adani group SBI loan 2.6 billion dollar like Nirav Modi vijay Mallya report hindenburg research

हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद अडानी समूह के कारोबारी साम्राज्य पर जोरदार चोट पहुंची है। इसके बाद एसबीआई के शेयरों की चाल सुस्त हो चली है।

SBI Adani loan, Adani Group Crisis

नई दिल्ली। गौतम अडानी के कारोबाजी साम्राज्य को जोरदार झटका लगा, जब अमेरिका स्थित शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के दावा किया कि अडानी समूह कई अवैध, गैरकानूनी गतिविधियों के जरिए कारोबारी साम्राज्य को स्थापित किया। इस खबर के बाद अडानी को जोरदार नुकसान हुआ और वो विश्व के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति की सूची से खिसकर सातवें पायदान पर पहुंच गए। 

विजय माल्या और नीरव मोदी की राह पर अदानी 
बता दें कि गौतम अडानी पर काफी कर्ज है, जिसे उन्होंने भारतीय बैंकों से लिया है। गौतम अडानी ने देश की सबसे बड़ी बैंक "स्टेट बैंक ऑफ इंडिया" से 2.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 21,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इस खबर के आने के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर एसबीआई के शेयरों की चाल सुस्त हो गई। वही एसबीआई के शेयर फ्लैट 527.75 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। एसबीआई की तरह पंजाब नेशनल बैंक ने अडानी समूह को करीब 7000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या गौतम अडानी भी नीरव मोदी और विजय माल्या की राह पर चल निकले हैं? 

क्या है विजय माल्या और नीरव मोदी की कहानी 
बता दें कि साल 2017 में विजय माल्या ने 17 बैंकों से करीब 9 हजार करोड़ रुपये कर्ज लिया था। हालांकि कारोबारी घाटे की वजह से विजय माल्या देश छोड़कर लंदन भाग गए थे। इसी तर्ज पर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने भारीत बैंकों से करीब 11000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसमें ब्याज की रकम भी शामिल है। इन दोनों कारोबारियों के कर्ज न चुकाने पर एसबीआई के नेतृत्व में उनकी संपत्ति की नीलामी करके रिकवरी की गई।   

क्या है एसबीआई की सफाई 
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक गौतम अडानी को लोन तय नियमों के हिसाब दे दिया गया है। साथ ही यह तय नियमों के हिसाब से मिलने वाली कर्ज की रकम का आधा लोन है। एसबीआई चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि अडानी समूह की कंपनियां कर्ज चुका रही हैं। साथ ही बैंक के कर्ज पर कोई तत्काल चुनौती नहीं दिख रही है। लेकिन हकीकत यह है कि पिछले एक सप्ताह में अदानी समूह के शेयरों में 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

 

संवादपत्र

संबंधित लेख