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नियमित रूप से निवेश की गई छोटी राशि का मूल्य समय के साथ कैसे बढ़ता जाता है और आपको इससे अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल करने में किस तरह मदद मिलती है? इस सवाल का जवाब है कंपाउंडिंग।

Compounding-Give yourself a gift

लकी ड्रॉ, जुआ और पोकर में एक बात आम है। किस्मत के एक जादुई स्ट्रोक से विजेता को इनाम में काफी बड़ी राशि मिल जाती है। 

हालांकि लॉटरी जीतना हर आदमी की किस्मत में नहीं होता, लेकिन एक चीज़ है जो कुछ नहीं से बहुत कुछ बना सकती है और वो है कंपाउंडिंग।

कंपाउंडिंग का सार छुपा है एक निश्चित अवधि के लिए, नियमित रूप से एक निश्चित राशि को निवेश करने में। निवेश की गई यह राशि मैच्योरिटी (परिपक्व होना) पर बढ़ जाती है और अंत में, निवेश की गई असल राशि से अधिक मात्रा में पैसा प्राप्त होता है।

अपने पैसे को वापस निकालने की इच्छा से बचे रह कर, उसे लंबे समय के लिए निवेश करना ही कंपाउंडिंग का आधार है। 
उदाहरण

कंपाउंडिंग को और समझने के लिए एक उदाहरण की सहायता लेते हैं।


मान लीजिए कि समान डेमोग्राफिक्स वाली तीन महिलाएं हैं, निकिता, स्नेहा और असावरी। वे एक ही फंड में ( जो 8% का वार्षिक रिटर्न देता है), समान राशि (10,000 रुपये प्रति माह) का निवेश करती हैं। जो मासिक रूप से कंपाउंड होता है। इनमें बस एक ही अंतर है कि निकिता ने 25 साल की उम्र में निवेश करना शुरू किया जबकि स्नेहा और असावरी ने क्रमशः 30 और 35 साल की उम्र में निवेश की शुरुआत की।

विवरण

निकिता

स्नेहा

असावरी

शुरुआत करने की उम्र

25 साल

30 साल

35 साल

हर महीने निवेश की गई राशि

10,000

10,000

10,000

महीनों की संख्या (रिटायरमेंट की उम्र – शुरुआत की उम्र) 

420

360

300

निवेश की गई कुल राशि

42,00,000

36,00,000

30,00,000

रिटर्न की दर

8%

8%

8%

संपत्ति में हुई बढ़त

1,72,25,675

1,04,85,505

60,89,909

60 की उम्र तक फंड का मूल्य

2,29,38,824

1,49,03,594

 

95,10,263

 

 

समय महत्वपूर्ण है

वित्तीय फायदे को अधिकतम करने का मुख्य तरीका है निवेश की गई पूंजी को लंबे समय के लिए लॉक करके इंतज़ार करना। 


जब निकिता 60 की उम्र में रिटायर होगी तो उसके पास 2.3 करोड़ रुपये का कोष होगा (जबकि उसने कुल 42 लाख रुपये निवेश किए)। स्नेहा के पास 1.5 करोड़ रुपये का फंड होगा (उसने 36 लाख रुपयों का निवेश किया था) जबकि असावरी के पास मात्र 95 लाख रुपये की राशि होगी (उसने 30 लाख रुपयों का निवेश किया था)।


इससे स्पष्ट होता है कि निवेश की गई राशि में ज़्यादा अंतर नहीं है लेकिन धन की बढ़त में काफ़ी बड़ा अंतर है। यह फर्क कंपाउंडिंग की वजह से आया है। यह अंतर आया क्योंकि निकिता ने पूरा लाभ उठाने के साथ-साथ अपने और परिवार के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के इरादे से जल्दी निवेश करने की शुरुआत कर दी थी।


इसका मुख्य कारण है कि समय के साथ वह प्रिंसिपल अमाउंट यानि मुख्य राशि बढ़ती जाती है, जिस पर रिटर्न प्राप्त होता है। तो मतलब हर बार जब रिटर्न प्राप्त होता है, तो रिटर्न के रूप में अर्जित अगली राशि एक बड़ी राशि का प्रतिशत होती है। उदाहरण के लिए, आप हर साल 10% की ब्याज दर पर 1,00,000 लाख रुपये निवेश करते हैं। आपको पहले साल में 10/100*1,00,000= 10,000 रुपये का रिटर्न प्राप्त होता है। दूसरे साल में आपको रिटर्न के रूप में 1,10,000 रुपयों का 10% यानि 10/100*1,10,000= 11,000 रुपये प्राप्त होते हैं। इस दर से बढ़ते हुए, दसवें साल तक मुख्य राशि 2,35,795 हो जाएगी जबकि शुरुआत में यह रकम बस 1,00,000 रुपये थी।
यही वजह है कि आपको जल्दी निवेश करने की शुरुआत करनी चाहिए। हालांकि निवेश की शुरुआत की कोई तय उम्र नहीं है लेकिन आपको कमाना शुरू करते ही निवेश भी चालू कर देना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर आपका करियर 30,000 रुपये के वेतन से शुरू होता है तो आपको हर महीने कम से कम इसके 30% यानि 9000 रुपये की बचत करके निवेश करना चाहिए।


पैसे से ही पैसा बनता है


दुनिया भर के अमीर लोगों ने बड़ा बनने के लिए बस अपनी कड़ी मेहनत पर ही भरोसा नहीं किया बल्कि थोड़ी कमाई अपने पैसे को भी करने दी।

शुरुआत में, हमें कंपाउंडिंग का जादू देखने के लिए एक पीपीएफ में निवेश करना चाहिए। पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक निवेश का साधन है जिसमें आपको थोड़े-थोड़े समय में निवेश करके लॉक इन करना होता है। 15 साल का लॉक इन पीरियड खत्म होने पर, समय के साथ किए गए छोटे-छोटे निवेश बड़े पैमाने में बढ़ कर शानदार रिटर्न देते हैं। 

फिक्स्ड डिपोज़िट भी ऑटो-रिन्युअल विक्लप है, जो परिपक्व हुई राशि को उतने ही समय के लिए फिर से निवेश करके आपका काम आसान बना देता है। समय के साथ, कंपाउंड होकर आपकी एफडी, आपके लिए बड़ी मात्रा में संपत्ति उत्पन्न करने का काम करती है। 

बॉन्ड भी पैसा इकट्ठा करने का अच्छा विकल्प देते हैं। इनके द्वारा प्राप्त हुए ब्याज को पहली वाली जगह पर ही दोबारा निवेश कर दिया जाता है। 


निष्कर्ष

अब आप कंपाउंडिंग की बारीकियों को समझते हैं और जानते हैं कि इससे आपको कैसे फायदा पहुंच सकता है। इसलिए हमेशा अपनी मौजूदा खपत की जगह अपने भविष्य की ज़रूरतों को प्राथमिकता दें और अपने पैसे को ज़्यादा समय के लिए निवेश करें ताकि लंबी अवधि में ज़्यादा बढ़त हो सके।


कंपाउंडिंग को अपनी निवेश रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाकर अपने पैसे को और पैसा बनाने दें। अगर आप को सही दिशा में सलाह की ज़रूरत है, तो यहां मौजूद है 7 चरणों में वित्तीय प्लानिंग करने की गाइड।

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