डिजिटल युग में बच्चों को पैसे का सबक सिखाने के 5 तरीके

एक अभिभावक के तौर पर आप अपने बच्चे के दोस्त, अध्यापक और मार्गदर्शक सभी की भूमिका निभाते हैं।

Give financial advice to child about the Digital age

बच्चों को पैसे का सही प्रबंध सिखाना बहुत ज़रूरी है। यह उनकी पढ़ाई जितना ही आवश्यक है। यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि अपने बच्चों को पैसे की बचत, उसे सही तरह से   खर्च करने, सीमित साधनों में रहने और समाज के लिए कुछ करने के बारे में   सिखाएं।

इसके लिए कोई उम्र छोटी नहीं है। बच्चों को कम उम्र से ही पैसों के सही इस्तेमाल के बारे में समझाएं। खासतौर से तेज़ी से कैशलेस होते अर्थजगत में यह बेहद ज़रूरी है।

शुरूआत करने के कुछ तरीके: 

1. उन्हें जेबखर्च दें

अपने बच्चों को एक जेबखर्च दें लेकिन सीधे बैंक के बचत खाते से ना शुरूआत  करें। शुरू में उन्हें हर हफ्ते कुछ पैसे दें।उन्हें पैसा हाथ में आने के रोमांच को महसूस करने दें। आप उन्हें समझा सकते हैं कि इस में से कुछ पैसे की बचत करने से उनका जमा पैसा कैसे बढ़ेगा। इससे उन्हें अपने सीमित साधनों में रहने की आदत भी पड़ेगी क्योंकि उन्हें अगला जेबखर्च मिलने तक उसी पैसे में काम चलाना पड़ेगा।

2. उन्हें बचत करना सिखाएं

वास्तविक दुनिया में चीज़ें कैसे काम करती हैं यह जानना अनोखा अनुभव हो    सकता है। बच्चों को बचत के बारे में सिखाने के लिए उन्हें एक गुल्लक ला कर दें और उनसे कहें कि जेबखर्च से मिले कुछ पैसों को इसमें जमा करें। महीने के आखिर में गुल्लक से पैसे निकाल कर गिनें और उन्हें बताएं कि धीरे-धीरे कितने पैसे जमा हो गए हैं। पैसे को तीन हिस्सों में बांटें- एक हिस्सा बच्चों की पसंद पर खर्च करें, यह उनके बचत करने का इनाम हो सकती है, दूसरा हिस्सा किसी अच्छे काम के लिए दान कर दें ( दूसरों के प्रति दया का भाव सिखाना ज़रूरी है), तीसरे हिस्से को उनके  बैंक खाते में जमा कर दें। 

3. पैसे के बारे में बात करें

बच्चे चीज़ों को बहुत जल्दी समझते हैं। उनको उदाहरण देकर समझाएं। बच्चे कुछ बड़े हो जाएं तो उन्हें पास की दुकान पर लेकर जाएं। उनको विभिन्न चीज़ों के बीच तुलना करना और खरीदारी करना सिखाएं। उनको डेबिट और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल  करना सिखाएं। उन्हें समझाएं कि आप समय से क्रेडिट कार्ड का बिल कैसे चुकाते हैं। उनसे पैसे के बारे में बात करें। बच्चों को बताएं कि आप क्या खरीद रहे हैं और उसके लिए कितने पैसे चुकाए। खरीदारी से जुड़े बड़े फैसलों जैसे कार खरीदने या कोई इलेक्ट्रोनिक सामान    खरीदने के बारे में उनसे सलाह लें। 

4. उनकी मांग तुरंत ना मानें

बच्चे तो अलग-अलग तरह की मांग करते ही हैं। वे खिलौने, क्रेयोन या साइकिल कुछ भी मांग सकते हैं। वे इन चीज़ों को टेलिविजन या अपने किसी दोस्त के पास देखते हैं और फिर    उनकी मांग करते हैं। उनकी हर बात को मत मानिए भले ही आप उन्हें पूरा करने की स्थिति में हों। एक बार बच्चों की सभी मांगें पूरी होने लगीं तो वे मेहनत से कमाए पैसे का मोल नहीं समझ पाएंगें। आप उनके जन्मदिन या किसी ख़ास मौके पर उनकी मांगों को पूरा कर सकते हैं। हालांकि दूसरे किसी समय पर तुरंत उनकी मांगों को पूरा मत कीजिए। उन्हें कहें कि जो चीज़ वो चाहते हैं उसको पाने के लिए उन्हें भी एक हिस्से का    पैसा जुटाना होगा और उनसे वादा करें कि अगर वे ईमानदारी से काम करेंगे   तो बाकि के हिस्से को आप पूरा कर देंगे। 

5.  लांग टर्म लक्ष्य

बच्चों को जेबखर्च से बचत करना सिखाएं। बच्चों को कहें कि अगर वे कुछ महंगा समान खरीदना चाहते हैं तो रिश्तेदारों से उपहार में मिले पैसे को बचत खाते में डालें। उनको कंपाउंडिग की ताकत के बारे में बताएं। उन्हें कहें कि अगर वे साइकिल या आईपैड खरीदना चाहते हैं तो उसके  लिए 60% पैसा वे बचत से इकट्ठा करें और बाकि 40% आप देंगे। इससे आप ना केवल उन्हें जिंदगी के कीमती सबक सिखाएंगे बल्कि लक्ष्य पूरा होने पर बच्चे को भी लगेगा कि उसने खुद कुछ हासिल किया है। 

बच्चों के बड़ा होने पर उन्हें म्यूचूअल फंड, सोने, गोल्ड ईटीएफ, सरकारी योजनाओं और ऐसी दूसरी चीज़ों के बारे में बताएं। आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने की दिशा में अपने बच्चों का सही मार्गदर्शन करें। 

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