Starting SIP in Mutual Funds? Regular vs. Direct - Which Option is Right for You

म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश करना लंबी अवधि में आपकी संपत्ति को बढ़ाने का एक शानदार तरीका हो सकता है। लेकिन, अपनी निवेश यात्रा शुरू करने से पहले, रेगुलर और डायरेक्ट प्लान विकल्पों में से किसी एक को चुनना महत्वपूर्ण है। इस लेख में रिटर्न और खर्च में अंतर सहित दोनों विकल्पों के बीच एक विस्तृत तुलना की गई है। अपनी एसआईपी निवेश पर अधिकतम रिटर्न पाने के कई टिप्स यहाँ मौजूद हैं।

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Regular Mutual funds vs Direct Mutual funds: यदि आप म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं, तो रेगुलर और डायरेक्ट मार्गों के बीच प्रमुख अंतरों को समझना महत्वपूर्ण है। ये अंतर लंबी अवधि में आपके रिटर्न को प्रभावित कर सकते हैं।

म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश करना आपके धन को बढ़ाने का एक शानदार तरीका हो सकता है, लेकिन आरंभ करने से पहले अपने विकल्पों को समझना महत्वपूर्ण है। जब म्युचुअल फंड में SIP की बात आती है, तो आपके पास दो विकल्प होते हैं: रेगुलर प्लान और डायरेक्ट प्लान।

आपके लिए कौन सा विकल्प सही है, इस बारे में सूचित निर्णय लेने के लिए, इन वितरण चैनलों की स्पष्ट समझ होना महत्वपूर्ण है। हालांकि अनुभवी निवेशक इस बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हो सकते हैं, मगर जो निवेश की दुनिया में नए हैं, उनके लिए यह जानना महत्वपूर्ण है। 

रेगुलर और डायरेक्ट ऑप्शंस में बेसिक अंतर क्या है?

रेगुलर योजनाएँ बिचौलियों जैसे बैंकों, फंड मैनेजर्स और व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट डिस्ट्रिब्यटर्स द्वारा वितरित की जाती हैं। ये पार्टियां निवेशकों को म्यूचुअल फंड योजनाओं को बेचने के बदले कमीशन कमाती हैं, जिसका भुगतान म्यूचुअल फंड हाउस करते हैं। 

म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर को फंड हाउस द्वारा भुगतान किए गए कमीशन के माध्यम से मुआवजा दिया जाता है। इस खर्च में डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन, फंड मैनेजमेंट चार्ज और मार्केटिंग कॉस्ट जैसी कई लागतें शामिल हैं।

ये म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं और निवेशकों को उनके विभिन्न वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम उठाने की क्षमता और अन्य प्रासंगिक कारकों के आधार पर जागरूक निर्णय लेने में मदद करते हैं। 

दूसरी ओर, डायरेक्ट प्लान में बिचौलिए शामिल नहीं होते हैं और म्यूचुअल फंड हाउस द्वारा सीधे बेचे जाते हैं। इसका मतलब है कि इसमें खर्चे कम हैं, और रेगुलर योजनाओं की तुलना में रिटर्न आम तौर पर थोड़ा अधिक हो सकता है। हालांकि, डायरेक्ट प्लान चुनने वाले निवेशकों को अपना खुद का शोध और कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है।

रेगुलर या डायरेक्ट? कौन सी योजना आपके लिए सर्वोत्तम है?

इस सवाल का कोई आसान जवाब नहीं है। डिस्ट्रिब्यटर कमीशन के कारण एक रेगुलर योजना में निवेश करना अधिक महंगा हो सकता है। हालांकि, रेगुलर योजनाएं मार्गदर्शन का लाभ प्रदान करती हैं, जो उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें अपने निवेश में सहायता की आवश्यकता होती है। 

उदाहरण के लिए, यदि आप इक्विटी मार्किट में म्यूचूअल फंड के जरिए निवेश करना चाहते हैं, तो एक वितरक कागजी कार्रवाई को संभाल सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि निवेश ठीक से संसाधित हो, और आप बाकी झंझटों से बच जाते हैं। 

हालांकि, जिन्हें डायरेक्ट प्लान के लिए व्यापक मार्गदर्शन की आवश्यकता है, उनके लिए सेबी गाइडलाइन पंजीकृत निवेश सलाहकार यानि रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाईजर्स (आरआईए) उपलब्ध हैं। 

आरआईए निवेशक के जोखिम प्रोफाइल, निवेश लक्ष्यों, आय स्तर और अन्य के आधार पर वैयक्तिकृत सलाह प्रदान करते हैं। वे टैक्स प्लानिंग और एसेट एलोकेशन की सिफारिशें भी देते हैं। हालांकि, वे अपनी सेवाओं के लिए शुल्क लेते हैं।

आपका निवेश - आपका चयन 

अंततः, रेगुलर और डायरेक्ट योजनाओं के बीच का चुनाव आपकी व्यक्तिगत स्थिति और निवेश लक्ष्यों पर निर्भर करता है। अगर आप अपना शोध और कागजी कार्रवाई करना पसंद करते हैं, और खर्चों पर बचत करना चाहते हैं, तो डायरेक्ट प्लान एक बेहतर विकल्प हो सकता है। लेकिन अगर आपको व्यापक सलाह के आधार पर बेफिक्र होकर निवेश करना है तो रेगुलर प्लान फायदेमंद होगा।

संवादपत्र

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