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भारत में प्रदूषण बढ़ रहा है खासतौर से दिल्ली और मुंबई जैसे मैट्रो शहरों में। इस लेख को पढ़ कर आपको पता चलेगा कि यह कैसे आपके स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल रहा है।

Effects of Living in a polluted city

जीया से मिलिए जो पहले दिल्ली में रहती थीं। 
क्यों? 
क्योंकि अब वह इस शहर में सांस नहीं ले सकती। 

इस साल के शुरू में जीया दिल्ली आना चाहती थीं। एक बड़े शहर में रहने और काम करने का अपना अलग ही आकर्षण था और जीया इसे महसूस करना चाहती थीं। हालांकि जल्दी ही उनका यह भ्रम टूट गया। शहर में बढ़ते प्रदूषण ने उनका रहना मुश्किल कर दिया था। दिल्ली के पास के राज्यों में जलाई जाने वाली पराली और दिपावली के पास तो यह प्रदूषण बहुत बढ़ जाता था। उनको सांस की गंभीर समस्या होने लगी। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में जो पैसा बचाया था वह सारा इलाज में खर्च हो गया। परेशान होकर वह अपने शहर वापस लौट गई। 

अगर आप भी एक प्रदूषित शहर में रहते हैं तो आपको जीया जैसी स्थिति आने से पहले ही इसे रोकने के लिए कदम उठाने होंगे। हालांकि वातावरण को बदलने के लिए आप कुछ खास नहीं कर सकते लेकिन आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक अच्छा हेल्थ इन्शयोरेन्स प्लान लें, जिससे जरूरत के समय उसका इस्तेमाल कर सकें। इसके बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़े। 


दिपावली के बाद की स्थिति

हर साल दीपावली के बाद हवा प्रदूषित हो जाती है लेकिन इस साल स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दिल्ली और उत्तर भारत के दूसरे शहरों के  आसमान पर गहरे स्मॉग की परत छा गई। स्थिति इतनी खराब हो गई कि स्कूल बंद करने पड़े। प्रदूषण का स्तर औसत से 300% ज्यादा हो गया था और कुछ अनुमानों के मुताबिक दिल्ली की हवा में सांस लेना 40 सिगरेट पीने के बराबर था। 

अगर आप बाहर निकलने के बाद अपने नाक और मुंह को ढक कर रखें या पटाखों से दूर रहें तब भी इस बात की गारंटी नहीं कि आप बिमार नहीं होंगे या आपको त्वचा में खुजली नहीं होगी या किसी तरह की सांस की समस्या नहीं होगी। इसलिए आपको यह पक्का करना होगा कि अगर कुछ होता है तो आपको इलाज पर हजारों या लाखों रूपये ना खर्च करने पड़े। 

आपके लिए सबसे सही यही है कि आप एक बेहतर और व्यापक हेल्थ इन्शयोरेंस पॉलिसी खरीद लें। इससे आप बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें पा सकेंगे। इस तरह का प्लान चुनें जिसमें आंखों और सांस की सभी तरह की समस्याओं को शामिल किया गया हो। बहुत से प्लान में दमा या उसके जैसी फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बिमारियों को पहले से हुई बिमारियों की सूची में होने के कारण पॉलिसी के फायदों से बाहर रखा जाता है। इसलिए ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें इन्हें शामिल किया गया हो और खुद को सुरक्षित करें। 

नीचे दीपवली के आस-पास होने वाली स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य समस्याओं, उनके इलाज और उसमें इन्शयोरेंस कैसे मदद कर सकता है इस बात की जानकारी दी गई है। 


सामान्य बिमारियां और उनके इलाज का खर्च

सांस की समस्या :
प्रदूषित हवा में सांस लेने से वयस्कों और बच्चों को गले और फेफड़ों की समस्या हो सकती है। बहुत से लोगों में सांस की यह समस्या दमे में बदल जाती है। इसका इलाज करने के लिए आपको छाती का एक्सरे करवाना होगा और इन्हेलर खरीदना होगा। स्थिति ज्यादा खराब होने पर आपको अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है। 

लेकिन क्या आप जानते थे कि दमा का इलाज पर आपको हर बार 5000 रूपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं? अगर अस्पताल में भर्ती होना पड़े तो आप हेल्थ इन्शयोरेंस पर भरोसा कर सकते हैं। हर हेल्थ इन्शयोरेंस में अस्पताल में भर्ती का खर्च, भर्ती होने से 30 दिन पहले और 60 दिन बाद का मेडिकल खर्च, एंबुलेंस का खर्च और मेडिकल टेस्ट का खर्च शामिल होता है। 

आंखो की समस्या :
धुएं और स्मॉग से आंखों में धुंधलापन, जलन और कुछ मामलों में अस्थाई अंधेपन की समस्या भी हो सकती है। एक अच्छे अस्पताल में आंखों की पूरी जांच ( बिना सर्जरी के)  और दूसरे जटिल प्रक्रियाओं में 2,500 रूपये तक खर्च हो सकते हैं। अगर सर्जरी करनी पड़े तो खर्च बहुत ज्यादा हो सकता है। अगर इसे पढ़ कर भी आपको रोना नहीं आ रहा तो आपके लिए कुछ और भी है: हो सकता है कि आपके सामान्य हेल्थ इन्शयोरेंस में आंखों से जुड़ी समस्या शामिल ही ना हो जब तक कि उसमें सर्जरी की नौबत ना आए। 

उच्च रक्तचाप:
प्रदूषित शहरों में रहने वाले लोगों को अक्सर उच्च रक्तचाप, मितली और चक्कर आने की समस्या हो जाती है। उच्च रक्तचाप और चक्कर की जांच और उससे जुड़े टेस्ट का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है और यह खर्च 5,000 रूपये तक जा सकता है। अगर इलाज में डे-केयर या अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है तो इस तरह का ज्यादातर खर्च सामान्य हेल्थ इनश्योरेंस में शामिल होता है। हालांकि, अगर उच्च रक्तचाप दिल की गंभीर बिमारी में बदल जाए तो आपको क्रिटिकल इलनेस कवर लेने की जरूरत होगी। 

आखिरी बात 

इन्शयोरेंस एक तरह का निवेश है जो आप अपने भविष्य के लिए करते हैं। इसलिए एक बेहतर हेल्थ पॉलिसी खरीदें और आगे के लिए योजना बना कर रखें। यह दीपावली तो चली गई लेकिन आपको पता चले उससे पहले अगली दीपावली आ चुकी होगी। अगर आंकड़ों पर भरोसा करें तो हो सकता है कि अगले साल ज्यादा गंभीर प्रदूषण का सामना करना पड़े। अपने इन्शयोरेंस सलाहकार से बात करें या खुद रिसर्च करके अपने लिए बेहतर प्लान लें जो ना केवल आपको बल्कि आपके परिवार को भी कवर करे। 

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