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अमीरों की तरह जीना एक बात है, लेकिन क्या इसके साथ आपने ऐसी तैयारी कर रखी है, जिससे भविष्य में कभी पैसों की दिक्कत नहीं हो?

 reasons why need to plan early to retire rich

अगर आप ये जानते हैं कि कब क्या करना है, तो इस दुनिया में संपन्नता के साथ रिटायरमेंट बहुत मुश्किल काम नहीं है। लेकिन इसका राज क्या है? शुरू करने में देरी नहीं करें। क्योंकि ये समझ लीजिए कि आप हमेशा काम नहीं कर सकते हैं। और इसके अलावा लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा लंबे समय तक जी रहे हैं। ऐसे में जरूरत है कि आप अपने आखिरी अवस्था यानी रिटायरमेंट के बाद के लिए वित्तीय तौर पर इतनी तैयारी कर लें कि किसी तरह की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े। पहले इस प्लानिंग के लिए सेविंग मूल-मंत्र था, लेकिन अब बदलते समय में निवेश मूल-मंत्र बन चुका है।

हालांकि मुश्किल और पेचीदा लगने वाला इंवेस्टमेंट और रिटायरमेंट प्लानिंग मुख्य तौर पर अनुशासन के साथ नियमति तरीके से छोटे से निवेश के इर्द-गिर्द ही घूमता है। अगर आप सुनियोजित तरीके से नियमित तौर पर निवेश करते हैं, तो आप अपना लक्ष्य आसानी से हासिल कर लेंगे। हालांकि भारत में स्थिति अभी तक अच्छी नहीं है।

2016 तक दुनियाभर में 38 फीसदी वेतनभोगी कर्मचारियों के पास सही रिटायरमेंट प्लान नहीं थे। 2016 में एगॉन द्वारा किए गए सर्वे से पता चलता है कि रिटायरमेंट की तत्परता की दर साल 2015 में 5.9 फीसदी थी जो 2016 में घटकर 5.8 फीसदी हो गई। भारत में ये दर 7 फीसदी से बढ़कर 2016 में 7.3 फीसदी हो गई। इसके बावजूद देश में बड़ी तादाद में लोग बाज़ार में मौजूद पेंशन स्कीम से कोसों दूर हैं। हालांकि 'नेशनल पेंशन स्कीम - रिटायरमेंट प्लान फॉर ऑल' जैसी योजनाएं मौजूदा हालात को बेहतर करने में जुटी हुई है।

आज के दौर में नौकरी के लिए घर से दूर जाने की वजह से परिवार भी छोटा होता जा रहा है। काम की तलाश में लोग अलग-अलग जगहों पर रहने लगे हैं। मौजूदा माहौल में बच्चों की माता-पिता से दूर रहने की संभावनाएं ज्यादा हो गई हैं। इसके अलावा नई पीढ़ी संयुक्त परिवार की बजाय एकल परिवार में ज्यादा रहना पसंद करते हैं। और इस तरह का दौर आगे और बढ़ता चला जाएगा। एक औसत भारतीय 40 साल की उम्र के आसपास अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करते हैं। और देरी से शुरू करने के बावजूद इस कैटेगरी में भी 59 फीसदी लोग ही रिटायरमेंट के लिए नियमति तौर पर अनुशासन के साथ बचत करते हैं।

इस पर जरूर ध्यान दें: कई दंपति इस बात से ज्यादा खुश हो जाते हैं, जब उनके वित्तीय सलाहकार कहते हैं कि अगर वो 10,000 रुपए हर महीने सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करें तो 20 साल में एक करोड़ रुपए हो जाएगा। लेकिन वो इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाते हैं कि बाज़ार में किस तरह के उतार-चढ़ाव रहते हैं, और जिस तरह से खर्चों में बढ़ोतरी हो रही है वो आपके जरूरत की राशि का एक चौथाई रह जाएगा। क्योंकि भविष्य के लिए आपने जो रकम जमा करने का लक्ष्य तय कर रखा है उसमें महंगाई और बाज़ार के उतार-चढ़ाव दोनों की गणना करें। इस तरह के विचार के साथ इसमें कोई आश्चर्य नहीं था कि भारत की प्रति व्यक्ति रिटायरमेंट संपत्ति जीडीपी का सिर्फ 15.1 फीसदी था, जबकि अन्य देश जैसे जर्मनी में 21 फीसदी और अमेरिका में 78.9 फीसदी है। यानी इन देशों के मुकाबले हम रिटायरमेंट प्लानिंग में काफी पीछे हैं।

ऐसे में जरूरी है कि आप सभी तरह के अलग-अलग निवेश के विकल्पों को समझें। जैसे, म्यूचुअल फंड्स, पेंशन स्कीम्स, शेयर्स और बाकी हाइब्रिड प्रोडक्ट में निवेश, ताकि जो भी आपके बजट और स्थिति के मुताबिक सही प्रोडक्ट हो उसमें सही स्ट्रैटेजी के साथ निवेश कर सकें, और उसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकें। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय बेहतर तरीके से निवेश करना ज्यादा अच्छा विकल्प है।

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