रिटायरमेंट के बाद टैक्स लाभ

आयकर कानून के तहत रिटायरमेंट लाभ जैसे पीएफ, पेंशन, ग्रैच्युइटी और दूसरे लाभों पर टैक्स नहीं लगता है। रिटायरमेंट के बाद टैक्स के झंझट से बचने के लिए यहां दिए गए उपयुक्त टैक्स नियमों को पढ़ें।

Tax Benefits

रिटायरमेंट की शुरुआत रिटायरमेंट लाभों जैसे प्रोविडेंट फंड, ग्रैच्युइटी, सुपरएनुएशन फंड, लीव इनकैशमेंट, आदि की पूंजी मिलने से होती है।

इन लाभों को, जो कई सालों तक अनुशासित तरीके से बचत करने का नतीजा हैं, आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है, ताकि आप रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी बिना किसी वित्तीय परेशानी के गुजार सकें। हालांकि, इन लाभों पर लगने वाले टैक्स को अनदेखा करने से आपको कानूनी और वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इस लेख में आम रिटायरमेंट लाभों पर लागू होने वाले टैक्स नियमों के बारे में ध्यान से पढ़ें।

  1. प्रोविडेंट फंड

रिटायरमेंट के वक्त आपके प्रोविडेंट फंड अकाउंट में आपके योगदान, आपके सभी नियोक्ता के योगदान और पूंजी पर सालों तक मिल रहे ब्याज की राशि होगी। ये पूरी राशि टैक्स मुक्त होती है अगर नीचे दी जाने वाली शर्तें पूरी होती हैं:

Cgc पीएफ अकाउंट स्टैचूअरी या स्वीकृत या पब्लिक पीएफ अकाउंट है।

ब) आप न्यूनतम पांच साल की अवधि के लिए निरंतर नौकरी कर रहे थे, चाहे आप लगातार एक ही नियोक्ता या फिर कई नियोक्ता के काम कर रहे थे। अगर आपने नौकरी बदली है तो पीएफ अकाउंट को नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर करना चाहिए। अगर ऐसा करते हैं, तो पांच साल की अवधि की गणना करते वक्त पूर्व नियोक्ता के लिए काम करने की अवधि को भी जोड़ा जाएगा।

तो अगर आप लगातार पांच साल के लिए एक या फिर अलग-अलग नियोक्ता के लिए काम कर रहे थे और आपके पास अस्वीकृत पीएफ फंड के अलावा कोई भी प्रोविडेंट फंड अकाउंट है, तो रिटायरमेंट के बाद आपको मिलने वाली प्रोविडेंट फंड की राशि पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा।

  1. ग्रैच्युइटी

टैक्स छूट के लिए ग्रैच्युइटी की गणना आपके मासिक वेतन के अंश के हिस्से को आपकी कुल नौकरी के साल से गुणा करके निकाली जाती है। अगर आप पेमेंट ऑफ ग्रैच्युइटी एक्ट के दायरे में आते हैं तो रिटायरमेंट के पहले आखिरी वेतन के हिसाब से गणना की जाती है। अगर उसके दायरे में नहीं आते हैं तो रिटायरमेंट के पहले 10 महीनों के वेतन के औसत के आधार पर गणना होती है। ग्रैच्युइटी की अधिकतम 10 लाख रु तक की रकम पर ही टैक्स छूट मिलती है।  

अगर आपका वेतन 20,000 रु मासिक है और आपने कुल 25 साल नौकरी की है तो आपकी इतनी रकम टैक्स छूट के दायरे में आएगी:

26 कामकाजी दिनों में से 15 दिन का वेतन

करीब 11,540 रु

नौकरी के कुल साल

25 साल

ग्रैच्युइटी की रकम जिस पर टैक्स छूट मिलेगी

रु 2,88,500

 

  1. सुपरएनुएशन

सीधे या नियोक्ता के जरिए ली गई कोई भी सुपरएनुएशन या पेंशन पॉलिसी आपके रिटायरमेंट के वक्त मैच्योर होती है। आमतौर पर मैच्योरिटी की रकम आंशिक तौर एक मुश्त मिलती है और बाकी की रकम एनुइटी में निवेश की जाती है, जिससे आपको हर महीने या नियमित आय मिल सके।

अगर आपकी मैच्योरिटी रकम 1 करोड़ रुपये है तो संभवत: आपको 30-40 लाख रुपये एक मुश्त मिले और बाकी की रकम आपकी मृत्यु तक तय मासिक आय के लिए निवेश की जाए। एक मुश्त रकम को कम्यूटेड पेंशन कहते हैं। जबकि एनुइटी में निवेश की जाने वाली रकम को अनकम्यूटेड पेंशन कहा जाता है।

जिन लोगों को नियोक्ता से ग्रैच्युइटी मिलती है उनके कम्यूटेड पेंशन का एक तिहाई हिस्सा टैक्स मुक्त होता है। वहीं, बाकी लोगों के लिए टैक्स छूट की सीमा 50 फीसदी है। अनक्मयूटेड पेंशन से होने वाली आय पर आयकर स्लैब के मुताबिक टैक्स लगता है।

न्यू पेंशन स्कीम के खाताधारक पूरी रकम पर टैक्स छूट पा सकते हैं, बशर्ते पूरी रकम तय आय के लिए एनुइटी में निवेश की गई हो।

आप फंड में से 60 फीसदी की स्वीकृत अधिकतम सीमा तक पूंजी निकाल सकते हैं, लेकिन 40 फीसदी रकम पर ही टैक्स छूट मिलेगी।

  1. लीव एनकैशमेंट

रिटायर हो रहे कर्मचारियों को नियोक्ता कुछ तय पेड लीव और छुट्टियों (सार्वजनिक और संगठन के हिसाब से) को भुनाने का विकल्प देते हैं। इसमें 3 लाख रुपये या 10 महीनों की लीव एनकैशमेंट, जो रकम कम हो, पर टैक्स छूट मिलती है।

अगर रिटायरमेंट के वक्त आपके पास 5 महीनों की छुट्टियां बाकी हैं और 10 महीनों का औसत वेतन 50,000 रुपये है तो आप 2.5 लाख रुपये (50,000 रुपये गुणा 5 महीने) पर टैक्स छूट ले सकते हैं।

रिटायरमेंट लाभों पर लगने वाले टैक्स नियमों के बारे में जानकारी होने से आप रिटायरमेंट के बाद अपनी बचत ज्यादा से बढ़ा और कानूनी और वित्तीय परेशानियों को घटा सकते हैं।

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