गिल्ट म्यूचुअल फंड्स: क्या वे निवेश के सुरक्षित विकल्प हैं?

जोखिम से बचने की चाह रखने वाले खुदरा निवेशकों के लिए गिल्ट फंड्स एक बढ़िया विकल्प है। लेकिन गिल्ट फंड्स वास्तव में क्या हैं, और उन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित क्यों माना जाता है?

गिल्ट फंड्स क्या हैं क्या वे निवेश के सुरक्षित विकल्प हैं

कई खुदरा निवेशकों का मानना है कि बाजार से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स और निवेशों में काम करना एक अत्यधिक जोखिम भरा काम है। हालांकि, यह हर निवेश विकल्प के लिए सही नहीं है। कुछ ऐसे  म्यूचुअल फंड्स  हैं जो अन्य की तुलना में सुरक्षित हैं और अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करते हैं। गिल्ट फंड्स में प्रवेश करें 

गिल्ट फंड क्या है? और इसे एक सुरक्षित निवेश विकल्प क्यों माना जाता है? यहां आपके लिए समस्त जानकारी है कि ये फंड्स कैसे काम करते हैं और इनमें कौन निवेश कर सकता है।  

गिल्ट फंड्स को समझना

गिल्ट फंड्स एक प्रकार का डेट म्यूचुअल फंड  है जो राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा जारी सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करता है। इनका नाम गोल्डन-एज्ड सर्टिफिकेट्स से बना है जिसमें सरकारी बॉन्ड्स जारी किए गए थे। 

आमतौर पर गिल्ट फंड्स दो तरह के होते हैं। पहला, जो विभिन्न परिपक्वता अवधि में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करता है। दूसरा, वह जो 10 साल की निश्चित परिपक्वता में निवेश करता है। दूसरी श्रेणी के गिल्ट फंड्स को अनिवार्य रूप से अपने असेट्स ले न्यूनतम 80 प्रतिशत सरकारी प्रतिभूतियों में 10 साल की परिपक्वता के साथ निवेश करना होता है। 

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अब जब हम समझ गए हैं कि गिल्ट फंड क्या है, तो आइए देखें कि यह कैसे काम करता है।

गिल्ट म्यूचुअल फंड्स कैसे काम करते हैं?

जब भारत सरकार को धन की आवश्यकता होती है, तो वह शीर्ष बैंक, यानी भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से संपर्क करती है। आरबीआई बैंकों और बीमा कंपनियों जैसी संस्थाओं से उधार लेने के बाद सरकार को पैसा उधार देकर बैंकर के रूप में कार्य करता है। यह तब ऋण के बदले में सरकारी प्रतिभूतियां जारी करता है। गिल्ट फंड का फंड मैनेजर  इन प्रतिभूतियों को सब्सक्राइब करता है जो एक निश्चित अवधि के लिए जारी की जाती हैं। परिपक्वता पर, सरकारी प्रतिभूतियों को वापस करने के बाद गिल्ट फंड को पैसा मिलता है। 

क्या गिल्ट म्यूचुअल फंड्स सुरक्षित हैं?

कॉरपोरेट बॉन्ड्स में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड्स के विपरीत, गिल्ट फंड्स केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। इसलिए, इसमें कोई क्रेडिट जोखिम  शामिल नहीं है, क्योंकि अंतर्निहित प्रतिभूतियों को जारी करने वाली सरकार कभी भी डिफ़ॉल्ट नहीं हो सकती है। यही कारण है कि गिल्ट फंड्स को कम से कम जोखिम वाले सामान्य रिटर्न्स के साथ एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।

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गिल्ट फंड्स से जुड़े जोखिम क्या हैं?

हालांकि, गिल्ट फंड्स में कोई क्रेडिट जोखिम नहीं होता है, लेकिन उनमें ब्याज दर का जोखिम होता है। जैसे-जैसे ब्याज दरें बदलती हैं, फंड का नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) भी बदलता है। ऐसे समय में गिल्ट फंड्स में निवेश करना सबसे अच्छा है जब ब्याज दरें बढ़ रही हों। 

क्या गिल्ट फंड्स निवेश का अच्छा विकल्प हैं?

गिल्ट फंड्स  पारंपरिक सावधि जमा योजना का एक बढ़िया विकल्प हैं। यदि आपको कम से कम तीन से पांच साल के लिए निवेश करना है, तो वे कम जोखिम और सामान्य रिटर्न की पेशकश करने वाले एक अच्छे निवेश विकल्प हो सकते हैं। जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए, गिल्ट फंड्स अच्छे रिटर्न्स के साथ पूंजी के संरक्षण को सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत में शीर्ष 5 गिल्ट फंड्स का पिछले 3 साल का रिटर्न 6.95% से 8.86% के बीच रहा है।

निवेश करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आप समझते हैं कि गिल्ट फंड्स वार्षिक शुल्क लेते हैं जिसे व्यय अनुपात के रूप में जाना जाता है। यह फंड मैनेजर के शुल्क और अन्य फंड-प्रबंधन संबंधित खर्चों के लिए होता है। डेट फंड्स के लिए इस अनुपात की ऊपरी सीमा 2.25 फीसदी है। इसके अलावा, गिल्ट फंड्स से पूंजीगत लाभ कर योग्य हैं। यदि आप उन्हें 36 महीने से कम समय के लिए रखते हैं, तो आपको अपने आयकर स्लैब के अनुसार शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) का भुगतान करना होगा। 36 महीने से अधिक की अवधि के लिए, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) पर इंडेक्सेशन के लाभ के साथ 20% टैक्स लगता है।

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अंतिम शब्द

यदि आपके पास एक म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो है जो  इक्विटी फंड्स की ओर झुका हुआ है, तो आप इसमें गिल्ट फंड्स जोड़कर अधिक स्थिरता और विविधता जोड़ सकते हैं। 

संवादपत्र

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