2019 का बजट स्वयं सहायता समूहों की कैसे करेगा मदद?

2019 के बजट में वित्‍त वर्ष 2020 के लिए कई महत्‍वपूर्ण नीतियां प्रस्‍तावित की गई हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को यह वास्तव में कैसे लाभान्वित करेगा?

 2019 बजट स्वयं सहायता समूह कैसे मदद करेंगे?

भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किये गए केंद्रीय बजट 2019 में महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। अपनी राह से भटके बिना, वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय महिलाओं को निराश नहीं किया। यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि अंतरिम बजट में महिलाओं से जुड़ी पहलों पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया गया था।

वित्‍त मंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था के विकास के भागीदार के रूप में महिलाओं के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विजयी भाव से वर्तमान लोकसभा में महिलाओं की रिकॉर्ड उपस्थिति को इंगित किया। महिलाओं से संबंधित घोषणाओं में से सबसे महत्‍वपूर्ण ब्याज अनुदान कार्यक्रम का विस्तार सभी जिलों में करने से जुड़ी घोषणा थी।

इस पहल के तहत, ब्याज अनुदान कार्यक्रम के विस्तार के अलावा, जन धन बैंक खाता रखने वाला प्रत्येक सत्यापित महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्य 5000 रुपये के ओवरड्राफ्ट के योग्‍य होगा। इसके अलावा, प्रत्येक एसएचजी की एक महिला मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये तक के ऋण के लिए पात्र होगी।

भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में महिला सशक्तिकरण एक शीर्ष एजेंडा था। वहीं नई सरकार के पहले बजट में भी यदि कोई संकेत दिया गया है, तो वह यह है कि पूरे कार्यकाल के दौरान सरकार की यही प्राथमिकता रहेगी।

क्या यह कार्यक्रम अन्य योजनाओं का विस्तार है?

वित्‍त मंत्री ने अपने भाषण में उल्लेख किया कि सरकार ने मुद्रा, स्टैंड अप इंडिया और पहले से मजबूत एसएचजी मूवमेंट जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के बीच उद्यमशीलता की भावना को समर्थन और प्रोत्साहन दिया है। स्टैंड अप इंडिया महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के बीच उद्यमशीलता को सहायता प्रदान करता है। मुद्रा योजना सूक्ष्म और लघु उद्यमों को सस्ता ऋण प्रदान करती है। मुद्रा योजना का उद्देश्य छोटे उद्यमों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना है और यह सुनिश्चित करना है कि "जिन्‍हें कर्ज न मिलता हो" वे भी धन प्राप्त करें।

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एसएचजी क्या है, और महिला सशक्तिकरण में इसकी भूमिका क्या है?

एसएचजी एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें पुरुषों और महिलाओं के समूह वाले सूक्ष्म उद्यमों को शामिल किया जाता है और यह स्वरोजगार एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है। यह किसी कंपनी या साझेदारी की तुलना में लोगों का एक अनौपचारिक समूह है। यह स्व-शासन और सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति के साथ सदस्यों को सशक्त बनाता है। एसएचजी के माध्यम से, लोग एक कॉमन फंड में बचत और योगदान कर सकते हैं। इस कॉमन फंड का उपयोग किसी सदस्य द्वारा आपात स्थिति में किया जाता है।

इसकी अनौपचारिक और सरल संरचना के कारण, महिलाओं, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं, ने स्वयं को स्वयं सहायता समूहों के साथ जोड़ना सुविधाजनक पाया है। महिलाओं के ये समूह, जिसमें सदस्‍यों की संख्‍या आम तौर पर 15-20 होती है, वे व्यावसायिक रूप से किसी आम उद्देश्‍य के लिए या एक जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एक साथ आगे आ सकते हैं। इसके अलावा, बजट में हुई घोषणा के अनुसार इन एसएचजी के लिए ऋण उपलब्धता की सुविधा सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है।

मुद्रा महिला उद्यमिता को कैसे मजबूत कर रही है?

महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए, मुद्रा योजना उन संस्थानों को ब्याज में रियायत देती है जो महिला उद्यमियों को ऋण प्रदान कर रहे हैं। यह योजना महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने हेतु अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करने के लिए वित्त पोषण संस्थानों को भी प्रोत्साहित करती है।
एसएचजी इन ऋणों के लिए कैसे आवेदन कर सकते हैं?

अधिकांश बैंकों और वित्तीय संस्थानों में एसएचजी के लिए विशेष ऋण उत्पाद हैं। एसएचजी को समूह की आयु, सदस्यों की संख्या, कॉर्पस आदि के बारे में बैंक के मानदंडों को पूरा करना चाहिए। इसके साथ ही सरकारी अधिकारी द्वारा सत्यापित संवैधानिक दस्तावेजों के साथ इसकी पहचान और पते से संबंधित दस्तावेज जमा करना होगा। जब कर्ज सही प्रकार से इस योजना से लिंक होते हैं, तब मुद्रा बैंकों को धन मुहैया करता है।

वित्तीय वर्ष 2019-2020 में आने वाले बदलावों की बारीकियों को समझने के लिए एक नज़र डालिए बजट 2019: आपके लिए इसका क्या मतलब है? 

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