चार कारण जिससे भारत का लिंग कैप इंडेक्स नीचे गिर गया है । | Tomorrowmakers

क्यों पुरुषों की आमदनी महिलाओं से ज़्यादा होती है ? यहाँ कुछ प्राथमिक कारण दिए गए हैं जिस वजह से भारत में लिंग गैप और बढ़ रहा है।

Reasons why India ranks low in gender gap

विश्व आर्थिक मंच की वैश्विक लिंक गैप रिपोर्ट 2017 के मुताबिक़ , भारत २१ पायदान नीचे चला गया है  । और लिंग गैप इंडेक्स में 108 वें स्थान पर है, अपने पड़ोसी देश चीन और बांग्लादेश के भी पीछे। यह मुख्यत महिलाओं की अर्थव्यवस्था और कम आमदनी में कम भागीदारी होने के कारण है।
 आइए नज़र डालते हैं कि क्यों भारत कई सालों से अभी तक इस लिंग गैप को ख़त्म करने में पीछे रह गया है।
 
 

महिलाओं की भारतीय अर्थव्यवस्था में भागीदारी में कमी:
 
 
जब बाद महिलाओं की अर्थव्यवस्था में भागीदारी की आती है तो भारत 139 वें स्थान पर है, जो इस उपनिवेश में नीचे से छठवें स्थान पर है।
 
 

क्या आप आश्चर्य चकित हैं क्यों भारत महिलाओं की अर्थव्यवस्था में इतनी कम भागीदारी है?


1.  एक रिपोर्ट के अनुसार:

• भारतीय महिलाएँ अलग अलग किरदार निभाते हुए कई तरह के सामाजिक दायित्व से बँधी होती है जैसे माँ का, पत्नी का, बहू का इत्यादी। इन ज़िम्मेदारियों के साथ, वे और किसी चीज़ पर ध्यान नहीं लगा पाती।
 
 

• भारतीय महिलाएँ टेक्निकल शिक्षा कमी ग्रहण करती है। इसी की बदौलत, वह कभी भी नेतृत्व या प्रबंधकीय भूमिकाएं, या विधायक या टेक्निकल विशेषज्ञ की भूमिकाएँ  नहीं लेती हैं।
 
 

• अधिकतर परिस्थितियों में, महिलाएँ मातृत्व हो या शिशु के जन्म के बाद अपना काम फिर से शुरू नहीं कर पाती क्योंकि  बाल विकास के शुरुआती समय पर वह बच्चों को पालने के अतिरिक्त ज़िम्मेदारी से भारित हो जाती है।
 
 

2. राजनीति में महिलाओं को प्रतिनिधित्व की कमी:
 

 
अंतर संसदीय संघ द्वारा जारी एक रिपोर्ट द्वारा, “ राज्यसभा और लोकसभा में महिला विधायकों का प्रतिशत् 11% और 11.5% क्रमशः है।
 
 

साफ़ तौर पर, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में कमी दिखरही है। एक मज़बूत महिला राजनैतिक नेता की भारत को बहुत ज़रूरत है। ताकि भारत राजनैतिक सशक्ति करण के क्षेत्र में अपनी रैंकिंग बनाए रख सके।
 
 

दुर्भाग्यवश, इस विधेयक के लिए लगातार विरोध होता है ताकि संसद में महिलाओं को आरक्षण ना मिल सके।
 
 नवीनतम एम एस आई के अनुसार,
 •भारतीय महिलाओं को पुरुषों से 20% कम वेतन मिलता है।
 • पुरुष औसतन 231 रूपया प्रति घंटे वेतनमान कमाते हैं।
 • जबकि महिलाएँ केवल 184.80 रूपया कमाती है।
 • हालाँकि काफ़ी सालों में लिंग वेतन गैप 24.8%,2016 से घटकर 5% पर आ गया है।
 • 0 से 2 वर्ष के अनुभवी पुरुष महिलाओं के मुक़ाबले, 7.8% ज़्यादा औसतन आमदनी कमाते हैं।
 • जबकि छह से 10 वर्ष के अनुभवी पुरुष, महिलाओं के मुक़ाबले 15.3% ज़्यादा कमाते हैं।
 

 3. महिला कर्मी के ख़िलाफ़ भेदभावपूर्ण मज़दूरी नीति:
 
 

महिला कर्मियों के अपने पसंदीदा क्षेत्रों में काम का चयन करने से पीछे हटने का यह 

1 बहुत बड़ा कारण है। वैश्विक लिंग गैप रिपोर्ट के अनुसार,” औसतन, 12 प्रतिशत पुरुषों के मुक़ाबले 66 प्रतिशत महिलाओं को काम का वेतन नहीं मिलता।”
 

   चहे वह कुशल या अकुशल नौकरिया हों, यहाँ बहुत से उदाहरण है जहाँ पुरुषों के        मुक़ाबले महिला कर्मियों को कम भुगतान किया जाता है।
 
 

4.  पर्याप्त और दुर्गम स्वास्थ्य सुविधाएँ:
 
 

स्वास्थ्य लिंग गैप में भारत नीचे से चौथे स्थान पर है और विगत 10 वर्षों में इसमें कोई भी सुधार नहीं देखा गया है।
 
 

भारत में स्वास्थ्य और अस्तित्व की संभावनाओं की पूरी तस्वीर ऊपर के आंकड़ों से साफ़ है। देश की महिलाओं के लिए, ऐसे हालात में बढ़ती भागीदारी के साथ विकास की एक नए युग को आगे बढ़ाना काफ़ी चुनौतीपूर्ण होगा।
 
 

निरक्षरता और लिंग असमानता को संबोधित करने के लिए कड़े कानूनों की अनुपस्थिति के कई और मुद्दे हैं जिनके कारण देश में लिंग गैप बढ़ रहा है।


 अंततः,अनेक कारणों से बढ़ते लिंग गैप और भारत का विश्व में निचला स्थान,यह साफ़ संकेत देता है कि सुधारात्मक कार्रवाई की सख़्त ज़रूरत है,और जल्द ही ज़रूरत है।  यह महत्वपूर्ण समय है जब हमें कुछ कड़े क़दम उठाने चाहिए जो कि दूर दृष्टिकोण के साथ विकास में सुधार एवं बढ़ोतरी लाएगा।

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