स्टैंड उप इंडिया बजट २०१९ - इसमें उद्यमियों के लिए क्या है?

स्टैंड उप इंडिया का पूर्ण विवरण और उस पर केंद्रीय बजट २०१९ का प्रभाव

यह हैं स्टैंड उप इंडिया बजट २०१९ की सिफारिशें और योजना

२०१६ में स्टैंड उप इंडिया ऋण योजना इस उद्द्येश्य से शुरू की गई थी कि महिलाओं और अनुसूचित जाति और जनजाति उद्यमियों को इसका लाभ हो सके। इस योजना के अंतर्गत बैंक द्वारा या तो महिला को या फिर अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्य को १० लाख से १ करोड़ तक का ऋण प्रदान किया जा सकता है। ये ऋण उत्पादन, सेवाओं अथवा व्यापारिक क्षेत्र में greenfield व्यवसाय के लिए दिया जाता है। यदि ऋण के लिए आवेदन किसी व्यावसायिक उद्यम के लिए किया जाता है तो कम से कम 51% शेयर किसी महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति के पास होना चाहिए ।

योग्यता 

आवेदक महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति का व्यक्ति १९ या उससे अधिक उम्र का होना चाहिए। ऋण लेने का उद्द्येश्य एक greenfield परियोजना होना चाहिए अर्थात आवेदक के लिए यह उत्पादन, सेवाओं अथवा व्यापारिक क्षेत्र का पहला उद्यम होना चाहिए। आवेदक का किसी बैंक या वित्तीय संस्था पर किसी प्रकार का बकाया नहीं होना चाहिए।

लोन के सम्बन्ध में

देश के अनुसूचित व्यावसायिक बैंक की शाखाएं इस योजना को आवेदकों के लिए उपलब्ध करवा सकती हैं। अवधी पूर्ण और कार्यशील पूँजी दोनों की आवश्यकतानुसार १० से १०० लाख रुपये का ऋण दिया जा सकता है।

ऋण की राशि परियोजना मूल्य की 75% होगी। अगर आवेदक का योगदान तथा अन्य किसी योजना से प्राप्त समर्थन मिलकर परियोजना मूल्य के 25% से अधिक होगा तो ये प्रतिशत लागू नहीं होगा।

ऋण पर ब्याज दर उस श्रेणी का न्यूनतम होगा। इसके अतिरिक्त ब्याज दर MCLR 3% और tenor premium के कुल योग से अधिक नहीं होगा।

प्राथमिल सुरक्षा के अतिरिक्त बैंक ये निर्णय ले सकता की ज़मानत सुरक्षा अथवा स्टैंड उप इंडिया लोन के लिए क्रेडिट गारंटी फण्ड स्कीम की गारंटी द्वारा सुरक्षित किया जाए।

ऋण राशि का भुगतान ७ वर्षों में होना आवश्यक है। अधिकतम स्थगन अवधी १९ महीनों की है।

१० लाख तक की कार्यशील पूँजी को अधिविकर्ष के रूप में निकला जा सकता है। इससे अधिक की आवश्यकता के लिए कॅश क्रेडिट लिमिट का प्रयोग किया जायेगा। आसान निकासी के लिए Rupay डेबिट कार्ड का भी उपयोग किया जा सकता है।

बजट घोषणाएं 

हाल ही में वित्त मंत्री के बजट भाषण की घोषणा के अनुसार इस योजना को २०२५ तक के लिए बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्री ने इस योजना की उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस स्कीम से हमारे हज़ारों उद्यमियों को व्यवसाय एवं उद्योग स्थापित करने में सहायत मिली है। उन्होंने कहा कि बैंक व्यवसाय आधारित आवश्यकताएं जैसे मशीन इत्यादि खरीदने में वित्तीय सहायता करेगा।

हालाँकि विभिन्न राष्ट्रों से प्राप्त हुई रिपोर्ट के अनुसार इस योजना का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। ऐसा पाया गया है कि महाराष्ट्र के शहर जैसे मुंबई, पुणे, ठाणे, नागपुर एवं कोल्हापुर में राज्य का सबसे अधिक ऋण वितरण हुआ है। और दूसरी तरफ, Hingoli, जहाँ राज्य की 13% अनुसूचित जाति बसती है वहां ८० बैंक शाखाओं के होते हुए, एक भी व्यक्ति को लाभ नहीं हुआ। हाल ही में जुलाई २०१९ में तमिलनाडु के बैंकों को अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं को ऋण वितरण बढ़ाने के लिए कहा गया है।

भारतीय सरकार द्वारा तय किये गए लक्ष्य से उपलब्धि का स्टार काफी नीचे है। फिर भी २०२५ तक बढ़ा दिए जाने के कारण इस योजना को फलीभूत होने के लिए काफी समय मिल जायेगा, उन राज्यों में भी जहाँ अभी संभव नहीं हो पा रहा है।

Union Budget 2019 – Key Highlights पढ़िए, केंद्रीय बजट को और बेहतर समझने के लिए।

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