रिटायरमेंट के बाद ये बातें रखेंगी आपकी वित्तीय सेहत का ख्याल

रिटायर होने के बाद आपकी वित्तीय योजना में बदलाव आता है। हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप रिटायरमेंट के बाद अपनी वित्तीय हालत का प्रबंधन कर सकते हैं।

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रिटायरमेंट। कुछ लोगों के लिए ये एक डरावना उम्र का पड़ाव है। क्या हमारी बचत पर्याप्त है? क्या हम मन मुताबिक जिंदगी गुजार पाएंगे? अगर बीमार हो गए तो क्या होगा? वहीं, कुछ लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी उम्मीदों से भरी है। रिटायरमेंट के बाद सभी इच्छाएं पूरी की जा सकती है, जैसे यात्रा करना, शौक पालना या फिर ऐसे काम जिनके लिए पहले वक्त नहीं था। आखिरकार रिटायरमेंट नौकरी से ले रहे हैं, न कि जिंदगी से।

ये बातें एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन फिर भी रिटायरमेंट के लिए पहले से योजना बनाने में चूक जाते हैं। रिटायरमेंट के बाद के जीवन को वित्तीय रूप से सुरक्षित करने की योजना पर रोज की समस्याएं हावी पड़ जाती हैं। चाहे आप की वित्तीय बेहद हालत अच्छी हो, फिर भी लंबी अवधि के लिए पैसों का प्रबंधन करना और खर्चों पर लगाम रखना जरूरी है। रिटायरमेंट के बाद इन बातों का ध्यान रखकर आप बेहतर तरीके से वित्तीय प्रबंधन कर सकते हैं।

क्या करें

  1. हर महीने के खर्च की योजना है।  
  2. उन निवेश विकल्पों में पैसे लगाएं जिनसे आपको घर खर्च पूरा करने के लिए नियमित रिटर्न मिलेगा।
  3. फिक्स्ड डिपॉजिट या डेट-ओरिएंटेड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया है तो टैक्स बोझ को जानिए।
  4. ऐसे निवेश विकल्पों को चुनिए जो टैक्स कम करने के बाद महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न देते हों।
  5. छोटी अवधि की जरूरतों के लिए लगने वाले पैसों को डेट फंड में लगाएं और लंबी अवधि की जरूरतों के लिए निवेश पोर्टफोलियों में बाकी विकल्पों के साथ इक्विटी फंड को जरूर रखें।
  6. चिकित्सीय आपातकाल, स्वास्थ्य जांच और आकस्मिक एकबारगी खर्चों (घर की मरम्मत, आदि) के लिए अलग से आपात फंड बनाएं।
  1. अपनी वसीयत तैयार कीजिए। अगर आपने पहले ही वसीयत बनाई हुआ है, तो साल में कम से कम एक बार उसकी समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि आपकी संपत्ति (भौतिक और वित्तीय दोनों) की सूची सामयिक है और हर संपत्ति के लिए नॉमिनी का नाम लिख हुआ है।

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क्या करें 

  1. काम करना न छोड़े। आपके लिए पूरे वक्त की नौकरी करना जरूरी नहीं है। कंसल्टंट या फ्रीलांसर के बतौर काम करने से न सिर्फ आपको आय मिलेगी, बल्कि आपको मानसिक और शारीरिक तौर पर सक्रिय रखेगी।
  2. आय के लिए कई पेंशन प्लान खरीदने से बचें। इन प्लान पर महंगाई की मार पड़ती है और इनमें निवेश पर लॉक-इन पीरियड भी होता है।
  3. टैक्स लगने वाले डेट निवेश विकल्पों में बड़ी पूंजी न लगाएं।
  4. पूंजी घाटे के जोखिम वाले निवेश विकल्पों में ज्यादा पैसा लगाने से बचें।
  5. इक्विटी में निवेश कुल पोर्टफोलियो का 25 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
  6. एक ही तरह के निवेश विकल्प या फंड में पैसा न लगाएं। लंबी अवधि में विविधीकरण वाले पोर्टफोलियो के साथ कम जोखिम जुड़ा होता है।
  7. सभी निवेश विकल्पों में नॉमिनी का नाम लिखना न भूलें।

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  1. निजी बजट योजना

 निजी बजट आसान है, लेकिन उबाऊ काम है। क्यों? क्योंकि शुरुआत में आपको आय के हर स्रोत और खर्च की सूची बनानी पड़ती है। लेकिन, जब एक बार आप सूची बना लेंगे, तब खर्चों में बदलाव करना और बजट पर नजर रखना बेहद आसान हो जाएगा।

सबसे पहले आपको महीने के कुल खर्च का हिसाब लगाना है। कुछ ऐसे खर्च होंगे जिन्हें आपको हर महीने करना ही होता है(सोसाइटी फीस, नगरपालिका टैक्स, आदि), इनको लेकर आप कुछ ज्यादा बदलाव नहीं कर पाएंगे। ज्यादातर खर्च बढ़ते-घटते रहते हैं और ये आपकी मासिक या सालाना आय पर निर्भर होते हैं। इनपर लगाम लगाई जा सकती है। इन खर्चों में खाना, उपभोगी सेवाएं, कपड़े, मनोरंजन और यात्रा शामिल हैं, जो बजट के बाहर भी जा सकते हैं। इन खर्चों पर नियंत्रण पाने के लिए समझदारी से काम लें।

जब आप निजी बजट बना लेंगे, तब आपको पता चल जाएगा कि आपको गुजारे के लिए कितनी रकम की जरूरत है। ऐसे में अनुशासन पालें और बचत में से सोच-समझकर ही पैसा निकालें। जितनी पूंजी आप निवेशित रखेंगी, उतनी ही संपत्ति में बढ़ोतरी होगी।विद्ड्रॉअल पर नियंत्रण 

2 दूसरे तरह का विद्ड्रॉअल जिसपर आपको ध्यान रखना चाहिए वो है कि आप कब और कैसे अपने निवेश से पैसा निकाल रहे हैं, क्योंकि जल्दी निवेश निकाले पर आपको विद्ड्रॉअल फीस चुकानी पड़ सकती है। हालांकि आमतौर पर इस तरह की फीस अनुइटी, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्युचुअल फंड्स पर लागू होती है, लेकिन लॉक-इन पीरियड का ध्यान रखें और इस प्रकार में निवेश विकल्पों में तभी पूंजी लगाएं जब आपको पैसों की तुरंत जरूरत नहीं पड़ेगी।

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  1. चालू बचत का खाता बनाएं

ज्यादातर रिटायर हुए लोगों के पास आय के दो स्रोत होते हैं। पहला स्रोत है पेंशन प्लान और दूसरा पहले पैसे लगाए हुए निवेश विकल्पों (म्युचुअल फंड्स, स्टॉक और शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट, अनुइटी, आदि) से होने वाली आय। आपने प्रॉपर्टी में भी निवेश किया हो सकता है, जिससे आपको किराया मिलता हो। चाहे कोई भी स्रोत हो, ये जरूरी है कि आप अपनी आय पर नजर रखें। अगर आपके पास अतिरिक्त आय हो तो उसे निवेश करें ताकि वक्त के साथ आपकी बचत में बढ़ोतरी जारी रहे।

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  1. एकबारगी खर्चों के लिए फंड बनाएं 

वृद्धावस्था में चिंता की सबसे बड़ी वजह आकस्मिक और अनपेक्षित बीमारियां। बजट बनाते वक्त इसे प्राथमिकता देना बेदह जरूरी है और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से मिलने वाले कवर के अलावा आपके लिए इलाज के लिए पूंजी अलग रखना जरूरी है।

हालांकि, खर्च बढ़ाने के पीछे बीमारी ही एकमात्र वजह नहीं है। आपको कुछ सालों के अंतराल में घर की मरम्मत करानी पड़ सकती है। या फिर आपको नई कार खरीदनी है। ऐसे खर्चों या खरीदारी के लिए अलग फंड बनाना अच्छा फैसला हो सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर इस फंड से पैसे निकाले जा सकें।

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निष्कर्ष में 

बाकी मामलों की तरह की रिटायरमेंट के बाद की आय के प्रबंधन के लिए योजना बनाने की जरूरत है। अगर आप योजना बनाने के लिए रिटायर होने का इंतजार करते हैं, तो आप काफी देर कर चुके हैं। रिटायरमेंट के लिए योजना बनाना जल्दी शुरू करें ताकि अगर कुछ बदलाव करने की जरूरत पड़े तो आपके नौकरी करने के समय में ही बदलाव किए जा सकें। ऐसा करने से आप मनमुताबिक जिंदगी जी पाएंगे।

डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश, बीमा, कर या कानूनी सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों से संबंधित निर्णय लेने के पहले विशेषज्ञों से स्वतंत्र सलाह प्राप्त करें।

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