भारतीय रिज़र्व बैंक लिब्रलाइस्ड रेमिटेंस स्कीम् के लेन देन को और अधिक कठोर बनाती है ।

आर.बी.आयी ने कुछ संशोधन किए जिससे लिब्रलाइस्ड रेमिटेंस स्कीम के लेन देन और अधिक मुश्किल और जवाबदेही बन गए हैं ।एक व्यक्ति अब एक साल में ढाई लाख US डॉलर ही विदेश भेज सकता है।

RBI has tightened norms for Liberalized Remittance Scheme

यहाँ एक काल्पनिक परिदृश्य दिया गया है- आपकी चचेरी बहिन अमेरिका में रहती है और अभी-अभी उसने एक नवजात कन्या को जन्म दिया है| स्वाभाविक है ,एक मामा या मौसी होने के नाते ,आप पुरानी भारतीय रीत के अनुसार अपनी नवजात भांजी के लिए कुछ पैसे भेजना चाहते होंगे | अब सवाल ये है की -विदेश में पैसे भेजना कितना वैध है? आप लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम के अंतर्गत अमेरिका में और कुछ अन्य देशो में कानूनन पैसे भेज सकते हैं | आप यह एक निगम इकाई के रूप में नहीं, अपितु एक भारतीय नागरिक होने के नाते ही कर सकते है | दरअसल व्यक्तिगत इकाई (जैसे की निगम, साझेदारी फर्म, ट्रस्ट आदि )के अलावा संस्थाएं इस योजना का लाभ नहीं उठा सकती हैं |  हालांकि नाबालिग ,एक निवासी व्यक्ति के रूप में इसका लाभ उठा सकते हैं | फिर भी, यदि प्रेषक एक नाबालिग है , तो उन्हें अपने प्राकृतिक अभिभावक से आवश्यक (फॉर्म )फॉर्म प्रतिहस्ताक्षरित करवाना होगा | 

लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम के लेनदेन भारतीय फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के अंतर्गत आता है और भारतीय रिज़र्व बैंक से स्वीकृत है ,जब तक की इनकी कुछ शर्तें पूरी नहीं होती ,जैसे की प्रेषण उन जगहों में न होना जो  फाइनेंसियल एक्शन टास्क फार्स (एफ. ए. टी. एफ) द्वारा स्वीकृत है वह 'गैर सहकारी देशो और क्षेत्रो' के अंतर्गत आते है |

योजना की रूपरेखा भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2004 में पहली बार लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम के दिशानिर्देश जारी किये और तबसे नियमित रूप से इसे अपडेट रखा | जून 2015 के अपडेट के अनुसार, एक निवासी भारतीय के रूप में , आप एक वित्तीय वर्ष में 2,50,000  $ या उस के बराबर की कोई मुद्रा विदेश भेज सकते हैं|

यह एक वित्तीय वर्ष में भेजे जाने वाली अधिकतम सीमा है -2,50,000$ |अगर आप एक साल में कुल अनुमत राशि तक भेज चुके हैं ,तो आप स्वीकृत सीमा तक पहुंच चुके हैं और इससे ज्यादा शेष वित्तीय वर्ष के लिए किसी भी देश में नहीं भेज सकते हैं |

एल.आर.एस  के अंदर प्रेषण की संख्या की कोई सीमा नहीं है, हालांकि कूल राशि,एक वित्तीय वर्ष में ,अनुमत सीमा के अंतर्गत होनी चाहिए | इसके अलावा यह सीमा किसी भी अनुमत चालू खाता या कैपिटल खाता या एक साथ दोनों के लेन-देन के लिए लागू है |

इसीलिए यदि आप विदेश पैसे भेजना चाहते हैं तो आगे बढिये | सिर्फ सीमा के अंदर रहिये और सुनिश्चित कीजिये की प्राप्तकर्ता एफ. ए. टी. एफ  के अंतर्गत ब्लैकलिस्टेड देशो की सूची में तो नहीं आता | भारतीय रिज़र्व बैंक के इस विषय से सम्बंधित कुछ अन्य अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नो का विवरण यहाँ दिया गया है 

योजना उद्देश्य :

लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम, 2004 में विदेशी मुद्रा प्रवाह एवं एक्सचेंज दर के अप्प्रेसिअशन की जांच के लिए पहली बार लागू हुआ था |

इस योजना ने न केवल निवासी नागरिको को अपने रुपये बदलने और विदेश में रह रहे अपनी सम्बन्धियों को पैसे भेजने की अनुमति दी, अपितु, भारतीय रिज़र्व बैंक की सहमति के बिना विदेशो में निवेश की भी अनुमति दी, जब तक की निवेश सीमा अनुमत सीमा के अंतर्गत हो |

( यह सीमा 2004 से नियमित रूप से संसोधित की जा रही है )

लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम एक अच्छा विचार है उन लोगो के लिए, जो अपने निवेश राशि को विदेश इक्विटी और प्रॉपर्टी में बाँट देते है | इस योजना के अंतर्गत, भारतीय रिज़र्व बैंक के नियमो का पालन करते हुए, ,लोग शेयर्स और डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स या कोई और एसेट्स -जिसमे भारत के बाहर की प्रॉपर्टी भी शामिल हो सकती है - उसे रख सकते है |

फिर भी, यह देखा जा रहा है की पैसो को निवेश के लिए कम रखा जा रहा है और प्रेषक के परदेश में पढ़ रहे बच्चो की पढाई,यात्रा और अन्य रिश्तेदारों के भुगतान के लिए अधिक जा रहा है | मीडिया रिपोर्ट ने भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़ों अनुसार बताया है की अप्रैल 2017 से जनवरी2018 के बीच 8 .2  $ करोड़ रुपये भेजे गए हैं जिसमे 90 %इसी के लिए थे|

भारतीय रिज़र्व बैंक के संसोधन :

जल्द ही, सेंट्रल बैंक ने इस योजना के दुरुपयोग और एल.आर.एस के संदिग्ध लेनदेन के मामले सामने आये ,जो की मनी लॉन्डरिंग के लिए एक मार्ग बन गया था | राउंड ट्रिपिंग के भी मामले सामने आये ,और भारतीय रिज़र्व बैंक ने कंपनियों को इससे सम्बंधित नोटिस भेजे |

इसके बाद इस वर्ष अप्रैल ५ और जून ६ को ,भारतीय रिज़र्व बैंक के कुछ संसोधन हुए जिसमे एल.आर.एस के लेनदेन और भी कठोर और जवाबदेही हो गया है |

अप्रैल के संसोधन व्यक्तिगत के मुकाबले ,बैंको पर ज्यादा केंद्रित है, जिससे बैंको में रोज़ के लेनदेन की जानकारी को रोज़ाना अपलोड करना अनिवार्य हो गया है ताकि सब बैंक आपस में जुड़े रहे |आर.बी.आई ने देखरेख में सुधार और एल.आर.एस के सीमा के अनुपालन को ध्यान में रखते हुए यह किया है | 


जून के संसोधन में प्रेषक जो की आप हैं ,उनके लिए दो अपग्रेड शामिल हुए | पहला, आर.बी.आई ने प्रेषक के परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) को सभी लेन-देन के लिए अनिवार्य कर दिया,जैसा पहले नहीं था | दूसरा, इसने 'नज़दीकी रिश्तेदार' की परिभाषा पर स्पष्टता लायी जिसका बहुत बार दुरूपयोग होता था |

आर.बी.आई की जारी सुचना अनुसार कंपनी एक्ट 1956 की जगह कंपनी एक्ट 2013 के परिभाषा अनुसार कहा गया " 'रिश्तेदार' की परिभाषा का समन्वयन तय किया जा चूका है " |2013 के एक्ट अनुसार 'नज़दीकी रिश्तेदार की परिभाषा के अंतर्गत "माता पिता ,पति या पत्नी, बच्चे और उनके जीवन साथी आते हैं जो की सग्गे रिश्तेदार हैं |


आखिरी शब्द 

अगर आप विदेश पैसे भेजना चाहते हैं तो याद रखिये लिबरलिज़्ड रेमिटेंस स्कीम  पूर्णतः कानूनी वैद लेन देन है | परन्तु आप आर.बी.आई के वेबसाइट पर ज़रूर जाये और वहाँ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नो को पढ़े ,जिनकी आपको जानकारी होनी चाहिए |

उदाहरण के लिए , केंद्रीय सर्कार द्वारा प्रतिबंधित फॉरेन एक्सचेंज के लेन-देन की निकासी,जो की लाटरी में जीत कर मिल सकती है ,इस बारे में जानना अच्छी बात हो सकती है |' क्या किया जाना चाहिए और क्या नहीं' इस विषय में पूर्णतः ज्ञान आपको प्राधिकारों के झमेलों से बचा सकता है |

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