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क्या आप अपने वेतन या पॉकेट मनी का अधिकांश हिस्सा किताबों पर खर्च कर देते है? आइये जानते है कि आप पुस्तकों की खरीद पर खर्च की जानेवाली राशि को कैसे बचा सकते हैं।

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"किताबों से ज्यादा और कोई वफादार मित्र नहीं है" - अर्नेस्ट हेमिंग्वे।

बड़े होते हुए हम सभी को पढ़ने का मूल्य सिखाया गया है। लेकिन हम में से कुछ को पढ़ने के लिए केवल बहाने की जरूरत होती है –एक अवास्तविक, काल्पनिक दुनिया का  हिस्सा होने का आकर्षण बहुत प्रबल होता है और इसलिए, हम पुस्तकों पर बहुत समय और पैसा खर्च कर देते हैं।

और, जब बिजली के बिल, इंटरनेट बिल, किराने का सामान आदि का खर्च आपके बजट को कम करता है, तो पढ़ना कभी-कभी पीछे चला जाता है।


चिंता की कोई बात नहीं; यहां कुछ तरीके दिए हैं जिनसे आप कम बजट में भी अपना पढना जारी रख सकते हैं:


1. सार्वजनिक पुस्तकालय

सौभाग्य से, पुराने और अच्छे सार्वजनिक पुस्तकालय अभी भी मौजूद हैं। जहाँ आज किन्डल और  ई-बुक्स की इस दुनिया में उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है, फिर भी वे सस्ती किताबें पाने का एक अच्छा विकल्प हैं। कई सार्वजनिक लाइब्रेरी आपको किताबें किराए पर देती हैं, उधार देती हैं और आप वहां से खरीद भी सकते हैं। यदि आप सार्वजनिक लाइब्रेरी की सदस्यता लेते हैं, तो वे आपको किताबों पर मासिक पैकेज भी प्रदान करते हैं, जो आपको सभी पुस्तकों पर खर्च किए जाने वाले खर्च का 30% तक की बचाने में मदद करता है। 

तो, आप अपने आसपास सार्वजनिक लाइब्रेरी ढूंढिए और अपनी पसंदीदा पुस्तकों के साथ रहना जारी रखिए।

2. एक पुस्तक क्लब शुरू करें या उसमे शामिल हों जाएँ 

क्यों न आप अपनी पुस्तकों को दूसरों के साथ साझा करें और फिर दुसरे भी ऐसा ही करेंगे ? यह ऐसे काम करेगा - आप दूसरों से जो पुस्तकें लायेंगे उनकी अदलाबदली कर दीजिये, जिससे आपकी पढ़ी गई पुस्तकों की कीमत लगभग आधे से कम ही हो जायेगी ।


वैकल्पिक रूप से, कुछ बुक क्लब्स सदस्यों से एक निश्चित राशि जमा करने के बदले उन्हें उनकी पसंद की किताबें खरीदने की अनुमति देते हैं और फिर ये किताबें हर व्यक्ति तक पहुँचती रहती है जब तक की सभी पुस्तकों को पढ़ नहीं लेते हैं। यह राशि आपके उन पैसों से बहुत कम होती है जो आप अपनी सभी पुस्तकों को खरीदने के लिए खर्च करते हैं।

और इसके अलावा, एक बुक क्लब आपको आपके जैसे समान विचारधारा के लोगों से मिलने और उनके साथ दिलचस्प बातचीत करने का मौका देता है। तो, कुछ दोस्तों या रिश्तेदारों को खोजिये जिनकी पसंद आपसे मिलती हो और उन्हें एक बुक क्लब शुरू करने के लिए राजी कीजिये। यदि आप पहले से ही किसी बुक क्लब को या किसी को जानते हैं जो एक बुक क्लब का सदस्य है, तो उसमें शामिल हो जाइए।

3. स्थानीय किफ़ायती दुकानें 

आप इन दुकानों को आमतौर पर स्कूलों या कॉलेजों के पास पायेंगे।आप उन दुकानों के साइज़ पर मत जाईयें, क्योंकि उनके पास शेक्सपियर से लेकर जेके रोलिंग तक वे सभी किताबें होती हैं जो आपकी रीडिंग लिस्ट में हैं।वे इन पढ़ी हुई किताबों को 100रु. तक की कम कीमतों पर बेचते हैं।इसके अलावा, वे आपकी पढ़ी हुई किताबों को वापस खरीदने के लिए भी तैयार होते हैं। अब यह एक अच्छा सौदा है,है ना?

4. ऑनलाइन स्टोर

भारत में ऑनलाइन बुक स्टोर्स की संख्या बढ़ रही है - जैसे बुक चोर, ओएलएक्स, पुश्तककोष - जो पढ़ी हुई किताबें खरीदते, बेचते और दान करते हैं। यहां पुस्तकों की कीमतें किफ़ायती दुकानों जितनी कम नहीं होती है। हालांकि, आप एक बड़ी दुकान में पुस्तक पर जितना खर्च करते हैं उससे यहाँ कम ही खर्च करेंगे। यहाँ आपको एक अतिरिक्त लाभ यह मिलता है कि ये आपके घर तक पहुंचा दी जाती है और आप जिन लोगों को दान करना चाहते हैं उन्हें कूरियर कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

पढ़ने की आदत आपको आत्मविश्वासी और अच्छा जानकार व्यक्ति बनाये रखती है, तो आगे बढ़िये और अधिक खर्च की चिंता किए बिना अपने पढ़ने के जुनून को जारी रखिये।
 

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