भारत में रिटायरमेंट लाइफस्टाइल बदलने लगा है | How the retired life is changing in India

इन दिनों रिटायरमेंट का मतलब दुनिया की सैर करना और वह सब कुछ करना है जो अपने करियर में व्यस्त रहने के दौरान आपने नहीं किया. आइए जानते हैं कि इसके लिए कैसे प्लान करें.

भारत में रिटायरमेंट लाइफस्टाइल बदलने लगा है

जहाँ 60 के दशक में अपने लिए जीना नए लाइफस्टाइल का हिस्सा बन गया है, ऐसे में रिटायरमेंट कैसे पीछे रह सकता है? जीवन का यह नया अध्याय अब आपके बच्चों और पोते-पोतियों के साथ रहने या किसी पुराने दोस्त के घर जाने के लिए नहीं है. बहुत से लोग रिटायरमेंट का इंतज़ार कर रहे हैं, ताकि वे अपने ख़्वाबों और अरमानों को पूरा कर सकें. अब उनके पास समय ही समय है, इसलिए वे सभी अरमान पूरे कर लेना चाहते हैं जो वे काम और पारिवारिक बाधाओं के कारण पहले नहीं कर सकते थे. क्यों रिटायरमेंट की सेविंग्स को मैराथन के रूप में माना जाना चाहिए न कि स्प्रिंट के तौर पर? ज़्यादा जानें

चाहे वह दुनिया की सैर करने एक क्रूज पर जाना हो, कोई शौक पूरा करना हो, ऐसी कार खरीदना हो जो आपको हमेशा से पसंद थी, एक नया इंस्ट्रूमेंट सीखना हो, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दोस्तों से मिलना हो या किसी ऐसे काम के लिए वालंटियर करना जो आपको अच्छा लगता हो, अपना रिटायरमेंट फंड प्लान करते समय अपने अरमानों को ज़रूर शामिल करना चाहिए. बुनियादी खर्चों को कवर करने के साथ-साथ, आपका रिटायरमेंट फंड भविष्य की इन अन्य जरूरतों के खर्चों को पूरा करने में भी सक्षम होना चाहिए.

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एक आरामदायक रिटायरमेंट के लिए निवेश

अपने रिटायरमेंट पोर्टफोलियो पर रिटर्न बढ़ाने के अलावा, निवेशकों को बने रहने की अवधि के दौरान निवेश के पेआउट या ;लिक्विडिटी पर भी विचार करना होगा. पारंपरिक और वैकल्पिक एसेट क्लास का एक अच्छा मिक्स एक फॉल-बैक कॉर्पस बनाने के साथ-साथ एक नियमित आय का ज़रिया बनाने में मदद कर सकता है जिसका इस्तेमाल आपकी सभी आवश्यक और आकस्मिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सके. विचार करने के लिए यहां कुछ विकल्प दिए गए हैं.

आरईआईटी: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) किरायेदारों से निपटने, अपकीप और मेंटेनेंस कॉस्ट को मैनेज करने, या प्रॉपर्टी खरीदने में हाई एंट्री बैरियर पर काबू पाने की परेशानी के बिना आपके पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट जोड़ने का एक बढ़िया विकल्प है. 

आरईआईटी म्यूचुअल फंड की तरह काम करते हैं, जहां फंड मैनेजर ज़्यादा किराया देने वाली प्रॉपर्टी जैसे कमर्शियल रियल एस्टेट, मॉल, होटल, अस्पताल आदि में निवेश करता है. आरईआईटी शेयर की कीमत बढ़ने के अलावा, किराये की आय का अधिकांश हिस्सा (90% तक) शेयरधारकों को सालाना लाभांश आय के रूप में वितरित किया जाता है, जो आपके कैश फ्लो के लिए बहुत काम आ सकता है.

म्यूचुअल फंड एसआईपी: इक्विटी निवेश के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण से, खासकर जब कम उम्र में शुरू किया जाता है, आपको रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी जीने के लिए ठीक-ठाक पैसे जमा करने में मदद मिल सकती है. म्युचुअल फंड एसआईपी लंबी अवधि में वोलाटिलिटी को दूर करने में मदद करती हैं और आपके पैसों को बढ़ाने में मदद करती हैं. 12% प्रति वर्ष के औसत रिटर्न पर 10,000 रुपए का छोटा एसआईपी अमाउंट, 30 साल के अंत में आपको लगभग 3.5 करोड़ रुपये का तैयार फंड देगा!

म्यूचुअल फंड एसआईपी के ज़रिए निवेश करने के कई अन्य फायदे भी हैं. आप अपने बजट के अनुसार बचत और निवेश कर सकते हैं और लिक्विडिटी के आधार पर पैसे जमा करने की फ्रीक्वेंसी बढ़ा या घटा सकते हैं. आपको फंड के बीच स्विच करने या जब चाहें निवेश रिडीम करने की आसानी भी है. आपके पास में एक बड़ा फंड होना आपके लिए एक सुरक्षा जाल की तरह काम कर सकता है और कोई भी महँगी खरीदारी करना आसान कर सकता है, जैसे रिटायरमेंट होम के लिए डाउन पेमेंट करना या पैसों की चिंता किए बिना विदेश यात्रा के लिए पेमेंट करना. 

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एनपीएस: राष्ट्रीय पेंशन योजना या एनपीएस सरकार द्वारा प्रायोजित पेंशन योजना (जो कर लाभ के साथ आती है), आपके रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट प्लान में ज़रूर शामिल होनी चाहिए, खासकर अगर आप एक नौकरीपेशा प्रोफेशनल हैं. इसमें आप अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार, अपनी खुद की निवेश राशि और पेंशन फंड चुन सकते हैं. 

रिटायरमेंट की आयु तक पहुंचने पर, 60% राशि एकमुश्त रूप में निकाली जा सकती है, जबकि शेष 40% का इस्तेमाल एन्युटी खरीदने के लिए किया जाता है. निकाली जा सकने वाली धनराशि पर ग्राहक को टैक्स नहीं देना होता और इसका इस्तेमाल तत्काल खर्चों के भुगतान जैसे कि किसी नई जगह पर शिफ्ट करना, कार खरीदना, या आय बढ़ाने वाले निवेश जैसे कि फिक्स्ड डिपॉज़िट, डैट फंड, आदि के लिए किया जा सकता है.

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डिविडेंड देने वाले स्टॉक: जो लोग स्टॉक की समझ रखते हैं और ज़्यादा जोखिम ले सकते हैं वे ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं जिनके पास कमाई का हिस्सा शेयरधारकों में बाँट देने का ट्रैक रिकॉर्ड है. बेहतर यह होगा कि आप उन बिज़नस के शेयरों को इकट्ठा करें जिनका डिविडेंड पेआउट रेश्यो कम से कम 40% (शेयरधारकों को वापस दी गई वार्षिक आय का अनुपात) और डिविडेंड यील्ड 3% (डिविडेंड, शेयर की कीमत के प्रतिशत के रूप में) है.

समय के साथ जब आप शेयर में निवेशित रहते हैं, तो कैपिटल एप्रीसिएशन के अलावा, कंपनी के ग्रोथ के साथ-साथ ऐसे शेयरों से आपकी डिविडेंड इनकम बढ़ सकती है, जिससे आपको बहुत लिक्विडिटी मिलती है.

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ज़रा सोचिए

  • जल्दी शुरू करें: अगर आप जल्दी निवेश शुरू नहीं करते हैं तो अपने रिटायरमेंट गोल हासिल करने में आपकी मदद निवेश के सर्वोत्तम विकल्प भी नहीं कर पाएंगे. आपकी बचत की कंपाउंडिंग करने में समय की अहम भूमिका है. क्या 50 की उम्र में रिटायरमेंट के लिए बचत करने का कोई लाभ है?
  • बचत बढ़ाएं: अगर आप ज़्यादा कमाते हैं तो ज़्यादा बचाएं. रिटायरमेंट के समय ज़्यादा पैसे होने पर आप महंगाई का मुकाबला कर सकेंगे और आपके पास अपनी ज़रूरतों के लिए भी पैसा रहेगा.
  • एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखें: आपके फाइनेंशियल प्लान में जोखिम से बचने के लिए अलग-अलग एसेट क्लास शामिल होनी चाहिएं, जिनसे अस्थिरता को कम करते हुए रिटर्न पाने में मदद मिले. अपने रिटायरमेंट प्लान को सेट करने में सहायता के लिए वेल्थ मैनेजमेंट प्रोफेशनल से परामर्श लें. 
  • बीमा कराएं: बढ़ती उम्र के साथ आप गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं. उचित स्वास्थ्य बीमा कवरेज यह सुनिश्चित करता है कि मेडिकल खर्च आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर बोझ न बने. इन सवालों के जवाब दें और जानें कि आपके रिटायरमेंट के दिन कैसे दिखेंगे?
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