सड़क दुर्घटनाओं के बारे में ये जरूर जानिए | Tomorrowmakers

साल 2014 में हर घंटे हुईं 56 सड़क दुर्घटनाएं और 16 मौतों को देखते हुए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) लाइसेंस जारी करने में सख्त रवैया अपना रहे हैं। लेकिन, असली जिम्मेदारी गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति की होती है।

Things you need to know about road accidents

भारत में सड़क दुर्घटनाएं मृत्यु की मुख्य वजहों में से एक बन गई हैं। साल 2014 में ही, 489,400 सड़क दुर्घटनाएं हुईं थीं, जिसमें दोपहिया वाहन सबसे घातक साबित हुए और कुल दुर्घटनाओं में इनका हिस्सा 27.3 फीसदी रहा। वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में कार और जीप की हिस्सेदारी 22.7 फीसदी थी। दुर्घटनाओं में 137,000 लोगों की मृत्यु हुईं, ये आंकड़ा साल 2014 में हुए आतंकी हमलों के हताहतों की संख्या के 100 गुना से भी ज्यादा है। भारत की राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा कारें हैं और बाकी शहरों की तुलना में यहां सबसे ज्यादा यानि रोजाना 5 व्यक्तियों की कार दुर्घटना में मृत्यु होती है। 

दिलचस्प बात ये है कि पूरे देश में दुर्घटनाओं का प्रमाण एक समान नहीं है

भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजहें ये हैं: 

1. ज्यादा रफ्तार से गाड़ी चलाना
पिछले साल देश में हुईं आधे से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं (55 फीसदी) और मृत्यु (56.2 फीसदी) के पीछे ज्यादा रफ्तार से गाड़ी चलाने वाले चालकों का हाथ था। इसकी वजह ये है कि ज्यादा रफ्तार में चालक गाड़ी का नियंत्रण खो बैठता है और गति कम करने के लिए ज्यादा वक्त और फासले की जरूरत पड़ती है जो भीड़ भरी भारतीय सड़कों पर मिलना मुश्किल है। जितनी ज्यादा रफ्तार होती, उतनी ज्यादा टक्कर होने की संभावना होती है और किसी की जान का खतरा बढ़ता है। इसलिए, जरूरी है कि आप उतनी ही रफ्तार से गाड़ी चलाएं जिसमें आपका गाड़ी पर नियंत्रण बना रहे; खासतौर पर शहर के अंदर, जहां दूसरे वाहन और पैदल यात्री मौजूद होते हैं। 

2. चालक का ध्यान बंटना
चालक का ध्यान भंग करने वाली चीजों, चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हों, से बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं, क्योंकि इनकी वजह से चालक का ध्यान सड़क से हटता है। आपने अंदाजा लगा लिया ही होगा कि ध्यान हटने की सबसे बड़ी वजह गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल है। हेडसेट और ईरफोन काम लाए जा सकते हैं, लेकिन ये भी चालक का ध्यान बांटने का काम करते हैं, क्योंकि चालक का ध्यान बात करने में बंट जाता है, खासतौर पर अगर फोन जरूरी काम से संबंधित है। 

मोबाइल फोन के अलावा चालक का ध्यान बांटने के कारण गाड़ी के अंदर और बाहर मौजूद होते हैं - जैसे सहयात्रियों की बातचीत, अचानक सड़क पर आए पैदल यात्री या जानवर, कार के अंदर चल रहा संगीत, सड़क किनारे लगे आकर्षक इश्तहार, आदि। चाहे आप अपनी गाड़ी चलाने की क्षमता को लेकर कितने भी आश्वस्त क्यों न हों, गाड़ी चलाते वक्त आपका पूरा ध्यान सड़क पर होना जरूरी है। 

3. लाल बत्ती को अनदेखा करना
ये काफी देखने में आता है कि चालक लाल बत्ती को अनदेखा करते हैं या फिर लाल बत्ती होने के पहले चालक गाड़ी की रफ्तार बढ़ा देते हैं ताकि उन्हें रुकना न पड़े। दोनों स्थितियों में लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है क्योंकि पैदल यात्री और दूसरे वाहन को उम्मीद होती कि गाड़ी की रफ्तार कम होगी और इस वजह से भयंकर दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

4. नशे में गाड़ी चलाना
हाल के मामलों को मीडिया द्वारा प्रचारित किए जाने और दोषियों को सख्त सजा मिलने की वजह से नशे में गाड़ी चलाने के मामलों में कमी आई है। हालांकि, साल 2014 में 10.5 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं और 6.8 फीसदी मृत्यु की वजह चालक द्वारा शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन रही। ज्यादा शराब की मात्रा होने का मतलब है ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी, दृष्टि पर असर, जोखिम उठाने की ललक बढ़ना जिसका नतीजा होता गाड़ी चलाने में लापरवाही। शोध से पता चला है कि खून में शराब की मात्रा में 0.05 की हर बढ़त से दुर्घटना होने की संभावना दोगुनी हो जाती है। सरकार और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा शुरू किए गए जागरुकता अभियान शराब पीकर गाड़ी न चलाने की चेतावनी देते हैं। अगर आपने मित्रों, परिवारजन या सहयोगियों के साथ शराब पी है, तो शराब न पीने वाले मित्र को आपको घर छोड़ने के लिए कह सकते हैं, टैक्सी कर सकते हैं या अगर पहले से योजना बनाई हो तो किसी ड्राइवर को बुला सकते हैं। 

5. यातायात नियमों का उल्लंघन करना
यातायात नियम, जिसमें सीटबेल्ट पहना शामिल है, बनाएं गएं हैं और सभी चालकों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य है। गलत लेन में गाड़ी चलाने या गलत तरीके से ओवरटेक करने से गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। 

सड़क दुर्घटनाओं का सबसे ज्यादा निर्दयी पहलू है बढ़ते हिट एंड रन मामले, जिनमें गलती करने वाला चालक दुर्घटना में घायल हुए व्यक्तियों और क्षति पहुंचे वाहनों का हाल जानने के लिए रुकता नहीं और दुर्घटनास्थल से भाग जाता है। साल 2013 के मुकाबले साल 2014 में ऐसे मामलों में 7.6 फीसदी की बढ़ोतरी नजर आई और पिछले साल 53,334 हादसों में 19,569 लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे मामले और दु:खद होते हैं क्योंकि अधिकतर हताहतों को बचाया जा सकता है, अगर गलती करने वाले चालक ने गाड़ी रोके और सुनिश्चित करे पीड़ितों को जरूरी चिकित्सीय सहायता मिले। 

पिछले साल हर घंटे हुईं 56 सड़क दुर्घटनाएं और 16 मौतों को देखते हुए आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) लाइसेंस जारी करने में सख्त रवैया अपना रहे हैं और बीमा कंपनियां लापरवाही से और नशे में गाड़ी चलाने की वजह से क्लेम लेने वाले पॉलिसीधारकों का रिनूअल प्रीमियम बढ़ा रही हैं। उसी तरह, सरकार और गैर सरकारी संगठनों के लोगों में लापरवाह, नशे में और असावधानी के साथ गाड़ी चलाने के खतरों को लेकर जागरुकता बढ़ाने के प्रयासों में भी बढ़ोतरी हुई है। 

लेकिन, असली जिम्मेदारी गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति की होती है, जिसके पास सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाने या फिर अपनी जिंदगी, सहयात्रियों की जिंदगी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जिंदगी खतरे में डालने का विकल्प होता है। समझने की बात ये है कि चाहे भाग्यवश अब तक आप सड़क दुर्घटना होने से बचे हुए हैं, लेकिन मानना कि आपके साथ दुर्घटना नहीं होगी ये सही नहीं है। जरूरी नहीं है कि आपकी गलती हो, लेकिन अगर दुर्घटना होती है तो दूसरे पर उंगली उठाने से नुकसान और क्लेश की भरपाई नहीं की जा सकती है। 

 

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