फिक्स्ड डिपॉजिट्स के 4 विकल्प जो सीनियर सिटिजन को ज्यादा बेहतर डील प्रदान करते हैं

ऊपर के औसत रिटर्नों से लाभ लेने के लिए, सीनियर सिटिजन को अपने निवेशों में विविधता लानी चाहिए। यहां इसके कारण है।

फिक्स्ड डिपॉजिट्स के 4 विकल्प जो सीनियर सिटिजन को ज्यादा बेहतर डील प्रदान करते हैं

भारत में जीवन-आयु काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। आज, 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले किसी व्यक्ति से 80 वर्ष या उससे ज्यादा तक जीवन जीने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, मुद्रास्फीति के बढ़ने और ब्याज दरों के गिरने से, फिक्स्ड डिपॉजिट्स (एफडी‌) में निवेश करना अब ज्याफा फायदेमंद नहीं रह गया है।

एसबीआइ की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 4.1 करोड़ भारतीय सीनियर सिटिजनों ने वर्तमान में लगभग रु. 14 लाख करोड़ रु. का निवेश किया है। दुर्भाग्यवश, एफडी की ब्याज दरें आम लोगों के लिए 5.30% और 6.75% p.a के बीच की रहती है, जबकि सीनियर सिटिजन 5.80%–7.25% तक उम्मीद कर सकते हैं। यह इसलिए क्योंकि आरबीआइ ने एफडी की ब्याज दर को रेपो रेट से जोड़ रखा है, जो एक बदलने वाली चीज है। 

इसके अलावा, हाल के वर्षों में आरबीआइ रेपो रेट में लगातार कटौती करता रहा है। उदाहरण, रेपो रेट 2018 में 6% से घटकर आज 4% रह गया है। रेट में हर कटौती के साथ, ब्याज दर और भी गिर जाती है। वित्तीय नियोजनकार कहते हैं कि सीनियर सिटिजन को लंबे समय तक लगातार रिटर्न पाने के लिए अपने निवेश में विविधता लानी चाहिए।

यदि आप सीनियर सिटिजन हैं, तो निवेश करते समय आपको शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों जरूरतों का ध्यान रखना होगा। इसका अर्थ यह है कि सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय रूप से स्वतंत्र होने के लिए आपको लिक्विडिटी और ग्रोथ के अच्छे मिश्रण का ध्यान रखना होगा। दूसरा, टैक्स लायब्लिटी का भी ध्यान रखना चाहिए, ख़ासकर जब शॉर्ट-टर्न निवेश की बात की जाए।

यहां एफडी के कुछ विकल्प हैं, बेहतर रिटर्न पाने और मुद्रास्फीति से मुकाबला करने के लिए जिनका आप ध्यान रख सकते हैं।

1. सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम्स (एससीएसएस)
जैसा कि नाम से पता चलता है, एससीएसएस 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए है। इसे भारत सरकार की गारंटी प्राप्त है, जो जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए एक आकर्षक कारक हो सकता है।

  • अवधि: इसकी एक निश्चित अवधि 5 साल की होती है, पर इसे और भी 3 साल बढ़ाया जा सकता है।
  • ब्याज दर: 7.4% पर एससीएसएस अभी फिक्स्ड आय इंस्ट्रुमेंटों में सवोत्तम ब्याज दर प्रदान करता है। इस पर अर्जित ब्याज अपने आप हर 3 महीने में आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है, जो इसे अल्प-कालिक वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आदर्श बनाता है।
  • जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर): एक बार लॉक हो जाने पर, ब्याज दर जमा की संपूर्ण अवधि के लिए फिक्स्ड हो जाती है। हालांकि, ब्याज दर को हर तीन महीने पर संशोधित किया जाता है और यह प्रचलित आर्थिक दशाओं के आधार पर लगती है।
  • कर लाभ: आप आय कर अधिनियम You can claim income tax deduction of Rs 1961 की अनुच्छेद 80सी के तहत रु. 1.5 लाख के आय कर की कटौती का दावा कर सकते हैं। हालांकि, ब्याज की आय पर कर लगेगा। एससीएसएस क्यों रिटायरमेंट प्लैनिंग के लि ईक अच्छी स्थिति पैदा करता है यह जानने के लिए विस्तार से देखिए।

इससे जुड़ी बातें: पीपीएफ, एससीएसएस पोस्ट ऑफ़िस सेविंग्स स्कीम संशोधित: यहां वे चीजें हैं आपको जाननी होगी

2. डेट म्यूचुअल फंड्स
यदि आप 20% या 30% के टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो डेट म्यूचुअल फंड्स एक आदर्श विकल्प हो सकता है। डेट फंड्स से प्राप्त रिटर्न्स सामान्यतः 3 वर्ष या अधिक की समयावधि के इक्विटी फंड्स निवेश की तुलना में अधिक स्थिर होते हैं। इससे यह सीनियर सिटिजन के लिए एक अच्छा निवेश विकल्प बनता है।

  • अवधि: हर संभव सर्वोत्तम रिटर्न पाने के लिए, सलाह दी जाती है कि आप डेट फंड में कम से कम 5 वर्षों के लिए निवेश करें। यह इसलिए क्योंकि लंबी निवेश अवधि में इंडेक्सेशन आता है। हालांकि, लिक्विड फंड जैसे अल्प-कालिक डेट फंड अल्प काल के निवेश के लिए अच्छा हो सकता है।
  • ब्याज दर: रिटर्न के लिहाज से डेट फंड्स फिक्स्ड डिपॉजिट्स से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करता रहा है, क्योंकि ब्याज दर हमेशा नीचे की ओर रहते हैं। डेट फंड की मौजूदा रिटर्न दर 7% से 8.5% है।
  • जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर): डेट फंड्स ब्याज दर उतार-चढ़ाव और क्रेडिट रिस्क के अधीन होते हैं, अर्थात, आप बॉन्ड मार्केट के प्रदर्शन के आधार पर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
  • कर लाभ: डेट फंड्स पर लागू होने वाला 20% का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स 3 वर्ष के बाद रिडीम होता है। इसके अलावा, 3% सेस भी लगता है।

इससे जुड़ी बातें: डेट और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड्स जोखिम में कैसे अलग-अलग होते हैं

3. सरकारी बॉन्ड्स
सीनियर सिटिजन के रूप में, आप टैक्स-फ्री बॉन्ड्स में निवेश से भी लाभांवित हो सकते हैं। इन्हें सरकार की गारंटी प्राप्त होती है, जिसका अर्थ है कि लंबे समय में निश्चित रिटर्न्स मिलना।

  • अवधि: यह एक दीर्घकालिक निवेश विकल्प है, जो 10 से 30 वर्ष के निवेश श्रेणी में निवेश करने वाले लोगों के लिए आदर्श है।
  • ब्याज दर: 5.50% से 6.50% होती है। भले ही यह औसत प्रतीत होता है, पर टैक्स बचाने की क्षमता से यह कारगर विकल्प बन जाता है। उदाहरण के लिए, आरबीआइ ने हाल ही में 7.75% ब्याज के साथ एक कर योग्य बॉन्ड की शुरुआत की। हालांकि, टैक्स-फ्री बॉन्ड्स की तुलना में पोस्ट-टैक्स रिटर्न्स के कम रहने की संभावना होती है।
  • जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर): अपने निवेश के मूल्य को बढ़ाने के लिए यह एक आदर्श विकल्प है, क्योंकि इसमें जोखिम कुछ भी नहीं है।
  • कर लाभ: टैक्स-फ्री बॉन्ड्स सीनियर सिटिजन के लिए आकर्षक होते हैं, क्योंकि उनके ऊपर कर नहीं लगता। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, आरबीआइ ने हाल ही में 7.75% पर एक कर योग्य बॉन्ड की शुरुआत की है, हालांकि टैक्स फ्री बॉन्ड्स की तुलना में पोस्ट-टैक्स रिटर्न्स के कम रहने की संभावना रहती है।

इससे जुड़ी बातें: भारत बॉन्ड ईटीएफ: निवेशक को जिस बारे में जानना चाहिए

4. पोस्ट ऑफ़िस मासिक आय योजना
सीनियर सिटिजन के लिए पीओएमआइएस के कुछ अहम फ़ायदे हैं, जैसे कि कम लॉक-इन अवधि और पूंजी की रक्षा। इसमें अधिकतम रु. 4.5 लाख (व्यक्ति) और रु. 9 लाख (संयुक्त खाता) निवेश किया जा सकता है।

  • अवधि: पीओएमआइएस में निवेश के लिए लॉक-इन अवधि 5 वर्ष है।
  • ब्याज दर: वर्ष 2019-20 से ब्याज दर 6.60% रहा है।
  • जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर): हालांकि रिटर्न भरोसेमंद है, इसमें समय से पहले निकालने पर दंड भी लगता है।
  • कर लाभ: टीडीएस लागू नहीं है, पर धारा 80सी के तहत कोई छूट नहीं है।

इससे जुड़ी बातें: पोस्ट ऑफ़िस मासिल आय स्कीम (पीओएमआइएस) में आपको क्यों निवेश करना चाहिए?

संक्षेप में कहें, तो अपने निवेशों में विविधता लाने से आपको बेहतर रिटर्न पाने के साथ बाजार जोखिमों से बचने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा, इन्हें भी देखें ऐसे निवेश विकल्प जो सेवानिवृत्त लोगों में लोकप्रिय हैं

अस्वीकरण: यह आलेख केवल एक सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसे निवेश या कर या कानूनी सलाह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इन विषयों पर फ़ैसला लेते समय आपको अलग से स्वतंत्र राय लेनी चाहिए। 




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