ONDC Impact on Business: ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी बिजनेस को बदलकर रख देगा ONDC?

ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी बिजनेस में बड़ा बदलाव आने वाला है। Amazon.com Inc. ने अब तक अपनी लॉजिस्टिक्स सेवाओं जिसमें पिकअप से डिलीवरी तक को ONDC के साथ मर्ज करने पर सहमति जता दी है।

ONDC Impact on Business

ONDC Impact on Business: आने वाले दिनों में ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी बिजनेस में बड़ा बदलाव आने वाला है। इंफोसिस लिमिटेड के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि के पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के प्रचार से फूड डिलिवरी कंपनियां पहले से ही चिंतित हैं। दरअसल वॉलमार्ट इंक सरकार द्वारा समर्थित पहल का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ Amazon.com Inc. ने अब तक अपनी लॉजिस्टिक्स सेवाओं जिसमें पिकअप से डिलीवरी तक  को ONDC के साथ मर्ज करने पर सहमति जता दी है।

अगर चीन ने क्यू आर कोड़ के जरिए पेमेंट वर्ल्ड में क्रांति की तो वहीं भारत ने यूपीआई के जरिए पिछले सात सालों में डिजिटल पेमेंट वर्ल्ड में तलहका मचा दिया। सिर्फ एक फोन से आप किसी को भी कहीं भी पेमेंट कर सकते हैं। यूपीआई को अब दुनिया के कई देशों में फॉलो किया जा रहा है। वहीं भारत अब यूपीआई पेमेंट को ग्लोबल मार्केट तक लेकर जाना चाहता है। 

इस बीच नीलेकणि ने ई-कॉमर्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इंटरनेट एक्सेस वाले लगभग 75% भारतीय ऑनलाइन खरीदारी नहीं कर रहे हैं। जबकि देश के 100 मिलियन छोटे, लघु और मध्यम फर्मों में से सिर्फ 5 मिलियन फर्म ऐसे हैं जो डिजिटल रूप से सामान बेचने के लिए रजिस्टर्ड हैं। उनमें से केवल कुछ ही प्लेटफॉर्म पर अच्छा बिजनेस होता है। कंसल्टिंग फर्म McKinsey & Co., ONDC की एक रिपोर्ट बताती है कि नीलेकणि के सपोर्ट और सरकार के मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उभरी गैर-लाभकारी संस्था ONDC के विस्तार के कितने चांस हैं।

ONDC Impact on Business: आने वाले दिनों में ई-कॉमर्स और फूड डिलिवरी बिजनेस में बड़ा बदलाव आने वाला है। इंफोसिस लिमिटेड के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि के पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन के प्रचार से फूड डिलिवरी कंपनियां पहले से ही चिंतित हैं। दरअसल वॉलमार्ट इंक सरकार द्वारा समर्थित पहल का समर्थन कर रहा है। दूसरी तरफ Amazon.com Inc. ने अब तक अपनी लॉजिस्टिक्स सेवाओं जिसमें पिकअप से डिलीवरी तक  को ONDC के साथ मर्ज करने पर सहमति जता दी है।

अगर चीन ने क्यू आर कोड़ के जरिए पेमेंट वर्ल्ड में क्रांति की तो वहीं भारत ने यूपीआई के जरिए पिछले सात सालों में डिजिटल पेमेंट वर्ल्ड में तलहका मचा दिया। सिर्फ एक फोन से आप किसी को भी कहीं भी पेमेंट कर सकते हैं। यूपीआई को अब दुनिया के कई देशों में फॉलो किया जा रहा है। वहीं भारत अब यूपीआई पेमेंट को ग्लोबल मार्केट तक लेकर जाना चाहता है। 

इस बीच नीलेकणि ने ई-कॉमर्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। इंटरनेट एक्सेस वाले लगभग 75% भारतीय ऑनलाइन खरीदारी नहीं कर रहे हैं। जबकि देश के 100 मिलियन छोटे, लघु और मध्यम फर्मों में से सिर्फ 5 मिलियन फर्म ऐसे हैं जो डिजिटल रूप से सामान बेचने के लिए रजिस्टर्ड हैं। उनमें से केवल कुछ ही प्लेटफॉर्म पर अच्छा बिजनेस होता है। कंसल्टिंग फर्म McKinsey & Co., ONDC की एक रिपोर्ट बताती है कि नीलेकणि के सपोर्ट और सरकार के मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उभरी गैर-लाभकारी संस्था ONDC के विस्तार के कितने चांस हैं।

संवादपत्र

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