आई.पी.ओ. में निवेश करते वक़्त किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए ?

वित्तीय विशेषज्ञ कहते हैं, जब बाजार चढ़ता है तब अक्सर प्रमोटर्स नए इशू(अंक) लेकर आते हैं |

आई.पी.ओ. में निवेश करते वक़्त किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए ?

ब्रोकरेज हाउस द्वारा जारी एक डाटा के अनुसार,इस महामारी ने भारत के प्राथमिक बाज़ार में लगी आग को कम नहीं किया है| अक्टूबर 2020 तक के दस महीने में,बाजार के आंकड़े बताते हैं कि नए इशू 18,000 करोड़ रुपये तक बिके- जो कि पिछले साल उतनी ही अवधि के लिए कमाए गए 12,700 रुपये से एक बड़ी छलांग है |

रिपोर्ट बताते हैं कि 80 कंपनियों ने बाज़ार नियामक सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया ) से संपर्क किया ताकि वे प्राथमिक बाज़ार का दोहन करें | एक खाते से 30-35 आवेदकों ने स्वीकृति प्राप्त की है | सबसे नवीनतम में से एक बर्गर किंग इंडिया है;भारतीय रेस्टोरेंट व्यवसाय में कोविड-19 के तबाह करने वाले प्रभावों की अवमानना करते हुए,इस त्वरित-सेवा श्रृंखला ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आई.पी.ओ.) से 542 करोड़ रुपये इक्कट्ठा करने का प्रयास किया है |

सेबी में फाइल किये गए कागज़ातों के अनुसार, बर्गर किंग इस इशू से प्राप्त आय का उपयोग नए दूकान को वित्तपोषित करने के लिए करेगी | स्पष्ट है, यह कंपनी आर्थिक गतिविधियों के उठने की उम्मीद कर रही है ,जैसे जैसे महामारी का भय ख़त्म हो रहा है और भारतीय लोग खाने-पिने के लिए वापस बाहर निकल रहे हैं |

आर्थिक इजाफा

स्पष्ट है कि अन्य भी भारत के लचीलेपन में विश्वास रखते हैं और सभी पहलुओं से,कंपनियां भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति से निर्भीक हैं | परिणाम स्वरुप, महामारी के विनाशकारी प्रभाव के बावजूद, 2020 के आई.पी.ओ. बाज़ार आशाजनक लग रहे हैं|

जैसा कि ज्योति रॉय,डी.वी.पी. और एंजेल ब्रोकिंग के इक्विटी रणनीतिज्ञ ,बिज़नेस इनसाइडर मैगज़ीन में समझाते हैं,निवेशक उन कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं जिनका व्यापार लाभदायक और उचित मूल्यांकन वाला हो | पर फिर, भारतीय निवेशकों को नए इशू के लिए हमेशा लालायित होते देखा गया है | उदाहरण के लिए, आंकड़े बताते हैं कि 2019 में सूचीबद्ध 11 में से 8 आई.पी.ओ. में 95 % की बढ़त हुई जबकि बाजार काफी अस्थिर थे |

यह साल नए इशू के लिए भी बेहतर लग रहा है और जैसे-जैसे 2020 अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, मंदी पहले से ही अतीत का बुरा सपना लग रही है |राजीव बिस्वास, आई.एच.एस. मार्किट के एशिया पैसिफिक मुख्य अर्थशास्त्री कहते हैं कि उनकी कंपनी द्वारा संगृहीत किये गए आंकड़े ' 2020 की दूसरी छमाही में आर्थिक विकास की गति में सुधार और वित्तीय वर्ष 2020-21 में 6.7% की सकारात्मक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि' की ओर इशारा कर रहे है |

दरअसल, आई.एच.एस मार्किट के अनुसार,भारत के लिए मध्यावधि आर्थिक दृष्टिकोण अनुकूल बना हुआ है| यह विकास के अनेकों प्रमुख चालकों द्वारा समर्थित हैं ,जिनमे बड़ी तादाद में और तेज़ी से बढ़ने वाले मध्यम वर्ग शामिल हैं | बिस्वास की कंपनी ने परिकल्पित किया कि 2020 और 2025 के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के कुल खर्च 42 % तक बढ़ेंगे और यह 2030 तक 3.2ख़रब $ तक दोगुना हो जाएगा |

बाजार में उछाल

यह सब शेयर बाज़ार और आई.पी.ओ. निवेश के लिए अच्छे संकेत हैं | दरअसल, बजाज एलियांज लाइफ में मुख्य निवेश अफसर,संपथ रेड्डी के अनुसार, कंपनियां अनुकूल बाज़ार स्थितियों के कारण आई.पी.ओ. के लिए पंक्तिबद्ध होना शुरू हो रहे हैं,और अगर स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें लगता है कि और भी लोग इस पंक्ति में शामिल होंगे |

सितम्बर 2020 में मनी कंट्रोल के साथ एक इंटरव्यू में रेड्डी ने बताया कि कई कारक जैसे कि लॉकडाउन का खुलना, विभिन्न आर्थिक संकेतकों में स्वस्थ रिकवरी और यहां तक कि कोविड-19 के नैदानिक परीक्षण ने भारतीय बाज़ारों को सुधरने में मदद की है |

नतीजतन, इक्विटी बाजार में उछाल ने कंपनियों,जिसमे मौजूदा बड़े फर्म भी शामिल हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया है कि वे इक्विटी पूंजी को बढ़ाएं और अपने बैलेंस शीट को मज़बूत करें और विकास में चल रही मंदी से उबरने के लिए तरलता बफर बनाएं। यह उछाल आई.पी.ओ. को प्रोत्साहित करने के लिए ज़िम्मेदार है |

नए इशू (अंक) में निवेशक रेड्डी के स्थिति के विश्लेषण से दो सीख ले सकते हैं : पहला,यदि वे अपने निवेश का दीर्घकालिक दृष्टिकोण लेते हैं तो वे व्यवस्थित रूप से इक्विटी में निवेश कर सकते हैं,और दूसरा,एक विविध पोर्टफोलियो इस मुश्किल समय में फायदेमंद हो सकता है |

रेड्डी कहते हैं कि वर्तमान स्थिति में जो क्षेत्र अच्छा काम करेंगे,वो आई.टी. ,फार्मा और एफ.एम.सी.जी. है| हालांकि,उन्होंने चेताया है कि बड़े भू-राजनीतिक तनाव या महामारी के वापस लौटने से तरलता प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है और बाजार में आयी उछाल में गिरावट हो सकती है| इसलिए, वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए ,नए इशू सब्सक्राइबर के साथ निवेशकों के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण रखना महत्वपूर्ण है |

स्मार्ट निवेश

एक दीर्घकालिक क्षितिज,कहानी का केवल एक हिस्सा है; यदि आप बिना देखे निवेश करते हैं तो आई.पी.ओ. निवेश सीधा डूब सकता है ,क्यूंकि सारे निवेश अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं | यह सब इस पर निर्भर करता है कि बाज़ार में निवेश कितने सफल रहते हैं - यदि वह अच्छा करता है तो आपको बहुत लाभ होगा ;यदि नहीं तो आप अपने पैसे को भूल जाएं |

बाज़ार में सफलता की कुंजी ,स्मार्ट तरीके से किया गया निवेश होता है और इसे करने का सही तरीका ,सही आई.पी.ओ. को सही मूल्य में ढूंढ़ना होता है | इसीलिए, आप जब बाज़ार में आये किसी भी संभव आई.पी.ओ. पर विचार करते हैं तो स्वयं से सबसे महत्वपूर्ण सवाल पूछें : क्या यह मेरे लिए अच्छा निवेश होगा ?

इसे निर्धारित करने के लिए, पहले अपने जोखिम क्षमता,अपना निवेश बजट और अपने वित्तीय लक्ष्य तय कर ले| एक बार आप ये सही से कर ले तो आप अपने आई.पी.ओ. की खोज को संकरा कर देंगे | परन्तु आपको जिस कंपनी में निवेश करना है ,उसके बारे में भी जानना चाहिए ,इसीलिए प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से पढ़ें ताकि आप उसके वित्त,बाज़ार के रिकॉर्ड और आई.पी.ओ. जारी करने के कारण के बारे में स्पष्ट रहे | किसी भी खतरे की निशानी को जांच लें |

साथ ही वह कंपनी जिस क्षेत्र में काम कर रही है,उस पर अच्छे से शोध कर ले ताकि आप ये जान सके कि उस प्रॉस्पेक्टस में कोई ज़रूरी सुचना छूट तो नहीं रही | आगे, इसके लिए आवेदन करते वक़्त ए.एस.बी.ए. मार्ग अपनाना सही होगा | ए.एस.बी.ए. आवेदन से, आप अपने फंड्स को अवरुद्ध नहीं करते परन्तु अपने बैंक खाते में उस पर ब्याज अर्जित करते हैं |

आई.पी.ओ. का मूल्य निर्धारण

यह जानने कि सलाह दी जाती है कि आई.पी.ओ. के मूल्य को कैसे निर्धारित किया जाता है ; यह आपको ये तय करने में मदद करेगा कि वह आपके लिए सही है या नहीं | यह तो समझ में आता है कि आई.पी.ओ. जारी करने वाली कंपनी को अधिकतम मूल्य चाहिए होता है ,जबकि अंडरराइटर कंपनी के मूल्यांकन के आधार पर एक स्वीकार्य प्रस्ताव मूल्य निर्धारित करने की कोशिश करता है | इसलिए, एक ऐसे आई.पी.ओ. को चुनने की सलाह दी जाती है जिसके मजबूत अंडरराइटर हो जैसे कि कोई मान्य निवेश बैंक या फर्म |

एक आई.पी.ओ. मूल्य निर्धारण या तो निश्चित-मूल्य प्रस्ताव होता है या तो एक बुक-बिल्ट प्रस्ताव होता है | पहली श्रेणी में, कंपनी आवेदन का मूल्य निर्धारित करता है जबकि दूसरी,मूल्य खोज की प्रक्रिया होती है |

बुक बिल्डिंग इशू की स्थिति में, प्रस्ताव के दस्तावेज़ को 'रेड हेरिंग' प्रॉस्पेक्टस कहा जाता है-उसमे मूल्य का विवरण, दी गई शेयरों की संख्या या इशू का आकर नहीं लिखा होता है| एक रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में या तो केवल पेश की गई सिक्योरिटीज का आधार मूल्य शामिल होगा या तो मूल्य बैंड होगा जिसके बीच बोलियां लग सकती हैं | बोली की प्रक्रिया ख़त्म होने के बाद ही इसका मूल्य निर्धारित हो सकता है |

जब तक आपकी बोली 1 लाख रुपये के अंदर की रहेगी तो आप एक खुदरा निवेशक माने जाएंगे ; इससे ऊपर की बोली होने से आप एच.एन.आई. श्रेणी में आ जाएंगे | आप इशू के बंद होने के बाद या तो बी.एस.ई. वेब साइट पर या तो रजिस्ट्रार की वेब साइट पर अपने आवंटन की स्थिति जांच सकते हैं |

अंतिम पंक्तियाँ

यदि आप किसी नए कंपनी द्वारा दी गए अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो एक आई.पी.ओ निवेश आदर्श होगा | ऐसे निवेश ऐसे लोगों के लिए भी फायदेमंद होते हैं जिनको बाजार के रुझानों की अच्छी समझ है -साथ ही,बेशक, जोखिम लेने की अच्छी क्षमता भी |

पर ध्यान रखें जो देव आशीष, स्टेबल इन्वेस्टर के वित्तीय विश्लेषक और वित्तीय योजना के संस्थापक और निवेश सलाहकार कहते हैं , "आई.पी.ओ. आमतौर पर अधिक मूल्यांकित होते हैं "| जैसा कि उन्होंने मनी कंट्रोल के एक छोटे से लेख में लिखा है -जो अक्सर कंपनियों को आई.पी.ओ. लाने के लिए प्रेरित करता है ,वह एक बाजार में सुधार के बाद निवेश करने वाली जनता के बीच एक उछाल की मनोदशा है -जैसा कि अभी है| इसका कारण: बाजार में सुधार एक अवधारणा बनाता है कि स्टॉक एक्सचेंज में पैसे कमाना आसान है |

सारांश में, इस कहावत को मानना भारी पड़ सकता है- 'किसी किताब को उसके कवर से न परखें '- या इस स्थिति में, किसी नए कंपनी के आसपास के सुर्ख़ियों से | उसे उसके फंडामेंटल के आधार में परखें, प्रॉस्पेक्टस ध्यान से पढ़ें और देखें कि क्या वह आपके वित्तीय लक्ष्यों से मेल खाता है |

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कानूनी सलाह के रूप में नहीं लगाया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको अलग से सलाह प्राप्त करनी चाहिए ।




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