इंट्रा-डे ट्रेडिंग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वह सब जो आप इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में जानना चाहते थे लेकिन पूछने में संकोच कर रहे थे।

 इंट्रा-डे ट्रेडिंग: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हम वर्तमान में एक ऐसी वैश्विक महामारी के बीच जीवन जी रहे हैं जिसके कारण हर जगह लॉकडाउन हो रहा है | घर से काम करने के कई फायदों में से एक यह है कि इसके कारण कई लोगों को घर पर रहते हुए स्टॉक मार्केट में हाथ आज़माने का हौसला मिला है| दरअसल,ऑनलाइन ट्रेडिंग एक बेहद आकर्षक व्यवसाय बन गया है क्यूंकि बहुत ही कम समय में इसने भारतीय बाजार में बेहतरीन रिटर्न उत्पन्न किये हैं |

कई नए निवेशक यह जानने के लिए काफी उत्सुक हैं कि जल्दी पैसे कैसे कमाए जा सकते हैं | उनमे से कई लोगों ने यक़ीनन तकनीकी विश्लेषण की मदद से एक दिवसीय ट्रेडिंग या इंट्राडे ट्रेडिंग की तरफ रुख किया है| हालांकि, ऐसा अनुमान लगाया गया है कि उनमे से करीबन 85 % से अधिक लोगों ने इंट्राडे व्यापार में पैसे केवल खोए हैं | इसकी विफलता के मुख्य कारणों में से एक यह है कि इंट्राडे व्यापारी,बाजार के उतार-चढ़ाव और अस्थिरता को समझने में चूक कर जाते हैं |

इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें :

1 ) इंट्राडे ट्रेडिंग क्या होता है ?

इंट्राडे ट्रेडिंग (या डे ट्रेडिंग) केवल एक दिन के लिए शेयर के सट्टे में भागीदारी होती है ,मतलब कि एक ही ट्रेडिंग दिन के भीतर आपको शेयर की खरीदी एवं बिक्री करनी होती है | डे ट्रेडर्स का एकमात्र उद्देश्य होता है-लाभ ,इसिलए उन्हें सट्टेबाज़ कहा जाता है |

2) क्या नए निवेशकों के लिए डे-ट्रेडिंग सलाहनीय है ?

अधिकांश डे ट्रेडर्स ,युवा खुदरा निवेशक हैं जो पूंजीगत व्यापार में नए हैं | स्विंग ट्रेडिंग की बजाय डे-ट्रेडिंग में भाग लेने का प्राथमिक कारण है- संसाधनों की उपलब्धता | इंट्राडे ट्रेडिंग ,व्यापारियों को उपलब्ध मार्जिन सुविधा से प्रेरित है | न्यूनतम पूंजी के साथ, व्यापारियों को केवल उस दिन के लिए स्टॉक मार्केट में बड़े दांव खेलने का अवसर मिलता है | किसी भी व्यापार में लिवरेज बहुत ज़रूरी है यदि वह सही ढंग से और रणनीतिक रूप से उपयोग किया जाये |

3. इंट्राडे व्यापारियों के लिए मार्जिन सुविधा क्या होती है?

मार्जिन, ब्रोकर द्वारा प्रदान किया गया केवल एक ब्याज रहित ऋण होता है। किसी भी अतिरिक्त लिवरेज से व्यापारी को न्यूनतम पूंजी के साथ भी बड़े दांव खेलने का अवसर मिलता है। दुर्भाग्य से, यह प्रतिभागियों के लालच को और बढ़ाता है। लिवरेज करने से लाभ और हानि पर हमेशा एक गुणक प्रभाव पढता है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए,विभिन्न ब्रोकरों द्वारा दी जाने वाली मार्जिन सुविधा उपलब्ध पूंजी के 5 गुना से लेकर 20 गुना (यानी 20 गुना लिवरेज) तक होती है।

4. क्या इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए कोई नियम होते हैं?

वैसे तो हर चीज़ के लिए नियम एवं मार्गदर्शन तथ्य हमेशा होते ही हैं | सबसे सामान्य अभ्यास यह है कि जब आप डे ट्रेडिंग करें तो आपको भावनाओं में नहीं बहना चाहिए | मानवीय हस्तक्षेप और भावनात्मक सोच से अकारण नुकसान और सीमित लाभ हो सकता है | यह समझना डे ट्रेडिंग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि यह व्यापार एक प्रकार का सट्टा ही होता है | सट्टे को भावनात्मक निर्णय लेकर नहीं खेला जा सकता है |

यदि आप डे ट्रेडिंग के माध्यम से लगातार लाभ कमाना चाह रहे हैं तो यहां कुछ नियम दिए गए हैं जिनका आपको पालन करना चाहिए :

  • आने वाले दिन के लिए पहले से ही ट्रेडिंग योजना तैयार करें
  • अपने नुकसान को सीमित करने के लिए हर ट्रेड के लिए एक स्टॉप लॉस आर्डर ज़रूर रखें
  • डे ट्रेडिंग के लिए जोखिम बनाम प्रतिफल के अनुपात को 1:2 से अधिक निर्धारित करें
  • लेन-देन की लागत के प्रति सचेत रहे
  • अधिक जोखिम लेने से बचें; केवल उतना ही ट्रेडिंग करें जितनी आपकी खोने की क्षमता हो
  • मार्केट आर्डर की जगह लिमिट आर्डर का उपयोग करें
  • किसी भी स्टॉक के लिए पिछले झुकाव और पिछले प्रदर्शन पर विचार करने से बचें। इंट्राडे ट्रेडिंग केवल उस ही दिन की चाल पर निर्भर करती है, इसलिए उस दिन की प्रवृत्ति के अनुसार ही व्यापार करें
  • सीमित रणनीतियों का पालन करें लेकिन उन्हें अनुशासित तरीके से लागू करें
  • भले ही छोटे लाभ कमाएँ लेकिन लगातार कमाएं

5. इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा होता है?

इंट्राडे ट्रेडिंग, मूल्य के उतार चढ़ाव और वॉल्यूम ब्रेकआउट पर निर्भर करता है | दूसरे शब्दों में, ये चाल पर आधारित व्यापर होते हैं | भारतीय स्टॉक मार्केट में सुबह 9 बजे (बाजार खुलने से पहले) से लेकर दोपहर 3.30 बजे तक ट्रेडिंग चलता है,और उसके बाद ट्रेडिंग समय बंद होने के बाद भी खुला रहता है (परन्तु वह डे ट्रेडर्स के लिए मायने नहीं रखता) |

डे ट्रेडर्स आमतौर पर इस पुरे ट्रेडिंग दिन को 3 मुख्य सत्रों में बाँट सकते हैं :

  • सत्र 1: सुबह 9.15 से 11 बजे तक
  • सत्र II: 11 बजे से 1.30 बजे तक
  • सत्र III: दोपहर 1.30 से 3.30 बजे

कायदे के अनुसार, सभी इंट्राडे ट्रेडिंग रणनीतियों को बेहद उच्च वॉल्यूम द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए। डॉव सिद्धांत द्वारा भी उच्च वॉल्यूम को एक आवश्यक इनपुट बताया गया है। ऐतिहासिक रूप से, स्टॉक मार्केट्स में सत्र I और III में तुलनात्मक रूप से उच्च वॉल्यूम और ट्रेंडिंग कीमतों को देखा गया है, जिससे डे ट्रेडिंग और अधिक आकर्षक लगते हैं।

द्वितीय सत्र आमतौर पर भोजन के लिए ब्रेक होता है (जैसा कि मार्केट में भाग लेने वाले लोग कहते है)| इसलिए ,आमतौर पर यह समय सीमाबद्ध होता है जिससे कि किसी भी तरफ कोई ख़ास हलचल नहीं दिखाई देती है |

6. इंट्राडे ट्रेडिंग कितना लाभदायक है?

इंट्राडे व्यापारियों को एक बात जिसका ध्यान रखना चाहिए,वह यह है कि उन्हें ट्रेडिंग को केवल एक रोमांचक खेल की तरह नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे पूर्णकालिक व्यापार के जैसे देखना चाहिए | वास्तव में, सटीक अभ्यास और पिछली रणनीति के परिक्षण के प्रयास से आप एक लाभप्रद व्यापारी बन सकते है |

इंट्राडे ट्रेडिंग एक साथ कई ट्रेड करना और उच्च वॉल्यूम में करते हुए कम मुनाफे कमाने के बारे में ही है | मुनाफे को जल्दी से बुक करना बहुत ज़रूरी है क्यूंकि अच्छे रुझान वाले बाजार के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने का अवसर देखने को नहीं मिलता है | लोगों को एक साथ ज्यादा ट्रेडिंग करने से भी बचना चाहिए क्यूंकि इससे लेन-देन की लागत बढ़ती है और लाभप्रदत्ता प्रभावित हो सकती है| 

7. इंट्राडे ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे पर कर कैसे लगाया जाता है?

इंट्राडे ट्रेडिंग से अर्जित होने वाली आय को सट्टा द्वारा आय के रूप में माना जाता है। यह "व्यापार या पेशे से आय" शीर्षक के तहत आवंटित किया गया है। यदि आपको लाभ होता है, तो यह आपकी कुल आय में जुड़ जाता है और आपके कर स्लैब के अनुसार कर लागू किया जाता है।

मेरा सुझाव है कि इसी लेख में हमे इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में और भी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नो को शामिल करके सभी प्रासंगिक सवालों के जवाब के लिए इसी लेख को लम्बे लेख के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए जिसमे इससे जुड़े सारे सवाल-जवाब हो|

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य सूचना उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कर या कानूनी सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको स्वतंत्र सलाह लेनी चाहिए।

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