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यह वेम्बली एरेना नहीं था और उसका गिटार कई बार गिरा, लेकिन राघव प्रभु ने अंत में उनके वरिष्ठ नागरिकों के हाउसिंग कैम्पस में पिछले महिने 50 विशेष पड़ोसी दर्शकों के सामने अपना सपना पूरा किया।

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यह वेम्बली एरेना नहीं था और उसका गिटार कई बार गिरा, लेकिन राघव प्रभु ने अंत में उनके वरिष्ठ नागरिकों के हाउसिंग कैम्पस में पिछले महिने 50 विशेष पड़ोसी दर्शकों के सामने अपना सपना पूरा किया। अब वह एक समूह बनाने की सोच रहा है।

1960 के दशक में बड़ा हुआ प्रभु अंदर से बिटल्स का फैन था जिसके दिल में संगीत के प्रति गहरा लगाव था जिसने आइगोर इरोडोव की फिजिक्स की समस्याओं को हल करने पर ध्यान कंेद्रित किया। एक इंजिनियर के रूप में काम किया, इसके बाद मैनेजमेंट में स्थान हांसिल किया और परिवार ने उसे कभी भी 2011 में उसके सेवानिवृत होने तक अपने ऊपर ध्यान देने का समय नहीं दिया और वह अपनी पत्नी के साथ सेवानिवृत घर में रहने लगा। जब कैम्पस मैनेजमेंट ने एक गिटार अनुदेशक को नियुक्त किया, प्रभु ने सबसे पहले दाखिला लिया, और तीन साल से वह अच्छा खासा गिटार बजाता है।

प्रभु और उसके जैसे हजारों वृद्ध जीवन के अंतिम दिनों को अपनी ही शर्तों पर जीना चाहते हैं, और कई सर्विस्ड हाउसिंग प्रोजेक्ट एक सुरक्षित, आरामदायक और समस्या रहित वातावरण में सम्मान के साथ रहने में उनकी सहायता कर रहे हैं।

67 वर्षीय कामिनी भण्ंडारी टीसीएस में वरिष्ठ प्रबंधक के पद से सेवानिवृत हुई और अब आशियाना उत्सव में रह रही हैं, जो दिल्ली के नजदीक भिवाड़ी में केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासीय परियोजना है। उनका कहना है, ”हमारी जवानी और अधेड़ उम्र में, हमने कैरियर और बच्चों के पालन पोषण पर ध्यान दिया। अब समय आ गया है कि हम केवल अपने लिए जीएं।“

वृद्धों के लिए आधुनिक आवास एक दुनिया है जो पुराने ‘वृद्धाश्रम’ से अलग है जहां वृद्ध लोग रहने के लिए आते हैं क्योंकि उनके वारिस नहीं हैं और इतने बीमार हैं कि अपनी सहायता खुद नहीं कर सकते, या उनके बच्चे उन्हें छोड़ देते हैं। निंदापूर्ण होने की अपेक्षा यह एक प्रकार की जीवनशैली है, जैसा कि वहां रहने वालों के मेलजोल से पता लगता है। उदाहरण के लिए उत्सव में डाॅक्टरों, इंजिनियरों और शिक्षकों के अलावा कुछ सेवानिवृत आईएएस, आईपीएस और सेना के अधिकारी रहते हैं।

उत्सव में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति प्रोफेसर वाईपी खन्ना ने बताया, ”हम यहां पर अपना भरपूर जीवन जीने के लिए और जो कुछ चाहें वह करने आते हैं“

अपने ग्राहकों की आशाओं को समझते हुए पं्रबंधन शौक पूरा करने के लिए कक्षाओं के अतिरिक्त मनोरंजक गतिविधियां भी प्रदान कर रहे हैं। बाल भवन, नई दिल्ली में निदेशक के रूप में सेवानिवृत होने वाली 63 वर्षीय अमिता शा, जो उत्सव में डांस और संगीत क्लब की अध्यक्ष हैं, कहती है, ”यहां हम अपने दैनिक जीवन को और अधिक भरपूर बनाने के लिए हमारे अनुभव का प्रयोग करते हैं।“

कई बार अपने साथी समूह में रहनने का अर्थ नई शुरूआत करना भी होता है। उदाहरण के लिए पुणे में एक प्रोप्रटी में दो 60 के दशक में पहूंचकर एक दूसरे में अपना जीवन साथी खोज लिया।

केवल वृद्धों के लिए आवासों की सामान्य विशेषताएं हैं चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और एम्बुलेंस सहित सहित क्रियात्मक स्वास्थ्य सेवाएं और अधिकतर नजदीकी अस्पताल में उन्हें आपातकाल में कैशलेस उपचार प्रदान करते हैं। कुछ में उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए केयर होम्स भी हैं जो एल्जाइमर, पागलपन, पार्किन्सन, जोड़ों का दर्द, ओस्टेपोरेसिस आदि से पीड़ित होते हैं।

केवल वरिष्ठ नागरिाकों के लिए आवास-जो 55 वर्ष से ऊपर की आयु के होते हैं-की शुरूआत भारत में 15 वर्ष पहले हुई, और इसका विकास तेजी से हो रहा है। पूरे देश में 15 विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत 3600 घर स्थापित हैं, और 20 नई परियोजनाओं के अंतर्गत 5000 नए घर बनाए जा रहे हैं। पुणे का परांजपे ग्रुप, बंगलुरू का मंत्री ग्रुप और दिल्ली एनसीआर में आशियाना ग्रूप कुछ स्थापित नाम हैं, मैक्स ग्रूप और टाटा हाउसिंग ने भी क्रमशः देहरादून और बंगलुरू में परियोजनाओं की शुरूआत की है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवासों को उपनगरों में विकसित किया जाता है ताकि लागतों को कम रखा जा सके। हालांकि यह एक बड़े शहर का हिस्सा होता है, लेकिन इसमें केवल इसमें रहने वाले लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। लीज पर लेना एक विकल्प है लेकिन अधिकतर ग्राहक खरीद लेते हैं। कीमतें एनसीआर में एक बेडरुप युनिट के लिए 23 लाख रुपये से तीन बेडरूम युनिट के लिए 58 लाख रुपये के बीच हैं; पुणे में 25 लाख से 59 लाख तक हैं; बंगलुरू में 39 लाख से 90 लाख तक हैं; चेन्नई में 30 लाख से 70 लाख तक हैं, और कोयम्बटोर में 25 लाख से 1.18 करोड़ तक हैं। अब लवासा भी 45 लाख से 1.45 करोड़ रुपये में वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर प्रदान कर रहा है।

मैक्स इंडिया जीवन भर लीज के आधार पर देहरादून में अपने अंतरा सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट में घर प्रदान कर रहा है, जिनकी कीमतें एक बेडरुम के लिए 1.7 करोड़ से लेकर 3 बेडरुम के लिए 7 करोड़ तक उपलब्ध हैं जिनके साथ स्टाफ के लिए भी कमरे हैं। इस लीज को वहां रहने वाले लोगों के वारिसों द्वारा रिन्यु भी करवाया जा सकता है, और वे उसे  मार्केट दामों पर बेच भी सकते हैं, लेकिन नए खरीदार प्रबंधन द्वारा अनुमोदित होेंने चाहिए।

इन मकानों की सफाई, मोपिंग और हाउसकीपिंग, सामान्य क्षेत्रों का रखरखाव और हेल्थ क्लिनिक भी मासिक शुल्कों में शामिल हैं जो अशियाना की छोटे से छोटे मकान में 2500 रुपये से लेकर अंतरा में सबसे महंगे मकान के लिए 70000 रुपये तक हैं। परांजपे ग्रूप मासिक शुल्कों की बजाय 8 लाख रुपये एक मुस्त जमा कराता है।

हालांकि सीनियर हाउसिंग युनिट में किचन शामिल होते हैं लेकिन प्रबंधन कैंटीनों का संचालन भी करता है।

परांजपे स्किम्स के महानिदेशक शशांक परांजपे ने बताया कि उनका उद्देश्य वहां रहने वाले लोगों को खुश और व्यस्त रखना है। ग्रूप ने सीनियर लिविंग होम्स के लिए इवेंट मैनेजरों के लिए प्रशिक्षण भी शुरू किया है। परांजपे ने बताया, ”रीयल एस्टेट, मेहमाननवाजी और नर्सिंग की समझ के अलावा वरिष्ठ नागरिकों की परियोजना के लिए देखभाल और लगाव सहित सामुदायिक भवनों की भी जरूरत होती है।“

वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास परियोजना प्राइमस इडेन के संचालक बंगलुरू स्थिति मंत्री डिवेलपर्स के सीएमडी सुशिल मंत्री ने बताया, ”वरिष्ठ नागरिकों के लिए आवास रीयल एस्टेट बिजनेस के अलावा बहुत कुछ है।“ कम्पनी अपने वृद्ध ग्राहकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आतिथ्य क्षेत्र में अपने ज्ञान और अनुभव का प्रयोग कर रही है।

सन 2001 में कोयम्बटोर में कोवाइ प्रोप्रटी सेंटर की शुरूआत करने वाले कर्नल (सेवानिवृत) ए. श्रीधर ने बताया, ”अतिथ्य व्यापार एक अल्प अवधि के लिए कैटरिंग एवं आवास प्रदान करता है। सेवानिवृतों के समुदाय में आपको विभिन्न सेवाएं मिलती हैं और वे कैटरिंग तक ही सीमित नहीं हैं। स्टाफ का प्रशिक्षण भी अतिथ्य क्षेत्र के स्टाफ की तुलना में अधिक विस्तृत है।“

भारत में 7.6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं-जो कि यूके की कुल 6.5 करोड़ जनसंख्या से अधिक है-और 2025 तक यह संख्या बढ़कर 17.3 करोड़ हो जाएगी। वृद्ध नागरिकों की आवास की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करना एक बड़ी चुनौति होगी।

स्रोत: इकनॉमिक टाइम्स

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