Gold vs Silver, More profitable: किसमें ज्यादा फायदा, सोना या चांदी

संपत्ति बढ़ाने और मुद्रास्फीति से बचाव के लिहाज से सोने और चांदी में से किसमें निवेश का विकल्प अच्छा होगा!

सोना या चांदी बेहतर निवेश

Gold or Silver: which is a  Better investment?  निवेशक संपत्ति बढ़ाने और मुद्रास्फीति से बचाव के लिए सोने-चांदी में निवेश को एक बहुत अच्छा विकल्प मानते हैं। साथ ही इससे कई अन्य तरह के लाभ भी मिलते हैं। लेकिन इसमें निवेश से पहले आर्थिक परिवेश में सोने और चांदी का प्रदर्शन कैसा है यह जान लेना बहुत जरूरी है। इस लेख में सोने और चांदी की तुलनात्मक जानकारी दी जा रही है। 

सोने और चांदी में निम्न तरीकों से निवेश किया जा सकता है, 

  • बुलियन 
  • फ्यूचर्स 
  • एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) 
  • माइनिंग स्टॉक्स    
  • ईटीएफ जो माइनिंग स्टॉक्स के मालिक हो 

हर एक तरीके से निवेश करने के अपने फायदे-नुकसान हैं। बुलियन खरीदने पर उसकी सुरक्षा का प्रश्न होता है, तो वहीं ईटीएफ बुलियन से अधिक सुरक्षित माध्यम है। ईटीएफ जो खुद बुलियन का मालिक हो, पब्लिक एक्सचेंज (विनिमय) द्वारा होल्डिंग की पूरी कीमत से प्राप्त किया जा सकता है और डीलर से ट्रेड करने से बचा जा सकता है।

माइनिंग स्टॉक खरीदने से सीधे-सीधे बहुमूल्य धातुओं की बढ़ती कीमत का फायदा मिल सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया बहुत समय मांगती हैं इसलिए आप चाहें तो ऐसे ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं जिनके पास खदानों के स्टॉक्स हों। 

निवेशक अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक सोने-चांदी के विभिन्न विकल्पों में निवेश कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: सोने की कीमत गई नीचे

सोने और चांदी का लंबी अवधि में प्रदर्शन 

आमतौर पर माना जाता है कि लंबी अवधि के लिए सोने और चांदी का निवेश बेहतर रिटर्न देता है पर हमेशा ऐसा नहीं होता। क्राइटन यूनिवर्सिटी के फ़ाइनांस प्रोफेसर रॉबर्ट आर. जॉनसन का कहना है कि 1925 से अब तक 95 वर्षों की अवधि में मुद्रास्फीति की दर 2.9% रही। इसलिए सोने और चांदी के निवेश से जो भी रिटर्न मिलता है उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा मुद्रास्फीति के कारण कम हो जाता है, जिस कारण निवेशकों की क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) उतनी नहीं बढ़ पाती। 

  • 1925 से लेकर सोने के भाव में $20.63 से 2020 तक $1893.66 तक की वृद्धि हुई। यानी पूरी अवधि में 4.87% वार्षिक चक्रवृद्धि प्रतिलाभ (सालाना कंपाउंड रिटर्न) मिला। 
  • वहीं इसी दौरान चांदी की कीमतें $0.68 से बढ़कर $17.14 तक पहुँची, यानी इसमें 3.46% रिटर्न मिला। लेकिन इस पूरे समय के दौरान मुद्रास्फीति 2.9% रही। 

ग़ौरतलब है कि दोनों बहुमूल्य धातुओं की तुलना में सोने का प्रदर्शन बेहतर रहा।

मुद्रास्फीति से बचाव 

अक्सर देखा गया है कि मुद्रास्फीति से बचने के लिए निवेशक अक्सर सोने में निवेश करना पसंद करते हैं। जैसे ही बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होते हैं, निवेशक सोने में निवेश की ओर बढ़ जाते हैं। 

ऐक्यूटी नॉलेज पार्टनर के एमडी महेश अग्रवाल का कहना है कि “मुद्रास्फीति से बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है और पैसे के अवमूल्यन से बचने के लिए सोने में निवेश बढ़ जाता है। मुद्रास्फीति और सोने के बीच गहरा संबंध है।” हालांकि, कभी-कभी बढ़ती हुई ब्याज दरों के कारण यह संबंध गड़बड़ा जाता है और ऊंची मुद्रास्फीति की प्रतिक्रिया में ब्याज की दरें बढ़ जाने से निवेश फायदा देनेवाला नहीं रहता और कर्ज की ओर बढ़ जाता है। “चांदी का मुद्रास्फीति की स्थितियों से संबद्ध सोने जितना ठोस नहीं है। मुद्रास्फीति की अनिश्चितताओं के बावजूद चांदी की कीमत में सोने से ज्यादा स्थिरता होती है। हालाँकि महंगाई के दौर में औद्योगिक मांग घटने के कारण चांदी मजबूत मांग से ऑफसेट हो जाती है। मुद्रास्फीति कम होने के बाद स्थितियाँ पलट जाती है।” 

सोने और चांदी की बाजार में मांग 

बाजार में सोने और चांदी की मांग अलग-अलग कारणों के लिए होती है। 

“सोने की ज्यादातर मांग संपत्ति की वृद्धि या निवेश के लिए होती है।” अग्रवाल का कहना है कि “सोना आमतौर पर संपत्ति के संचय के रूप में किया जाता है। इसका औद्योगिक उपयोग बहुत ही कम होता है। 2021 में देखा गया था कि इस बहुमूल्य पीली धातु की मांग का 90% हिस्सा निवेश और संबंधित क्षेत्रों से आया था, जबकि औद्योगिक गतिविधियों में केवल 10% की खपत हुई।” निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से मूल्यांकन करते हैं कि वे स्टॉक और बॉन्ड जैसी अन्य संपत्ति से कितना रिटर्न चाहते हैं और अपने निवेश की कितनी सुरक्षा चाहते हैं। इन कारणों के चलते सोने की कीमतें बढ़ती हैं। दूसरा मुख्य कारण यह है कि प्रति औंस सोने की कीमत तुलना में अधिक होती है जिसके कारण चांदी की तुलना में सोने को संग्रहित करना आसान होता है। 

दूसरी ओर चांदी की औद्योगिक गतिविधियों में मांग बहुत ज्यादा होती है जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल। इसलिए जब औद्योगिक गतिविधियाँ अच्छी चल रही हों और औद्योगिक स्थिरता बनी हुई है तो चांदी अच्छा कारोबार करती है। अग्रवाल का कहना है कि “निवेश के लिहाज से चांदी प्रमुख रूप से छोटे और खुदरा निवेशकों की पसंद होती है क्योंकि यह अधिक सुलभ है और सोने की तुलना में कम कीमत होने के कारण इससे अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना मानी जाती है।” 

सोने, चांदी में कौन ज्यादा स्थिर? 

अग्रवाल का मानना है कि “आर्थिक विकास के बढ़ने के साथ साथ चांदी अधिक स्थिर लगती है। साथ ही यह संपत्ति बढ़ाने के लिहाज से एक सुरक्षित माध्यम भी है।” लेकिन चांदी की कीमतों में कभी-कभी छोटी अवधि में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। अग्रवाल का कहना है “खासतौर पर जब वित्तीय बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) अपेक्षाकृत कम होती है, ऐसे में चांदी में निवेश, सोने की तुलना में अधिक जोखिम भरा दाँव होता है। निवेशकों को ऐसी संपत्ति का माध्यम चुनना चाहिए जो उनके पोर्टफोलियो में जोखिम प्रबंधन के हिसाब से सबसे उपयुक्त हो।”  

किस में निवेश करें 

दोनों बहुमूल्य धातुओं की विशेषताएँ देखने के बाद और आर्थिक परिवेश की पूरी जानकारी के बाद निवेशक को अपनी परिस्थिति और आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय लेना चाहिए कि वह सोने या चांदी में से किसमें निवेश करना चाहता है। लेकिन अभी खरीदारी करके होल्ड करने की परिस्थिति में मुद्रास्फीति के बाद के रिटर्न बहुत प्रभावशाली नहीं हैं। 

हाँ, निवेशकों के पास लार्ज कैप स्टॉक का यह विकल्प खुला है जिसके रिटर्न का रिकॉर्ड बहुत ही आकर्षक है। जॉनसन ने बड़ी कंपनियों जैसे स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 (S&P 500) इंडेक्स जैसे विविध पोर्टफोलियों में किए गए निवेश की तुलना 1925 में $20.63 की दर से खरीदे गए एक औंस सोने से की है। वे कहते हैं “1925 में सोना खरीदने के लिए $20.63 निवेश किया गया था। यदि वही निवेश S&P 500 में किया जाता तो आज उसे $225,788 मिलते।” यानी उसके निवेश पर 10.3% वार्षिक चक्रवर्ती प्रतिलाभ होता। 

दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों को सोने में निवेश करने की जगह विविध पोर्टफोलियो के बड़े शेयरों में निवेश करने से 119 गुना अधिक पैसा मिलता। चांदी की तुलना में यह विसंगति और भी अधिक थी। 

सोने और चांदी में निवेश करने से पहले निवेशकों को अच्छी तरह से विचार करना चाहिए कि क्या वास्तव में इससे फायदा होगा? कम समय के लिए या कीमती धातुओं से संबंधित बाजार में जब कुछ विशेष असंतुलन हो तब इस निवेश का मतलब बनता है। लेकिन लंबी अवधि के निवेश के समय यह प्रश्न “सोने और चांदी में से क्या बेहतर है?” तो इस प्रश्न का संभावित उत्तर हो सकता है “स्टॉक।”

निष्कर्ष 

चांदी और सोना दोनों ही सुरक्षा प्रदान करनेवाली संपत्तियाँ हैं। दोनों की तुलना करने पर सोने का रिकॉर्ड चांदी से बेहतर दिखता है। बावजूद इसके छोटी अवधि में हर बाजार की अपनी अलग गतिशीलता (डायनैमिक) होती है जो उसके संबंधित रिटर्न से अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।

आप चाहें तो किसी भी बहुमूल्य धातु में निवेश कर सकते हैं, मगर याद रखें कि इससे कैशफ़्लो नहीं होने वाला। इसलिए लंबी अवधि के लिए यदि खरीदकर होल्ड करने की रणनीति अपना रहे हों तो अपने पोर्टफोलियो में फायदेमंद और वृद्धि करनेवाले शेयर रखना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

संबंधित आलेख: सोने की हॉलमार्किंग के नियम लागू

Gold or Silver: which is a  Better investment?  निवेशक संपत्ति बढ़ाने और मुद्रास्फीति से बचाव के लिए सोने-चांदी में निवेश को एक बहुत अच्छा विकल्प मानते हैं। साथ ही इससे कई अन्य तरह के लाभ भी मिलते हैं। लेकिन इसमें निवेश से पहले आर्थिक परिवेश में सोने और चांदी का प्रदर्शन कैसा है यह जान लेना बहुत जरूरी है। इस लेख में सोने और चांदी की तुलनात्मक जानकारी दी जा रही है। 

सोने और चांदी में निम्न तरीकों से निवेश किया जा सकता है, 

  • बुलियन 
  • फ्यूचर्स 
  • एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) 
  • माइनिंग स्टॉक्स    
  • ईटीएफ जो माइनिंग स्टॉक्स के मालिक हो 

हर एक तरीके से निवेश करने के अपने फायदे-नुकसान हैं। बुलियन खरीदने पर उसकी सुरक्षा का प्रश्न होता है, तो वहीं ईटीएफ बुलियन से अधिक सुरक्षित माध्यम है। ईटीएफ जो खुद बुलियन का मालिक हो, पब्लिक एक्सचेंज (विनिमय) द्वारा होल्डिंग की पूरी कीमत से प्राप्त किया जा सकता है और डीलर से ट्रेड करने से बचा जा सकता है।

माइनिंग स्टॉक खरीदने से सीधे-सीधे बहुमूल्य धातुओं की बढ़ती कीमत का फायदा मिल सकता है। लेकिन यह प्रक्रिया बहुत समय मांगती हैं इसलिए आप चाहें तो ऐसे ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं जिनके पास खदानों के स्टॉक्स हों। 

निवेशक अपनी जरूरत और पसंद के मुताबिक सोने-चांदी के विभिन्न विकल्पों में निवेश कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: सोने की कीमत गई नीचे

सोने और चांदी का लंबी अवधि में प्रदर्शन 

आमतौर पर माना जाता है कि लंबी अवधि के लिए सोने और चांदी का निवेश बेहतर रिटर्न देता है पर हमेशा ऐसा नहीं होता। क्राइटन यूनिवर्सिटी के फ़ाइनांस प्रोफेसर रॉबर्ट आर. जॉनसन का कहना है कि 1925 से अब तक 95 वर्षों की अवधि में मुद्रास्फीति की दर 2.9% रही। इसलिए सोने और चांदी के निवेश से जो भी रिटर्न मिलता है उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा मुद्रास्फीति के कारण कम हो जाता है, जिस कारण निवेशकों की क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) उतनी नहीं बढ़ पाती। 

  • 1925 से लेकर सोने के भाव में $20.63 से 2020 तक $1893.66 तक की वृद्धि हुई। यानी पूरी अवधि में 4.87% वार्षिक चक्रवृद्धि प्रतिलाभ (सालाना कंपाउंड रिटर्न) मिला। 
  • वहीं इसी दौरान चांदी की कीमतें $0.68 से बढ़कर $17.14 तक पहुँची, यानी इसमें 3.46% रिटर्न मिला। लेकिन इस पूरे समय के दौरान मुद्रास्फीति 2.9% रही। 

ग़ौरतलब है कि दोनों बहुमूल्य धातुओं की तुलना में सोने का प्रदर्शन बेहतर रहा।

मुद्रास्फीति से बचाव 

अक्सर देखा गया है कि मुद्रास्फीति से बचने के लिए निवेशक अक्सर सोने में निवेश करना पसंद करते हैं। जैसे ही बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा होते हैं, निवेशक सोने में निवेश की ओर बढ़ जाते हैं। 

ऐक्यूटी नॉलेज पार्टनर के एमडी महेश अग्रवाल का कहना है कि “मुद्रास्फीति से बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है और पैसे के अवमूल्यन से बचने के लिए सोने में निवेश बढ़ जाता है। मुद्रास्फीति और सोने के बीच गहरा संबंध है।” हालांकि, कभी-कभी बढ़ती हुई ब्याज दरों के कारण यह संबंध गड़बड़ा जाता है और ऊंची मुद्रास्फीति की प्रतिक्रिया में ब्याज की दरें बढ़ जाने से निवेश फायदा देनेवाला नहीं रहता और कर्ज की ओर बढ़ जाता है। “चांदी का मुद्रास्फीति की स्थितियों से संबद्ध सोने जितना ठोस नहीं है। मुद्रास्फीति की अनिश्चितताओं के बावजूद चांदी की कीमत में सोने से ज्यादा स्थिरता होती है। हालाँकि महंगाई के दौर में औद्योगिक मांग घटने के कारण चांदी मजबूत मांग से ऑफसेट हो जाती है। मुद्रास्फीति कम होने के बाद स्थितियाँ पलट जाती है।” 

सोने और चांदी की बाजार में मांग 

बाजार में सोने और चांदी की मांग अलग-अलग कारणों के लिए होती है। 

“सोने की ज्यादातर मांग संपत्ति की वृद्धि या निवेश के लिए होती है।” अग्रवाल का कहना है कि “सोना आमतौर पर संपत्ति के संचय के रूप में किया जाता है। इसका औद्योगिक उपयोग बहुत ही कम होता है। 2021 में देखा गया था कि इस बहुमूल्य पीली धातु की मांग का 90% हिस्सा निवेश और संबंधित क्षेत्रों से आया था, जबकि औद्योगिक गतिविधियों में केवल 10% की खपत हुई।” निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से मूल्यांकन करते हैं कि वे स्टॉक और बॉन्ड जैसी अन्य संपत्ति से कितना रिटर्न चाहते हैं और अपने निवेश की कितनी सुरक्षा चाहते हैं। इन कारणों के चलते सोने की कीमतें बढ़ती हैं। दूसरा मुख्य कारण यह है कि प्रति औंस सोने की कीमत तुलना में अधिक होती है जिसके कारण चांदी की तुलना में सोने को संग्रहित करना आसान होता है। 

दूसरी ओर चांदी की औद्योगिक गतिविधियों में मांग बहुत ज्यादा होती है जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल। इसलिए जब औद्योगिक गतिविधियाँ अच्छी चल रही हों और औद्योगिक स्थिरता बनी हुई है तो चांदी अच्छा कारोबार करती है। अग्रवाल का कहना है कि “निवेश के लिहाज से चांदी प्रमुख रूप से छोटे और खुदरा निवेशकों की पसंद होती है क्योंकि यह अधिक सुलभ है और सोने की तुलना में कम कीमत होने के कारण इससे अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना मानी जाती है।” 

सोने, चांदी में कौन ज्यादा स्थिर? 

अग्रवाल का मानना है कि “आर्थिक विकास के बढ़ने के साथ साथ चांदी अधिक स्थिर लगती है। साथ ही यह संपत्ति बढ़ाने के लिहाज से एक सुरक्षित माध्यम भी है।” लेकिन चांदी की कीमतों में कभी-कभी छोटी अवधि में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखता है। अग्रवाल का कहना है “खासतौर पर जब वित्तीय बाजार में तरलता (लिक्विडिटी) अपेक्षाकृत कम होती है, ऐसे में चांदी में निवेश, सोने की तुलना में अधिक जोखिम भरा दाँव होता है। निवेशकों को ऐसी संपत्ति का माध्यम चुनना चाहिए जो उनके पोर्टफोलियो में जोखिम प्रबंधन के हिसाब से सबसे उपयुक्त हो।”  

किस में निवेश करें 

दोनों बहुमूल्य धातुओं की विशेषताएँ देखने के बाद और आर्थिक परिवेश की पूरी जानकारी के बाद निवेशक को अपनी परिस्थिति और आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय लेना चाहिए कि वह सोने या चांदी में से किसमें निवेश करना चाहता है। लेकिन अभी खरीदारी करके होल्ड करने की परिस्थिति में मुद्रास्फीति के बाद के रिटर्न बहुत प्रभावशाली नहीं हैं। 

हाँ, निवेशकों के पास लार्ज कैप स्टॉक का यह विकल्प खुला है जिसके रिटर्न का रिकॉर्ड बहुत ही आकर्षक है। जॉनसन ने बड़ी कंपनियों जैसे स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 (S&P 500) इंडेक्स जैसे विविध पोर्टफोलियों में किए गए निवेश की तुलना 1925 में $20.63 की दर से खरीदे गए एक औंस सोने से की है। वे कहते हैं “1925 में सोना खरीदने के लिए $20.63 निवेश किया गया था। यदि वही निवेश S&P 500 में किया जाता तो आज उसे $225,788 मिलते।” यानी उसके निवेश पर 10.3% वार्षिक चक्रवर्ती प्रतिलाभ होता। 

दूसरे शब्दों में कहें तो निवेशकों को सोने में निवेश करने की जगह विविध पोर्टफोलियो के बड़े शेयरों में निवेश करने से 119 गुना अधिक पैसा मिलता। चांदी की तुलना में यह विसंगति और भी अधिक थी। 

सोने और चांदी में निवेश करने से पहले निवेशकों को अच्छी तरह से विचार करना चाहिए कि क्या वास्तव में इससे फायदा होगा? कम समय के लिए या कीमती धातुओं से संबंधित बाजार में जब कुछ विशेष असंतुलन हो तब इस निवेश का मतलब बनता है। लेकिन लंबी अवधि के निवेश के समय यह प्रश्न “सोने और चांदी में से क्या बेहतर है?” तो इस प्रश्न का संभावित उत्तर हो सकता है “स्टॉक।”

निष्कर्ष 

चांदी और सोना दोनों ही सुरक्षा प्रदान करनेवाली संपत्तियाँ हैं। दोनों की तुलना करने पर सोने का रिकॉर्ड चांदी से बेहतर दिखता है। बावजूद इसके छोटी अवधि में हर बाजार की अपनी अलग गतिशीलता (डायनैमिक) होती है जो उसके संबंधित रिटर्न से अधिक महत्त्वपूर्ण होती है।

आप चाहें तो किसी भी बहुमूल्य धातु में निवेश कर सकते हैं, मगर याद रखें कि इससे कैशफ़्लो नहीं होने वाला। इसलिए लंबी अवधि के लिए यदि खरीदकर होल्ड करने की रणनीति अपना रहे हों तो अपने पोर्टफोलियो में फायदेमंद और वृद्धि करनेवाले शेयर रखना एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

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