क्रिप्टोकरेंसी क्या है? इसके बारे में सबकुछ जानें | What is Cryptocurrency?

क्रिप्टोकरेंसी में पैसे लगाने से पहले जान लें कि भारत में ये कानूनी है या नहीं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है इसके बारे में सबकुछ जानें

पिछले कुछ सालों से निवेश की दुनिया में बिटकॉइन, इथीरियम, टीथर, कार्डानो, पोल्काडॉट, रिपल और डोजकॉइन की काफी चर्चा है। दरअसल, ये सब क्रिप्टोकरेंसी हैं और अलग-अलग देशों की प्रचलित करेंसी यानी मुद्रा  जैसे कि अमेरिका का डॉलर, भारत का रुपया, जापान का येन, यूरोपीय संघ का यूरो, ब्रिटेन का पौंड-स्टर्लिंग से अलग हैं। अलग-अलग देशों की करेंसी की ही तरह क्रिप्टोकरेंसी में भी अरबों डॉलर के लेन-देन होते हैं, लेकिन दोनों में काफी अंतर है।

क्रिप्टोकरेंसी मतलब गुप्त करेंसी होता है। इसे वर्चुअल करेंसी, ई-करेंसी, डिजिटल करेंसी के नाम से भी जाना जाता है। ये हमेशा इलेक्ट्रॉनिक रूप में ही पाई जाती है। इसे सिर्फ इंटरनेट पर पा सकते हैं और अपने कम्प्यूटर, मोबाइल या टैबलेट में स्टोर कर सकते हैं। यानी इसे आप सिक्के या नोट की तरह ना तो अपने वॉलेट में रख सकते हैं, ना ही छु सकते हैं या देख सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है। आभासी का मतलब हुआ कि पौंड, डॉलर, रुपया, येन जैसी दूसरी मुद्राओं की तरह इसका कोई भौतिक स्वरुप नहीं है।

अल-सल्वाडोर को छोड़कर किसी भी देश की सरकार या केंद्रीय बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं दी है। यानी इसे अभी दुनियाभर में सर्वमान्य कानूनी मान्यता मिलना बाकी है। फिर भी इसका रुतबा लगातार बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर की नामी-गिरामी कंपनियां इसे भुगतान के तौर पर स्वीकार कर रही हैं।

सातोशी नकामोतो नामक अभियंता ने 2008 में कंप्यूटर नेटवर्किंग पर लेन-देन के लिए बिटकॉइन नामक क्रिप्टोकरेंसी का आविष्कार किया गया और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में 3 जनवरी 2009 को जारी किया। इसे कम कीमत पर खरीदकर ऊंचे दामों में बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं।  

इस तरह से बिटकॉइन दुनिया की पहली विकेंद्रित डिजिटल करेंसी है। बिटकॉइन समेत दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को क्रेडिट कार्ड की तरह लेन-देन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें क्रेडिट की कोई लिमिट नहीं है। इसका लेन-देन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज के जरिये किया जाता है। भारत में भी वजीरएक्स समेत कई क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज हैं। ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पर इन क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन होता है। इसमें जानकारी को बदलना या हैक करना या फ्रॉड करना नामुमकिन जैसा है। इसमें सभी लेन-देन कम्प्यूटरों के विशाल नेटवर्क में एन्क्रिप्टेड, कॉपीड और डिस्ट्रीब्यूटेड होते हैं। इस तरह की इनक्रिप्टेड या कोडेड करेंसी की संख्या करीब 4000 है लेकिन ज्यादातर लोग बिटकॉइन को ही जानते हैं। आप प्लेन टिकट, होटल की बुकिंग, कार, कॉफी समेत कई चीजों का भुगतान क्रिप्टोकरेंसी से कर सकते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी पर किसी व्यक्ति विशेष या सरकार या एजेंसी या रेगुलेटर का कंट्रोल नहीं है। इसका कंट्रोल इसकी खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के हाथों में सामूहिक तौर पर होता है। क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन करने के लिए आपके पास स्मार्ट फोन, लैपटॉप, टैबलेट, कम्प्यूटर के साथ ही इंटरनेट कनेक्शन होना जरूरी है।

दिग्गज क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज coinbase  पर 12 जुलाई 2021 को एक बिटकॉइन की कीमत करीब 25,51,357 और एक इथीरियम की कीमत करीब 1,59,845 थी। बिटकॉइन का मार्केट कैप करीब $635 अरब डॉलर है, यानी अकेले बिटकॉइन का बाजार पूंजीकरण कई देशों के जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद से अधिक है।

भारत में स्थिति:

भारत में सभी वाणिज्यिक और सहकारी बैंक, भुगतान बैंक, लघु वित्त बैंक, एनबीएफसी, भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल करेंसी में कारोबार जारी रखने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने दे दी है। लेकिन, इसके लिए जरूरी कानूनों और मानकों जैसे अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी), धन शोधन निवारण (एएमएल), वित्तपोषण का विरोध आतंकवाद (सीएफटी) और धन की रोकथाम के तहत विनियमित संस्थाओं के दायित्व प्रासंगिकता का अनुपालन सुनिश्चित करने के अलावा, लॉन्ड्रिंग अधिनियम, (पीएमएलए), 2002 विदेशों के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत प्रावधान प्रेषण का पालन करना जरूरी है। हालांकि, भारत में भी अभी क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता नहीं मिली है। लेकिन, केंद्र सरकार इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक जरूर पास करने वाली है। अगर ये कानून बन जाता है तो क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल लीगल टेंडर या करेंसी के तौर पर करना प्रतिबंधित हो जाएगा। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी के निर्माण, खरीदारी, होल्ड करने, बेचने, डील करने और जारी करने पर भी रोक लग जाएगी। 

क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के 7 खतरे:

-पहला खतरा: काफी रिस्की है। भयंकर उतार-चढ़ाव होता है।

-दूसरा खतरा: यह ना तो कमोडिटी है और ना ही करेंसी।

-तीसरा खतरा: क्रिप्टोकरेंसी के मुवमेंट का अनुमान लगाना मुश्किल है।

-चौथा खतरा: यह रेगुलेटेड नहीं है। जितने भी निवेश के साधन हैं, वो सब रेगुलेटेड हैं। हर किसी का कोई ना कोई रेगुलेटर है।

-पांचवां खतरा: भारत में इसकी कानूनी वैधता को लेकर संदेह। भारत में जो लोग बिटकॉइन में निवेश करना चाहते हैं वो इसकी कानूनी वैधता को लेकर उलझन में हैं।

-छठा खतरा: पोंजी स्कीम्स की तरह फर्जीवाड़े की पूरी आशंका। क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग को लेकर किसी भी तरह की स्पष्टता के अभाव में पोंजी स्कीम की तरह इसमें फर्जीवाड़े की काफी आशंका है।

-सातवां खतरा: गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की आशंका।

संबंधित लेख