सुकन्या समृद्धि या पीपीएफ: अपनी बेटी के लिए निवेश का सही विकल्प कैसे चुनें? | Sukanya Samriddhi vs PPF

सुकन्या समृद्धि या पीपीएफ, कन्याओं के लिए बचत करने के लिए ज़रूरी नहीं कि आप एक विकल्प तक सीमित रहें. अलग-अलग तरह के एसेट क्लास में डायवर्सिफिकेशन करने से लंबी अवधि का बेहतर रिटर्न मिल सकता है.

सुकन्या समृद्धि या पीपीएफ अपनी बेटी के लिए निवेश का सही विकल्प कैसे चुनें

अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना माता-पिता के लिए हमेशा से पहली प्राथमिकता रही है. ज़्यादातर भारतीय दंपति, अगर वे एक बेटी के माता-पिता हैं, तो उसकी शिक्षा और शादी की योजना उसके जन्म के दिन से ही शुरू कर देते हैं. हालांकि, वे अक्सर यह तय नहीं कर पाते हैं कि सबसे शानदार रिटर्न पाने के लिए कहां और कितना निवेश करना चाहिए. 

आइए एक उदाहरण लेते हैं. कुछ समय पहले तक, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) को निवेश के लिए सबसे अच्छे फिक्स्ड रिटर्न के रूप में देखा जाता था क्योंकि रिटर्न पूरी तरह से कर टैक्स-फ्री होता है. हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में, कन्याओं के लिए समर्पित निवेश योजनाएँ - जैसे सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) शुरू की गई हैं.

चूंकि इन दोनों योजनाओं में कई समानताएं हैं, इसलिए माता-पिता के लिए दोनों में से किसी एक को चुनना कठिन हो गया है. यह आर्टिकल आपको दोनों योजनाओं के बारे में ज़्यादा जानने में मदद करेगा.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड

टैक्स बचाने के अलावा, पीपीएफ स्कीम सर्वोत्तम ब्याज दर देने वाले फिक्स्ड रिटर्न वाले निवेश विकल्पों में से एक है. ब्याज की वर्तमान दर 7.1% है, जो बैंक फिक्स्ड डिपॉज़िट (एक अन्य साधन जो भारतीय निवेशकों में बहुत लोकप्रिय है) की तुलना में काफी अधिक है.

पीपीएफ में आप छठे वर्ष के बाद आंशिक तौर पर पैसे निकाल सकते हैं. 15 साल के बाद आंशिक तौर पर पैसे निकालने या मैच्योरिटी पर कोई टैक्स लागू नहीं होता है. इसके अलावा, पीपीएफ अकाउंट न्यूनतम 500 रुपये के निवेश के साथ खोला जा सकता है, इस तरह यह ज़्यादा लोगों के लिए आसानी से लिया जाने वाला विकल्प बनता है. निवेश की जा सकने वाली अधिकतम राशि 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है और मैच्योरिटी की अवधि 15 वर्ष है. अपने बच्चे के लिए पीपीएफ खाता खोलना चाहते हैं? आपको यह जानना ज़रूरी है.

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सुकन्या समृद्धि योजना 

2015 में, केंद्र सरकार ने कन्याओं के स्वास्थ्य और वित्तीय कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम शुरू किया. एसएसवाई स्मॉल सेविंग्स स्कीम इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इससे निवेशकों को गारंटीड रिटर्न मिलता है. इसमें कन्या की ओर से 250 रुपये के न्यूनतम वार्षिक निवेश पर 7.6% का ब्याज मिलता है. ऊपरी सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ष है.

शर्त सिर्फ इतनी है कि बच्चे की आयु 10 वर्ष से कम होनी चाहिए. जिनकी दो बेटियां हैं, वे दो अलग-अलग एसएसवाई खाते खोल सकते हैं. जहां तक ​​टैक्स लाभों की बात है, एसएसवाई खाताधारक धारा 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये की कटौती का क्लेम कर सकते हैं. ब्याज से आय और मैच्योरिटी वैल्यू के साथ-साथ, रिटर्न भी टैक्स-फ्री हैं. एसएसवाई तब मैच्योर होती है जब लाभार्थी 21 वर्ष की आयु प्राप्त करती है.

तो कौन सा निवेश बेहतर है?

माता-पिता के लिए, सुकन्या समृद्धि योजना कई कारणों से पहली पसंद हो सकती है. पहला यह कि टैक्स लाभ लगभग एक जैसे होते हुए भी, एसएसवाई 0.5% अधिक रिटर्न देती है. इस मामले में एसएसवाई ने पीपीएफ, एनएससी और फिक्स्ड डिपॉज़िट और ऐसे ही दूसरे फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट से कहीं बेहतर रिटर्न दिया है. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि एसइसवाई कन्याओं के लिए एक समर्पित निवेश योजना है. जब तक बच्चे की उम्र 10 साल से कम है तब तक खाता कभी भी खोला जा सकता है. अन्य निवेश विकल्पों के विपरीत, एसएसवाई खाते की अवधि बढ़ाने की कोई सुविधा नहीं है, जो मैच्योरिटी पर अपने-आप बंद हो जाता है.

वहीं दूसरी ओर, पीपीएफ किसी भी लिंग के सभी लोगों के लिए है और यह रिटायरमेंट के बाद एक स्थिर आय देने के उद्देश्य से बनाया गया है. इसमें 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है, जिसे हर 5 साल में आगे बढ़ाया जा सकता है. इसलिए, हरेक योजना के लाभ, निवेशक के निवेश उद्देश्य के हिसाब से ही मिलते होते हैं.

न्यूनतम 1000 रुपये की राशि के निवेश के साथ, एक एसएसवाई खाता 8.4% का चक्रवृद्धि वार्षिक ब्याज देता है. हालांकि ब्याज दर को सालाना संशोधित किया जाता है, यह एक बहुत फायदेमंद निवेश विकल्प है. बिना किसी दंड या कर दायित्वों के आंशिक तौर पर पैसे निकाल सकते हैं. इसके अलावा, अगर कोई एसएसवाई खाता मैच्योरिटी पर बंद नहीं किया जाता है, तो उस पर ब्याज मिलता रहता है.

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डायवर्सिफिकेशन और लंबी अवधि के रिटर्न

निवेश करते समय बैक-अप विकल्प रखने की सलाह दी जाती है. यह एसएसवाई और पीपीएफ जैसे फिक्स्ड-आय निवेश विकल्पों पर भी लागू होता है. आखिरकार, ब्याज दरें परिवर्तन के अधीन हैं और भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि उनमें कब कटौती की जा सकती है. डायवर्सिफिकेशन से निवेशकों को हरेक नुकसान को घटाने और समय के साथ बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिल सकती है. उदाहरण के लिए, चूंकि एसएसवाई में कोई रिइन्वेस्टमेंट का विकल्प नहीं है, इसलिए लंबी अवधि में रिटर्न पाने के लिए पीपीएफ का लाभ उठाया जा सकता है. 

हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एसएसवाई और पीपीएफ दोनों अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हैं. जहाँ एक ओर एसएसवाई कन्या की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए है, वहीं पीपीएफ रिटायरमेंट आय के उद्देश्य को पूरा करता है. इसलिए, महंगाई के प्रभावों को मात देने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए. उदाहरण के लिए, 18 साल की अवधि के लिए 6000 रुपये प्रति माह की एसआईपी एक परिवार को 12% वार्षिक रिटर्न की दर से लगभग 50 लाख रुपये का फंड बनाने में मदद कर सकती है. 

छोटी अवधि के शिक्षा संबंधी खर्चों के लिए डैट म्यूचुअल फंड एक शानदार विकल्प हो सकता है. ये फंड सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट शेयरों में निवेश करते हैं, जो तुलनात्मक रूप से ज़्यादा टिकाऊ होते हैं और 5% -7% तक का स्थिर रिटर्न प्रदान करते हैं. अंत में, एक टर्म इंश्योरेंस प्लान माता-पिता की अचानक मृत्यु होने की स्थिति में कन्याओं के लिए ज़्यादा सुरक्षा प्रदान कर सकता है. पीपीएफ या म्यूचुअल फंड? अपने बच्चे की शिक्षा की ज़रूरतें पूरी करने के लिए किसमें निवेश करें?

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