एसबा : क्या और क्यों

भारत में बाजार नियंत्रक के रूप में सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने सामान्य शेयर के सार्वजनिक निर्गम के लिए निवेशकों द्वारा आवेदन करते समय भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक विकल्प का सुझाव दिया है ।

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भारत में बाजार नियंत्रक के रूप में सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने सामान्य शेयर के सार्वजनिक निर्गम के लिए निवेशकों द्वारा आवेदन करते समय भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक विकल्प का सुझाव दिया है । यह विकल्प एसबा यानि (एप्लिकेशन सपोरटिड बाई ब्लोक्डअमाउंट) के रूप में है।

वर्तमान प्रणाली में निवेशकों को आईपीओ शेयरों के लिए आवेदन करते समय भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट या चेक देने अनिवार्य थे लेकिन एसबा ने इस अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। एसबा प्रणाली के अंतर्गत निवेशक सीधे बैंक के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। बैंक इसके एवज में निवेशक की जमा को एक प्रकार से गिरवी रख लेता है और जब तक निर्गम पूरी तरह से आबंटित नहीं हो जाते हैं तब तक यह जमा राशि बैंक में रिजर्व रहती है।

एसबा के माध्यम से भुगतान के दो फायदे हैं। पहला,निर्गम के रिफ़ंड के साथ जुड़ी हुई सामान्य समस्याओं से निवेशक व्यक्तिगत रूप से बच जाता है, और  दूसरा, यदि एसबा फंड ब्याज वाले खातों में जमा है तो आवेदन प्रक्रिया के दौरान भी निवेशकों को ब्याज के रूप में आय का अर्जन हो जाता है।

 

निवेशकों  के लिए एसबा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल एवं  जानकारी :

एसबा क्या है ?

एसबा एक प्रकार की आवेदन के भुगतान की प्रक्रिया है जिसके अनुसार किसी शेयर के लिए आवेदन करते समय आवेदन राशि को बैंक अकाउंट में रोक कर रखने का अधिकार बैंक के पास होता है ।

इसका मतलब है की निवेशक के बैंक खाते से आवेदन राशि (यदि आवेदन एसबा के द्वारा किया गया है ) को तभी डेबिट किया जाएगा जब उसके द्वारा किया गया आवेदन, आबंटन के लिए चुन लिया गया है और इसी के आधार पर आईपीओ स्टॉक का आबंटन भी किया जा रहा है , या फिर निर्गम वापस ले लिए गए  हैं और या फिर, ऐसा मान लिया गया है की निर्गम फेल हो गए है ।

यदि निवेशक ने अधिकार निर्गम के लिए आवेदन किया है तो, आवेदन राशि बैंक खाते से तभी डेबिट की जाती है जब रजिस्ट्रार से ऐसा करने के निर्देश आ जाते हैं ।

दरअसल सेबी ने एसबा प्रक्रिया को प्रयोग के आधार पर या पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर केवल अधिकार निर्गमन के संबंध में ही मंजूरी दी है। कंपनी के अंशधारक,एसबा का प्रयोग अधिकार निर्गम के आवेदन राशि के लिए रिकॉर्ड तारीख तक कर सकते हैं, बशर्ते वे:

1. डीमैट शेयर्स रखते हैं और वैधानिक अधिकार के लिए आवेदन किया हो या फिर डीमैट प्रारूप में ही अतिरिक्त शेयर्स के लिए आवेदन किया हो।

2. इसके वैधानिक अधिकार को पूरी तरह से या आंशिक रूप से त्याग न दिया हो

3. निर्गम को किसी दूसरे के पक्ष* में छोड़ (रीनाउंसी) न दिया हो

4. एससीबी के द्वारा संचालित बैक खाते के द्वारा आवेदन किया हो

* रीनाउंसि कौन होते है: कंपनी वर्तमान अंशधारकों को प्रतिभूति, उनके द्वारा अधिग्रहित प्रतिभूतियों की संख्या के अनुपात में जारी करती है। अंशधारक इस कंपनी के इस प्रस्ताव को ठुकरा भी सकते हैं और किसी दूसरे व्यक्ति के पक्ष में एक निश्चित रकम के बदले छोड़ भी सकते हैं। यह स्थिति रीनाउंसि कहलाती है।

चेक के स्थान पर एसबा के माध्यम से आवेदन करने पर होने वाले लाभ:

एसबा के द्वारा आवेदन करने पर निम्नलिखित लाभ होते हैं :

1. निवेशक को आवेदन राशि के लिए चेक देने की जरूरत नहीं होती है। बल्कि जब निवेशक एसबा को जमा करता है तो बैंक को आवेदन राशि के बराबर रकम को रोक कर रखने के अधिकार होता है ।

2. निवेशक को रिफ़ंड के संबंध में भी परेशान होने की जरूरत नहीं होती है। इसका मुख्य कारण यह है की प्रतिभूतियों के लिए अनिवार्य आबंटन राशि, बैंक से अपने आप ले ली जाती है और यह भी तभी होता है जब आवेदन को आबंटन के लिए स्वीकार कर लिया जाता है ।

3. आवेदन राशि के बैंक में जमा होने के कारण, निवेशक उस राशि पर ब्याज भी कमा सकता है।

4. आवेदन पत्र बहुत सरल होता है।

5. निवेशक अपने जाने पहचाने मध्यस्थ-जो उसका अपना बैंक है, से व्यवहार करता है।

जो निवेशक एसबा का माध्यम अपनाते हैं उनके लिए केवल इसी प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना अनिवार्य नहीं है। बल्कि वे चाहें तो चेक के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।

क्या सभी निर्गमनों के आवेदन के लिए निवेशक एसबा प्रक्रिया का प्रयोग कर सकते हैं:

नहीं, एसबा केवल बुक-बिल्ट पब्लिक इशू पर ही लागू होता है, जो छोटे निजी निवेशकों को एक जैसा भुगतान का विकल्प प्रदान करता है। इसका मुखी कारण यह है की सेबी ने पायलट प्रयोग के तौर पर ही कुछ ही इशू पर एसबा को प्रयोग करने की अनुमति दी है।

विशेष: जब कोई कंपनी जनता को शेयर्सका प्रस्ताव करती है तो या तो ये प्रस्ताव आरंभिक जन प्रस्ताव (आईपीओ ) या फिर अनुसारित जन प्रस्ताव (एफपीओ) होता है। इसके अलावा यह प्रस्ताव या तो स्थिर मूल्य पर होता है या फिर कोई मूल्य-सीमा (जहां निवेशक मूल्य-सीमा का निर्धारण करते हैं) पर भी आधारित हो सकता है। मूल्य-सीमा के आधार पर शेयरों को प्रस्तावित किए जाने की प्रक्रिया को बूक-बिल्डिंग विधि कहते हैं।

क्या निवेशक एसबा के माध्यम से सार्वजनिक निर्गमन के आवेदन करने के लिए वर्तमान प्रार्थना पत्र का प्रयोग कर सकते हैं?

निवेशकों को प्रार्थना पत्र को बहुत ध्यान से जांच लेना चाहिए। सार्वजनिक निर्गमन की स्थिति में एसबा का आवेदन पत्र, वर्तमान आवेदन पत्र से थोड़ा अलग होता है।

ये आवेदन पत्र एससी एसबी की चुनी हुई शाखाओं पर उपलब्ध होते हैं। अधिकार शेयरों (राइट इशू ) के संबंध में, एसबा का कोई अलग फॉर्म नहीं होता है। बल्कि, निवेशक संयुक्त प्रार्थना पत्र में पार्ट ए के एसबा विकल्प का चयन करके भी यह काम कर सकते हैं ।

एसबा निविदा की वापसी और अस्वीकृति

निवेशक अपनी एसबा के प्रस्ताव को एक सामान्य पत्र के द्वारा वापस ले सकते हैं । यह पत्र उसी बैंक में जमा करना होता है जहां एसबा को जमा किया गया था। प्रार्थना पत्र पर अपने इशू के प्रार्थना पत्र का नंबर और यदि है तो लेन-देन पंजीकरण पर्ची है तो वह भी लगानी होती है।

निविदा समापन अवधि के बाद, वापसी प्रार्थना पत्र रजिस्ट्रार के पास भेज दिया जाता है जो, आबंटन निविदा को निरस्त करने के निर्देश कर देता है और आबंटन की प्रक्रिया के पूरा होने के बाद एससीएसबी को बैंक खाते में रोक कर रखी गयी प्रार्थना राशि को भी जारी करने का आदेश देता है ।

यदि एसबा में सही और पूरी जानकारी देने के बावजूद ‘गलत जानकारी या तथ्य’ के आधार पर प्रार्थना पत्र को अस्वीकृत किया  जाता है तो निवेशक एससीएसबी के पास अस्वीकृति संबंधी शिकायत लेकर जा सकता है । इस संबंध में बैंक को 15 दिन के अंदर ही जवाब देना होता है। यदि बैंक द्वारा दिया गया जवाब असंतोषजनक है तो निवेशक चाहे तो सेबी के निवेशक शिकायत केंद्र में भी इस विषय के बावत  संपर्क कर सकता है ।

यदि एसबा द्वारा दिया गया प्रार्थना पत्र वापस लिया जाता है तो क्या बैंक का खाता उसी समय खोल दिया जाता है ?

यदि निविदा अवधि में वापसी प्रक्रिया की जाती है तो एससीएसबी निविदा को निरस्त कर देता है और बैंक खाते में रखी प्रार्थना राशि जारी कर दी जाती है। 

यदि निविदा तिथि के बाद वापसी की जाती है तो एससीएसबी,निर्गम के आबंटन प्रक्रिया पूरी होने के बाद और रजिस्ट्रार के पास से पूरी जानकारी आने के बाद ही प्रार्थना राशि को जारी कर सकता है।

एसबा के द्वारा जमा किया जाने पर कुछ और आवश्यक तथ्य याद रखने चाहिए:

· निवेशक के लिए यह बिलकुल जरूरी नहीं है की उनका डिपोसिटरी पार्टीसीपेंट* अकाउंट एससीएसबी के पास हो जहां उनका फॉर्म जमा किया गया है ।

· निवेशकों को अपना एसबा केवल एससीएसबी के पास जमा करना अनिवार्य है ।

· निवेशक चाहें तो एसबा के जरिये या फिर वर्तमान प्रणाली के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं ।

· यदि निवेशक आवेदन करने के लिए दोनों प्रणालियों (एक जैसा पैन नंबर ) का उपयोग करते हैं तो यह स्थिति में यह एक से अधिक प्रार्थना पत्र माने जाएंगे और दोनों आवेदन अस्वीकृत कर दिये जाएंगे।

· आबंटन प्रक्रिया के अंतिम चरण में एसबा फॉर्म्स भी गैर-एसबा फॉर्म की तरह ही माने जाएंगे।

*भारत में, डिपोजीटरी पार्टीसीपेंट को एक डिपोजीटरी एजेंट माना जाता है । डिपोजीटरी वह संस्थान होता है जो बैंक की भांति काम करता है और जो निवेशकों द्वारा ग्रहीत प्रतिभूतियों (अंश,ऋणपत्र,म्यूचुअलफंड आदि )को  जो भौतिक सर्टिफिकेट न होकर डीमैट या इलेक्ट्रोनिक फॉर्म में होते हैं,के  खाते व्यवस्थित करते हैं

असफल या वापसी लिए गए इशू के संबंध में,एससीएसबी रजिस्ट्रार के पास से निर्देश आने के बाद ही बैंक खातों में से प्रार्थना राशि को जारी करने का काम करते हैं। दूसरी ओर, जो निवेशक किसी प्रकार की शिकायत करना चाहते हैं वो उस बैंक से संपर्क कर सकते हैं जहां उन्होने अपना प्रार्थना पत्र जमा किया था या फिर इस संबंध में रजिस्ट्रार के पास भी जा सकते हैं । 

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