Investment Tips: Factors to consider when investing in equity mutual funds and SIP Investment in hindi

अगर आपको बाजार का निवश करने का विचार कर रहे हैं तो पहले आपको इन बातों का पता होना जरूरी है। आकर्षक रिटर्न के साथ ज्यादा जोखिम भी जुड़ा होता है।

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Investment Tips: अगर आपको बाजार का निवश करने का विचार कर रहे हैं तो पहले आपको इन बातों का पता होना जरूरी है। आकर्षक रिटर्न के साथ ज्यादा जोखिम भी जुड़ा होता है।

Investment Tips: पिछले दो दशकों में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में जबर्रदस्त तेजी देखने को मिली है। खास तौर पर इक्विटी म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। कई इक्विटी म्यूचुअल फंड पिछले पिछले दशक में डबल नंबर्स में कंपाउंड रिटर्न दे रही है। हालांकि अपने पोर्टफोलियो के लिए सही म्यूचुअल फंड चुनना और उसके कारकों को समझना आपकी काफी मदद करता है। दरअसल किसी भी निवेश से पहले ये समझना चाहिए कि हम सब सबके जीवन के हर मोड़ पर अलग-अलग वित्तीय लक्ष्य हैं। 20 से 25 साल के युवक के लक्ष्य अलग हो सकते हैं। अच्छा मोबाइल खरीदना, अच्छी गाड़ी लेना या अपने प्रोशेशनल स्किल्स को बढ़ाना उसका लक्ष्य हो सकता है। वहीं 30 से 40 साल के व्यक्ति के लक्ष्य अलग हो सकते हैं। उसे घर खरीदना या घर बनवाना, होम लोन की पेमेंट करना, इमरजेंसी फंड बनाना, बच्चों की स्कूली शिक्षा के लिए सेंविंग करना आदि जरूरी लग सकता है।

बाजार का भी ऐसी है हिसाब है। आपकी हर तरह की जरूरत के लिहाज से मार्केट में निवेश के विकल्प हैं। जरूरत इस बात की है कि आप सही समय पर सही फंड का चुनाव कैसे करें। आम तौर पर माना जाता है कि इक्विटी में निवेश करना लॉन्ग टर्म में बेहतर होता है। जितना ज्यादा समय होगा उतना अच्छा और मजबूत पोर्टफोलियो बनेगा।  7 से 8 साल से अधिक की निवेश योजना बना रहे हैं तो इक्विटी फंड में अधिकतम एसआईपी रखें। वहीं छोटी से मध्यम अवधि की अवधि के लिए इक्विटी, डेट और गोल्ड फंड के मिक्स फंड का चुनाव करें।

म्यूचुअल फंड निवेश बाजार से जुड़े निवेश हैं और ये लंबे समय में आपका पैसा बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। इसमें कम टाइम के पूंजी निवेश का रिस्क है। एसआईपी निवेश का बढ़िया विकल्प है जहां आपको लिक्विडिटी भी मिलती है। हालांकि बाजार में अस्थिरता के बावजूद आपको लक्ष्य और समय सीमा के अनुसार निवेश बनाए रखना चाहिए।

निवेश का कोई सीधा फॉर्मूला नहीं है कि सबके लिए एक साथ एक समय पर फिट बैठे। आपके बाजार में जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार बहुत सी बातों का निर्धारण होता है। अगर आप रिस्क ले सकते हैं तो आपको इक्विटी फंड चुनना चाहिए जिसमें रिस्क है तो तेजी से बढ़ने का मौका भी है। वहीं दूसरी तरफ अगर आप कम रिस्क लेना चाहते हैं तो आपको  पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड के साथ बैलेंस फंड भी जोड़ना चाहिए।

संवादपत्र

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