डैट फंड किस तरह से महंगाई और ब्याज दर में बदलाव के जोखिमों से बचा सकते हैं?

बढ़ती महंगाई और ब्याज दर में बदलाव डैट फंड यील्ड को प्रभावित कर सकते हैं लेकिन इसे प्रभावी ढंग से मैनेज करने के तरीके हैं.

डैट फंड किस तरह से महंगाई और ब्याज दर में बदलाव के जोखिमों से बचा सकते हैं?

जोखिम की संभावना को डायवर्सिफाई करने के लिए, हर निवेशक एक ऐसा पोर्टफोलियो बनाता है जिसमें निवेश की अलग-अलग कैटेगरी शामिल हों जैसे कि इक्विटी, लोन, प्रेशियस मेटल्स, विदेशी स्टॉक आदि. इक्विटी निवेश ज़्यादा रिटर्न का एक बेहतर मौका देते हैं, और इसके विपरीत, अचानक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. हालांकि, डैट फंड आपको नियमित आय और एक अनुमानित दर पर रिटर्न का आश्वासन देते हैं. डैट म्यूचुअल फंड को पुराने तरह के निवेश विकल्पों की कैटेगरी में रखा जाता है जिनमें मुनाफा या नुकसान कम दर्ज़े के होते हैं. 

एक निवेशक के रूप में, आप कुछ पैसा डैट फंड में निवेश करेंगे. आपको यह सुनिश्चित करना होगा: क्या आपका निवेश महंगाई और ब्याज दर जोखिम को मात दे सकता है? 

बड़ा सवाल

डैट फंड में एक निवेशक के रूप में, आपको डैट फंड से जुड़े नफा-नुकसान की जानकारी रहती है. बाज़ार की अनिश्चितताओं को दूर करने के लिए एक स्थिर और नियमित रिटर्न बेहतर है, लेकिन यह महंगाई और ब्याज दर की अनिश्चितताओं को मात देने के लिए काफी होना चाहिए. 

महंगाई हमारी पैसे से खरीदने की शक्ति को कम करके हमारे जीवन जीने के स्तर को कमज़ोर करती है. अगर आपका निवेश मौजूदा ब्याज दर से ज़्यादा रिटर्न नहीं देता है, तो ऐसे निवेश का कोई फायदा नहीं है. वर्तमान में, भारत में महंगाई जारी रहने की उम्मीद है क्योंकि सप्लाई साइड अभी तक महामारी से पूरी तरह से उबर नहीं पाई है. 

पटरी पर आती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के साथ, निकट भविष्य में निवेश में ब्याज दरों में और कमी आने की संभावना कम ही दिखती है. दरों में बढ़ोतरी की भी संभावना नहीं है क्योंकि इससे उधार लेने की लागत बढ़ेगी और आर्थिक सुधार में बाधा आएगी.

बढ़ती महंगाई और स्थिर ब्याज दर के साथ, डैट फंड्स का ग्रोथ प्रॉस्पेक्ट भी कुछ ख़ास अच्छा नहीं लग रहा है. डैट फंड की अवधि जितनी लंबी होगी, ब्याज दर में बदलाव जोखिम उतना ही ज़्यादा होगा. शॉर्ट और मीडियम टर्म डैट फंड्स पर फोकस के साथ, विशेषज्ञ निवेशकों को ब्याज में बदलाव के ज़्यादा जोखिम के कारण स्टैंडअलोन लॉन्ग-टर्म डैट फंड से बचने की सलाह दे रहे हैं. 

इसलिए, यह मान लेना सुरक्षित है कि अगर मौजूदा बढ़ती महंगाई और रुकी हुई ब्याज दर की स्थिति में ब्याज दर में बदलाव के जोखिम को कोई मात देना चाहता है तो लघु और मध्यम अवधि के डैट फंड बेहतर हैं.

इससे मिलती-जुलती बातें: डैट और इक्विटी पर आधारित म्यूचुअल फंड के जोखिम में क्या फर्क है

लघु और मध्यम अवधि के डैट फंड विकल्प

फंड का चुनाव निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता और फंड की लागत पर निर्भर करेगा. नीचे कुछ डैट फंड्स का उल्लेख किया गया है जिनमें निम्न से मध्यम स्तर का जोखिम रहता है. 

  • शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड ओपन-एंडेड शॉर्ट-टर्म डैट फंड हैं जो मार्किटेबल सिक्योरिटीज़ में निवेश करते हैं. इन फंड्स की अवधि 1-3 साल होती है और ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम मध्यम दर्ज़े का रहता है. उनका क्रेडिट जोखिम मध्यम से थोड़ा उच्च दर्ज़े का हो सकता है. अपेक्षित यील्ड-टू-मैच्योरिटी (वायटीएम)* दर 4.96% है.
  • मध्यम अवधि के फंड डैट और डैट से संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं और ओपन-एंडेड होते हैं. इन फंड्स की अवधि 3-4 साल होती है. इनमें मध्यम से थोड़ा उच्च दर्ज़े का क्रेडिट जोखिम और ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम मध्यम दर्ज़े का रहता है. उनकी वायटीएम दर 6.33% है. 
  • कॉरपोरेट बॉन्ड फंड 1-5 साल की अवधि के होते हैं और इनमें ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम मध्यम दर्ज़े का रहता है. हालांकि, उनका क्रेडिट जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है. ये फंड हाई रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं और इनकी वायटीएम दर 5.24% है. 
  • जोखिम और अवधि के मामले में, बैंकिंग और पीएसयू डैट फंड कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे ही होते हैं. ये फंड अपने कुल एसेट्स का कम से कम 80% बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में निवेश करते हैं. इन फंड्स पर अपेक्षित वायटीएम दर 5.19% है. 

इससे मिलती-जुलती बातें: समझ नहीं आ रहा कौन सा डैट इंस्ट्रूमेंट लें? यहाँ से जानें कि सही डैट इंस्ट्रूमेंट कैसे चुनें [प्रीमियम]

वहीं दूसरी ओर, निम्नलिखित डैट फंड में में ब्याज दरों में बदलाव का जोखिम और क्रेडिट जोखिम दोनों की ही दर कम रहती है:

  • कम अवधि के फंड ओपन-एंडेड फंड स्कीम हैं जो एक साल से कम अवधि के लिए डैट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं. कम अवधि के फंड के लिए वायटीएम दर 4.26% है.
  • अल्ट्रा शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड 3-6 महीने की अवधि वाले ओपन-एंडेड फंड हैं. वे ज्यादातर सिक्योरिटीज़ में निवेश करते हैं. इन फंड्स से 3.82% वायटीएम दर की उम्मीद की जा सकती है.
  • ओवरनाइट फंड का इस्तेमाल एक दिन जितना छोटा निवेश करने के लिए किया जा सकता है. निवेश ओवरनाइट सिक्योरिटीज़ में किए जाते हैं और निवेशकों द्वारा इमरजेंसी फंड के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. ओवरनाइट फंड से लगभग 3.22% वायटीएम की उम्मीद की जा सकती है.
  • लिक्विड फंड अधिकतम तीन महीने की अवधि के लिए डैट और डैट से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं. लिक्विड फंड्स का वायटीएम 3.3% रहने की उम्मीद है.
  • मनी मार्केट फंड्स को लिक्विड डैट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है, जिसमें कैश इकुईवलेंट और ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर, हाई रेटेड डैट सिक्योरिटीज़ आदि शामिल हैं. ये फंड 3.6% वायटीएम रिटर्न दे सकते हैं.

*सभी वायटीएम दरें फरवरी 2021 तक की हैं, iFast Research द्वारा अनुमानित.

इससे मिलती-जुलती बातें: डैट फंड के बारे में जानना चाहते हैं? यहां छह आम सवालों के जवाब दिए गए हैं

लंबी अवधि के डैट फंड ज़्यादा रिटर्न देते हैं लेकिन इनमें ब्याज दर में बदलाव का जोखिम भी ज़्यादा रहता है. डैट फंड में निवेश करते समय शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर भी विचार किया जाना चाहिए. बढ़ती महंगाई के प्रति आरबीआई की प्रतिक्रिया - विशेष रूप से ब्याज दरों में बदलाव के माध्यम से, पर भी नज़र रखनी चाहिए. इन बातों को ध्यान में रखते हुए, निवेशक डैट फंड में निवेश के साथ महंगाई को मात दे सकते हैं और ब्याज दरों में बदलाव के जोखिम को मैनेज कर सकते हैं. म्यूचुअल फंड के तहत उपलब्ध इन अलग-अलग तरह के फंड्स के बारे में जानें.

संबंधित लेख