उच्च मुद्रास्फीति बाजार में लाभ कमाना और मुद्रास्फीति से अधिक कमाई करना संभव है।

यदि आपकी आय अधिक दर से नहीं बढ़ती है तो उच्च मुद्रास्फीति आपकी क्रय शक्ति को कम कर सकती है। आप मुद्रास्फीति को कैसे हरा सकते हैं और लाभ कमा सकते हैं? यहां उसके विवरण हैं।

उच्च मुद्रास्फीति बाजार में लाभ कमाना और मुद्रास्फीति से अधिक कमाई करना संभव है

भारत में, अप्रैल 2022 में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 7.79% थी। मई 2014 के बाद से, यह मुद्रास्फीति की उच्चतम दर रही है। खाद्य मुद्रास्फीति भी बढ़कर 8.38% हो गई, जो नवंबर 2020 के बाद सबसे अधिक है। लगातार चौथे महीने, मुद्रास्फीति की दर आरबीआई की निर्धारित सहनशीलता की सीमा से 2-6% से अधिक है। उच्च मुद्रास्फीति दर आपकी क्रय शक्ति को कम करती है। यह निश्चित आय, जैसे सावधि जमा और अन्य गारंटीकृत आय योजनाओं से आपके लाभ मार्जिन को भी खत्म कर देता है। क्या उच्च मुद्रास्फीति बाजार में लाभ कमाना और अपने व्यक्तिगत फाइनेंस का प्रबंधन करना संभव है? आइए पता लगाते हैं। मुद्रास्फीति की परिभाषा जानने के लिए यहां क्लिक करें।

क्या आप उच्च मुद्रास्फीति में लाभ कमा सकते हैं?

हां, उच्च मुद्रास्फीति होने पर भी आप लाभ कमा सकते हैं। उच्च मुद्रास्फीति दरों में विभिन्न प्रकार की संपत्तियां काफी अच्छा प्रदर्शन करती हैं।

ऐसा देखा गया है कि टैंजिबल एसेट क्लास जैसे कमोडिटी (विशेष रूप से सोना) और रियल एस्टेट मुद्रास्फीति बचाव के रूप में काम करते हैं। आप कुछ विशेष सिक्योरिटीज़ की सहायता से अपने पोर्टफोलियो की क्रय शक्ति को भी बनाए रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, ट्रेज़री मुद्रास्फीति-संरक्षित सिक्योरिटीज़, सिक्योरटाइज़्ड लोन, मुद्रास्फीति-अनुक्रमित बॉन्ड, और विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित स्टॉक आपके पोर्टफोलियो की क्रय शक्ति को बनाए रखते हैं।

उच्च मुद्रास्फीति बाजार में आप कैसे लाभ कमा सकते हैं, इसका विवरण प्राप्त करने से पहले, मुद्रास्फीति के बारे में और अधिक जानकारी होना आवश्यक है।

मुद्रास्फीति क्या हैभारत में इसकी गणना कैसे की जाती है?

मुद्रास्फीति एक आर्थिक माप है। यह एक विशेष वर्ष (आधार वर्ष कहा जाता है) के मुकाबले सामानों की एक टोकरी (जिसे केंद्रीय बैंक या देश की सरकार द्वारा प्रमाणित किया गया है) की कीमतों की बदलती दरों को ट्रैक करता है। आसान शब्दों में, यह समय के साथ वस्तुओं की कीमत में वृद्धि को मापता है। मुद्रास्फीति की दर प्रतिशत में व्यक्त की जाती है।

भारत में मुद्रास्फीति की गणना दो सूचकांकों की सहायता से की जाती है:

  1. थोक मूल्य सूचकांक (WPI): यह सामानों की एक टोकरी (जिसमें 697 सामान शामिल है) के संयुक्त थोक मूल्य में वृद्धि की दर पर विचार करता है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, सामानों की टोकरी में निम्न शामिल हैं:

औद्योगिक क्षेत्र से 65% सामान

खाद्य पदार्थों सहित प्राथमिक क्षेत्र से 20.1% सामान

14.9% ईंधन और ऊर्जा

RBI ने अपनी मौद्रिक नीति तैयार करने के लिए 2014 तक डब्ल्यूपीआई को मुख्य मूल्य सूचकांक माना।

  1. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI): यह सामानों की एक टोकरी (जिसमें सामान और सेवाओं सहित 260 वस्तुएं शामिल हैं) के संयुक्त खुदरा मूल्य में वृद्धि की दर को ध्यान में रखता है। डब्ल्यूपीआई से अलग, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा स्तर की कीमतों को ध्यान में रखता है। आरबीआई पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के दौर में, 2014 में डब्ल्यूपीआई की जगह सीपीआई मुद्रास्फीति माप को अपनाया गया था। यह परिवर्तन इसलिए किया गया क्योंकि डब्ल्यूपीआई ने सेवा क्षेत्र की कीमतों में वृद्धि और थोक व्यापारी-खुदरा सप्लाई चेन में बाधा को ध्यान में नहीं रखा था। 

मुद्रास्फीति आपकी आय को कैसे प्रभावित करती है?

जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो आपको उतनी ही मात्रा में सामान और सेवाओं के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है जितना आप पहले प्राप्त कर रहे थे। उदाहरण के लिए, आप विशेष प्रकार का चावल एक साल पहले 40 रुपये प्रति किलो में खरीद रहे थे। अगर महंगाई दर 10% है, तो अब आपको वही चावल खरीदने के लिए 44 रुपये प्रति किलो खर्च करना पड़ेगा।

बढ़ती महंगाई के साथ आपके रहन-सहन की लागत बढ़ जाती है। यदि आपकी आय मुद्रास्फीति की तुलना में तेजी से नहीं बढ़ती है, तो आपका जीवन स्तर गिर जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि अब आप एक साल पहले की तुलना में कम मात्रा में सामान और सेवाएं खरीद सकते हैं।

यदि मुद्रास्फीति की दर बहुत अधिक होगी, तो यह अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। आरबीआई के अनुसार, मुद्रास्फीति का सहनशील स्तर आमतौर पर 4-4.5% के भीतर रहता है। ग्लोबल डेटा का अनुमान है कि भारत में सीपीआई मई 2022 में 6.04% होगी, जो मई 2021 में 5.14% थी।

उच्च मुद्रास्फीति बाजार में लाभ कमाने के शीर्ष तरीके

1. IINSS-C (इंफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग सिक्योरिटीज़ - कुमुलेटिवमें निवेश करें

यह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुद्रास्फीति से जुड़ी सिक्योरिटीज़ बचत योजना है। इन्हे ट्रेज़री इन्फ्लेशन-प्रोटेक्टेड सिक्योरिटीज़ (TIPS) कहा जाता है। आप इन सिक्योरिटीज़ में तभी निवेश कर सकते हैं जब आप खुदरा निवेशक हों। इंफ्लेशन-इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग सिक्योरिटीज़ - कुमुलेटिव आपको दो प्रकार की ब्याज दरें प्रदान करता है:

  • 1.5% प्रतिवर्ष की निश्चित ब्याज दर
  • पिछले 6 महीनों के दौरान मुद्रास्फीति की दर

अर्ध-वार्षिक आधार पर, ब्याज दर जमा और चक्रवृद्धि होती है। जब आप रिडेम्पशन करेंगे तो आपको कुल राशि (निवेश की गई मूल राशि + चक्रवृद्धि ब्याज) मिलेगी। आप अधिकृत बैंकों के माध्यम से भारत में ट्रेज़री मुद्रास्फीति संरक्षित सेक्युरिटीज़ में निवेश कर सकते हैं, जैसे:

  • एसबीआई एंड एसोसिएट्स
  • एचडीएफसी बैंक
  • राष्ट्रीयकृत बैंक
  • ऐक्सिस बैंक
  • आईसीआईसीआई बैंक

यहां डेब्ट फंड के कुछ और उपाय दिए गए हैं जो मुद्रास्फीति से निजात पाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

2. सोने में निवेश करें

इतिहास में जाकर देखें, तो हम पाते हैं कि सोने में निवेश ने मुद्रास्फीति के बचाव के रूप में काम किया है। आप लंबी अवधि के लिए सोने में निवेश करके महंगाई को मात दे सकते हैं। मुश्किल समय में भी सोने के मूल्य में वृद्धि हुई है। कोविड-19 के दौरान, जब स्टॉक की कीमतों में गिरावट आई, तो सोने का मूल्य बढ़ता रहा। भौतिक सोना खरीदने के अलावा, आप इसमें निवेश भी कर सकते हैं:

  • सॉवरेन गोल्ड बांड
  • गोल्ड ईटीएफ
  • डिजिटल गोल्ड

आइए मुद्रास्फीति के खिलाफ सोने की बचाव क्षमता के बारे में यहां और जानें। 

3. रियल एस्टेट में निवेश करें

रियल एस्टेट आपके पास निवेश का एक और ऐतिहासिक रूप से मान्य विकल्प है। आप रियल एस्टेट खरीद सकते हैं, और एक मकान मालिक के रूप में, आप टैंजिबल एसेट के मूल्य और किराए में वृद्धि कर सकते हैं। यदि आप एक छोटे या मध्यम निवेशक हैं, तो मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश करना होता है। सीधे रियल एस्टेट खरीदने के बजाय, आप आरईआईटी (रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट) में निवेश कर सकते हैं।
 

सारांश

मान लीजिए आप इस उच्च मुद्रास्फीति बाजार में लाभ कमाना चाहते हैं और अपनी खरीदने की क्षमता भी बढ़ाना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में, आप उपर्युक्त विकल्पों में से किसी एक में निवेश कर सकते हैं। आप इन सभी में भी निवेश कर सकते हैं। इससे आपको अपनी निवेश योग्य आय को इनके बीच वितरित करने में मदद मिलेगी जिससे मुद्रास्फीति को मात देने के लिए एक संतुलित निवेश पोर्टफोलियो तैयार हो सके। 

संवादपत्र

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