यदि आप एक नियमित निवेशक हैं तो आपको एन.ए.वी. के बारे में क्यों जानना चाहिए ?

क्या आप एक नियमित निवेशक हैं ? जानिये कि आपको म्यूच्यूअल फंड में एन.ए.वी. के बारे में अपडेट रहना क्यों ज़रूरी है

यदि आप एक नियमित निवेशक हैं तो आपको एन.ए.वी. के बारे में क्यों जानना चाहिए ?

म्यूच्यूअल फंड में ट्रेडिंग या निवेश करने के वक़्त,लोग अक्सर एन.ए.वी. शब्द के बारे में सुनते है | यह किस फंड को खरीदना चाहिए, इसका निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है| इस लेख में, हम जानेंगे कि एन.ए.वी. इतना महत्वपूर्ण क्यों है और इसके अनेक पहलुओं के बारे में समझेंगे |

एन.ए.वी. क्या है ?

एन.ए.वी या नेट एसेट वैल्यू ,फंड का मार्केट मूल्य नहीं होता है; यह फंड के मूल्य में से देनदारियों को घटाने के बाद इसे फंड यूनिट से भाग देकर निकाला जाता है| निवेश फंडों के लिए, इसे पोर्टफोलियो के प्रतिभूतियों के समापन मूल्य के आधार में हिसाब किया जाता है |

एन.ए.वी. आमतौर पर प्रति यूनिट व्यक्त किया जाता है और एन.ए.वी. गणना सरल होती है। नेट एसेट वैल्यू फॉर्मूला नीचे दिया गया है।

एन.ए.वी. = (परिसंपत्तियों का मूल्य - देनदारियों की कीमत) / बकाया इकाइयों की संख्या।

यह समझने के लिए कि एन.ए.वी. की गणना कैसे की जाती है, निम्न उदाहरण पर विचार करें:

यदि किसी फंड की कुल संपत्ति 10 करोड़ रुपये है और कुल देनदारियां लगभग 8 करोड़ रुपये हैं, और उस दिन योजना में 10,00,000 इकाइयाँ शामिल की गई हैं, तो प्रत्येक इकाई के एन.ए.वी. की गणना इस प्रकार की जाती है:

(10 - 8) करोड़ / 10,00,000 = 2,00,00,000 / 10,00,000 = 20

इसलिए, इस फंड का एन.ए.वी. 20 रुपये है।

हम घरेलु खर्चों के साथ इसी तरह की समान तुलना कर सकते हैं | चलिए मानते हैं कि एक परिवार में 4 सदस्य हैं (माता-पिता और दो बच्चे) | यदि पुरे घर की कुल आय 20 लाख रुपये हैं और यदि उनके खर्चें 8 लाख के आसपास होते हैं ,तो हर परिवार के सदस्य का एन.ए.वी. (20-8) लाख/4= 3 लाख रुपये होंगे |

एन.ए.वी. के बारे में आपको जानकारी कहाँ से मिल सकती है ?

एक फंड की नेट एसेट वैल्यू उसी जगह उपलब्ध होती है जहां फंड से सम्बंधित सभी जानकारियां उपलब्ध होती है| उदाहरण के लिए, यदि आप एस.बी.आई. ब्लू चिप फंड के एन.ए.वी. के बारे में जानना चाहते हैं ,तो किसी भी विश्वसनीय साइट पर जाएं जहां उस फंड से सम्बंधित सभी जानकारी दी जाती है | उसी पेज पर,आपको उसके एन.ए.वी. के बारे में भी जानकारी मिलेगी |

जब कोई निवेशक फंड में निवेश करते हैं,तो उन्हें एक विशिष्ट इकाई संख्या मिलती है जिन्हे शेयर बाजार में बेचा या खरीदा जा सकता है | जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी के शेयर खरीदता है, तो उसका मूल्य उस दिन के उस मिनट के ट्रेडिंग पर निर्भर करता है |

हालांकि, किसी बाजार में एक फंड की कीमत,उसके एन.ए.वी. द्वारा निर्धारित की जाती है | यदि एन.ए.वी. ऊपर जाता है ,तो फंड की कीमत भी बढ़ जाती है| यदि एन.ए.वी. नीचे आती है,तो फंड की कीमत भी गिर जाती है |

एन.ए.वी., निवेशक को ये निर्धारित करने में मदद करता है कि कोई विशेष फंड निवेश करने के लायक है या नहीं | किसी ओपन-एंडेड फंड में ,यह समझने में मदद मिलती है कि यदि हम किसी फंड से अपने निवेश को वापस लेते हैं तो रिटर्न कैसे होंगे | क्लोज्ड-एंडेड फंड में, यह समझने में मदद मिलती है कि फंड एन.ए.वी. से ऊपर या नीचे,किस ओर ट्रेडिंग कर रहा है |

जब हम किसी विशेष फंड के एन.ए.वी जान लेते हैं तो दो स्थिति मुमकिन हो सकती है | यदि किसी फंड की एन.ए.वी. बहुत कम होती है ,तो इसका शायद सही मूल्यांकन नहीं हुआ हो और निकट भविष्य में यह बढ़ सकता है | दूसरी ओर, यदि किसी फंड की एन.ए.वी. ज्यादा होती है,तो हो सकता है कि फंड का आंकलन गलती से ज्यादा कर लिया गया हो और वह निकट भविष्य में लोअर सर्किट को हिट करे |

एन.ए.वी से सम्बंधित कुछ बिंदु,जिन्हे आपको ध्यान में रखना चाहिए

  • नेट एसेट वैल्यू में असल में निवेश की गई राशि, ट्रेडिंग की प्रक्रिया में पोर्टफोलियो द्वारा अर्जित किया गया लाभ और जो बढ़त इसके द्वारा हुई है, वह सब शामिल हैं |
  • नेट एसेट वैल्यू ,हर दिन में कितनी इकाइयों की खरीदी एवं बिक्री हुई है,उसके अनुसार बदलता है | इसलिए, एन.ए.वी. केवल उसी दिन का नेट एसेट वैल्यू होता है |
  • सेबी के नियमो के अनुसार सभी म्यूच्यूअल फंडों का नेट एसेट वैल्यू ,ट्रेडिंग दिन के अंत में घोषित किया जाता है |
  • यदि फंड द्वारा अर्जित कुल लाभ ज्यादा हो, फंड में निवेश की बढ़त अच्छी हो और खर्च अनुपात न्यूनतम रखा गया हो, तो नेट एसेट वैल्यू बहुत अधिक होता है |
  • नेट एसेट वैल्यू,दुर्लभ स्थितियों में नकारात्मक भी हो सकता है यदि लाभ और निवेश से कुल खर्च ज्यादा हो जाए |

निफ़्टी और सेंसेक्स ,एन.ए.वी. को कैसे प्रभावित करते हैं ?

सेंसेक्स और निफ़्टी एन.ए.वी को प्रभावित करते हैं यदि उस म्यूच्यूअल फंड ने ऐसी कंपनियों में निवेश किया हो जो इन सूचकांकों का हिस्सा हो| यदि एक लार्ज कैप फंड ने भारत के सबसे बड़े कंपनियों में बहुत निवेश किया है ,तो फंड पर बहुत असर पड़ेगा | दूसरी ओर, एक स्माल कैप फंड पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्यूंकि ये फंड जिन कंपनियों में निवेश करते हैं,वे इन दो सूचकांकों का हिस्सा नहीं होंगे |

एक मल्टी कैप फंड,सेंसेक्स या निफ़्टी के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो भी सकता है ओर नहीं भी| यदि फंड में लार्ज कैप का हिस्सा ज्यादा है और इसमें देश के सबसे बड़ी कंपनियों में अच्छे निवेश हैं ,तो वह ऐसी हलचल से प्रभावित होगा | अगर इसमें लार्ज कैप,मिड कैप और स्मॉल कैप में बराबर मात्रा में निवेश किया गया है तो संभावना है कि ये फंड सेंसेक्स और निफ़्टी के उतार चढ़ाव से प्रभावित हो|

एन.ए.वी. और स्टॉक मूल्य में क्या अंतर है ?

हालांकि एन.ए.वी और स्टॉक की कीमत समान लगती है ,एक महत्वपूर्ण कारक उनको भिन्न बनाता है | वह महत्वपूर्ण कारक है 'मांग' | एन.ए.वी. वास्तव में उस फंड की बुक वैल्यू होती है | यह ‘कुल एसेट’ होता है- मतलब, कुल देनदारियों को कुल इकाई संख्या से विभाजित करो | दूसरी ओर, शेयर की कीमत ,मांग से बेहद प्रभावित होती है | यदि मांग बढ़ती है तो स्टॉक की कीमत बढ़ती है ,और यदि मांग कम होती है तो स्टॉक की कीमत भी कम होती है |

एन.ए.वी और स्टॉक की कीमतों में कुछ अन्य अंतर हैं :

  • स्टॉक की कीमत का आंकलन होता है इससे कि कैसे विश्लेषक एक कंपनी के भविष्य में प्रदर्शन को देखते हैं |
  • स्टॉक की कीमतों को स्टॉक एक्सचेंज में उद्धृत किया जाता है जबकि एन.ए.वी को नहीं |
  • स्टॉक की कीमतों को उसी वास्तविक समय पर निर्धारित किया जाता है जबकि एन.ए.वी. के फंड के प्रदर्शन के आधार पर दिन के अंत में गणना की जाती है |

एंट्री और एग्जिट लोड क्या होते हैं

एन.ए.वी. को दैनिक आधार पर निर्धारित किया जाता है | निवेशक जो ओपन-एंडेड योजनाएं खरीदते हैं ,उन्हें विशेषाधिकार होता है कि वे किसी भी वक़्त फंड से ही फंड की इकाइयां खरीद सकते हैं और वापस फंड को ही फंड की इकाइयां बेच सकते हैं | इसे क्रमशः विक्रय ट्रांसक्शन और पुनर्खरीद ट्रांसक्शन कहा जाता है |

पहले, फंडों को निवेश में से कुछ प्रतिशत राशि (जिसे एंट्री लोड कहते हैं ) की कटौती करने की अनुमति थी | वही सुविधा तब भी दी जाती थी जब निवेशक फंड की इकाइयां वापस बेचना चाहते थे| पुनर्खरीदी ट्रांसक्शन में ,कुल बिक्री आय से एक निश्चित प्रतिशत की कटौती होती थी और उसे एग्जिट लोड कहा जाता है |

एग्जिट लोड इस तरह से संरचित किया जाता है कि अगर निवेशक एक साल के भीतर फंड की इकाइयों को बेचता है, तो उन्हें अधिक निकास भार वहन करना होगा। हालांकि, अगर वे 2 साल के भीतर इकाइयों को बेचते हैं, तो निकास भार कम हो जाएगा, और इसी क्रम में घटता जाएगा । यह ये सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि निवेशक लंबी अवधि के लिए अपने निवेश पर बने रहे ।

नियम बदल गए हैं। सेबी के एक फैसले के मुताबिक, म्यूचुअल फंड अब एंट्री लोड नहीं वसूल सकते। हालांकि, एग्जिट लोड आज भी मौजूद है और हर म्यूचुअल फंड के लिए अलग होता है।

किस फंड की सबसे ज्यादा एन.ए.वी. होती है ?

यह जानकर कि कहाँ निवेश करना है और सही फंड में निवेश करके, आप अपने लिए और अपनों के लिए एक अच्छा भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं | इस भाग में, हम कुछ ऐसे फंड पर नज़र डालेंगे जिनके एन.ए.वी. सबसे ज्यादा है | चाहे आप कम अवधि या लम्बी अवधि के लिए निवेश ढूंढ रहे हो,ये निवेश आपके लिए उपयोगी होंगे |

पद फंड एन.ए.वी.* फंड के प्रकार

1 यु.टी.आई इक्विटी फंड 157.229 ग्रोथ

2 कनारा रिबेको इक्विटी डाइवर्सिफाइड फंड 145.67 ग्रोथ

3 पी.जी.आई.एम. इंडिया डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड 15.59 ग्रोथ

4 डी.एस.पी. इक्विटी फंड 41.63 ग्रोथ

5 एल.आई.सी. मुलतिकाप म्यूच्यूअल फंड 46.8195 ग्रोथ

14 सितम्बर 2020 के अनुसार एन.ए.वी. * विवरण दिए गए हैं

इस लेख से आपको स्पष्ट पता लग गया होगा कि एन.ए.वी. क्या है और एक म्यूच्यूअल फंड के एन.ए.वी. का कैसे हिसाब लगाया जाता है | यदि आपको म्यूच्यूअल फंड के बारे में अधिक जानकारी चाहिए या आप विविध प्रकार के फंडों की तुलना करना चाहते हैं या बचत खाते बनाम लिक्विड फंड के बारे में जानना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें |

डिस्क्लेमर : यह लेख केवल सामान्य जानकारी उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश या कानूनी सलाह के रूप में नहीं लगाया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में निर्णय लेते समय आपको अलग से सलाह लेनी चाहिए ।

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