यूलिप या म्यूचुअल फंड, किसमें करें निवेश?

सारांश- म्यूचुअल फंड आज निवेश का सबसे आम साधन हैं।

यूलिप या म्यूचुअल फंड, किसमें करें निवेश?
एक समय था जब मुंबई में बरगद के पेड़ के नीचे शेयरों की खरीद-बिक्री की जाती थी। हम उस वक्त से बहुत आगे आ चुके हैं। आज आपके सामने निवेश के सैंकड़ों विकल्प उपलब्ध हैं। आपकी आवश्यकताओं, सीमाओं और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से आप इन विकल्पों में से चुनाव कर सकते हैं, जिससे आपकी संपत्ति की सुरक्षा होने के साथ उसमें वृद्धि भी हो।
 
म्यूचुअल फंड आज निवेश का सबसे आम साधन हैं। यह निवेश का ऐसा साधन है जिसमें पहले निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया जाता है और फिर निवेशकों के पैसे पर रिटर्न हासिल करने के लिए उसे अलग-अलग ऐसेट्स में निवेश किया जाता है। यह एक बस यात्रा की तरह है जिसमें ड्राइवर यात्रियों को एक जगह तक ले जाता है। इस मामले में फंड मैनेजर ड्राइवर की तरह है, म्यूचुअल फंड योजना एक बस है और निवेशक बस में सफ़र करने वाले यात्री हैं।
 
 यूलिप बनाम म्यूचुअल फंड
 
अक्सर म्यूचुअल फंड को यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान( यूलिप) समझ लिया जाता है, जबकि दोनों निवेश के अलग-अलग साधन हैं। यूलिप एक बीमा पॉलिसी है जिसमें दोहरा फायदा मिलता है, इसमें आपको बीमा कवर का फायदा मिलने के साथ ही निवेश पर रिटर्न भी मिलता है। बीमा कंपनियां निवेशकों से पैसा इकट्ठा करने के लिए म्यूचुअल फंड हाउस की तरह ही फंड जारी करती हैं। फिर इकट्ठा किए पैसे को बहुत से ऐसेट्स जैसे शेयर्स और बांड्स में निवेश किया जाता है। यह देखने में काफी कुछ म्यूचुअल फंड जैसा ही लगता है। लेकिन ये दोनों एक जैसे नहीं हैं।
 
यूलिप बनाम म्यूचुअल फंड: दोनों में अंतर

सबसे बड़ा अंतर यह है कि म्यूचुअल फंड में जीवन बीमा नहीं होता जबकि यूलिप के साथ जीवन बीमा मिलता है। बीमित व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाने पर उसके आश्रितों को बीमा का फायदा मिलता है।

इसको एक उदाहरण से समझते हैं।

मिस्टर ए यूलिप में 50,000 रूपये का निवेश करते हैं और मिस्टर बी इतने ही पैसे म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। ए और बी दोनों के पैसों का निवेश कर दिया गया है। अब मिस्टर ए के निवेश का एक हिस्सा हर महीने इंश्योरेंस कवर के प्रीमियम के बतौर काटा जाता है। इससे उन्हें 5 लाख का बीमा कवर मिलता है। जबकि मिस्टर बी को जीवन बीमा लेने के लिए अलग से बीमा पॉलिसी खरीदनी होगी। अगर मिस्टर ए की किसी दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो बीमा कंपनी उनके परिवार को 5 लाख रूपये या फंड वैल्यू देगी, जो भी ज़्यादा होगा। लेकिन मिस्टर बी के साथ ऐसा नहीं है।

यूलिप के साथ अतिरिक्त सुरक्षा

बाज़ार में बहुत से यूलिप उत्पाद मौजूद हैं जो राइडर्स या अंतर्निहित फायदों के ज़रिए अतिरिक्त सुरक्षा देते हैं। इस तरह के यूलिप उत्पाद उन ग्राहकों के लिए बेहतर होते हैं जो किसी ख़ास वजह से निवेश करते हैं और उन्हें चिंता होती है कि उनके ना रहने पर यह ज़रूरत पूरी नहीं हो पाएगी। बच्चों की शिक्षा के लिए बचत इसका एक उदाहरण है। कुछ यूलिप उत्पाद अभिभावक की मृत्यु हो जाने पर इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आश्रितों को एकमुश्त पैसा देते हैं। इसके अलावा कंपनी अभिभावकों की तरफ से फंड के प्रीमियम का भुगतान करना भी जारी रखती है। इससे परिवार को पॉलिसी की समय अवधि में नियमित आय मिलती रहती है।

टैक्स में बचत

यूलिप निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। आप यूलिप में जो पैसा निवेश करते हैं वह आपकी कुल कर योग्य आय में से घटाया जाता है। इसके कारण आपका आयकर कम हो जाता है। दूसरी तरफ, म्यूचुअल फंड निवेश में हमेशा टैक्स छूट नहीं मिलती। केवल ईएलएसएस या इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम में ही टैक्स छूट मिलती है।

यूलिप बनाम म्यूचुअल फंड शुल्क

यूलिप और म्यूचुअल फंड निवेश देखने में एक जैसे लग सकते हैं- दोनों ही बहुत से ऐसेट्स में निवेश करते हैं। हालांकि, दोनों का ढांचा अलग होता है और इसलिए दोनों के शुल्क में भी अंतर है। म्यूचुअल फंड में केवल आपके पैसे का प्रंबध करने और उससे बाहर निकलने का शुल्क लिया जाता है, जो एक तरह से म्यूचुअल फंड से जल्दी बाहर निकलने का जुर्माना होता है। दूसरी तरफ, यूलिप कई बातों के लिए आपसे पैसे लेते हैं। इसमें प्रीमियम आवंटन शुल्क, प्रशासनिक शुल्क और फंड का प्रबंध करने का शुल्क शामिल है। यूलिप निवेश के पैसे में बीमा प्रीमियम का पैसा भी शामिल होता है। इसे अक्सर मॉर्टैलिटी चार्ज कहा जाता है।

हालांकि यूलिप के फंड प्रंबधन शुल्क म्यूचुअल फंड से कम होते हैं। यूलिप में यह 1.35% तो म्यूचुअल फंड में 2.5% होता है। इसके अलावा आरआरडीएआई के हिसाब से यूलिप पर कुल शुल्क 2.25% से ज़्यादा नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि यूलिप पर लिए जाने वाला शुल्क कभी भी म्यूचुअल फंड से ज़्यादा नहीं होगा।
 
 
यूलिप और म्यूचुअल फंड को लेने का सही समय

तो आपको यूलिप और म्यूचुअल फंड में कब निवेश करना चाहिए? इसका उत्तर सीधा नहीं है। यह आपकी ज़रूरतों पर निर्भर करता है।

सबसे पहले, अगर आप अपने निवेश को लिक्विड रखना चाहते हैं- जो निवेश आसानी से कम समय में ही नकद में बदल जाए, तो आपके लिए म्यूचुअल फंड बेहतर रहेगा। यूलिप में कम से कम पांच वर्ष का लॉक-इन पीरियड होता है। इस दौरान आप पैसा नहीं निकाल सकते। हालांकि सभी म्यूचुअल फंड लिक्विड नहीं होते। ईएलएसएस म्यूचुअल फंड में भी तीन वर्ष का का लॉक-इन पीरियड होता है।

ज़्यादा विकल्प

बाज़ार में हज़ारों म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं जिनमें निवेश किया जा सकता है। आप उनके जोखिम और अपने रिटर्न के उद्देश्य को देखते हुए निवेश कर सकते हैं। कुछ ऐसे भी फंड हैं जो सेंसेक्स या निफ्टी जैसे इक्विटी इंडेक्स की नकल करते हैं। आपको इस तरह की विविधता यूलिप में देखने को नहीं मिलेगी। हालांकि, यह देखते हुए की आप किसकी सुरक्षा के लिहाज से यूलिप लेना चाहते हैं- खुद के रिटायरमेंट के लिए, अपने बच्चों के लिए या किसी दूसरी वजह से-  आपको यूलिप में भी निवेश के बहुत से विकल्प मिल जाएंगें।

यूलिप बनाम म्यूचुअल फंड, आप किसमें निवेश करेंगे?

दोनों में से किसी भी विकल्प में निवेश करने से पहले आपके सामने यह बात साफ होनी चाहिए कि आप उस पैसे से क्या हासिल करना चाहते हैं।
 
  1. आपके जोखिम उठाने की क्षमता कितनी है?
  2. आपके वित्तीय लक्ष्य क्या है? क्या आप रिटायरमेंट के लिए पैसा बचाना चाहते हैं या भविष्य में संभावित दूसरे खर्चों के लिए बचत करना चाहते हैं?
  3. क्या आपको बीमा कवर की ज़रूरत है?
  4. आपके निवेश की सीमा क्या है?
लंबे समय की वित्तीय योजना को ध्यान में रखकर पैसा बनाने और बीमा लेने वालों के लिए यूलिप बेहतर विकल्प है। चाहे यह रिटायरमेंट के लिए हो, बच्चों की पढ़ाई के लिए या किसी दूसरे वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए, यूलिप में मेचुरिटी तक निवेश करने से बहुत फायदा मिलता है। इससे आपको एक ही प्लान में बचत और बीमा सुरक्षा दोनों के फायदे मिलते हैं। यूलिप उन लोगों के लिए भी बेहतर है जो इक्विटी में निवेश करके लंबे समय में पैसा बनाना चाहते हैं लेकिन उन्हें इक्विटी बाज़ार या बाज़ार में उपलब्ध ढ़ेरों म्यूचुअल फंड्स की जानकारी नहीं है।
 

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