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जब भी निवेश की बात आती है तो भारतीय निवेशकों के लिए सही विकल्प चुनना काफी मुश्किल हो जाता है।

What are tax-free bonds and how they work

जब भी निवेश की बात आती है तो भारतीय निवेशकों के लिए सही विकल्प चुनना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि निवेश साधनों की भरमार है। मसलन, मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना रिटर्न देने वाली निवेश योजना से लेकर कर योग्य और कर मुक्त रिटर्न जैसी योजनाओं की एक लंबी फेहरिस्त है। इसलिए सही निवेश साधन चुनना शायद उतना आसान नहीं है जितना लगता है। निवेशकों खासकर हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स (बड़ी पूंजी वाले निवेशक) के लिए बेहद लोकप्रिय निवेश विकल्पों में से एक है कर-मुक्त बॉन्ड। आइये जानते हैं कि ये बॉन्ड क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं?

कर-मुक्त बॉन्ड क्या है: बॉन्ड निश्चित आय वाला साधन है जिसमें कूपन दर ब्याज की व्यवस्था है। यह निश्चित कार्यकाल के लिए जारी किया जाता है। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कर मुक्त बॉन्ड से अर्जित ब्याज कर मुक्त होता है। साधारण शब्दों में, आप किसी भी आय स्लैब में रहें आपको इसकी ब्याज आय पर आयकर का भुगतान नहीं करना पड़ता है। कर मुक्त बॉन्डों के जरिए धन जुटाने वाले कुछ सार्वजनिक उपक्रम हैं आईआरएफसी, पीएफसी, एनएचएआई, हुडको, आरईसी, एनटीपीसी और भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी।

बॉन्ड की अवधि आमतौर पर 10/15 या 20 साल होती है। वे शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होते हैं ताकि निवेशक उसे बेचकर बाहर निकल सकें। बॉन्ड कर-मुक्त, सुरक्षित, बेचकर बाहर निकलने योग्य (रिडीमबल) और गैर-परिवर्तनीय होते हैं।

कर स्थिति: अर्जित ब्याज आय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (15) (iv) (एच) के तहत कर से मुक्त है। हालांकि, ऐसे बॉन्डों में किए गए निवेश की मात्रा पर कोई कर लाभ नहीं मिलता है। इसके अलावा, ब्याज आय पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाता है। लेकिन, आवेदन करते समय आवेदन की रकम पर जरूर टीडीएस नियम लागू होते हैं।  

ऐसे बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होते हैं और केवल डीमैट खातों के माध्यम से ही इसमें कारोबार किया जाता है। यदि एक्सचेंजों पर उन्हें बेचने पर कोई पूंजीगत लाभ मिलता है, तो उस पर कर देना होता है। यदि कोई निवेशक एक साल के भीतर ही स्टॉक एक्सचेंजों पर कर मुक्त बॉन्ड बेचता है तो उसकी बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर उस निवेशक की कर दर के अनुसार लगाया जाता है। यदि कर-मुक्त बॉन्ड एक साल के बाद बेचा जाता है तो पूंजीगत लाभ पर 10.3 फीसदी की दर से कर देना होता है। साथी ही इंडेक्सेशन (सूचीकरण) का भी कोई लाभ नहीं मिलता है।

फायदा: हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स (बड़ी पूंजी वाले निवेशकों) के बीच कर-मुक्त बॉन्ड काफी लोकप्रिय है, क्योंकि उन्हें एक ही जगह पर काफी बड़ी रकम निवेश करने का मौका मिलता है। उन्हें तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वे मुख्य रूप से सरकारी संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं। साथ ही क्रेडिट रेटिंग्स एजेंसी से उन्हें उच्च निवेश ग्रेड रेटिंग्स मिलती है। यानी उनमें निवेश काफी भरोसेमंद माना जाता है। इसके अलावा, उच्च आयकर स्लैब वालों के लिए कर चुकाने से पहले का प्रभावी रिटर्न काफी अधिक होता है। कर- मुक्त बॉन्ड कम जोखिम वाले प्रोडक्ट होते हैं, क्योंकि कर चुकाने से पहले का प्रभावी रिटर्न काफी अधिक होता है। अनिल रेगो, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और संस्थापक, राइट होराइजन्स कहते हैं, "अगर हम वित्तीय योजना के नजरिये से कर-मुक्त बॉन्ड को देखें तो यह कम जोखिम वाला निवेश साधन है। लेकिन अधिक जोखिम उठाने वाले निवेशक भी इसमें निवेश कर सकते हैं क्योंकि इसमें मिलने वाला रिटर्न कर-मुक्त है। इसलिए अगर इस पर कर चुकाने के बाद रिटर्न की गणना करें तो यह काफी अधिक होगा। इसमें निवेशकों को कर-मुक्त आय तो मिलती ही है, उनकी पूंजी भी सुरक्षित रहती है।"

उच्च कर स्लैब में आनेवाले लोगों के उपयुक्त: 30.9 फीसदी आयकर का भुगतान करने वाले उच्च कर स्लैब में आने वाले लोगों के लिए कर-मुक्त बॉन्ड उपयुक्त है। मान लीजिए, कोई बैंक अपनी जमा राशियों पर 7.5 फीसदी सालाना रिटर्न देता है। चूंकि फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज पूरी तरह से कर योग्य है, इसलिए ब्याज आय कुल आय में जोड़ दी जाती है। इसलिए, 30.9 फीसदी कर देने वालों के लिए शुद्ध आय 5.18 फीसदी होगी, जो कि बचत खातों की पेशकश की तुलना में अधिक है।

इसका क्या मतलब है: इसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति जो 30.9 फीसदी कर का भुगतान करता है, अगर वह सालाना 8.68 फीसदी से ज्यादा रिटर्न देने वाले कर योग्य निवेश साधन में पैसा लगाता है, तभी कोई फायदा होगा। 8.68 फीसदी रिटर्न देने वाला कर योग्य निवेश 30.9 फीसदी के टैक्स के बाद गिरकर 6 फीसदी पर आ जाएगा। हालांकि, वास्तव में, बैंक फिलहाल अपनी जमा राशियों पर करीब सालाना कर योग्य 7.5 फीसदी रिटर्न दे रहे हैं, 10 साल की जमा राशियों पर भी। अगर कोई 20.6 फीसदी कर दे रहा है तो उसके लिए भी कर-मुक्त बॉन्ड उपयुक्त है।

ये कैसे काम करते हैं: जारीकर्ता अपने बॉन्ड पर निवेशकों को उसे जारी किए जाने के समय के आसपास सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाली यील्ड जितना ब्याज यानी रिटर्न की पेशकश कर सकता है। एक बार ब्याज तय कर देने और पेशकश करने के बाद यह पूरे कार्यकाल के लिए तय हो जाएगा। ब्याज दर दो कारकों पर निर्भर करती है - एक, जारीकर्ता की रेटिंग और दूसरी, निवेशक खुदरा है या हाई नेट वर्थ (बड़ी पूंजी वाला)।

एएए रेटिंग वाले कर मुक्त बॉन्ड के मामले में खुदरा निवेशकों के लिए ब्याज दर सरकारी प्रतिभूति दर (जी-सेक रेट)से 0.5 फीसदी कम और दूसरे सभी निवेशकों के लिए 0.8 फीसदी कम रहती है। एए+ रेटिंग वाले कर मुक्त बॉन्डों पर ब्याज दर एएए रेटिंग वाले कर मुक्त बॉण्डों की तुलना में 0.10 फीसदी और एए या एए- रेटिंग वाले कर मुक्त बॉन्डों के लिए ब्याज दर एएए रेटिंग वाले कर मुक्त बॉन्डों की तुलना में 0.20 फीसदी अधिक होगी।

हर इश्यू में 10 लाख रुपये तक निवेश करने वाला खुदरा व्यक्तिगत निवेशक माना जाता है। इसमें अनिवासी भारतीय (प्रत्यावर्तन या गैर-प्रत्यावर्तन आधार पर) शामिल हैं। दूसरी ओर, 10 लाख रुपये से अधिक निवेश करने वालों को हाई नेट वर्थ इन्वेस्टर्स (बड़ी पूंजी वाला निवेशक) माना जाता है।

 

नुकसान: कर मुक्त बॉन्ड में लंबी अवधि के लिए निवेश करना होता है। इसलिए लंबी अवधि का लक्ष्य ध्यान में रखकर ही इसमें निवेश करना चाहिए। इसलिए आप इस बात को लेकर आश्वस्त हो जाएं कि इन पैसों का इस्तेमाल आप लंबी अवधि तक नहीं करेंगे।

कर मुक्त बॉन्ड में तरलता कम है। आम तौर पर वे शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होते हैं ताकि  निवेशकों को इससे बाहर निकलने का रास्ता मिल सके। लेकिन, बॉन्ड की बिक्री के समय मूल्य और वॉल्यूम खेल बिगाड़ सकते हैं।

इसके अलावा कर-मुक्त बॉन्डों पर ब्याज का भुगतान सालाना होता है। छमाही ब्याज भुगतान के समय यह दर आमतौर पर 0.15 फीसदी कम हो जाती है। जब तक ब्याज आय की ठीक-ठीक गुंजाइश ना हो, तब तक बाजार आधारित लंबी अवधि के निवेश साधनों में पैसा नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि कोई जरूरी नहीं है कि बाजार आधारित लंबी अवधि के निवेश साधन अधिक रिटर्न दें। रेगो कहते हैं, "अगर किसी ने एक संचयी ब्याज भुगतान यानी परिपक्वता पर पूंजी के साथ ब्याज भुगतान का विकल्प चुना है तो उसी का उपयोग तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।"

निष्कर्ष: कर मुक्त बॉन्ड सेवानिवृति या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और शादी जैसे लंबी अवधि का लक्ष्य हासिल करने के लिए संपत्ति निर्माण करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। मुख्य रूप से कर देनदारी के बोझ को कम करने में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए अपने कर की दर, कर दायित्व और दीर्घकालिक आवश्यकताओं का ठीक से मूल्यांकन करने के बाद ही उनमें निवेश करें।

(विस्तृत सलाह के लिए पाठक अपने कर सलाहकार से परामर्श करें।)

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स