एक संपत्ति के मालिक होना बनाम किराए पर लेना: 2019 में आपको क्या चुनना चाहिए?

यहां 2019 में घर खरीदने या किराए पर लेने के फायदे एवं नुकसान के बारे में सबसे व्यापक लेख है

घर खरीदना बनाम किराए पर लेना: दोनों के फायदे एवं नुकसान

संपत्ति की कीमतें आसमान छू रही हैं ,धन्य है, हम में से अधिकांश जो एक नए निवास की तलाश कर रहे हैं, इस बारे में विचार कर रहे कि क्या एक घर किराए पर ले या एक खरीदने पर विचार करें। आइए हम 2019 में एक घर किराए पर लेने के साथ-साथ दोनों के कुछ फायदे एवं नुकसानों को देखें।
 

घर खरीदने के फायदे 
 

एक असली एसेट

रियल एस्टेट ट्रेंड ट्रैकर ट्रैक२रियल्टी द्वारा किए गए एक अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, 88% भारतीयों को लगता है कि रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए सबसे अच्छा एसेट वर्ग है। महत्वपूर्ण रूप से, इस सर्वेक्षण में केवल 28% उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि रियल एस्टेट में निवेश करना जोखिम भरा है। यह संपत्ति भारतीय घरो के एसेट का लगभग 91% हिस्सा बनाती है। रियल एस्टेट ने आमतौर पर समय के साथ में लगातार बढ़त की है।  घर का स्वामित्व यह सुनिश्चित करता है कि किसी के पास वास्तविक संपत्ति है जो समय के साथ बढ़त कर रही है और किराये की आय का एक संभावित स्रोत भी हो सकता है।

खरीदार के अनुकूल नीतियां

RERA के कार्यान्वयन ने देश भर में घर खरीदारों के लिए मानक मानदंड बनाए हैं। RERA अधिनियम आम घर खरीदार के अधिकारों की रक्षा करता है, जो घर खरीदने में अपनी जीवन बचत का लगभग सब कुछ निवेश करने की संभावना रखते हैं।इस अधिनियम के कुछ लाभों में बिल्डरों द्वारा कारपेट क्षेत्र की गणना में मानकीकरण शामिल है, बिल्डर द्वारा किए गए झूठे वादों और अग्रिम भुगतान पर एक सीमा  के मामले में खरीदार पूर्ण वापसी का हकदार है जो एक बिल्डर ले सकता है। हालांकि अभी भी RERA एक्ट के क्रियान्वयन में कमियां हैं, लेकिन कम से कम खरीदारों को पहले की तुलना में काफी सशक्त बनाया गया है।

डिमोनेटाइजेशन का भी प्रभाव पड़ता है। शीर्ष आठ संपत्ति बाजारों में, दिसंबर २०१८ में समाप्त तिमाही के लिए आवास की बिक्री एक साल पहले को 28% बढ़कर 51,701 अपार्टमेंट हो गई है।

नई इमारतों में कई सुविधाएं हैं

ऐसे परिवार भी हैं जो कई वर्षों या दशकों से तुलनात्मक रूप से छोटे घर में रह रहे हैं। वे अवकाश गतिविधियों पर पैसा खर्च करने के लिए काफी अवसरों का त्याग कर चुके हैं जैसे कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा या क्लब की सदस्यता खरीदना आदि। हालांकि, इन सभी वर्षों में वे बच गए होंगे और एक नया घर खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण कोष बना लिए होंगे।

पुराने घर जहां ऐसे परिवार रहते हैं, वे ऐसे समाजों में हो सकते हैं, जिन्होंने खुद को समय के अनुरूप नहीं रखा है। कुछ इमारतों को बहुत अधिक मरम्मत की आवश्यकता हो सकती है। इन परिवारों को एक नया घर खरीदने में खुशी होगी क्योंकि उन्हें शायद ही ऋण लेने की आवश्यकता हो। वे न केवल एक अच्छे कोष के मालिक होंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर शेष पैसे की व्यवस्था करने के लिए पुराने घर को भी बेच सकते हैं।

जो नया घर खरीदा जाएगा, वह कई सुविधाओं के साथ एक परिसर में हो सकता है जो इन परिवारों की जीवन शैली की जरूरतों के अनुरूप होगा।
 

संबंधित: क्या आपको एक सप्ताहांत घर खरीदना चाहिए

घर खरीदने के नुकसान 

डाउन पेमेंट के लिए बचत करने में समय लगता है

यह मानते हुए कि कोई व्यक्ति प्रति वर्ष 8 लाख रुपये की पूर्व-कर आय अर्जित करता है, आय का 25% बचाता है और बचत पर 10% रिटर्न अर्जित करता है, घर खरीदने के लिए एक मेट्रो शहर में डाउन पेमेंट की व्यवस्था करने में 3.6 साल से 12 साल के बीच कहीं भी लगता है।  डाउन पेमेंट में घर की कुल लागत के 15% और 20% के बराबर राशि हो सकती है।

संबंधित: 4 स्थिति जिससे हर घर मालिक  डरता है

विराम नहीं ले सकते हैं

ईटी वेल्थ सर्वे में पाया गया कि हर तीन भारतीय घर खरीदारों में से एक अपनी बचत का 50% घर के डाउन पेमेंट में बहा रहा है। ध्यान रखें, कि हमने अभी तक EMI के प्रभाव पर चर्चा नहीं की है। लगभग 28% भारतीय अपनी घरेलू आय में से 40% को होम लोन की ईएमआई में आवंटित करने के इच्छुक हैं और 10% के करीब भारतीय अपनी घरेलू आय का 50% होम लोन की ईएमआई में आवंटित करने के लिए तैयार हैं। इन लागतों के अलावा, मेंटेनेंस की लागत में छूट नहीं दी जा सकती है। अधिकांश नए आवास परिसरों को बनाया जा रहा है जिसमें कई सुविधाएं हैं जैसे कि स्विमिंग पूल, व्यायामशाला, डबल डेकर पार्किंग प्लेटफॉर्म और खेलने की जगह । ऐसे परिसरों के निवासियों को रखरखाव शुल्क के रूप में आसानी से 8,000 रुपये और 10,000 रुपये प्रति माह के बीच का भुगतान करना होगा।

इन लागतों के कारण, कोई व्यक्ति अन्य हितों को आगे बढ़ाने के लिए विश्राम या काम से ब्रेक लेने की कल्पना भी नहीं कर सकता है।

संबंधित: भारत में रिटायरमेंट होम में रहने वाले बनाम घर में रहने वाले

घर किराए पर देने के फायदे
 

लंबे समय तक बचत कर सकते है

अक्सर यह सही लगता है कि घर खरीदना संपत्ति बनाने के बराबर है। आइए देखें कि जब कोई 2 करोड़ रुपये का घर खरीदना चाहता है तो क्या होगा। ऐसे मामले में, हम मान सकते हैं कि लागत का 20% डाउन पेमेंट के रूप में भुगतान किया जाएगा और आप शेष 1.6 करोड़ रुपये के लिए, 25 वर्षों के कार्यकाल के लिए 8.7% की दर से एक होम लोन लेंगे।

इस व्यक्ति की मासिक ईएमआई 1,31,000 रुपये है। 25 वर्षों में भुगतान की गई कुल राशि 3,92,99,968 रुपये है। यद्यपि ऐतिहासिक रूप से, 1991 और 2014 के बीच भारत में अचल संपत्ति पर वार्षिक रिटर्न लगभग 20% था, भारत में संपत्ति की दर मार्च 2011 से मार्च 2018 तक लगभग 8.1% बढ़ी है और ऐसा करना जारी रह सकता है।

यदि कोई मानता है कि अगले 25 वर्षों में संपत्ति की दर 9% तक बढ़ सकती है, तो कोई यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि 2019 में 2 करोड़ रुपये में खरीदा गया घर 17.2 करोड़ रुपये का होगा। मुद्रास्फीति पर विचार किए बिना, प्रति माह 8000 रुपये की मेंटेनेंस लागत, खरीदार की जेब से 24 लाख रुपये निकलवाएगी। इन 25 वर्षों में, किसी ने ब्याज के रूप में हर साल 9.3 लाख रुपये के करीब खर्च किया है | इस ब्याज पर दो लाख रुपये के कर लाभ का दावा कर सकते हैं। 25 वर्षों में, यह 50 लाख रुपये हो जाता है। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति ने 17.2 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने के लिए 3.6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

लेकिन अगर कोई 2 करोड़ रुपये का मकान किराए पर लेता है, तो उसे 3% किराये की दर मानकर लगभग 60,000 रुपये का किराया देना होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई शहरों में, प्राइम क्षेत्रों में किराये की दर और भी कम है - लगभग 2.5%। यह व्यक्ति को एसआईपी के माध्यम से इक्विटी जैसे वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्ग में निवेश करने के लिए 70,000 रुपये के अधिशेष के साथ छोड़ देता है। अगले 25 वर्षों में इक्विटी में 15% की औसत वापसी की उम्मीद है। यहां तक कि अगर किराए में साल दर साल 10% की वृद्धि होती है, तो किसी की आय वृद्धि से इसे बराबर करने की उम्मीद की जा सकती है और यहां तक कि एसआईपी निवेश में भी योगदान दे सकता है। वो कोष जो प्रति माह 70,000 रुपये का निवेश करके अर्जित किया गया है और साल दर साल 5% की दर से बढ़ाकर 17.63 करोड़ रुपये का हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति ने 17.63 करोड़ रुपये का कोष बनाने में 3.36 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

इसलिए, यहां तक कि निवास किराया भत्ता पर विचार किए बिना, घर को किराए पर देने की तुलना में एक लंबे समय तक घर खरीदना बेहतर आरओआई प्रदान कर सकता है। 25 वर्षों के बाद, कोई भी ऋण लिए बिना उस घर को खरीद सकता है, धन्यवाद् जिसने कोष बनाया है।
हालांकि, लंबी अवधि में लागत बचाने के लिए किराये के दृष्टिकोण का फैसला करने से पहले सटीक गणना और भावी मेट्रिक्स करनी होती है।

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कम लागत के लिए उच्च जीवन स्तर का आनंद लें

अगर कोई मुंबई के एक लोकप्रिय केंद्रीय उपनगर में 3BHK के विशाल आवास में रहना चाहता है, तो उसकी कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये हो सकती है। यह मानते हुए कि कोई व्यक्ति 70 लाख रुपये का भुगतान करने में सक्षम है (फ्लैट के मूल्य का 20%), किसी को 2.8 करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए 2,46,903 रुपये का मासिक ईएमआई देना होगा। जो अगले बीस वर्षों में चुकाया जा सकता है। कोई भी मेंटेनेंस की लागत पर विचार नहीं कर रहा है।

एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने अभी अपना करियर शुरू किया है या उसमें कुछ साल हैं, इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को लेना बेहद चुनौतीपूर्ण है। यदि कोई निश्चित नहीं है, तो ऐसी प्रतिबद्धता के लिए खुद को बांधना भी वांछनीय नहीं है।

इन दोनों मुद्दों का समाधान पहले कुछ वर्षों के लिए बड़े पैमाने पर घर किराए पर लेना है। उपनगरीय मुंबई में किराये की दर 2.5% से 3% के बीच है। इसलिए, कोई भी इस घर में रहने का अनुभव ले सकता है और लगभग एक लाख या उससे कम पर सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।

यह एक व्यक्ति को यह पता लगाने में भी मदद करेगा कि क्या वह ऐसा जीवन जीना चाहता है और जैसे-जैसे साल बीतते हैं, वह अपने करियर बना सकता है। यह एक बड़ा ऋण लेने का निर्णय लेने के लिए एक बेहतर मंच बन सकता है।

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एक घर किराए पर लेने के नुकसान 

घूमते रहना होगा

यह संभवतः एक घर किराए पर लेने का सबसे बड़ा नुकसान है। हर कुछ वर्षों में एक व्यक्ति को घूमते रहना पड़ता है। यह आपके जीने के तरीके पर एक टोल ले सकता है| एक ही इलाके में नए घरों की तलाश करने के लिए मजबूर किया जा सकता है क्योंकि दूर जाने से किसी की जीवन शैली पर भारी असर पड़ सकता है। हर बार किराये के समझौते  समाप्त होने के समय पर नयी जगह शिफ्ट होने की चिंता हमेशा दिमाग में रहती है।

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मुश्किल होती है जब आप बड़े होते जाते हो

जैसे-जैसे कोई वृद्ध होता है, वैसे-वैसे किसी के जीने का तरीका तय होता जाता है। साथ ही जगह बदलना शारीरिक रूप से कठिन होता जाता है। इसलिए पुराने दंपतियों के लिए या ऐसे परिवारों के लिए जिनमें पुराने सदस्यों की संख्या अधिक है, हर कुछ वर्षों में शिफ्ट होने की प्रथा कष्टकारी है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रहने के लिए घर खरीदना ज्यादातर भारतीय परिवारों के लिए एक भावनात्मक निर्णय है और इसलिए वे अपनी बैंक के अधिकांश बचत को तोड़ने का मन बनाते हैं और अपने सपनों का घर खरीदने के लिए पर्याप्त ऋण भी लेते हैं। हालांकि, युवा पेशेवर जो होम लोन से बिना बंधे हुए जीवन को पूरी तरह जीने  के लिए उत्सुक हैं, वे किराए पर रहने के लिए खुले हैं। यदि आप अचल संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं? यहां कुछ चीजें हैं जो आपको पता होनी चाहिए।

संपत्ति की कीमतें आसमान छू रही हैं ,धन्य है, हम में से अधिकांश जो एक नए निवास की तलाश कर रहे हैं, इस बारे में विचार कर रहे कि क्या एक घर किराए पर ले या एक खरीदने पर विचार करें। आइए हम 2019 में एक घर किराए पर लेने के साथ-साथ दोनों के कुछ फायदे एवं नुकसानों को देखें।
 

घर खरीदने के फायदे 
 

एक असली एसेट

रियल एस्टेट ट्रेंड ट्रैकर ट्रैक२रियल्टी द्वारा किए गए एक अखिल भारतीय सर्वेक्षण के अनुसार, 88% भारतीयों को लगता है कि रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए सबसे अच्छा एसेट वर्ग है। महत्वपूर्ण रूप से, इस सर्वेक्षण में केवल 28% उत्तरदाताओं ने महसूस किया कि रियल एस्टेट में निवेश करना जोखिम भरा है। यह संपत्ति भारतीय घरो के एसेट का लगभग 91% हिस्सा बनाती है। रियल एस्टेट ने आमतौर पर समय के साथ में लगातार बढ़त की है।  घर का स्वामित्व यह सुनिश्चित करता है कि किसी के पास वास्तविक संपत्ति है जो समय के साथ बढ़त कर रही है और किराये की आय का एक संभावित स्रोत भी हो सकता है।

खरीदार के अनुकूल नीतियां

RERA के कार्यान्वयन ने देश भर में घर खरीदारों के लिए मानक मानदंड बनाए हैं। RERA अधिनियम आम घर खरीदार के अधिकारों की रक्षा करता है, जो घर खरीदने में अपनी जीवन बचत का लगभग सब कुछ निवेश करने की संभावना रखते हैं।इस अधिनियम के कुछ लाभों में बिल्डरों द्वारा कारपेट क्षेत्र की गणना में मानकीकरण शामिल है, बिल्डर द्वारा किए गए झूठे वादों और अग्रिम भुगतान पर एक सीमा  के मामले में खरीदार पूर्ण वापसी का हकदार है जो एक बिल्डर ले सकता है। हालांकि अभी भी RERA एक्ट के क्रियान्वयन में कमियां हैं, लेकिन कम से कम खरीदारों को पहले की तुलना में काफी सशक्त बनाया गया है।

डिमोनेटाइजेशन का भी प्रभाव पड़ता है। शीर्ष आठ संपत्ति बाजारों में, दिसंबर २०१८ में समाप्त तिमाही के लिए आवास की बिक्री एक साल पहले को 28% बढ़कर 51,701 अपार्टमेंट हो गई है।

नई इमारतों में कई सुविधाएं हैं

ऐसे परिवार भी हैं जो कई वर्षों या दशकों से तुलनात्मक रूप से छोटे घर में रह रहे हैं। वे अवकाश गतिविधियों पर पैसा खर्च करने के लिए काफी अवसरों का त्याग कर चुके हैं जैसे कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा या क्लब की सदस्यता खरीदना आदि। हालांकि, इन सभी वर्षों में वे बच गए होंगे और एक नया घर खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण कोष बना लिए होंगे।

पुराने घर जहां ऐसे परिवार रहते हैं, वे ऐसे समाजों में हो सकते हैं, जिन्होंने खुद को समय के अनुरूप नहीं रखा है। कुछ इमारतों को बहुत अधिक मरम्मत की आवश्यकता हो सकती है। इन परिवारों को एक नया घर खरीदने में खुशी होगी क्योंकि उन्हें शायद ही ऋण लेने की आवश्यकता हो। वे न केवल एक अच्छे कोष के मालिक होंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर शेष पैसे की व्यवस्था करने के लिए पुराने घर को भी बेच सकते हैं।

जो नया घर खरीदा जाएगा, वह कई सुविधाओं के साथ एक परिसर में हो सकता है जो इन परिवारों की जीवन शैली की जरूरतों के अनुरूप होगा।
 

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घर खरीदने के नुकसान 

डाउन पेमेंट के लिए बचत करने में समय लगता है

यह मानते हुए कि कोई व्यक्ति प्रति वर्ष 8 लाख रुपये की पूर्व-कर आय अर्जित करता है, आय का 25% बचाता है और बचत पर 10% रिटर्न अर्जित करता है, घर खरीदने के लिए एक मेट्रो शहर में डाउन पेमेंट की व्यवस्था करने में 3.6 साल से 12 साल के बीच कहीं भी लगता है।  डाउन पेमेंट में घर की कुल लागत के 15% और 20% के बराबर राशि हो सकती है।

संबंधित: 4 स्थिति जिससे हर घर मालिक  डरता है

विराम नहीं ले सकते हैं

ईटी वेल्थ सर्वे में पाया गया कि हर तीन भारतीय घर खरीदारों में से एक अपनी बचत का 50% घर के डाउन पेमेंट में बहा रहा है। ध्यान रखें, कि हमने अभी तक EMI के प्रभाव पर चर्चा नहीं की है। लगभग 28% भारतीय अपनी घरेलू आय में से 40% को होम लोन की ईएमआई में आवंटित करने के इच्छुक हैं और 10% के करीब भारतीय अपनी घरेलू आय का 50% होम लोन की ईएमआई में आवंटित करने के लिए तैयार हैं। इन लागतों के अलावा, मेंटेनेंस की लागत में छूट नहीं दी जा सकती है। अधिकांश नए आवास परिसरों को बनाया जा रहा है जिसमें कई सुविधाएं हैं जैसे कि स्विमिंग पूल, व्यायामशाला, डबल डेकर पार्किंग प्लेटफॉर्म और खेलने की जगह । ऐसे परिसरों के निवासियों को रखरखाव शुल्क के रूप में आसानी से 8,000 रुपये और 10,000 रुपये प्रति माह के बीच का भुगतान करना होगा।

इन लागतों के कारण, कोई व्यक्ति अन्य हितों को आगे बढ़ाने के लिए विश्राम या काम से ब्रेक लेने की कल्पना भी नहीं कर सकता है।

संबंधित: भारत में रिटायरमेंट होम में रहने वाले बनाम घर में रहने वाले

घर किराए पर देने के फायदे
 

लंबे समय तक बचत कर सकते है

अक्सर यह सही लगता है कि घर खरीदना संपत्ति बनाने के बराबर है। आइए देखें कि जब कोई 2 करोड़ रुपये का घर खरीदना चाहता है तो क्या होगा। ऐसे मामले में, हम मान सकते हैं कि लागत का 20% डाउन पेमेंट के रूप में भुगतान किया जाएगा और आप शेष 1.6 करोड़ रुपये के लिए, 25 वर्षों के कार्यकाल के लिए 8.7% की दर से एक होम लोन लेंगे।

इस व्यक्ति की मासिक ईएमआई 1,31,000 रुपये है। 25 वर्षों में भुगतान की गई कुल राशि 3,92,99,968 रुपये है। यद्यपि ऐतिहासिक रूप से, 1991 और 2014 के बीच भारत में अचल संपत्ति पर वार्षिक रिटर्न लगभग 20% था, भारत में संपत्ति की दर मार्च 2011 से मार्च 2018 तक लगभग 8.1% बढ़ी है और ऐसा करना जारी रह सकता है।

यदि कोई मानता है कि अगले 25 वर्षों में संपत्ति की दर 9% तक बढ़ सकती है, तो कोई यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि 2019 में 2 करोड़ रुपये में खरीदा गया घर 17.2 करोड़ रुपये का होगा। मुद्रास्फीति पर विचार किए बिना, प्रति माह 8000 रुपये की मेंटेनेंस लागत, खरीदार की जेब से 24 लाख रुपये निकलवाएगी। इन 25 वर्षों में, किसी ने ब्याज के रूप में हर साल 9.3 लाख रुपये के करीब खर्च किया है | इस ब्याज पर दो लाख रुपये के कर लाभ का दावा कर सकते हैं। 25 वर्षों में, यह 50 लाख रुपये हो जाता है। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति ने 17.2 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने के लिए 3.6 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

लेकिन अगर कोई 2 करोड़ रुपये का मकान किराए पर लेता है, तो उसे 3% किराये की दर मानकर लगभग 60,000 रुपये का किराया देना होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई शहरों में, प्राइम क्षेत्रों में किराये की दर और भी कम है - लगभग 2.5%। यह व्यक्ति को एसआईपी के माध्यम से इक्विटी जैसे वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्ग में निवेश करने के लिए 70,000 रुपये के अधिशेष के साथ छोड़ देता है। अगले 25 वर्षों में इक्विटी में 15% की औसत वापसी की उम्मीद है। यहां तक कि अगर किराए में साल दर साल 10% की वृद्धि होती है, तो किसी की आय वृद्धि से इसे बराबर करने की उम्मीद की जा सकती है और यहां तक कि एसआईपी निवेश में भी योगदान दे सकता है। वो कोष जो प्रति माह 70,000 रुपये का निवेश करके अर्जित किया गया है और साल दर साल 5% की दर से बढ़ाकर 17.63 करोड़ रुपये का हो जाएगा। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति ने 17.63 करोड़ रुपये का कोष बनाने में 3.36 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

इसलिए, यहां तक कि निवास किराया भत्ता पर विचार किए बिना, घर को किराए पर देने की तुलना में एक लंबे समय तक घर खरीदना बेहतर आरओआई प्रदान कर सकता है। 25 वर्षों के बाद, कोई भी ऋण लिए बिना उस घर को खरीद सकता है, धन्यवाद् जिसने कोष बनाया है।
हालांकि, लंबी अवधि में लागत बचाने के लिए किराये के दृष्टिकोण का फैसला करने से पहले सटीक गणना और भावी मेट्रिक्स करनी होती है।

संबंधित: क्या आपको एक सप्ताहांत घर खरीदना चाहिए

कम लागत के लिए उच्च जीवन स्तर का आनंद लें

अगर कोई मुंबई के एक लोकप्रिय केंद्रीय उपनगर में 3BHK के विशाल आवास में रहना चाहता है, तो उसकी कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपये हो सकती है। यह मानते हुए कि कोई व्यक्ति 70 लाख रुपये का भुगतान करने में सक्षम है (फ्लैट के मूल्य का 20%), किसी को 2.8 करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए 2,46,903 रुपये का मासिक ईएमआई देना होगा। जो अगले बीस वर्षों में चुकाया जा सकता है। कोई भी मेंटेनेंस की लागत पर विचार नहीं कर रहा है।

एक ऐसे व्यक्ति के लिए जिसने अभी अपना करियर शुरू किया है या उसमें कुछ साल हैं, इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को लेना बेहद चुनौतीपूर्ण है। यदि कोई निश्चित नहीं है, तो ऐसी प्रतिबद्धता के लिए खुद को बांधना भी वांछनीय नहीं है।

इन दोनों मुद्दों का समाधान पहले कुछ वर्षों के लिए बड़े पैमाने पर घर किराए पर लेना है। उपनगरीय मुंबई में किराये की दर 2.5% से 3% के बीच है। इसलिए, कोई भी इस घर में रहने का अनुभव ले सकता है और लगभग एक लाख या उससे कम पर सभी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।

यह एक व्यक्ति को यह पता लगाने में भी मदद करेगा कि क्या वह ऐसा जीवन जीना चाहता है और जैसे-जैसे साल बीतते हैं, वह अपने करियर बना सकता है। यह एक बड़ा ऋण लेने का निर्णय लेने के लिए एक बेहतर मंच बन सकता है।

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एक घर किराए पर लेने के नुकसान 

घूमते रहना होगा

यह संभवतः एक घर किराए पर लेने का सबसे बड़ा नुकसान है। हर कुछ वर्षों में एक व्यक्ति को घूमते रहना पड़ता है। यह आपके जीने के तरीके पर एक टोल ले सकता है| एक ही इलाके में नए घरों की तलाश करने के लिए मजबूर किया जा सकता है क्योंकि दूर जाने से किसी की जीवन शैली पर भारी असर पड़ सकता है। हर बार किराये के समझौते  समाप्त होने के समय पर नयी जगह शिफ्ट होने की चिंता हमेशा दिमाग में रहती है।

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मुश्किल होती है जब आप बड़े होते जाते हो

जैसे-जैसे कोई वृद्ध होता है, वैसे-वैसे किसी के जीने का तरीका तय होता जाता है। साथ ही जगह बदलना शारीरिक रूप से कठिन होता जाता है। इसलिए पुराने दंपतियों के लिए या ऐसे परिवारों के लिए जिनमें पुराने सदस्यों की संख्या अधिक है, हर कुछ वर्षों में शिफ्ट होने की प्रथा कष्टकारी है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रहने के लिए घर खरीदना ज्यादातर भारतीय परिवारों के लिए एक भावनात्मक निर्णय है और इसलिए वे अपनी बैंक के अधिकांश बचत को तोड़ने का मन बनाते हैं और अपने सपनों का घर खरीदने के लिए पर्याप्त ऋण भी लेते हैं। हालांकि, युवा पेशेवर जो होम लोन से बिना बंधे हुए जीवन को पूरी तरह जीने  के लिए उत्सुक हैं, वे किराए पर रहने के लिए खुले हैं। यदि आप अचल संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं? यहां कुछ चीजें हैं जो आपको पता होनी चाहिए।

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