Why learning share trading on YouTube could be your biggest mistake

शेयर बाजार में निवेश के लिए धड़ल्ले से चल रहे हैं यूट्यूब चैनल और, विडियो लेकिन क्या ये सुरक्षित हैं!

_YouTube पर शेयर ट्रेडिंग

Trading from YouTube: शेयर बाजार अपने पैसे को कई गुना बढ़ाने का एक तरीका है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह झटपट पैसा कमाने का भी एक रास्ता बन चुका है। पारंपरिक रूप से शेयर बाजार में निवेश करने की जगह अब युवाओं को डेरिवेटिव मार्केट में निवेश ज्यादा लुभा रहा है। आँकड़ों की मानें तो छोटे शहर और कस्बे भी इससे अछूते नहीं हैं।

डेरिवेटिव मार्केट की स्थिति 

वित्त वर्ष 2020-21 में इंडेक्स ऑप्शंस मार्केट का टर्न ओवर ₹58 लाख करोड़ का रहा। लेकिन उससे सिर्फ 1 साल पहले ही जितना टर्नओवर था, यह उसका 120% अधिक था। साफ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में रुचि कितनी रफ्तार से बढ़ी है। 

इसकी तुलना में उसी वित्त वर्ष में स्पॉट मार्केट या कैश मार्केट का टर्न ओवर था ₹165 लाख करोड़ का जो कि उसके पिछले वर्ष से मात्र 8% अधिक था। 

टर्न ओवर की वृद्धि के हिसाब से हम समझ सकते हैं कि कितनी अधिक संख्या में लोगों का रुझान डेरिवेटिव मार्केट या ऑप्शन ट्रेडिंग की ओर बढ़ा है। 

इस पूरे कालखंड में स्टॉक फ्यूचर्स स्टॉक ऑप्शंस, इंडेक्स फ्यूचर और इंडेक्स ऑप्शन का कुल कारोबार रहा ₹16,952 लाख करोड़ रुपए का। 

युवाओं की खास दिलचस्पी 

इतनी बड़ी संख्या में टर्न ओवर से ज़ाहिर है कि यह मार्केट अब लोगों के बीच लोकप्रिय है। लेकिन जहाँ पारंपरिक कैश या स्पॉट मार्केट को ही समझना अपने आग में एक टेढ़ी लकीर है वहीं ऑप्शन ट्रेडिंग उससे भी अधिक मुश्किल जान पड़ती है। 

ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए युवाओं में खासा रुझान देखा जा रहा है जो इसे न सिर्फ बेरोजगारी से बचने का साधन मानता है बल्कि अमीर बनने का कामयाब तरीका भी समझता है। इसकी एक वजह अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में मिलने वाले कंटेंट को माना जा सकता है। क्वांटिटेटिव डेरिवेटिव्स ट्रेडर शुभदीप नंदी का यही मानना है। उन्होंने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि इस सर्वेक्षण के अनुसार ट्विटर पर पूछे गए सवाल का उत्तर देने वाले लोगों में लगभग 75% लोग 2017 के आसपास शेयर बाजार से जुड़े थे।

ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसे विशेषज्ञता भरे बाजार का कारोबार जिस अनुपात में बढ़ा है क्या उस अनुपात में इसके लिए समझ भी बढ़ी है? 

यूट्यूब विडियो एक प्रमुख कारण 

ऑप्शन ट्रेडिंग की सफलता के बढ़ते ग्राफ के लिए यूट्यूब चैनल एक कारण माना जा सकता है। 

2013 में जब मंदी का खतरा मंडरा रहा था तब बैंको में भी एफडी के ब्याज घट रहे थे। रुपए का अवमूल्यन होता जा रहा था और बाजार में उलझन थी कि निवेश कहाँ किया जाए? निवेश का सही रिटर्न मिलने के ज्यादा विकल्प समझ नहीं आ रहे थे। 

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म्यूचुअल फंड प्लेटफार्म टेक ऑफ इंडिया के संस्थापक प्रसाद लेंडवे उन दिनों छात्र थे। उन्होंने पाया कि शेयर बाजार से संबंधित जानकारी अंग्रेजी माध्यम में तो मौजूद थी लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं या हिंदी में जानकारी का अभाव था। उन्होंने माध्यमों की इसी कमी को दूर करने के लिए कुछ विडियो श्रृंखलाएँ प्रस्तुत कीं जो बहुत सफल रहीं। अब वे एक सफल यूट्यूब चैनल कन्वे बाय फिनोवेशन्ज़ (Convey by FinnovationZ) द्वारा मार्केट की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। 

निवेश की जानकारी देने वाले यूट्यूब चैनल 

मौजूदा परिस्थितियों में यूट्यूब भरा पड़ा हुआ है कई चैनल्स और विडियो से जो निवेश की जानकारी देते नजर आते हैं। अधिकतर यूट्यूब चैनल्स सफलता की कहानी बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। नया निवेशक इन्हीं कहानियों से आकर्षित होता है। सफलता के ये सभी किस्से उसे हौसला देते हैं कि एक दिन वह खुद भी बेहद बड़ी सफलता प्राप्त करेगा। इन यूट्यूब चैनल के दर्शक और सब्सक्राइबर ज्यादातर ग्रामीण इलाकों या छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। इनमें महाराष्ट्र और गुजरात के साथ मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और बिहार के लोग भी शामिल हैं। 

बीएसई लिमिटेड ने खुलासा किया है कि पिछले वर्ष जुड़ने वाले नए निवेशकों का 26% महाराष्ट्र और गुजरात से आता है। प्रसाद लेंडवे के यूट्यूब चैनल के अधिकतर दर्शक इन्हीं दो राज्यों से आते हैं। 

कुछ एक चैनल्स छोड़ दिए जाएँ तो ज्यादातर चैनल्स देखा-देखी में तुरंत मुनाफा कमाने के लिहाज से बनाए गए जान पड़ते हैं। इन चैनल्स में यह जानकारी देने वाले कोई स्टॉक मार्केट के विशेषज्ञ (Stock Market Expert) हों ऐसा जरूरी नहीं। वे अतिरिक्त आमदनी के लालच में यह काम करते हुए दिखते हैं इनमें से ज्यादातर लोग किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। 

प्रवीण खेतान की ऑप्शन ट्रेडिंग के विडियो तो खासे मशहूर हैं और जिन्हें आज तक 22 लाख बार देखा गया है। इस विडियो में दर्शकों की प्रतिक्रिया के रूप में लोगों के सफल होने और इस विडियो से सहायता मिलने की कहानियाँ पढ़ने मिल जाती हैं। 

यह विडियो एक ही दिन में ₹5000 से ₹45लाख बनाने का चमत्कार होने का दावा करता है। शिवदीप नंदी का कहना है कि लोग सफलता की कहानी से जल्दी आकर्षित तो हो जाते हैं लेकिन यह समझने में चूक जाते हैं कि एक सफल कहानी के पीछे हजारों लोगों की असफलताएँ छुपी रहती हैं। लोग ज्ञान अर्जित करने में समय नहीं लगाना चाहते बल्कि झटपट जानकारी लेकर पैसा कमाना चाहते हैं। 

निवेश से जुड़े फ्रॉड 

सोशल मीडिया पर ऑप्शन ट्रेडर की सफलताओं की कहानियाँ पढ़ने को मिलती हैं जो ट्रेडर को बहुत प्रभावित करती हैं। एक यूट्यूब ऑप्शन ट्रेडर और ट्रेनर पी आर सुंदर ने घंटेभर में ही ₹10 लाख कमा लेने का ट्वीट किया था। इनके ट्विटर पर 3 लाख 76,000 फॉलोअर्स हैं। रोज़-रोज़ ₹10 लाख कमा लेने का दवा कितना सच है यह तो वही जानें लेकिन दूर किसी शहर या कस्बे में बैठे आम नौजवान के लिए इस आकर्षण से बचना मुश्किल होता है। 

डेरिवेटिव मार्केट का जोखिम 

एल्गो और क्वांट ट्रेनिंग कंपनी QuantInsti के सह-संस्थापक और डायरेक्टर नितेश खंडेलवाल का मानना है कि ट्रेडिंग एक मुश्किल काम है इसलिए लोगों को ऑप्शन ट्रेडिंग का भी सिद्धांत सही तरीके से समझ लेना चाहिए। लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि ऑप्शन का खरीदार बड़ी रकम गँवा भी बैठता है।

होना यह चाहिए कि वे परंपरागत तरीके से इस बाजार का अध्ययन करें और उसकी बारीकियाँ सीखें। लेकिन जल्दबाजी इतनी है कि आगे आने वाले खतरों के बारे में कोई भी सावधानी न बरतते हुए कई बार आँख बंद करके इन यूट्यूब चैनलों पर विश्वास कर लिया जाता है। हो सकता है कि विडियो से लोगों को मुनाफा कमाने में सफलता मिली हो लेकिन यदि व्यावसायिक तौर पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग और ऑप्शन ट्रेडिंग को अपनाना चाहते हैं तो आवश्यक है कि इसका पूरा अध्ययन करें और रिस्क मैनेजमेंट या फिर डेरिवेटिव ट्रेडिंग से संबंधित किताबों से ज्ञान प्राप्त करें।

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संवादपत्र

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