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वक्त आ गया है कि आप तुरंत योजना बनाने में जुट जाएं ताकि आप आराम से रिटायर हो सकें।

Retirement Planning

एगॉन रिटायरमेंट रेडिनेस सर्वे 2016 के मुताबिक कुल भारतीयों में, जो रिटायरमेंट के बाद अपने जीवनसाथी पर निर्भर हैं, महिलाओं का हिस्सा 34 फीसदी हैं। अगर इन महिलाओं में से एक हैं, तो वक्त आ गया है कि आप अपनी भविष्य की योजनाओं पर पुनर्विचार करें। चाहे जरूरत पड़ने पर आपके पति और बच्चे आपको वित्तीय तौर पर मदद करेंगे, लेकिन शायद आप उनपर अपना बोझ नहीं डालना चाहेंगी। और ऐसा होगा भी नहीं अगर आप सही तरीके से अपने रिटायरमेंट की योजना बनाती हैं। लंबी अवधि के इस लक्ष्य को तय करके आप निश्चिंत रह सकती है कि रिटायरमेंट के बाद आपको वित्तीय तौर पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

रिटायरमेंट के लिए योजना बनाते वक्त इन बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

  1. आप ज्यादा लंबा जीएंगी

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनिजेशन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पुरुषों का जीवन काल 66.9 साल और महिलाओं का जीवन काल 69.9 साल है। अगर आपके पति की मृत्यु आपसे पहले हो जाती है तो आप अपना वित्तीय सहारा भी खो बैठेंगी और इस वजह से आपको जिंदगी गुजर करने में भी दिक्कतों का सामना कर पड़ सकता है। इसका मतलब रिटायरमेंट के बाद आरामभरी जिंदगी के लिए योग्य और सशक्त योजना बनाना अहम है।

तथ्य है कि आप ज्यादा लंबा जीएंगी, तो फिर ये जरूरी हो जाता है कि जल्द से जल्द आप अपनी रिटायरमेंट के लिए योजना बनाना शुरू करें, योग्य निवेश विकल्पों में पैसा लगाएं, अपने जीवन और स्वास्थ्य बीमा खरीदेंगे ताकि रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए आपके पास पर्याप्त राशि जमा हो जाएगी।

  1. जल्दी शुरू करें

पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में ज्यादातर महिलाओं कम साल के लिए नौकरी करती हैं। अपने घर, बच्चे और परिवार की देखभाल करने के लिए भारतीय महिलाएं या तो नौकरी छोड़ देती हैं या फिर कम घंटों वाली नौकरी करती हैं। इस वजह से आपको ये नहीं समझना चाहिए कि आपके पास रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करने के लिए काफी वक्त है।

आदर्शरूप से आपको पहला वेतन मिलने के साथ ही रिटायरमेंट फंड में पैसा डालना शुरू कर देना चाहिए। समझदारी की बात ये है कि रिटायरमेंट के लिए बचत की शुरुआत छोटी रकम से करें और वित्तीय हालत बेहतर होने के बाद इस रकम में बढ़ोतरी करते रहें।

जल्द बचत शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा है कि आपको कंपाऊंडिंग का फायदा मिलता है। इससे आपकी रकम में तेजी के साथ बढ़ोतरी होती है, ये बढ़ोतरी आपके निवेश पर मिलने वाले ब्याज पर निर्भर होती है। इसलिए जब आप रिटायर होंगी तब तक आपने पर्याप्त पूंजी इकट्ठी कर ली होगी और आपको किसी दूसरे पर आश्रित होने जरूरत नहीं पड़ेगी।

रिटायरमेंट के लिए जल्द बचत करने के पीछे दूसरी बड़ी वजह है महंगाई। वक्त के साथ महंगाई बढ़ने से आपकी क्रय-शक्ति यानि पर्चेजिंग पावर घटती है। रिटायरमेंट फंड में जल्द पैसा डालना शुरू करने से आप रिटायरमेंट के बाद जब आपकी मासिक आय बंद हो चुकी होगी तब पूंजी पर महंगाई से पड़ने वाले बोझ को कम कर सकते हैं। इससे आप रिटायर होने के बाद भी आरामभरी जिंदगी जी सकेंगे।

  1. बीमा को प्राथमिकता दें

भारत में व्यापक तौर पर बीमा लेने वालों की संख्या काफी कम है। 80 फीसदी से ज्यादा भारतीयों के पास सामान्य जीवन बीमा कवर नहीं है और वहीं 95 फीसदी भारतीय स्वास्थ्य संबंधी संकंट-स्थिति का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं।

पर्याप्त बीमा कवर न लेने से भविष्य में आपको बड़ी परेशानी हो सकती है। इसका मतलब है कि बीमार होना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। इसलिए, स्वास्थ्य बीमा प्लान लेना आपको इस तरह की वित्तीय मुश्किल से बचा सकता है।

कई बीमा कंपनियां महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य बीमा प्लान मुहैया कराती हैं। अभी खरीदा गया योग्य स्वास्थ्य बीमा प्लान आपको भविष्य के महंगे इलाज का बोझ उठाने में मदद करता है।

  1. परंपरागत विकल्पों के आगे सोचें

आमतौर पर महिलाएं बचत करने में माहिर होती हैं, लेकिन निवेशक के तौर पर पीछे रह जाती हैं। और जब महिलाएं निवेश करती हैं तो वो परंपरागत के मुताबिक फिक्स्ड डिपॉजिट और सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में पैसा लगाना पसंद करती हैं।

  • अगर आपके रिटायरमेंट में वक्त है तो आप लंबी अवधि के लिए इक्विटी में निवेश करने पर विचार कर सकती हैं। इससे रिटायरमेंट के वक्त आपके पास बड़ी पूंजी इकट्ठी हो पाएगी। इक्विटी में लंबी अवधि के लिए निवेश करने से जोखिम काफी कम होता है। छोटी अवधि में शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव लगा रहता है, लेकिन लंबी अवधि में इनपर मिलने वाला रिटर्न बेहतर होता है।
  • अगर आपके पास इक्विटी के बारे में पर्याप्त ज्ञान नहीं है तो आप म्युचुअल फंड के जरिए इक्विटी में निवेश करने के बारे में सोच सकती हैं। इस तरह किए हुए निवेश में सीधे शेयर और बॉन्ड खरीदने के मुकाबले कम जोखिम है और पिछले 35 सालों में म्युचुअल फंड्स में 14.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
  • आप सिस्टमैटिव इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) का भी इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे आप हर महीने 500 रुपये की छोटी रकम से भी निवेश शुरू कर सकती हैं।
  • सुरक्षित निवेश विकल्प

अगर आप कम जोखिम वाले निवेश विकल्प पसंद करती हैं, तो आपके लिए पेंशन प्लान जैसे नेशनल पेंशन स्कीम, पेंशन फंड्स, आदि उपयुक्त रहेंगे। बीमा और म्युचुअल फंड कंपनियां दोनों ही पेंशन प्लान मुहैया कराती हैं। एनपीएस के तहत आप 6,000 रुपये (टीयर -1) और 2,000 रुपये (टीयर – 2) का न्यूनतम निवेश कर सकती हैं। इसके तहत आप तीन तरह के एसेट – इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगी। ये पेंशन स्कीम सुनिश्चित करती हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपको नियमित आय मिलती रहेगी।

निष्कर्ष में, लैंगिक समानता से तात्पर्य सिर्फ ये नहीं कि कैसे बाकी लोग आपसे बर्ताव करते हैं। इसका मतलब एक महिला द्वारा अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेना भी है और रिटायरमेंट के लिए जल्द से जल्द योजना बनाकर आप अपनी वित्तीय हालत को नियंत्रण में रख सकती हैं।

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