भारत में एसआईपी के माध्‍यम से बिटकॉइन और इथेरियम जैसी क्रिप्‍टोकरेंसी में कैसे निवेश करें?

एसआईपी के माध्‍यम से क्रिप्‍टो में निवेश करना निवेश की सबसे अच्‍छी रणनीति में बदल सकता है, क्‍योंकि इससे न केवल जोखिम कम होगा बल्कि आपके निवेश को भी क्रमबद्ध कर देगा और दीर्घकालिक धन उत्पन्न करने में आपकी मदद करेगा।

भारत में एसआईपी के माध्‍यम से बिटकॉइन और इथेरियम जैसी

क्रिप्टोकरेंसी आकर्षण का नया केंद्र है, क्‍योंकि पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों ने इसमें अविश्वसनीय लाभ देखा है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में, कुछ उतार-चढ़ाव आए हैं, जिसने निवेशकों को रूकने और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे बिटकॉइन, इथेरियम, शीबा इनु, डॉजक्वाइन, आदि जैसे क्रिप्टो में निवेश से जुड़े जोखिमों को कैसे कम कर सकते हैं।

हाल ही में क्रिप्टो करों के लागू होने और नियमों की प्रतीक्षा ने भी निवेशकों को इस बारे में जागरूक किया है कि अब क्या करना है और यह कैसे सुनिश्चित करें कि कड़ी मेहनत से कमाया गए पैसे का नुकसान ना हो।

इस प्रकार, इस लेख में, हम बताएंगे कि एक निवेशक रूप में, आपको रिकरिंग बाय प्‍लान (RBP) को क्‍यों अपनाना चाहिए, जो क्रिप्‍टो एसेट्स में निवेश करने का एक सिस्‍टमैटिक तरीका है जिसके माध्‍यम से आप न केवल जोखिम को कम कर सकते हैं बल्कि यह आपके निवेश को क्रमबद्ध करेगा और सुनिश्चित करेगा कि आप दीर्घकालिक धन उत्पन्न कर रहे हैं।

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क्रिप्‍टो में कैसे निवेश करें?

क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों के बीच सबसे बड़ा डर निवेश से जुड़ा जोखिम और बाजार का उच्च उतार-चढ़ाव है।

इसलिए, इन समस्‍याओं का समाधान करने के लिए, क्रिप्‍टो एक्‍सचेंज ने तीन प्रोडक्‍ट्स शुरू किये हैं जो एक-दूसरे के लगभग समान हैं, उनका नाम है:

  • सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs)
  • रिकरिंग बाय प्‍लान्‍स(RBPs)
  • क्रिप्‍टो इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स(CIPs)

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान आपको हर महीने एक विशिष्ट क्रिप्टो में एक विशेष राशि का निवेश करने की अनुमति देता है ताकि आप रुपये की औसत लागत की शक्ति का आनंद लें और आवेग में आकर ना ख्ररीदें।

रिकरिंग बाय प्‍लान्‍स सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्‍स के समान हैं, जिसे निवेशक मुख्य रूप से इक्विटी बाजार (यानी, शेयर मार्केट और म्यूचुअल फंड्स) में उपयोग करते हैं।

क्रिप्‍टो इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स भी सामान्‍य सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्‍स की तरह हैं, लेकिन इसके अलावा, वे विशेष रूप से हर हफ्ते क्रिप्टो में एक विशेष राशि का निवेश करने की सुविधा प्रदान करते हैं।

इन प्रोडक्‍ट्स के पीछे मुख्‍य उद्देश्य जोखिम को कम करना, निवेश को क्रमबद्ध तरीके से करना और क्रिप्टो की आवेगपूर्ण खरीद/बिक्री को दूर करना है। इसके साथ ही, ये प्रोडक्‍ट्स सुनिश्चित करते हैं कि निवेशक कंपाउंड रिटर्न का आनंद लेता है और दीर्घकालिक संवृद्धि पोर्टफोलियो बनाता है।

इस प्रकार, अधिकांश निवेशक अब एकमुश्त राशि का निवेश करने के लिए हर हफ्ते या हर महीने राशि के कुछ हिस्से को व्यवस्थित रूप से निवेश करने की तरफ जा रहे हैं।

इन प्‍लान्‍स के निम्न फायदे हैं:

  1. कम जोखिम प्रदान करते हैं
  2. क्रमबद्ध तरीके से निवेश सुनिश्चित करते हैं
  3. इन्हें होल्ड किया जा सकता है 
  4. रूपये की कीमत का औसत करने के लाभ प्रदान करता है
  5. बाजार के समय की परेशानी से बचाता है
  6. लंबे समय तक पैसा बनाए रखता है
  7. आवेगी खरीद या बिक्री ट्रेड्स से बचाता है
  8. वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देता है

हालांकि, यह ध्‍यान रखना चाहिए कि ये प्‍लान्‍स लंबी अवधि के निवेशकों के लिए शुरू किया गया है, और इस प्रकार, ट्रेडर्स और कम अवधि के निवेशकों को इससे अनेक लाभ नहीं मिल सकते हैं।

एसआईपी में कराधान और क्रिप्‍टोकरेंसी में एकमुश्त निवेश 

वित्त विधेयक ने क्रिप्टोकरेंसी को वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के रूप में वर्गीकृत किया है, इसके साथ ही केंद्रीय बजट 2022 में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के ट्रांसफर पर सेस और सरचार्ज के अलावा 30% कर लागू किया।

आयकर नियम वर्चुअल डिजिटल एसेट खरीदने पर की जाने वाली कटौती को छोड़कर किसी भी कटौती की अनुमति नहीं देते हैं। इस प्रकार, उम्मीद है कि माइनर्स को कटौती का दावा करके लाभ मिलेगा जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी को माइन करने के लिए बिजली पर खर्च किया गया पैसा, माइनिंग की महंगी मशीन खरीदने पर खर्च किया गया पैसा, और इसी तरह अन्‍य।

इसके साथ ही, निवेशक एक वर्चुअल डिजिटल एसेट में हानि की किसी अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट के मुनाफे के साथ भरपाई नहीं कर पायेंगे, यानी, यदि आपने बिटकॉइन में 1000 रुपये और इथेरियम में 500 रुपये का निवेश किया था, लेकिन बिक्री के समय, बिटकॉइन का आपका निवेश 800 रुपये हो गया जबकि इथेरियम का निवेश 1000 रुपये हो गया, इस मामले में, आपको 500 रुपये पर कर का भुगतान करना होगा, जो कि इथेरियम पर आपका लाभ है, और इससे बिटकॉइन के 200 रुपये के नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती।  

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने 1 जून से एक विशिष्ट सीमा से ऊपर वर्चुअल डिजिटल एसेट के सभी ट्रांसफर पर 1% स्रोत पर कटौती योग्य कर (TDS) लगाने की भी घोषणा की।

हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2022 में एसआईपी के माध्यम से क्रिप्टो पर कराधान से संबंधित कुछ भी स्पष्ट नहीं किया।

यह निर्धारित करने के लिए कि कौन सा वर्चुअल डिजिटल एसेट पहले बेचा गया था और कौन सा आखिरी है, अकाउंटिंग के दो तरीके हैं, एक फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (FIFO) है, और दूसरा लास्ट इन फर्स्ट आउट (LIFO) है, और दोनों तरीके में, खरीद/बिक्री की कीमतों में अंतर के कारण अलग-अलग कर होंगे।

भारतीय क्रिप्‍टो मार्केट का भविष्‍य

भारतीय क्रिप्टो मार्केट आसमान छू रहा है, नए निवेशक आक्रामक रूप से बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2021 में, लगभग दो करोड़ भारतीय निवेशकों ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया था, यद्यपि क्रिप्टो की कीमतें सर्वकालिक उच्च स्तर पर थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, माना जाता है कि भारतीयों के पास क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 5.3 बिलियन डॉलर का स्वामित्व है। 

इसके अलावा, CREBACO के अनुसार, भारत का क्रिप्टो-एसेट उद्योग 15 बिलियन डॉलर से अधिक का है, जिसमें 6 मिलियन से अधिक उपयोगकर्ता आबादी का लगभग 0.5% हिस्सा हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी के ऐसे उज्ज्वल भविष्य के साथ, यदि आप सिस्‍टमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स (SIP), रिकरिंग बाय प्‍लान (RBP) या क्रिप्टो इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स (CIP) के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में व्यवस्थित रूप से निवेश करेंगे, तो आप यह सुनिश्चित करेंगे कि लंबी अवधि में, आपके पास एक बेहतर पोर्टफोलियो के साथ विस्तृत संचित धन होगा।

सारांश 

अस्थिर क्रिप्टोकरेंसी मार्केट, नियमों की कमी के संदर्भ में संदिग्ध क्षेत्र, वर्तमान में लगाए गए उच्च कर, और पूरे निवेश को खोने का खतरा भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण जोखिम हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजेस ने रिकरिंग बाय प्‍लान (RBP), सिस्‍टमैटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स (SIP) और क्रिप्टो इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान्‍स (CIP) जैसे प्रोडक्‍ट्स पेश करके इन मुद्दों को हल करने का प्रयास किया है।

इन प्रोडक्‍ट्स के प्रमुख लाभ जोखिम को कम करना, क्रमबद्ध तरीके से निवेश करना और आवेगपूर्ण खरीद/बिक्री से बचना हैं।

संवादपत्र

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