इंट्राडे ट्रेडिंग से प्राप्त लाभ पर कैसे कर लगाया जाता है ?

इंट्राडे ट्रेडिंग एक व्यापारिक गतिविधि है जो आयकर अधिनियम के अंतर्गत आती है

 इंट्राडे ट्रेडिंग से प्राप्त लाभ पर कैसे कर लगाया जाता है ?

जैसा कि हमने पिछले लेख में देखा था, इंट्राडे ट्रेडिंग, एक पूंजीगत मार्केट रणनीति है जहां शेयरों को एक ही ट्रेडिंग दिन में खरीदा एवं बेचा जाता है,इसका उद्देश्य शेयर की कीमतों के उतार-चढाव से लाभ लेना है | परन्तु जहां भी लाभ होता है,वहाँ एक कर भी लागू होता है ,सही है न ? यहां की स्थिति भी ऐसे ही है ,और यह लेख आपको एक ओवरव्यू देता है कि इंट्राडे ट्रेडिंग से लाभ पर कैसे कर लगाया जाता है |

इंट्राडे ट्रेडिंग एक निवेश क्यों नहीं है ?

सबसे पहले, आपको ये समझना चाहिए कि इंट्राडे ट्रेडिंग एक निवेश नहीं है; दोनों में बहुत महत्वपूर्ण अंतर है | निवेश की स्थिति में, लोग शेयरों की डिलीवरी लेते हैं और उसे कम से कम एक दिन के लिए होल्ड करके रखते हैं| परन्तु इंट्राडे ट्रेडिंग में, जहां ट्रेडिंग के दिन के समापन से पहले ही पोसिशन्स (खरीदे गए शेयर) बेच दिए जाते हैं ,वहाँ कोई डिलीवरी नहीं होती | इसका उद्देश्य होता है कि शेयरों के कीमतों में हलचल के वक़्त ,अच्छे वक़्त में शेयरों की बिक्री कर दी जाये ताकि लाभ मिल सके |

बेशक, यदि स्टॉक की कीमत अचानक गिर जाती है,जिस स्थिति में निवेशक को नुकसान होता है, तो उन्हें नुकसान कम करने के लिए कम मूल्य में बिक्री करनी पड़ती है| इसलिए, इंट्राडे ट्रेडिंग व्यावसायिक गतिविधि के सामान है जहां आपका उद्देश्य लाभ कमाना होता है पर यहां नुकसान भी उठाना पड़ सकता है |

इंट्राडे ट्रेडिंग से लाभ पर कैसे कर लगाया जाता है ?

इंट्राडे ट्रेडिंग से लाभ या हानि को पूंजीगत लाभ के रूप में नहीं माना जाता है, पर सट्टे से आय / हानि के रूप में देखा जाता है, जो कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 43 (5) के तहत व्यावसायिक आय या हानि के अंतर्गत आता है। मूल रूप से, इंट्राडे ट्रेडिंग को सट्टा माना जाता है क्यूंकि यह लंबी अवधि में मुनाफा कमाने के लिए नहीं किया जाता है।

पूंजीगत लाभ के लिए विशिष्ट कर दरें होती हैं,,जो अन्य आय के स्त्रोतों से जुड़ता है ( वेतन,संपत्ति से आय आदि) जिससे वह राशि जिस आयकर स्लैब में आती है ,उसके अनुसार कुल कर योग्य आय पर पहुंचा जा सकता है,पर यह सट्टे से कमाए आय पर लागू नहीं होता | गैर-सट्टे वाली आय को भी इस हिसाब में जोड़ा जाता है ; ऐसी आय (लाभ) इंट्राडे या फ्यूचर या ट्रेडिंग विकल्प से रातोरात ट्रेडिंग से प्राप्त होती है (एफ एंड ओ) |

आयकर रिटर्न में एक इंट्राडे व्यापारी किन खर्चों का दावा कर सकता है ?

इस गैर-सट्टे वाली व्यावसायिक आय को व्यवसाय के खर्चें जैसे कि एजेंट की फीस, इंटरनेट शुल्क,टेलीफोन बिल,ब्रोकर का कमीशन ,डीमैट खाते का शुल्क आदि के रूप में भरपाई किया जा सकता है | ब्रोकरेज और सिक्योरिटीज ट्रांसैक्शन टैक्स (एस.टी.टी.) में कटौतियां- एक प्रत्यक्ष कर है जो हर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के खरीद एवं बिक्री पर लगाया जाता है - जिसका आप आयकर रिटर्न दाखिल करते वक़्त दावा कर सकते हैं |

सट्टे के नुकसानों की वेतन,व्यापार, अचल संपत्ति के किराए या किसी अन्य आय से भरपाई नहीं की जा सकती है ; यह सिर्फ इंट्राडे ट्रेडिंग से अर्जित आय में स्वीकृत होता है | इस नुकसान को अगले चार वर्ष के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है ताकि किसी भी भावी सट्टे की आय से इसकी भरपाई की जा सके | हालांकि, यदि किसी भी नुकसान को आगे बढ़ाया जाना होता है तो उसे व्यापारी के आई.टी.आर. में बताया जाना चाहिए |

इंट्राडे ट्रेडिंग से लाभों और नुकसानों को दर्शाने के लिए कौन से टैक्स फॉर्म ज़रूरी होते हैं ?

वेतनभोगी लोग जिन्होंने इंट्राडे ट्रेडिंग में लाभ या नुकसान कमाए हैं ,उन्हें अपने रिटर्न आई.टी.आर. फॉर्म 3 में फाइल करने होंगे | कुल लाभ या नुकसान की गणना करने के लिए, उन्हें अपने ट्रांसैक्शन और अन्य खर्चों,जिनके बारे में पहले बताया गया है,उन पर भुगतान किये गए एस.टी.टी की कटौती करवाने की सलाह दी जाती है | व्यक्ति का टर्नओवर 1 करोड़ से ज्यादा होने पर टैक्स ऑडिट लागू होता है |

संबंधित लेख