महामारी के दौरान भी एसआईपी में निवेशित रहने के 4 कारण

कोविड-19 के दौरान घबराहट, चिंता, और बाजार में अस्थिरता ,आपके पैसे के लिए मौजूद वायरस से अधिक हानिकारक है। जानते हैं कि म्यूचुअल फंड कैसे काम करते हैं और एसआईपी वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए सबसे अच्छा विकल्प क्यों है।

महामारी के दौरान भी एसआईपी में निवेशित रहने के 4 कारण

एक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एस.आई.पी.) इन दिनों म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने का एक प्रभावी और बेहद लोकप्रिय तरीका है। हालांकि, जब हम महामारी के बीच में फंस जाते हैं, तो हमारी बुद्धि अक्सर घबराहट में फैसले लेने का शिकार होती है। इक्विटी लाभ की वैश्विक लड़ाई में फंसे, 2020, पोर्टफोलियो के पुनर्संतुलन के लिए एक साल है।

कोविड-19 का दुष्परिणाम बाजार के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन को भी प्रभावित कर रही है। यह अक्सर निवेशकों को आश्वस्त करता है कि म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर उनके दीर्घकालिक लक्ष्यों से दूर रहना एकमात्र समाधान है। लेकिन आम धारणा के विपरीत, एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (ए.एम.एफ.आई.) के आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 10 वर्षों में निवेश में तीन गुना वृद्धि हुई है। वास्तव में, म्यूचुअल फंड उद्योग के प्रबंधन (एयूएम) के तहत एसेट का आंकड़ा वर्तमान में 23,93,486 करोड़ रुपये (30 अप्रैल 2020 तक) है।

तो, यहां एसआईपी में निवेश किए जाने के चार कारण दिए गए हैं।

1. रुपए की औसत लागत निकालना

एस.आई.पी. नियमित निवेश की एक अनुशासित पद्धति का पालन करते हैं, जब बाजार में लगातार मंदी होती है,तब भी। शुरुआत में, आपको मार्किट टाइमिंग नहीं करना होगा, जो कि एकमुश्त राशि के निवेश की कोशिश करता है। निवेश के लिए यह पद्धतिगत दृष्टिकोण आपको नियमित अंतराल पर छोटी निश्चित मात्रा निवेश करने की अनुमति देता है, जिससे कीमत कम होने पर अधिक मात्रा खरीदने मिलता है, और अधिक होने पर कम इकाइयां खरीदने मिलती है। लंबे समय में, आप अपनी इकाइयों के अधिग्रहण की लागत का औसत निकालते हैं।

2. कंपाउंडिंग की शक्ति

जब आप एसआईपी में जल्दी निवेश करना शुरू करते हैं और इसे जारी रखते हैं, तो आप कंपाउंडिंग प्रभाव के माध्यम से दीर्घकालिक लाभ की उम्मीद कर सकते हैं। कई वर्षों के पोषण और बढ़त के साथ, आपके रिटर्न पुनर्निवेशित किये जाते हैं , जो आपको अधिक इकाइयों को जमा करने में मदद करता है। यह आपके लाभांश में समय के साथ चक्रवृद्धि ब्याज भी प्रदान करता है। दीर्घकालिक अच्छे रिटर्न के लिए जल्दी शुरुआत करें और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भी मजबूत रह कर सुरक्षित रहने की कोशिश करें।

3. एसेट एलोकेशन

कोरोनावायरस के विपरीत, एसआईपी एक नयी अवधारणा नहीं है। एक विधि जिसमे आप अपनी पसंद के फंड में हर महीने निवेश की जाने वाली धनराशि को अलग रखते है, यह एक बेहतरीन निवेश योजना होती है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अपने निवेश से अधिक रिटर्न प्राप्त करने के लिए, एसेट आवंटन ,धन- निर्माण में अत्यधिक प्रभावी होता है। तो, इक्विटी और ऋण के बीच एक क्रियाशील दृष्टिकोण के लिए प्रयास करें। बाजार के गिरने पर फंड को इक्विटी की तरफ आवंटित करें और बाजार के उठने पर फंड को डेब्ट की और आवंटित करें।

4. लचीलापन

एसआईपी में निवेश करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे आपको 500 रुपये प्रति माह से शुरू करने देते हैं। जब धन के बड़े हिस्से को निवेश के लिए अलग करना मुश्किल होता है, तो एक एसआईपी वित्तीय अनुशासन का पालन करने के लिए एक इंस्ट्रूमेंट के रूप में कार्य करता है। इसके अलावा, आपको अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर किस्त अवधि चुनने की स्वतंत्रता होती है। आप साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, या सालाना भी भुगतान कर सकते हैं।

आखरी शब्द

ऐसे समय में जब सेंसेक्स 4000 अंक से अधिक गिर चुका है, निवेशकों के बीच बेबसी की भावना अपरिहार्य लग सकती है। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि बाजार की अस्थिरता के समय एसआईपी सबसे अच्छा विकल्प है। आपके निवेश में निरंतर बढ़त करने के लिए एक कुशल विधि के रूप में, वे निवेशकों द्वारा सामना की जाने वाली सबसे बड़ी परेशानी को खत्म करते हैं -मार्किट टाइमिंग। ]

डिस्क्लेमर : यह लेख केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कर या कानूनी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको अलग से स्वतंत्र सलाह लेनी चाहिए।

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