नए जमाने के सेहत के ट्रिक्स और सुझाव जो हर महिला को जानना जरूरी है

अपने परिवार की देखभाल करने के लिए जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी खुद की भी देखभाल करना है। यहाँ स्वस्थ जीवन जीने के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं।

नए जमाने के सेहत के ट्रिक्स और सुझाव जो हर महिला को जानना जरूरी है

कई जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ-साथ, शहरी भारतीय महिला को स्वस्थ आदतों के लिए भी समय निकालना पड़ता है। यदि आप दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं, तो यहाँ कुछ समकालीन स्वास्थ्य युक्तियाँ हैं, जो आपकी मदद कर सकती हैं।

स्वस्थ भोजन विकल्प

  • जितना हो सके प्रोसेस्ड खाने से बचें। यदि आपको प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करना है, तो उसमे पोषक तत्व के बारे में पढ़ने की आदत डालें ताकि आप जानें की आप क्या खा रहे हैं। डाली हुई चीनी, संतृप्त वसा, ट्रांस वसा, मिला हुआ एम.एस.जी. आदि की मात्रा पूरी तरह लाल झंडी हैं।
  • व्यावसायिक रूप से बाके किये गए पूरे गेहूं की रोटी स्वस्थ नहीं है। मल्टीग्रेन आटे से घर पर बनी रोटियां ज्यादा बेहतर विकल्प है।
  • आपको विदेशी सुपरफूड जैसे क्विनोआ या एवोकैडो पर बहुत पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। ताजा स्थानीय उत्पाद खाना अधिक बेहतर विकल्प है।
  • भारतीय सुपरफूड जैसे देसी घी, मोरिंगा, कटहल, मखाना आदि को स्थानीय बाजार से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्हें अपने आहार में अवश्य शामिल करें।
  • भारतीय महिलाएं पर्याप्त प्रोटीन और ओमेगा -3 फैटी एसिड का सेवन नहीं करती हैं। ये पोषक तत्व मांसपेशियों के विकास, हड्डियों के स्वास्थ्य और अंगो के कार्यों के लिए आवश्यक हैं। प्रोटीन के आसान स्त्रोत जैसे नट्स और बीज जैसे अखरोट, अलसी, राजमा और हरी सोयाबीन को आपकी खरीदारी सूचि में शामिल करना होगा।

स्मार्ट वर्कआउट

  • स्वस्थ रहने के लिए सप्ताह में 5 बार मध्यम से उच्च तीव्रता वाले कसरत के तीस मिनट पर्याप्त हैं।
  • स्वस्थ रहने के लिए ज़ुम्बा, तैराकी, लंबी पैदल यात्रा या बच्चों के साथ खेलने जैसे मज़ेदार वर्कआउट आज़माएँ।
  • वर्कआउट की समयसारिणी रखने वाली अधिकांश भारतीय महिलाओं को ट्रेडमिल पर बिताए जाने वाले घंटों में कटौती करने की आवश्यकता होती है। अत्यधिक कार्डियो मांसपेशी को कमज़ोर करती है। महिलाओं को सक्रिय रूप से एक मजबूती वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल करना चाहिए। वजन सम्बंधित प्रशिक्षण मजबूत होने और मांसपेशियों की हानि और ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआत में होने वाले प्रभावों का मुकाबला करने का एक शानदार तरीका है।
  • कई मांसपेशी समूहों को लक्षित करने वाले यौगिक अभ्यासों का चयन करें ।
  • कसरत के बाद के 60 मिनट के समय में प्रोटीन को शीघ्र अवशोषित करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कर लाभ उठाएं |
  • व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले एक चिकित्सक से परामर्श करें, खासकर अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी चिंता हो।

सहायता के लिए ऐप्स

  • यदि आपके मन में एक लक्षित वजन है, तो 'माय फिटनेस पाल' जैसे कैलोरी काउंटिंग ऐप आपको अपने आहार की आदतों पर कड़ी नज़र रखने और एक विशिष्ट खाद्य सेवन कार्यक्रम बनाते हैं |
  • यदि आप एक कसरत के लिए 30 मिनट समर्पित नहीं कर सकते हैं, तो आप 7 मिनट की कसरत ऐप को आज़मा सकते हैं जो आपको एक उच्च तीव्रता, त्वरित कसरत कराता है। यह कसरत को पूरी तरह से छोड़ देने से बेहतर विकल्प है।
  • यदि आप दोहराए जाने वाले प्रशिक्षण से ऊब गए हैं, तो ऐसे कई कसरत ऐप हैं जो आपको लंबे समय तक व्यस्त रखने के लिए प्रगतिशील स्तरों के साथ विभिन्न अभ्यास प्रदान करते हैं। यदि आपके लिए जिम जाना मुश्किल है, तो वीडियो-आधारित इंटरैक्टिव कसरत योजना का पालन करना आसान है।
  • फिटनेस के अलावा, कई अन्य ऐप हैं जो समग्र स्वास्थ्य निगरानी में सहायता कर सकते हैं। एक ब्लड प्रेशर मॉनिटर आपके महत्वपूर्ण संकेतों को ट्रैक करने में मदद करता है और आपके दवा का रिकॉर्ड बनाता है। पल्स पॉइंट रिस्पोंड स्वचालित रूप से जी.पी.एस. के माध्यम से निकटतम चिकित्सा उत्तरदाताओं से जुड़ सकता है जब आप किसी आपात स्थिति का सामना करते हैं।
  • कई अन्य ऐप जैसे फ़्लो, क्यू, ईव, आदि न केवल आपके पीरियड्स को ट्रैक करने में मदद करते हैं बल्कि ओव्यूलेशन को भी ट्रैक करते हैं, सामान्य यौन स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं और ऐप के माध्यम से विशेषज्ञों से सलाह लेते हैं।
  • किसी भी व्यक्तिगत डेटा को साझा करने से पहले नियम और शर्तें / गोपनीयता नीति को ध्यान से पढ़ें।

स्वास्थ्य जांच

  • स्तन कैंसर के जोखिम की निगरानी के लिए, 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को वर्ष में एक बार मैमोग्राम करवाना चाहिए। जो लोग 55 से ऊपर हैं, उन्हें द्वि-वार्षिक जांच लेनी चाहिए। यदि आपकी बीमारी का पारिवारिक इतिहास है, तो आप जल्द से जल्द वार्षिक जांच शुरू कर सकते हैं।
  • आपको 21 साल की उम्र से शुरू करके हर तीन साल में एक बार पैप स्मीयर जांच करवाना चाहिए और सर्वाइकल कैंसर के खतरे का पता लगाना चाहिए।
  • भारतीय महिलाओं में लोह तत्त्व और कैल्शियम की अत्यधिक कमी है और इसलिए इन्हे अस्थि घनत्व या डेक्सा स्कैन की जांच करनी चाहिए ताकि ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम की निगरानी की जा सके।
  • महीने में एक बार घर पर ही पूरे शरीर की त्वचा का सावधानीपूर्वक निरीक्षण करें। त्वचा के कैंसर के शुरुआती संकेतों को पकड़ने के लिए त्वचा में किसी भी बदलाव, नए तिल या मौजूदा मस्सो में बदलाव पर नज़र रखें।

स्वस्थ रहने की कुंजी सही आदतों का विकास करना है। सही बदलाव करना हमेशा आसान नहीं हो सकता है, लेकिन यह एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण है, महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही आवश्यक है। यह लेख आपको उन विभिन्न रणनीतियों को समझने में मदद करेगा जो महिलाओं को सामना करने में मदद करती हैं और किस तरह से यह उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।




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