पी2पी लेंडिंग में निवेश कैसे करें और पैसा कैसे कमाए? पी2पी लेंडिंग कैसे काम करता है? पी2पी इंडिया - फेयरसेंट, 5पैसा लोन पी2पी लेंडिंग में निवेश कैसे करें और पैसा कैसे कमाए? पी2पी लेंडिंग कैसे काम करता है? पी2पी इंडिया - फेयरसेंट, 5पैसा लोन | P2P Lending a

आपको जानकर हैरानी होगी कि पी2पी लेंडिंग निवेश का एक अच्छा अवसर हो सकता है? पूरी प्रक्रिया को जल्दी से समझने के लिए इस लेख को पढ़ें।

पी2पी लेंडिंग: क्या आपने निवेश के इस नए विकल्प की छानबीन की है?

पीयर' शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं लेकिन आमतौर पर यह एक साथी या बराबर का संकेत देता है। तो, जब दो साथी एक-दूसरे की मदद करते हैं और उस सौदे से लाभ कमाते हैं, तो क्या यह दोनों के लिए अच्छी बात नहीं है?

पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली के विकल्प के रूप में आज बाजार में पीयर-टू-पीयर (पी2पी) उधार फल-फूल रहा है। बैंक और वित्तीय संस्थान ऋण प्रदान करने से पहले आपकी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करते हैं, ऐसे में आपके सहकर्मी आपको किसी भी बैंक सहयोगी से बेहतर समझ सकते हैं। तो, यह इस सौदे में शामिल दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है।

इस लेख में हम देखेंगे कि पीयर-टू-पीयर लेंडिंग को निवेश विकल्प के रूप में कैसे उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा जानेंगे कि यह एक सुरक्षित निवेश विकल्प है या नहीं। इससे जुड़े अन्य संबंधित पहलू पर भी हम चर्चा करेंगे। 

पीयर-टू-पीयर लेंडिंग क्या है?

पीयर-टू-पीयर लेंडिंग या पी2पी लेंडिंग एक तरह का ऋण आधारित कर्ज देने का साधन है। जिन व्यक्तियों या व्यावसायिक घरानों को ऋण की आवश्यकता होती है, वे सीधे अपने साथियों से संपर्क कर सकते हैं, और यदि उनके साथियों के पास अधिशेष धन है, तो वे धन उधार दे सकते हैं। उधार लेने-देने का यह काम एक्सचेंज के बजाय मार्केटप्लेस पर किया जाता है।

इन दिनों पी2पी ऋण देने के लिए अनेक आवेदन उपलब्ध हैं। जिस तरह बैंक अपने द्वारा वितरित किए गए ऋण पर ब्याज अर्जित करते हैं, उसी तरह साथियों को उनके द्वारा उधार दिए गए धन पर रिटर्न मिलता है। इस तरह दोनों पक्षों को पी2पी ऋण देने से लाभ होता है।

संबंधित: पी2पी लेंडिंग 101: यह क्या है और आप इसका कैसे उपयोग करते हैं? 

पी2पी लेंडिंग कैसे काम करता है?

पी2पी लेंडिंग में निवेश करने से पहले आपको यह समझना होगा कि यह कैसे काम करता है। आपके लिए जोखिम कारकों का आकलन करना और फिर समझदारी से निवेश करना महत्वपूर्ण है। 

  1. उधारकर्ता (कर्ज लेने वाले) द्वारा बाजार से क्रेडिट/ऋण के लिए आवेदन करने के साथ यह प्रक्रिया शुरू होती है। 
  2. वे क्रेडिट प्राप्त करने के साथ-साथ अपने व्यवसाय की संभावनाओं के समर्थन में जरूरी दस्तावेज जमा करते हैं।
  3. कर्ज देने वाला (ऋणदाता) कर्ज लेने वाले (उधारकर्ता) के जोखिम का पता लगाकर उसका आकलन करता है।
  4. फिर समझौते को पंजीकृत किया जाता है, जिसमें कर्ज देने-लेने के बारे में सभी जानकारी का उल्लेख होता है। दोनों पक्षों (साथियों) को इस पर हस्ताक्षर करना होता है। 
  5. कर्ज के पैसे को एस्क्रो खाते के माध्यम से स्थानांतरित किया जाता है 
  6. उधारकर्ता पूर्व निर्धारित समयसारिणी के अनुसार भुगतान करना शुरू कर देता है
  7. ऋणदाता की ओर से ऋण की वसूली की जाती है। 

पी2पी लेंडिंग में एक ऐसी प्रक्रिया शामिल है जो पूरी तरह से ऑनलाइन है। हां, एस्क्रो खाते में एक तीसरा पक्ष शामिल है लेकिन यह साथियों के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। 

पी2पी लेंडिंग बनाम पारंपरिक बैंकिंग

पी2पी लेंडिंग और पारंपरिक बैंकिंग के बीच कुछ बुनियादी अंतर हैं। सबसे पहले पी2पी लेंडिंग पूरी तरह से प्रौद्योगिकी आधारित है, जबकि पारंपरिक बैंकिंग अभी भी डिजिटल होने की प्रक्रिया में है। दूसरे, पी2पी प्लेटफॉर्म अंतिम ग्राहक के लिए अधिक अनुकूल है। कर्ज देने वालों को उधार के पैसे से बैंकों की तुलना में अधिक रिटर्न मिलता है। 

क्या पी2पी लेंडिंग में निवेश फायदेमंद है?

अगर आप पी2पी लेंडिंग निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं और जानना चाहते हैं कि इससे कैसे लाभ कमाया जा सकता है? तो, निवेश विकल्प के रूप में पी2पी ऋण देने के कुछ लाभ यहां दिए गए हैं: 

  • कम निवेश: पी2पी में निवेश करने के लिए आपको लाखों-करोड़ों की जरूरत नहीं है। आप छोटी राशि से शुरुआत कर सकते हैं और जैसे-जैसे आप प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं, आप अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। आप सिर्फ 50,000 रुपये से पी2पी लेंडिंग में निवेश शुरू कर सकते हैं। 
  • नियमित आय: यदि आप अपने साथियों को निवेश के रूप में उधार दे रहे हैं, तो यह नियमित आय का एक स्रोत भी हो सकता है। एक बार जब उधारकर्ता कर्ज चुकाना शुरू कर देता है, तो आपको मूल राशि के साथ-साथ उस पर रिटर्न भी मिलेगा, जो आपके लिए एक नियमित आय की तरह होगा। 
  • कोई उतार-चढ़ाव नहीं: ऋण राशि वितरित होने से पहले वापसी दर निर्धारित की जाती है। यही कारण है कि रिटर्न में कोई अस्थिरता नहीं है। यह बाजार जोखिम से जुड़ा नहीं है और उधारकर्ता मूलधन के साथ-साथ उस पर तय किए गए ब्याज को चुकाने के लिए बाध्य है। 
  • आसान तरीका: पी2पी लेंडिंग में निवेश की प्रक्रिया बहुत आसान है। आपको बस एक ऐसे मंच पर पंजीकरण करना होगा जो यह सेवा प्रदान करता है। ऋण राशि के लिए आवेदन करें और प्रतीक्षा करें। एक निवेशक के रूप में, आपको केवल आवेदनों और प्रदान किए गए विवरणों की जांच करने की आवश्यकता है और फिर आप उधार देना शुरू कर सकते हैं। 
  • अधिक रिटर्न: पी2पी लेंडिंग का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि आप पारंपरिक बैंकों की तुलना में  ऋण पर अधिक रिटर्न अर्जित कर सकते हैं। आपका पोर्टफोलियो भी अच्छी तरह से विविध हो सकता है।
  • निहित जोखिम: निवेश के रूप में पी2पी ऋण देने का प्राथमिक जोखिम यह है कि उधारकर्ता अपने भुगतान में चूक कर सकता है। यह ब्याज भुगतान या ब्याज और मूल राशि दोनों हो सकती है जिसे उधारकर्ता नहीं चुका पाए। 

संबंधित: पीयर-टू-पीयर (पी2पी) लेंडिंग: उधार देने और उधार लेने का एक नया विकल्प 

भारत में पीयर-टू-पीयर लेंडिंग

वैश्विक स्तर पर पी2पी लेंडिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पहले से ही कर्ज देने वाले और कर्ज लेने वाले कर रहे हैं। 2019 में पी2पी लेंडिंग का बाजार 67.9 अरब डॉलर था, जबकि 2027 के लिए अनुमानित आंकड़ा 558.9 अरब डॉलर है। इसके 29.7% की सीएजीआर से बढ़ने की उम्मीद है, जो वर्तमान में बाजार में सबसे अधिक है।

भारत में भी पी2पी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 2020 में रिटर्न में ग्रोथ करीब 10 गुना थी। बाजार 25% की दर से बढ़ा जो काफी अधिक है। एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक पी2पी एक ट्रिलियन डॉलर का बाजार बनने जा रहा है।

संक्षेप में, यदि आप अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाना चाहते हैं और निवेश के लिए अन्य निवेश साधनों की तलाश कर रहे हैं तो पी2पी लेंडिंग आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। 

पी2पी भागीदार 

भारतीय बाजार में शामिल कुछ पी2पी खिलाड़ी हैं 5 पैसा लोन, फेयरसेंट, i2iफंडिंग, रुपया सर्किल और अन्य। इनमें से फेयरसेंट भारत की पहली पी2पी ऋण देने वाली कंपनी है जिसे आरबीआई द्वारा पंजीकृत किया गया है। उसी के बाद, अन्य पी2पी ऋण देने वाली कंपनियां अब पंजीकृत पी2पी ऋणदाता बन रही हैं।

आखिरी शब्द

पी2पी उधार में वृद्धि दुनिया और भारत में साफ साफ दिख रही है। यह उछाल इसमें निवेशित रहने की तरफ इशारा कर रहा है। बाजार में तुलनात्मक रूप से नए होने की वजह से इसमें जोखिम भी है। लेकिन उचित शोध और बुद्धिमान निवेश निर्णयों से जोखिमों को कम भी किया जा सकता है।

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