womans Employee salary is much less than mans and gap is going down, see reason behind this in hindi

भारत समेत दुनियाभर में पुरुष कर्मचारियों के मुकाबले महिला कर्मचारियों को तुलनात्मक रूप से कम सैलरी मिलती है, चाहे एक ही तरह के काम दोनों क्यों न कर रहे हैं। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की एक स्टडी के अनुसार, महिलाएं वैश्विक स्तर पर पुरुषों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत कम सैलरी पाती हैं।

Gender Pay Gap

Gender Pay Gap: वेतन में लैंगिक असमानता को लेकर लंबे समय से बहस चलती रहती है और दुनियाभर में ऐसा देखने को मिलता है कि चाहे महिला और पुरुष एक ही तरह के काम कर रहे हों, लेकिन महिला कर्मचारियों को पुरुष कर्मचारियों के मुकाबले कम सैलरी दी जाती है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की 2018 की एक स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि महिलाओं को वैश्विक स्तर पर पुरुषों की तुलना में औसतन लगभग 20 प्रतिशत कम भुगतान किया जाता है। भारत में तो स्थिति और चिंताजनक है, जहां आईएलओ के मुताबिक पुरुष और महिलाओं के बीच सैलरी का अंतर 34 पर्सेंट से ज्यादा है।

अक्सर हमें पता नहीं चलता कि वेतन को लेकर जेंडर गैप कितना ज्यादा है। लेकिन कुछ दिन पहले ऑस्ट्रेलिया ने एक कानून पास किया, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि अगर किसी कंपनी में 100 लोग काम कर रहे हैं तो उसे बताना होगा कि कंपनी में कितना जेंडर गैप है। यानी अब ऑस्ट्रेलिया में यह पता करना आसान होगा कि किसी कंपनी में महिला कर्मचारियों को कितनी सैलरी मिल रही है और वहां पुरुष कर्मचारियों को कितनी सैलरी मिल रही है। ऐसे में अब कंपनियां भी आने वाले समय में सैलरी को लेकर जेंडर गैप को कम करने की कोशिश करेगी।

भारतीय कंपनियों में जेंडर पे गैप

भारत में महिला कर्मचारी अपने करियर में हर कदम पर अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में कम कमाती हैं, जैसा कि लिंग वेतन अंतर में वृद्धि से पता चलता है, खास तौर पर महिलाएं जब ऊंचे पदों पर जाती हैं। आईआईएम अहमदाबाद की एक स्टडी में पिछले साल यही बात सामने आई थी। व्यक्तिगत योगदान स्तर पर महिलाएं समान भूमिकाओं में काम करने वाले पुरुषों की तुलना में केवल 2.2% कम कमाती हैं। वहीं मैनेजर/सुपरवाइजर के लिए अंतर 3.1 पर्सेंट और डायरेक्टर्स के साथ ही सीनियर अधिकारियों के लिए जेंडर पे गैप 4.9 से 6.1 पर्सेंट ज्यादा हो जाता है। यह स्टडी 4,000 से ज्यादा सीनियर अधिकारियों के सैंपल साइज वाली 109 एनएसई कंपनियों के रिएंक्शंस पर बेस्ड था।

जेंडर पे गैर सेक्टर और कंपनियों में अलग-अलग हो सकता है। लेकिन स्टडी की मानें तो औसतन भारत में सीनियर महिला प्रफेशनल्स 100 रुपये के लिए केवल 85 रुपये कमाती हैं, जो समान स्थिति में पुरुष कमाते हैं। वेतन के मामले में लैंगिक असमानता का एक बड़ा कारण यह है कि कंपनियों में ऊंचे स्तर पर बहुत कम महिलाएं हैं। इसका मतलब यह है कि यह ज्यादातर पुरुष तय करते हैं कि एक महिला को कितना भुगतान किया जाता है। महिलाओं को कम संरक्षक और रोल मॉडल मिलते हैं। आईआईएम-अहमदाबाद की अध्ययन से पता चलता है कि भारत में कंपनियों के शीर्ष और वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निदेशक मंडल में महिलाओं के प्रतिशत की तुलना में काफी कम है।

संवादपत्र

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