5 तरीके जिनसे म्यूचूअल फंड आपकी वित्तीय स्थिति बेहतर बनाते हैं

अगर आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को पाना चाहते हैं तो इसके लिए वित्तीय प्रंबधन की बहुत जरूरत है।आइये पढ़ते हैं कि म्यूचूअल फंड इस प्रंबधन में किस तरह से सहायता करते हैं।

Mutual Funds & Finances

म्यूचूअल फंड कई तरह के एसेट्स में पैसा लगाने का जरिया हैं। आप किस तरह का जोखिम लेना चाहते हैं उसी के हिसाब से म्यूचूअल फंड के जरिए इक्विटी फंड या डेट फंड में निवेश करने की सलाह दी जाती है। म्यूचूअल फंड के जरिए आप कई तरीकों जैसे बेहतर रिटर्न या टैक्स बचाकर पैसे कमा या बचा सकते हैं। इससे आपको वित्तीय लक्ष्यों को पाने में मदद मिलती है। यहां पांच तरीके बताए गए हैं जिनसे म्यूचूअल फंड आपकी वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाते हैं।  

1. मार्केट लिंक्ड रिटर्न

निवेश के पारम्परिक साधनों की तरह म्यूचूअल फंड फिक्स रिटर्न देने का वादा नहीं करते। म्यूचूअल फंड से आपको मार्केट लिंक्ड रिटर्न मिलते हैं। इसका मतलब है कि अगर बाजार का प्रदर्शन अच्छा होगा तो आपका रिटर्न भी अच्छा होगा। इसके कारण आपका फंड किसी पारम्परिक निवेश की तुलना मे ज्यादा रिटर्न देता है। मार्केट लिंक्ड फंड जैसे ईएलएसएस, म्यूचूअल फंड और यूलिप 25% तक का रिटर्न दे देते हैं और ये सब लंबे समय के लिए होता है। दूसरी तरफ पारम्परिक निवेश साधन आमतौर से 8%-9.5% का रिटर्न देते हैं जो निवेश के समय पर लागू होते हैं। 


 इसका दूसरा पहलू भी है। क्योंकि यहां बाजार के खराब प्रदर्शन की भी संभावना होती है इसलिए हो सकता है कि आपको पोर्टफोलियो में नुकसान भी हो जाए। इसलिए इनमें लंबे समय तक निवेश जरूरी है और आपको अपने जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से म्यूचूअल फंड चुनने चाहिए। इसके अलावा, निवेश को कई क्षेत्रों में बांटकर आप जोखिम का खतरा भी कम कर सकते हैं। 

2.   डाईवर्सिफिकेशन के फायदे 

अगर आप ज्यादा जोखिम नहीं उठा सकते तब भी म्यूचूअल फंड आपके निवेश के लिए बिल्कुल सही है। क्योंकि इससे आप निवेश को कई क्षेत्रों में बांट सकते हैं जिनमें जोखिम भी अलग-अलग होता है। आप कैश फंड्स, बांड्स और इक्विटीज में निवेश कर सकते हैं। 


 इससे आपके निवेश पर जोखिम कम हो जाता है। अगर बाजार गिर भी जाता है तो भी आपकी पूंजी का कुछ हिस्सा डेट और कैश फंड में सुरक्षित रहता है। अगर बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है तो आपका फायदा होगा क्योंकि ऐसी स्थिति में इक्विटी फंड बढ़िया रिटर्न दे सकता है।  

3. टैक्स में राहत

म्यूचूअल फंड ना केवल पैसा बनाने में मदद करते हैं बल्कि ये आपकी आय पर लगने वाले टैक्स  के भार को भी कम करते हैं। उदाहरण के लिए, सेक्शन 80सी के तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम ( ईएलएसएस) में निवेश करके आप अधिकतम 1.5लाख रूपये का टैक्स कटौती का फायदा ले सकते हैं। ईएलएसएस एक तरह का डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्युचुअल फंड है। 

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4. लक्ष्य के हिसाब से फंड चुनने की सुविधा

जीवन के अलग - अलग मोड़ पर आपके वित्तीय लक्ष्यों में भी परिवर्तन होता है। म्यूचूअल फंड से आपको लांग-टर्म और शार्ट-टर्म दोनों तरह के वित्तीय लक्ष्यों को पाने में मदद मिलती है। क्योंकि विभिन्न जरूरतों के हिसाब  से यहां कई तरह के फंड चुने जा सकते हैं। 

उदाहरण के लिए, शार्ट-टर्म लक्ष्यों के पूरा करने के लिए बांड फंड्स सही माने जाते हैं। दूसरी तरफ बैलेन्सड और इक्विटी फंड्स में निवेश करके लांग-टर्म लक्ष्यों को पूरा किया जा सकता है। किसी आपात स्थिति के लिए कैश फंड सही रहते हैं। 

म्यूचूअल फंड में निवेश करने के दूसरे फायदे:

• आप सिप के माध्यम से कम से कम 500 रूपये प्रति महीना निवेश कर सकते हैं

• आप म्यूचूअल फंड की ऑनलाइन खरीद, बिक्री के साथ उस पर निगाह  भी रख सकते हैं।

• आप 2 से 5 दिन के भीतर म्यूचूअल फंड को बेच सकते हैं

• खरीदने से पहले आप म्यूचूअल फंड के पिछले प्रदर्शन को देख सकते हैं

• आपके पैसे का प्रबंध विशेषज्ञों द्वारा रखा जाता है और आपको उचित सलाह भी दी जाती है

  

5. फिक्सड डिपोडिट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन

फिक्सड डिपोजिट ( एफडी) लंबे समय से भारत में निवेश का भरोसेमंद साधन रहे हैं। लेकिन एक बार उनसे मिलने वाले रिटर्न पर नजर डालिए। आपको पता चलेगा कि डेट म्यूचूअल फंड फिक्सड डिपोजिट की तुलना में बेहतर रिटर्न देते हैं।

म्यूचुअल फंड्स

बेहतर रिटर्न के अलावा डेट म्यूचूअल फंड एफडी की तुलना में टैक्स बचाने में ज्यादा उपयोगी हैं। इन पर तीन वर्ष के बाद इंडेक्सेशन का फायदा भी लिया जा सकता है।

अगर आप सही विकल्प चुनते हैं तो म्यूचूअल फंड आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगे। फंड्स के समझें और उन्हें अपने जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से परखें। वही निवेश करें जो आपके लिए सही हो। 

डिस्कलेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है और इसे निवेश, कर या कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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