अलग अलग प्रकार के आईपीओ निवेशक: योग्य संस्थागत निवेशक, एंकर निवेशक, खुदरा निवेशक, एचएनआई

सेबी ने खुदरा निवेशकों के लिए कम से कम 35% का शेयर आवंटन अनिवार्य बनाया है।

आईपीओ निवेशकों के अलग अलग प्रकार

पिछले साल, भारत में 65 कंपनियों ने प्राथमिक बाजारों से लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जिससे 2021 हाल के दिनों में भारतीय आईपीओ के लिए सबसे सफल वर्षों में से एक बन गया।

पिछले साल कई आईपीओ ओवरसब्सक्राइब हुए। उदाहरण के लिए, लेटेंट व्यू एनालिटिक्स के आईपीओ को 325 गुना से अधिक सब्सक्राइव किया गया था, जिसमें एनआईआई, क्यूआईआई और खुदरा निवेशकों की श्रेणियों के निवेशकों ने अपने आवंटित हिस्से के मुकाबले कई सौ गुना बोली लगाई थी। यहां तक कि कर्मचारियों का हिस्सा भी ओवरसब्सक्राइब हुआ था।

आईपीओ के लिए विभिन्न प्रकार के निवेशक बोली लगाते हैं? चलिये, जानते हैं उन निवेशकों के बारे में। 

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आईपीओ निवेशकों के प्रकार

बाजार नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने आईपीओ प्रक्रिया में भाग लेने वाले निवेशकों को चार खंडों में वर्गीकृत किया है-योग्य संस्थागत निवेशक (क्यूआईआई), एंकर निवेशक, खुदरा निवेशक और अमीर व्यक्ति (एचएनआई) और गैर-संस्थागत निवेशक(एनआईआई)।

आइए अब हम इन निवेशकों के प्रकार के बारे में बात करते हैं:

1. योग्य संस्थागत निवेशक

क्यूआईआई ऐसे संस्थान होते हैं, जिनके पास पूंजी बाजार में रणनीतिक निवेश करने की विशेषज्ञता और वित्तीय पृष्ठभूमि होती है। इनमें शामिल हैं:

  • वाणिज्यिक बैंक;
  • सार्वजनिक वित्तीय संस्थान;
  • म्युचुअल फंड हाउस;
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक.

आईपीओ जारी करने वाली कंपनी के लिए क्यूआईआई महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि वे नए शेयरों का बड़ा हिस्सा खरीदते हैं। वे जितने अधिक शेयर खरीदते हैं, जनता के लिए उतने ही कम शेयर उपलब्ध होते हैं। यह स्टॉक की कीमत को बढ़ाता है, जिससे कंपनी अधिक पूंजी जुटाने में सक्षम होती है। हालांकि, सेबी ने अनिवार्य किया है कि क्यूआईआई को 50% से अधिक शेयर आवंटित नहीं किए जा सकते हैं।

क्यूआईआई से निम्नलिखित फायदे हैं:

  • जनता को शेयर जारी करने की तुलना में क्यूआईआई प्रक्रिया तेज है;
  • यह प्रक्रिया किफायती होती है, क्योंकि अनुमोदन प्राप्त करने के लिए बैंकरों, अधिवक्ताओं और लेखा परीक्षकों की किसी बड़ी टीम की जरूरत नहीं होती है।;
  • क्यूआईआई के पास बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिए पैसे और मौके दोनों होते हैं।

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2. एंकर निवेशक

वैसा क्यूआईआई, जो कम से कम 10 करोड़ रुपये का निवेश कर सकता है, उन्हें एंकर निवेशक कहा जाता है। आमतौर पर, उनकी उपस्थिति अन्य निवेशकों के बीच भरोसा जगाती है। उन्हें क्यूआईआई आवंटन का 60 प्रतिशत तक शेयर बेचा जा सकता है।

एंकर निवेशकों के लाभ इस प्रकार हैं:

  • आमतौर पर, उनके पास उस कंपनी के बारे में वह जानकारी होती है, जो सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं होती है। यह जानकारी ही उन्हें समझदारी से निवेश करने का मौका देती है। उनकी उपस्थिति आईपीओ में भरोसा जगाती है;
  • इसी कारण से, उनकी भागीदारी का आकार आईपीओ के बारे में संकेत देता है। 

3. खुदरा निवेशक

खुदरा निवेशक 2 लाख रुपये से कम निवेश करने वाले व्यक्ति को माना जाता है। सेबी ने आईपीओ में उनके लिए कुल शेयरों का कम से कम 35% आवंटन अनिवार्य किया है और ओवरसब्सक्रिप्शन के मामले में, सभी के लिए कम से कम एक लॉट शेयर। यदि यह संभव नहीं है, तो नियामक लॉटरी की अनुमति देता है। इसके अलावा, आम तौर पर, 1% -2% शेयर आईपीओ लाने वाली कंपनी के कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए जाते हैं।

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4. अमीर व्यक्ति (एचएनआई)/गैर-संस्थागत निवेशक (एनआईआई)

आईपीओ में 2 लाख रुपये से अधिक का निवेश करने वाला कोई भी व्यक्ति या संस्थागत निवेशक क्रमशः एचएनआई या एनआईआई कहलाता है। कंपनियां आमतौर पर एनआईआई के लिए लगभग 15% आईपीओ आरक्षित रखती हैं।

एनआईआई में शामिल हैं:

  • एचयूएफ;
  • कंपनियां;
  • सोसायटी और ट्रस्ट।

दूसरे प्रकार के निवेशकों को क्यूआईआई की तरह सेबी के साथ पंजीकृत होने की आवश्यकता नहीं होती है। 

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संवादपत्र

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