आपके रिटायरमेंट के बाद आप इन निवेश विकल्पों पर विचार कर सकते हैं

यह लेख निवेश विकल्पों की सूची दर्शाता है जो रिटायर लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है । यह निवेश विकल उच्च रिटर्न और कम जोखिम को ध्यान में रखते हुए रिटायर्ड लोगों के लिए बनाया गया है, यह ध्यान रखते हुए कि उनके पास कोई सक्रिय आय के स्त्रोत नहीं है।

रिटायर होने वाले लोगो के बीच प्रचलित निवेश के विकल्प

६० की उम्र के बाद, कई लोग आय का एक सक्रिय स्त्रोत खो देते हैं , जब तक वे फ्रीलांसिंग या कंसल्टिंग सेवाएं नहीं प्रदान कर रहे हो| रिटायर हुए  व्यक्ति के लिए एक निवेश पोर्टफोलियो बनाना महत्वपूर्ण है जो की कम जोखिम में  निवेशित पूंजी के आय का स्थिर स्त्रोत सुनिश्चित करता है | 
सरकार ने कुछ निवेश विकल्प प्रस्तावित किये हैं जो वरिष्ठ नागरिको को टैक्स लाभ प्रदान करता है | व्यक्तिगत वित्तीय संस्थाएं के पास भी ऐसे उत्पाद मौजूद है जो वरिष्ठों को लाभ दे | एक वरिष्ठ नागरिक होने के नाते, आपको अपने निवेश मिश्रण के लिए यहां दिए गए ६ निवेश विकल्पों को ध्यान में रखना चाहिए |
 

1) सीनियर सिटीज़'स सेविंग स्कीम :
खासतौर पर जो ६० वर्ष से ऊपर हैं, यह सरकार उनके लिए प्रायोजित बचत स्कीम एक सरल और सुरक्षित दीर्घकालिक बचत प्रणाली प्रदान करती है |एक एस.सी.एस.एस भारत की किसी भी अधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में खोला जा सकता है और कोई भी अधिकतम 15 लाख रुपये तक की राशी,1000 के आंकड़ों में निवेश कर सकते हैं ।

इस निवेश की अवधि पाँच वर्ष की होती है और मैच्योरिटी के बाद इसे अगले तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है । निवेश के एक वर्ष बाद धन की प्रीमैच्योर निकासी की अनुमति है परंतु निकासी शुल्क के साथ ही ।

एस.सी.एस.एस डिपॉज़िट कि वर्तमान उपज 8.3% है , जिसमे कि अन्य डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स से ज्यादा रिटर्न है। इसके अलावा यह रिटर्न धारा 80 सी के अंतरगत टैक्स लाभ के योग्य है ।

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2)  पोस्ट ऑफ़िस मासिक आय स्कीम:

वित् मंत्रालय के छेत्र में स्थापित,यह रिटायर लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है जिन्हें एकमुश्त राशि निवेश करना है और जो एक स्थिर और नियमित आय का स्त्रोत ढूंढ रहे हैं ।
कोई भी 1500 रुपये की राशि से शुरुआत करके , अकेले  4,50,000 रुपये तक या संयुक्त रूप से किसी दो अन्य जॉइंट अकाउंट धारकों के साथ नौ लाख रुपये तक जा सकता है । निवेश की अवधि पाँच वर्ष तक की है । मैच्योरिटी पर आप पूंजी को निकाल सकते हैं या अगले पाँच वर्ष के लिए पुनः निवेश कर सकते हैं ।

अभी यह 7.7% का मासिक भुगतान प्रदान कर रहा है,एम.आइ.एस फिक्स डिपॉज़िट द्वारा दिए जा रहे रिटर्न से भी ज़्यादा है। हालाँकि यह कोई टैक्स लाभ नहीं प्रदान करता है ।

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3) प्रधानमंत्री व्यय वन्दना योजना :

अस्थिर बाज़ार की स्थितियों से वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए,भारत सरकार ने एक सीमित अवधि की पेशकश के रूप में जीवन बीमा निगम के माध्यम से प्रधानमंत्री व्यय वन्दना योजना पेश किया है । यह योजना 10 वर्ष के लिए 8% वार्षिक दर से निश्चित पेंशन प्रदान करती है | मई 2018 में इस योजना की सदस्यता प्रति व्यक्ति अधिकतम 7.5 लाख रुपये की पूंजी निवेश के साथ समाप्त होने वाली थी | हालाँकि इसकी ऊपर की सीमा 15 लाख रुपये तक पहुँच चुकी है और मार्च 31, 2020 तक वरिष्ठ नागरिकों को निवेश करने का अवसर है।  पॉलिसी केवल असाधारण परिस्थितियों में ही छोड़ी जा सकती है। इस पॉलिसी पर ऋण ,निवेश के केवल 75% तक पाया जा सकता है और धारा 80 सी के अंतर्गत इस योजना में जमा राशि के आयकर मे छूट होती है |

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4) राष्ट्रीय पेंशन योजना :

सरकार द्वारा प्रायोजित एक और पेंशन योजना, राष्ट्रीय पेंशन योजना अपने ग्राहकों को कम से कम 6000 रुपया प्रति वर्ष की राशि से शुरुआत करके उनके कामकाजी जीवन के वक़्त ही पेंशन खाते में जमा कर नियमित योगदान प्रदान करने की अनुमति देता है । रिटायरमेंट पर ग्राहक आधी राशि एकमुश्त निकाल सकते हैं और बची हुई राशि से वार्षिकी ख़रीद कर अपने रिटायरमेंट के बादकी नियमित आय को सुरक्षित कर सकते हैं ।

राष्ट्रीय पेंशन योजना 80:20  ऋण बनाम इक्विटी अनुपात का हाइब्रिड निवेश है | वर्तमान में,आप आठ विभिन्न पंजीकृत पेंशन फंड प्रबंधकों में से चयन कर सकते हैं ।

इक्विटी अंश की बदौलत,राष्ट्रीय पेंशन योजना की उपज और ज़्यादा आकर्षक हो गई है,जिसमें ब्याज दर 10-14% के बीच मिल रहा है ।

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5)  फिक्स्ड डिपॉज़िट /राष्ट्रीय बचत सर्टिफ़िकेट /कर रहित बॉन्ड्स

यहाँ बताए गए तीनों विकल्प फिक्स्ड आय इंस्ट्रूमेंट्स है । हालाँकि बैंक,पोस्ट ऑफ़िस और अन्य वित्तीय संस्थान टर्म डिपॉज़िट प्रदान करते हैं, जो एन.एस.सी और टी.एफ.पी सरकारी योजनाओ या राज्य के स्वामित्व निगम द्वारा प्रदान की जाती है ।

आमतौर पर ज्यादातर भारतीयों के लिए, निवेश विकल्प तुरंत चाहिए होता है,इन डेब्ट इंस्ट्रूमेंट में तरलता की कमी है| स्थिर आय प्रतिभूतियों पर उपज ,आर्थिक उतार चढ़ाव के आधार पर बदलती रहती है |

कोई भी फिक्स्ड डिपाजिट पर 7 दिन से 10 वर्ष की अवधि के लिए निवेश कर सकता है| एन.एस.सी पोस्ट ऑफिस द्वारा 5 और 10 वर्ष की अवधी के लिए उपलब्ध होता है |

टी.एफ़.बी की लंबी लॉकिंग समय 10,15 या 20 वर्ष की होती है | कोई क़दम उठाने से पहले लॉग इन अवधि का आकलन करना महत्वपूर्ण है।

ज़्यादातर बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 0.25% से 0.5%  प्रति वर्ष का अतिरिक्त ब्याज प्रदान करता है, जो वर्तमान एफ़.डी पर 6.5% से 7.75% की वर्तमान उपज देता है | यह एक एन.एस.सी से बहुत कम है जो 8.1% देता है | तुलनात्मक रूप से,दीर्घकालिक टीएफपी 8.1% से 8.4% प्रतिवर्ष की उपज देता है ।

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6) म्यूचुअल फंड्स :

ज़्यादातर फिक्स्ड इंकम के विकल्प महँगाई दर को मुश्किल से मात दे पाते हैं, इसलिए कुछ इक्विटी एलोकेशन को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है । म्यूचुअल फंड ने परिसंपत्तियों की तुलना में उच्च इंफ्लेशन समायोजित रिटर्न दिया।

ऐसे फंड्स में निवेश करने से स्थिर रिटर्न मिलता है,जिनके उच्च ऋण बनाम इक्विटी अनुपात होता है। जिनकी जोखिम लेने की क्षमता होती हैं,वे एक संतुलित फंड पर विचार कर सकते हैं । दूसरे निवेश विकल्पों के जैसे , म्यूचुअल फंड निवेशक पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हो सकते हैं,फंड की कुछ निगरानी ज़रूरी होती है ।

म्यूचुअल फंड कुछ व्यवस्थित धन निकासी योजना और ऋण फंड प्रदान करते हैं उन लोगों के लिए जो इक्विटी आवंटन से अलग है । डेब्ट फंड ,रिडेंप्शन के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करता है और टर्म डिपॉज़िट के सामने 20 प्रतिशत के लिए करयोग्य हैं, जो की व्यक्तिगत टैक्स स्लैब की अनुसार 20% से 30% कर योग्य है।

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निष्कर्ष :

अपनी पसंदीदा जीवनशैली बनाए रखने के लिए ,रिटायरमेंट के बाद की आय की निवेश योजना  को अच्छे से प्रबंधित रखना होगा, एक नियमित नगद का प्रवाह उत्पन्न करना होगा और अन्य नियोजित या अनियोजित ख़र्च जैसे छुट्टियाँ, चिकित्सा आपातकाल आदि के लिए पर्याप्त छूट देनी होगी ।

एक आदर्श पोर्टफोलियो निश्चित आय और बाज़ार संबंधित निवेशो का एक मिश्रण होता है । यह अनुपात आपके व्यक्तिगत लक्ष्य और जोखिम की क्षमता पर निर्भर करता है ।

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