Unlock the Green Potential by Exploring India's Revolutionary Green Bonds Program

भारत सरकार का ग्रीन बॉन्ड कार्यक्रम निवेशकों के फायदे के साथ कार्बन कटौती, ऊर्जा दक्षता, और पर्यावरण संरक्षण में जरूरी योगदान देता है।

 ग्रीन बॉन्ड

India's Green Bonds Program: पिछले वर्ष के नवंबर में, सरकार ने सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड के लिए रूपरेखा पेश की थी। इसके बाद से ही लोगों के मन में ये सवाल उठने लगे कि ग्रीन बॉन्ड क्या है? सरकार की व्यापक रुचि को देखते हुए निवेशकों को यां बॉन्ड फायदे का सौदा दिख रहा है। हालांकि, संभावित निवेशकों को निवेश के पहले ब्याज दरों, तरलता और व्यापारिक पहलुओं के बारे में पता कर लेना जरूरी है।

क्या होते हैं ग्रीन बॉन्ड?

दरअसल, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड सरकार द्वारा जारी ऋण प्रतिभूतियां हैं, जिन्हें विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी मुद्दों से निपटने वाली परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

ज्ञात हो कि दुनिया के कई प्रमुख देश की सरकारों द्वारा ऐसे सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड जारी किए जाते हैं और कई जगह इसे विश्व बैंक का समर्थन प्राप्त है। 

FY23 के केंद्रीय बजट में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि भारत सरकार भी हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी करेगी। 

यह भी पढ़ें: कर मुक्त बॉन्ड क्या है और कैसे काम करता है

ग्रीन बॉन्ड प्रोग्राम कैसे काम करेगा?

सरकार द्वारा स्थापित ढांचा ग्रीन बॉन्ड जारी करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजार संघ के सिद्धांतों का पालन करेगा। इस ढांचे में चार मूलभूत घटक शामिल होंगे: आय का उपयोग, परियोजना मूल्यांकन और चयन, आय का प्रबंधन, और रिपोर्टिंग। 

इस ढांचे के तहत, ग्रीन बॉन्ड की आय उन हरित परियोजनाओं के लिए निर्धारित की जाएगी जो सतत विकास लक्ष्यों के सिद्धांतों के अनुसार इन प्रकार के लक्ष्यों को पूरा करती हैं:

  • ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना, 
  • कार्बन उत्सर्जन और ग्रीनहाउस गैसों को कम करना 
  • जलवायु लचीलापन और अनुकूलन को बढ़ावा देना 
  • प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता को बढ़ावा देना, इत्यादि।

योग्य व्यय बांड जारी करने से पहले 12 महीनों के भीतर किए गए सरकारी व्यय तक सीमित होगा, और इन्हें बॉन्ड जारी किए जाने के 24 महीनों के भीतर आय परियोजनाओं को आवंटित करना जरूरी होगा। पात्र हरित परियोजना के स्थगन या रद्द होने की स्थिति में, इसे अन्य उपलब्ध परियोजना से प्रतिस्थापित किया जाएगा। गौरतलब है कि सरकार अपनी कर प्राप्तियों के माध्यम से भी हरित परियोजनाओं का वित्तपोषण करेगी।

ग्रीन बॉन्ड में निवेश

FY23 के लिए, सरकार ने ग्रीन बॉन्ड के लिए 16,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। आरबीआई एक अर्ध-वार्षिक कैलेंडर जारी करता है जिसमें सरकार के बांड उधार की रूपरेखा होती है। चूंकि ढांचा नवंबर 2022 में जारी किया गया था, इसलिए सेंट्रल बैंक ने विशेष रूप से ग्रीन बांड के लिए जनवरी में एक अलग कैलेंडर जारी किया। 

हालांकि, अगले साल से ग्रीन बॉन्ड को सामान्य कैलेंडर में शामिल किया जाएगा। आरबीआई कैलेंडर के अनुसार, सरकार आने वाले समय में नीलामी के माध्यम से 8,000 करोड़ रुपये मूल्य के दो किश्तों में ग्रीन बांड जारी करने की योजना बना रही है। इन बांडों की परिपक्वता अवधि पांच साल और दस साल होगी। 

सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें किसी भी अन्य सरकारी बॉन्ड की तरह तरह कारोबार किया जा सकता है। 

यह भी पढ़ें: कर-बचत अभ्यास वित्तीय योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा क्यों है?

संवादपत्र

संबंधित लेख