Should investors focus on mid- and small-caps? क्या निवेशकों को मिड और स्मॉल-कैप पर ध्यान देना चाहिए?

फिलहाल बाजार में उथल-पुथल जारी है और निवेशक काफी असमंजस में हैं कि आखिर क्या रणनीति अपनाएं कि नुकसान होने से बच सकें।

अस्थिर बाजार में निवेश की स्ट्रेटेजी

Investment strategy in volatile market: हाल के दिनों में बाजार काफी अस्थिर रहा है; हालांकि निचले स्तर पर कुछ सुधार देखा जा रहा है मगर फिर भी बाजार में ब्याज की दरें, बढ़ती महंगाई के साथ-साथ राजकोष के घाटे के बढ़ने जैसी चुनौतियां लगातार जारी हैं। पिछले दो दिन से बाजार कुछ उबरा है। उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी एक अच्छा संकेत है, लेकिन मंदी की आशंका से जोखिम अब भी बना हुआ है। शेयर बाजार के अस्थिर होने पर छोटे निवेशक डर जाते हैं क्योंकि शेयर बाजार कभी चढ़ता है तो फौरन उतर भी जाता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि कौन से निवेश साधन सुरक्षित हैं।

अर्थव्यवस्था के इस माहौल में निवेशकों के सामने कई सवाल खड़े हो गये हैं; जैसे कि वे इस उधेड़बुन में हैं कि इस साल के अंत तक बाजार कहां रहेगा या वर्तमान सुधार के बाद किस सेक्टर में निवेश करना चाहिए। इसके अलावा ऐसे ही कई अन्य सवाल भी निवेशकों के मन में है। ऐसे में पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड के इक्विटी हेड ने निवेशकों के लिए कई टिप्स दिए हैं।

यह भी पढ़ें: भारत में 10,000 से कम के निवेश में छोटे बिजनेस के फायदेमंद आइडियाज

भारतीय और वैश्विक वित्तीय परिस्थियों का आकलन

पीजीआईएम इंडिया म्युचुअल फंड के इक्विटी हेड के अनुसार विकसित देशों और भारत के दृष्टिकोण में कुछ अंतर काफी स्पष्ट हैं। हालांकि महंगाई एक सामान्य वैश्विक विषय बन गई है, मगर अमेरिका और यूरोप की तुलना में भारत के लिए मंदी आने की आशंका बहुत कम है। बाजार में महंगाई, ब्याज दरों में वृद्धि, राजकोष के घाटे के बढ़ने जैसी चुनौतियां जारी हैं, मगर कॉरपोरेट इंडिया अपने मांग और ऑर्डर्स की स्थिरता से मजबूत दिखाई दे रही है। उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आने से मार्जिन के लिए राहत मिल सकती है। बाजार की पूंजी के अच्छा मूल्यांकन होने से कोई बड़ी वैश्विक मैक्रो चुनौती सामने आने पर भारतीय बाजारों के अच्छा प्रदर्शन के आगे भी जारी रहने की आशा है।

भारत में महंगाई में कमी आती दिख रही है। उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आने से महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी। लेकिन यह साफ नहीं है कि क्या अमेरिका में इसका ऐसा ही असर होगा। उपभोग्य वस्तुओं की कम कीमतों का अमेरिका में महंगाई दर पर भी असर दिखना शुरू हो जाना चाहिए। आने वाले समय में उनकी बॉन्ड यील्ड महंगाई में नरमी की उम्मीद है। इसलिए, भारत और अमेरिका के बीच महंगाई के रुझान में कोई अंतर है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा। अगर अमेरिका में मुद्रास्फीति दर का बढ़ना जारी रहता है, तो ब्याज की दरों में भी वृद्धि होती रह सकती है। इससे वैश्विक स्तर पर जोखिम तो कम होगा लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय इक्विटी की बिक्री जारी रख सकते हैं।

वर्तमान रणनीति क्या हो सकती है?

अभी के लिए सबसे अच्छी रणनीति यह होगी कि निवेशक अच्छी गुणवत्ता वाले व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करें। मजबूत बैलेंस शीट और अच्छे कैश फ्लो वाली कंपनियों में निवेश करें। ब्याज दर में वृद्धि और तरलता में कमी होने की स्थिति में बाजारों को मूल्यांकन का समर्थन करने के लिए नकदी के प्रवाह पर ध्यान देना होगा। बाजार के ऊपर बढ़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाले व्यवसायों में भी उछाल दिख सकता है।

बाजार के अनुमान के हिसाब से मिडकैप और स्मॉलकैप में थोड़ा और सुधार हुआ है। रुझान को देखते हुए कई मिड और स्मॉल कैप के अगले 3 से 5 सालों में और बेहतर सुधार होने का अनुमान है। हालांकि इन सेगमेंट को देखते हुए कहा जा सकता है कि वे कुछ दिन अस्थिर रहेंगे, लेकिन अगले 3 से 5 सालों में अच्छा मुनाफा देने की संभावना है।

कई कंपनियों के परिणाम उत्साह बढ़ा रहे हैं। मांग में मजबूती है और लोन ग्रोथ भी मजबूत है। कुछ उद्योगों में मार्जिन का दबाव है, लेकिन इसके भी धीरे-धीरे कम होने की आशा की जा सकती है। इंजीनियरिंग कंपनियों के ऑर्डर बुक में भी मजबूती नजर आ रही है। कॉरपोरेट भी सकारात्मक बातें कर रहे हैं। आईटी सहित अधिकांश क्षेत्रों में कोई बड़ा जोखिम होने की संभावना दिखाई नहीं दे रही है। कच्चे माल के महंगे होने से मुनाफे पर कुछ दबाव है, मगर इसके अलावा कॉर्पोरेट इंडिया पर किसी भी प्रमुख वैश्विक चुनौती का प्रभाव नहीं पड़ा है।

घरेलू या देशी निवेशकों का निवेश के प्रति रुझान बना हुआ है। कुछ अड़चनों के बावजूद परिसंपत्तियों का वित्तीयकरण और इक्विटी या इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंडों के लिए घरेलू संपत्ति के बढ़ते वितरण के अंतर्प्रवाह से, इस रुझान के आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। महंगाई की वैश्विक चिंताओं, ब्याज की बढ़ती दरों और कोष के बड़े पैमाने पर डॉलर में स्थानांतरित होने के कारण, पिछले 9 महीनों में एफआईआई ने भारत में काफी बिकवाली की है। हालांकि बाजार में ब्याज दरों के स्थिर होने का एहसास हो जाने पर एफआईआई वापस बाजार की ओर लौट सकते हैं।

यह भी पढ़ें: अस्थिर मार्केट में 2022 में निवेश करने के लिए उच्च डिविडेंड प्रदान करने वाले स्टॉक

4 मिनटों में समझें Stock Market में Volatility क्या हैं

संवादपत्र

संबंधित लेख