बच्चे की पढ़ाई का पैसा जुटाने में कैसे करें म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल | Tomorrowmakers

ऐसा अनुमान है औसत महंगाई दर की तुलना में शिक्षा खर्चों में अधिक वृद्धि होने वाली है। इसका मतलब यह हुआ कि अपने बच्चे की शिक्षा के लिए डेट उत्पादों में निवेश के भरोसे रहना काफी नहीं होगा। अगर आपने आज से 20 वर्ष पहले भी इन उत्पादों में निवेश शुरु किया होगा, तब भी पर्याप्त रकम नहीं जुटा सकेंगे।

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ज़रा सोचिये!

आज अगर एक इंजीनियरिंग कोर्स का औसत खर्च 6 लाख रुपये है तो 2033 में यह 33 लाख रुपये होगा। आज मेडिकल डिग्री लेने का औसत खर्च 12 लाख रुपये है, जो 2033 में 67 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा।


इसमें हैरानी की बात नहीं कि 61.7% माता-पिता के लिए “अपर्याप्त बचत” और “निवेश के विकल्पों की अपर्याप्त जानकारी” से भी बड़ी चिंता है भारत में शिक्षा की बढ़ती लागत।


ऐसे में डेट उत्पादों की बजाय अधिक लाभ देने वाले इक्विटी निवेश विकल्पों की तरफ बढ़ना ही ज़्यादा सही कदम होगा।


इस बड़ी ज़िम्मेदारी को पूरा करने का एकमात्र तरीका है अपने निवेश पर काफी ज़्यादा रिटर्न प्राप्त करना।

भारत में बच्चों की शिक्षा के लिए सर्वश्रेष्ठ म्यूचुअल फंड:

आमतौर पर, ज़्यादातर माता-पिता, फिक्स्ड इनकम पर आधारित चाइल्ड प्लान या पीपीएफ और बैंक की एफडी जैसी लंबी अवधि की (और बेहद सुरक्षित) छोटी बचत वाली योजनाओं को चुनते हैं। इन दोनों में ही टैक्स के बाद 6-7% जितना कम रिटर्न प्राप्त होता है। जिसका नतीजा यह होता है कि शिक्षा के लिए पैसा तो सुरक्षित रहता है लेकिन उसमें ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं हो पाती। 


विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जोखिम के बदले पर्याप्त लाभ मिलने के नज़रिए से देखा जाए, तो लंबी अवधि में (मान लीजिए 15-20 साल, जो कि शिक्षा के लिए निवेश की अवधि है), निवेश करने का सबसे अच्छा विकल्प इक्विटीज़ ही हैं।


वर्तमान में बीएसई सेंसेक्स की 30 साल की कंपाउंड एन्युअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) 17% है। साथ ही, याद रखें कि 1 साल से अधिक की होल्डिंग अवधि वाली इक्विटी की बिक्री पर मिलने वाले पूंजीगत लाभ टैक्स मुक्त है। इसमें लगभग 1-1.5% का वार्षिक लाभांश भी जोड़ दें और आप देखेंगे कि आपके पास इक्विटी के पक्ष में एक मजबूत आर्थिक पहलू है।

उन लोगों के लिए जिनके पास समय नहीं है या जो सीधे इक्विटी में निवेश नहीं करना चाहते, उनके लिए म्यूचुअल फंड सबसे अच्छा विकल्प हैं। इसके कई कारण हैं, जैसेः 

  • सबसे पहले तो अनुभवी फंड मैनेजर्स सोच-समझकर, रिसर्च, विश्लेषण और चर्चा के बाद ही आप जैसे निवेशकों की ओर से निवेश करते हैं।
  • दूसरा, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में काफी विविधता होती है जिसकी वजह से बड़े जोखिम के मामलों में आपको सुरक्षा मिलती है। 
  • तीसरा, म्यूजुअल फंड में निवेश, शिक्षा फंड के लिए ज़रूरी लचीलापन या छूट प्रदान करता है।
  • चौथा, लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड अच्छे होते हैं क्योंकि वे थोड़े समय की अस्थिरता के बावजूद भी, लंबी अवधि में उच्चतम रिटर्न प्रदान करते हैं।
  • पांचवां, एक प्योर इक्विटी फंड में निवेश करने पर आप कम से कम 10-12% रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।

कॉलेज शिक्षा फंड के लिए म्यूचुअल फंड का उपयोग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब बच्चे की पढ़ाई पर खर्च करने का वास्तविक समय आता है, तब तक आप अधिक जोखिम और ज़्यादा रिटर्न देने वाले म्यूचुअल फंड से थोड़े कम जोखिम वाले फंड पर जाने की स्थिति में आ जाते हैं। मतलब तब तक आपकी निवेश अवधि और जोखिम क्षमता कम होने के साथ-साथ उच्च रिटर्न प्राप्त करने की ज़रूरत भी कम हो चुकी होती है।

बस एक बटन की मदद से अपने निवेश को कम जोखिम वाले फंड में बदलना मुमकिन है। इन सभी सुविधाओं और निवेश से जुड़ी पेशेवर राय को, 1.5 से 2.5% के मामूली वार्षिक फंड मैनेजमेंट शुल्क पर प्राप्त किया जा सकता है।
म्यूचुअल फंड्स के जरिये इस तरह बनाएं एक शिक्षा फंड:

  • एक छोटा फोलियो बनाएं जिसका संचालन माता-पिता संयुक्त रूप से करें
  • अपनी क्षमता के अनुसार निवश राशि तय करें और एसआईपी शुरु करें
  • साल में एक बार एसआईपी राशि की समीक्षा करें और उसमें बढ़ोतरी करें
  • अपने निवेश के मुताबिक एसेट एलोकेशन (संपत्तियों का आवंटन) करें
  • समय-समय पर म्यूचुअल फंड निवेश के प्रदर्शन और एसेट एलोकेशन की समीक्षा करें (साल में एक बार)
  • एसआईपी के भुगतान के कुछ महीने पहले आवश्यक धनराशि को किसी लिक्विड फंड में जमा कर दें


कुछ ज़रूरी सवाल और जवाब:

  • मुझे हर महीने कितनी बचत करनी होगी?

आपके द्वारा हर महीने बचाई जाने वाली राशि आपके बच्चे की उम्र और इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी शिक्षा के लिए खर्च करने से पहले आपके पास कितने साल बचे हैं। भारत में शिक्षा के बढ़ते खर्च को देखते हुए अगर आपको इस फंड की ज़रूरत 10 साल के बाद पड़ेगी तो आपको ज़्यादा बचत करनी होगी। अगर 15 साल बाद ज़रूरत होगी तो तुलनात्मक रूप से कुछ कम बचत करनी होगी। ज़्यादा जानकारी के लिए इस चाइल्ड एजुकेशन कैलकुलेटर का उपयोग कीजिए।

  • मेरा लक्ष्य कितना होना चाहिए?

यह इस पर निर्भर करता है कि आप अपने बच्चे को कैसी शिक्षा देना चाहते हैं। शुरुआत करने से पहले अपने दिमाग में एक राशि निश्चित ज़रूर कर लें। इसके लिए सबसे पहले आपको भारत में अपने बच्चे को शिक्षित करने की लागत जाननी होगी।

अगर आपके पास अपने बच्चे के भविष्य के लिए पैसा जुटाने संबंधी कोई प्रश्न है तो हमें नीचे बताएं।

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