भारतीय राजनीति की 5 अग्रणी महिलाएं

आइए इन पांच महिला राजनेताओं के बारे में जानते हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति में अपना अहम स्थान बनाया

5 ताकतवर महिला राजनेता जिन्होंने बाधाओं को पीछे छोड़ा

ये असाधारण महिलाएं हैं। ये आगे बढ़कर नेतृत्व करती हैं और इन्होंने देश का चेहरा बदल दिया है।

हमारे देश में आज भी महिलाओं के लिए समान अधिकारों के लिए लड़ाई जारी है, ऐसे में इन महिला नेताओं ने पारंपरिक सोच को चुनौती देकर देश की बागडोर अपने हाथों में ली। उन्होंने जरूरी सुधार किए, गरीबों को ऊपर उठाने का काम किया, किसानों की मदद की, लाखों नौकरियां पैदा की और समाज की भलाई के लिए ऐसे बहुत से काम किए ।

यहां हम ऐसी ही पांच महिलाओं की बात करने जा रहे हैं: 

इंदिरा गांधी 

अपने समय तक इंदिरा गांधी दुनिया की दूसरी महिला थीं जिन्हें किसी देश का प्रमुख चुना गया था। भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री को ‘लौह महिला’ भी कहा जाता था। 1984 में उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने चार बार प्रधानमंत्री पद संभाला और कुल मिलाकर 11 वर्षों तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं।

इंदिरा गांधी का राजनैतिक कौशल बहुत असाधारण था। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के समय वे अपनी लोकप्रियता के शीर्ष पर थीं। उन्होंने गरीबी कम करने के लिए बहुत से सुधार लागू करने के साथ देश में परिवार नियोजन के उपायों को लागू किया और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। 

उन्हें सदी की सबसे ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया गया है। 
 
जयललिता

जयललिता को प्यार से ‘अम्मा’ कहा जाता था। वे पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनी और कुल मिलाकर 14 साल तक राज्य की बागडोर संभाली। वे 1960 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। वे 1982 में एआईएडीएमके में शामिल हुईं। 1991 में वे तमिलनाडु की सबसे युवा मुख्यमंत्री बनीं और 2016 में अपनी मृत्यु होने तक कई बार राज्य मुख्यमंत्री रहीं। 

अपने समय में उन्होंने गरीबों को ऊपर उठाने के लिए काफी काम किया। उन्होंने किसानों के कर्ज़ माफ किए। मास्टर हेल्थ चैकअप योजना लागू की जहां लोग बहुत कम पैसे में अपने स्वास्थ्य की जांच करवा सकते थे। घरों और हथकरघा इकाइयों को मुफ्त बिजली दी गई। साथ ही भोजन, पानी और नमक जैसी चीज़ों की कीमतों पर छूट दी गई। 

उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी पेंशन को भी बढ़ाया। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु में 20 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया। 

सुषमा स्वराज

वे भारत की वर्तमान विदेश मंत्री हैं। उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत की और उन्हें भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव भी मिला। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर कैरियर की शुरूआत की और राजनीति में आने के बाद बहुत से अहम राजनैतिक पदों को संभाला। वे सात बार सांसद और तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। 

विदेशी नागरिकों को तुरंत मानवीय सहायता पहुंचाने और विदेशों में रह रहे भारतीयों के मुद्दों को तत्परता से सुलझाने के लिए वॉल स्ट्रीट जनरल ने उन्हें ‘सबसे पसंदीदा राजनेता’ की उपाधि से सम्मानित किया । 

उनके नेतृत्व में भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ के 192 सदस्य देशों में से 186 के साथ संबंध स्थापित किए, देश में पासपोर्ट सेवा केन्द्रों की संख्या 77 से बढकर 227 हो गई और पिछले चार वर्षों में उन्होंने विदेशों में मुसीबत में फंसे 90,000 से ज़्यादा भारतीयों की मदद की है। 

ममता बैनर्जी

वे पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री होने के साथ अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं। 2011 में  उनकी पार्टी को मिली शानदार जीत के बाद वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं और तब से वे उसी पद पर हैं। उससे पहले वे केन्द्र में रेलवे, मानव संसाधन और बाल विकास जैसे कई अहम मंत्रालयों को संभाल चुकी हैं। 

उनके नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में कई प्रगतिशील कदम उठाए गए जैसे छात्रवृत्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण के ज़रिए लड़कियों के आर्थिक स्तर को बढ़ाने का प्रयास किया गया, राज्य में नौकरी चाहने वाले लोगों की सहायता के लिए ‘रोजगार बैंक’ बनाया गया, सस्ती जैनरिक दवाईयां देने के लिए उचित मूल्य कि दवाओं की दुकान खोली गई, सर्जिकल सामान को उसकी खुदरा कीमत से 50% कम कीमत पर दिया गया, 40 लाख स्कूली बच्चों को साइकिलें बांटी गईं। उन्होंने खाद्य सुरक्षा योजना शुरू की जिसमें राज्य की 82% आबादी को सस्ती दरों पर खाने का सामान दिया जाता है। इसके अलावा राज्य में स्वच्छता, बुनियादी ढांचे, और किसानों की भलाई से जुड़ी कई योजनाएं भी लागू की गई।

वसुंधरा राजे

सिंधिया राजघराने से जुड़ी वसुंधरा राजे राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री (2003-2008) बनीं और उसके बाद 2013 में वह फिर से राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं। वह पांच बार सांसद और चार बार विधायक रह चुकी हैं। 

उनके नेतृत्व में राजस्थान में कृषि विकास और उससे जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाकर 15 लाख नौकरियां पैदा की गईं। राज्य में व्यापार को आसान बनाने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए श्रम सुधार लागू किए गए। महिलाओं को सीधे वित्तीय और गैर-वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए योजनाएं लागू की गई और राज्य में 2000 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण के साथ बड़े पैमाने पर बुनियादी ढ़ांचे के विकास का काम शुरू किया गया।

उनके समय में राज्य में बीमा आधारित कैशलेस हेल्थ स्कीम शुरू की गई, ज़रूरतमंद लोगों को नाममात्र की कीमत पर बेहतर गुणवत्ता का भोजन दिया गया, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुधारा गया और गांवों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए वर्षा जल के संग्रह की योजनाएं शुरू की गईं। 

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