इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए स्‍टॉक्‍स को कैसे पहचानें। इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय ध्‍यान में रखी जाने वाली बातें | How to identify stocks

इस लेख में हम सीखेंगे कि इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सही स्टॉक कैसे चुनें और उसे कैपिटलाइज़ कैसे करें।

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए स्‍टॉक्‍स को कैसे पहचानें

भाग 1 में हमने समझ लिया है कि इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है। इंट्राडे ट्रेडिंग शुरू करने के लिए, आपको सबसे पहले उन स्‍टॉक्‍स की पहचान करनी होगी जिनमें आप ट्रेडिंग करेंगे। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए स्टॉक की पहचान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखें:

a) लिक्विड स्‍टॉक्‍स चुनें

एक स्टॉक को लिक्विड तब कहा जाता है यदि ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक होता है, और शेयर में प्रवेश और निकास बाजार मूल्य के सबसे करीब आसानी से होता है। आपको ऐसे स्‍टॉक्‍स को चुनना चाहिए जिनमें ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक हो - आप अपनी ओपन पोज़िशन से आसानी से बाहर निकल सकते हैं। यदि जिस स्टॉक में आपने ओपन पोज़िशन ली है, उसमें पर्याप्त लिक्विडिटी नहीं है, तो ट्रेड को समाप्‍त करना एक चुनौती हो सकती है। साथ ही, उच्च लिक्विडिटी सुनिश्चित करती है कि आप बाजार मूल्य के सबसे करीब स्टॉक को खरीद और बेच सकते हैं। इंडेक्स स्टॉक और अन्य लार्ज-कैप स्‍टॉक्‍स में आमतौर पर उच्च लिक्विडिटी होती है। इसलिए, इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए आपको इन शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।

b) ऐसे स्टॉक चुनें जिनमें हर दिन कीमत का काफी अच्छे से बड़ा उतार-चढ़ाव हो

आपको ऐसे स्‍टॉक्‍स को चुनना चाहिए जहां स्‍टॉक के मूल्य में रोजाना 2% -5% या उससे अधिक का उतार-चढ़ाव हो। प्रतिशत के उतार-चढ़ाव के बजाय, आप उन स्‍टॉक्‍स पर भी विचार कर सकते हैं जहां स्‍टॉक मूल्य में रोजाना (मान लीजिए) 25 रुपये से 50 रुपये या उससे अधिक का उतार-चढ़ाव हों। कृपया ध्यान दें कि आप केवल तभी पैसा कमा पाएंगे जब शेयर की कीमत में रोजाना अच्छी से लेकर बड़ी कीमत का उतार-चढ़ाव हो। यदि आप एक ऐसा स्टॉक चुनते हैं जहां मूल्य के उतार-चढ़ाव की सीमा स्थिर है, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि आप बहुत कम या कोई भी लाभ न कमा पाएं।

c) ऐसे स्‍टॉक्‍स चुनें जो बाजार रूझान के साथ चलते हैं

कुछ शेयर बाजार के रुझान के साथ चलते हैं, यानी जब बाजार बढ़ता है तो वे बढ़ते हैं और जब बाजार नीचे जाता है तो वे नीचे जाते हैं। दूसरी ओर, डिफेंसिव स्‍टॉक्‍स या कंट्रेरियन स्‍टॉक्‍स हैं जो बाजार के रूझान के विरूद्ध जाते हैं। इसलिए, जब बाजार में गिरावट आती है, तो ये शेयर आमतौर पर बढ़ते हैं और बाजार में गिरावट को रोकने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय बाजारों में, आईटी(IT), एफएमसीजी(FMCG) और फार्मा क्षेत्रों से संबंधित शेयरों को डिफेंसिव माना जाता है।

एक इंट्राडे ट्रेडर के रूप में, आपको उन स्‍टॉक्‍स के साथ जाना चाहिए जो बाजार के रुझान के साथ चलते हैं। इन शेयरों के साथ पैसा कमाने का अवसर अधिक है क्योंकि कुछ संपूर्ण बाजार की तुलना में अधिक गतिशील होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि बाजार 1% ऊपर है, तो ट्रेंडिंग स्टॉक्‍स 2% -3% या इससे भी अधिक ऊपर जाएंगे।

d) घटना या समाचार से प्रेरित होने वाले स्टॉक चुनें

मार्केट आवर्स के दौरान, यदि किसी विशिष्ट स्टॉक से संबंधित कुछ खबर की उम्‍मीद की जाती है, तो आप खबर सामने आने से पहले स्टॉक में पोज़िशन ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक स्टॉक जो मासिक सेल्‍स नंबर्स (ऑटोमोबाइल), तिमाही परिणाम, आदि की घोषणा करता है। कुछ स्टॉक अदालत के फैसले, सरकारी राजकोषीय नीति की घोषणाओं, आरबीआई की मौद्रिक नीति की घोषणाओं, केंद्र या राज्य सरकार की बजट घोषणाओं आदि से प्रभावित होते हैं। यदि आपने पहले ही पोज़िशन ले रखी है, और यदि समाचार अपेक्षित तर्ज पर है, तो आप लाभ कमाएंगे। यदि खबर प्रतिकूल है, तो सबसे ज्‍यादा संभावना है कि आपको नुकसान होगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज़, एचडीएफसी(HDFC), टीसीएस(TCS), हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईसीआइसीआई(ICICI) बैंक, टाटा स्टील आदि जैसे स्टॉक इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए उपरोक्त अधिकांश मानदंडों को पूरा करते हैं। ये इंडेक्स स्टॉक हैं क्योंकि वे NIFTY 50 इंडेक्स का हिस्सा हैं, बहुत लिक्विड हैं, हर दिन कीमत में अच्‍छा उतार-चढ़ाव होता है, और आमतौर पर बाजार के रुझान के साथ चलते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

अब जब आपने स्टॉक्स की पहचान कर ली है और इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए तैयार हैं, तो आपको निम्नलिखित सुझावों को दिमाग में रखना चाहिए:

a) ट्रेडिंग के लिए कई स्‍टॉक्‍स को पहचानना

किसी भी समय, आपको इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए कई शेयरों की पहचान करनी चाहिए। कभी भी अपना सारा पैसा एक स्टॉक या एक ट्रेड पर न लगाएं। यदि आपके पास कई ओपन पोज़िशन हैं, तो आप अन्य ट्रेडों से लाभ प्राप्त करना जारी रख सकते हैं चाहे एक ट्रेड अच्छा नहीं चल रहा हो। अपने पैसे को कई स्टॉक्स में बांटना जोखिम कम करने की रणनीति का एक हिस्सा है।

b) प्रत्येक ट्रेड के लिए लाभ और हानि की सीमा निर्धारित करें

जब स्‍टॉक्‍स हमारी मनचाही दिशा में आगे बढ़ता है तो अधिक लाभ के लिए लालची बनना एक स्वाभाविक मानवीय प्रवृत्ति है। इसी तरह, जब ट्रेडिंग हमारे विरूद्ध जाती है तो हम नुकसान उठाने से डरते हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय आपको अपने लालच और डर की भावनाओं को अलग रख देना चाहिए। आप स्टॉप लॉस का उपयोग करके लाभ और हानि के लिए सीमा निर्धारित करके ऐसा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आप 2000 रुपये में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर खरीद रहे हैं, तो लाभ को सुरक्षित करने के लिए आपको (मान लें) 5% (100 रुपये) की सीमा निर्धारित करनी चाहिए। तो, जिस क्षण आरआईएल(RIL) का शेयर ऊपर जाता है और 2,100 रुपये तक पहुंच जाता है, आपको लाभ बुक करना चाहिए और अपनी पोज़िशन को बंद करना चाहिए। यदि आप लालची हो जाते हैं और अधिक लाभ के लिए अपनी पोज़िशन पर बने रहते हैं, तो संभावना है कि शेयर की कीमत विपरीत दिशा में होने पर आपको कम लाभ हो जाए या हानि भी हो सकती है।

इसी तरह, आपको नुकसान को सीमित करने के लिए (मान लें) 5% (100 रुपये) की सीमा निर्धारित करनी चाहिए। इसलिए, जिस क्षण आरआईएल(RIL) का शेयर नीचे जाता है और 1900 रुपये तक पहुंच जाता है, आपको नुकसान बुक करना चाहिए और अपनी पोज़िशन को समाप्‍त कर देना चाहिए। यदि आप डर जाते हैं और शेयर की कीमत में सुधार होने की प्रतीक्षा में अपनी पोज़िशन पर बने रहते हैं, तो शेयर की कीमत में और गिरावट जारी रहने पर आपको और भी बड़ा नुकसान होने की संभावना होती है। 

c) रोजाना के लाभ और हानि की सीमा बनाएं

आपको दैनिक लाभ और हानि की सीमा निर्धारित करनी चाहिए। एक बार जब आप उस दिन के लिए लक्षित लाभ प्राप्त कर लेते हैं, तो ट्रेड करना बंद कर दें। इसी तरह, यदि आपको उस दिन के लिए अधिकतम नुकसान हो चुका है, तो आपको उसी तरह दिन के लिए ट्रेड करना बंद कर देना चाहिए। अधिक ट्रेडिंग करने और घाटे की भरपाई करने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है। अगले दिन शांत मन से नए सिरे से शुरुआत करें।

d) रूझान आपका मित्र है

आपको बाजार के रुझान के अनुसार ट्रेड करना चाहिए। यदि बाजार में तेजी का रुझान है, तो ऐसे मजबूत स्टॉक्स की पहचान करें, जिन पर आप बहुत आगे तक जा सकते हैं। यदि बाजार में गिरावट चल रही है, तो कमजोर स्टॉक्स की पहचान करें जिन्हें आप शॉर्ट कर सकते हैं। बाजार के रूझान के खिलाफ जाने की कोशिश न करें क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है। कहा गया है, 'रूझान आपका मित्र है। इसके साथ जाएं।’

इंट्राडे ट्रेडिंग के सूचक

इंट्राडे ट्रेडर्स आमतौर पर अपने ट्रेड्स को निश्चित करने के लिए कुछ तकनीकी विश्लेषण पैरामीटर्स का उपयोग करते हैं। इनमें से कुछ में शामिल हैं:

a) मूविंग एवरेज (MA)

मूविंग एवरेज (MA) एक निश्चित अवधि में स्टॉक का औसत समाप्ति मूल्य है। यह अवधि 5, 10, 20, 50, 200 दिन आदि हो सकती है। एक लाइन स्टॉक चार्ट पर MA को प्रदर्शित करती है। कई ट्रेडर्स स्टॉक में खरीदने और बेचने के अवसरों की पहचान करने के लिए MA पैरामीटर का उपयोग करते हैं।

जैसा कि ऊपर चित्र में देखा जा सकता है, नीली लाइन इंफोसिस के लिए MA दर्शाती है। मई से सितंबर के दौरान इंफोसिस के शेयर का मूल्‍य MA से ऊपर था। चार्ट में हरा बॉक्स इसे दिखाता है। कारोबारी इसे खरीदारी का मौका मानते हैं।

दूसरी ओर, अक्टूबर से जनवरी के महीनों में, इंफोसिस के शेयर की कीमत MA से नीचे थी। चार्ट में लाल बॉक्स इसे दिखाता है। ट्रेडर्स इसे बिक्री का मौका मानते हैं।

b) बोलिंगर बैंड्स (BB)

बोलिंगर बैंड्स (BB) पिछले सेक्‍शन में चर्चा किये गए मूविंग एवरेज (MA) की तुलना में अधिक एडवांस्‍ड है। BB में तीन लाइनें शामिल हैं: MA, अपर बैंड, और लोअर बैंड। आइए देखें, यह जानें बिना कि बैंड की गणना कैसे की जाती है, ट्रेडर BB का उपयोग कैसे करते हैं, क्योंकि यह इस लेख के दायरे से बाहर है।

उपरोक्त चार्ट से पता चलता है कि काली रेखा MA को दर्शाती है, ऊपरी लाल लाइन ऊपरी बैंड को दर्शाती है, और निचली लाल लाइन लोअर बैंड को दर्शाती है।

जब भी स्टॉक की कीमत अपर बैंड को छूती है, तो यह ट्रेडर को संकेत देता है कि शेयर की कीमत महंगी है क्योंकि यह MA से हट गया है। ऐसे समय में ट्रेडर स्टॉक को MA में वापस आने की उम्मीद में शॉर्ट (बेच) सकता है। उपरोक्त चार्ट में, सेलिंग के ऐसे सभी अवसरों को नीचे की ओर इंगित करने वाले ऐरो द्वारा दर्शाया गया है।

इसी तरह, जब भी स्टॉक की कीमत लोअर बैंड को छूती है, तो यह ट्रेडर को संकेत देता है कि शेयर की कीमत सस्ती है क्योंकि यह MA से हट गया है।  ऐसे समय में ट्रेडर स्टॉक को MA में वापस आने की उम्मीद में लॉन्‍ग (खरीद) कर सकता है।

मूविंग एवरेज (MA) और बोलिंगर बैंड्स (BA) केवल दो संकेतक हैं जिनका उपयोग ट्रेडर अपनी इंट्राडे पोज़िशन निर्धारित करने के लिए करते हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI), मूविंग एवरेज कन्वर्जेन्स एंड डाइवर्जेंस (MACD) जैसे अन्य संकेतक भी हैं। हालाँकि, एक ट्रेडर के रूप में, आपको उन सभी के बारे में जानने की आवश्यकता नहीं है। जब तक आप कुछ संकेतकों के बारे में जानते हैं और उनसे लाभ के लिए उनका उपयोग कर सकते हैं, तो आपके लिए इंट्राडे ट्रेडिंग करना ठीक है।

अंतिम शब्‍द

आपने एक ट्रेडर के बारे में समाचार लेख पढ़े होंगे जो केवल एक इंट्राडे ट्रेड में कुछ हज़ार या लाखों कमाता है। इस तरह की खबरें आपको उत्साहित कर सकती हैं और आपको इंट्राडे ट्रेडिंग बैन्ड्वैगन की तरफ जाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। लेकिन खबरों में यह खबर नहीं आती है कि कुछ इंट्राडे ट्रेडर्स अपनी सारी पूंजी खो देते हैं और यहां तक कि कर्ज में डूब जाते हैं। इसलिए, पक्के स्टॉप लॉस के साथ इंट्राडे ट्रेडिंग करें।

अपने इंट्राडे इन्वेस्टमेंट करियर की शुरुआत करते समय उत्साहित होना स्वाभाविक है, लेकिन एक उचित जोखिम प्रबंधन योजना का होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि आपके प्रयास आपकी जमा पूंजी को नुकसान न पहुंचा दें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी देने के उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कानूनी सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको अलग से स्वतंत्र सलाह लेनी चाहिए।

संवादपत्र

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