भारत में एक सामाजिक परिवर्तन समय की माँग है’ कहती है अमृता गंगोत्रा - डायरेक्टर टेक्नोलॉजी ,वोडाफ़ोन हंगरी | Tomorrowmakers

टुमॉरो मेकर्स के साथ बातचीत में अमृता गंगोत्रा, डायरेक्टर टेक्नोलॉजी,वोडाफ़ोन हंगरी , महिलाओं को विज्ञान,प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग,गणित (एस.टी.ई.एम) जैसे विषयों को पढ़ने के लिए,कार्यस्थल में विविधता के लिए और निजी कामकाजी जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Social Change India Needs.

आप अपनी नेतृत्व शैली का वर्णन कैसे करेंगे? आप हर चीज़ के लिए नहीं कर सकते हैं। मैं समूह शक्ति में विश्वास करती हूँ। इसलिए एक मज़बूत,जानकार और सहयोगी टीम महत्वपूर्ण है। चूंकि प्रौद्योगिकी एक कार्यात्मक क्षेत्र है,एक ऐसी टीम का होना अनिवार्य है ,जो व्यवसाय की भाषा में बात करें,समझें कि व्यवसाय में क्या चाहिए और वहीं करके दे।
 
 आपके विचार कैसे हैं इस कथन पर,जहाँ टेक्नोलॉजी को पुरुष वर्चस्व वाली क्षेत्र के रूप में माना जाता है?
 मैं इस बात से बिलकुल सहमत नहीं हूँ,ख़ास तौर पर जब बात भारत की हो। यह भारत की तुलना में,अमरीका और यूनाइटेड किंगडम के लिए ज़्यादा सटीक बैठता है।इन देशों में लड़कियों के आंकड़े जो एस.टी.ई.एम विषय लेती है बहुत कम है।अभी वहाँ लड़कियों को इस दिशा में प्रेरित करने के लिए बहूत से कार्यक्रम हो रहे हैं। मैं भी ऐसे ही कुछ पहल से जुड़ी हूँ जो हंगरी और यु.के में चल रहे हैं। पर अगर आप भारत के इंजीनियरिंग और विज्ञान महाविद्यालयों पर नज़र डालें ,तो यहाँ पर पुरुषों और महिलाओं का ५०-५० का अनुपात है।भारत में समस्या अलग प्रकार की है ।प्रबंधन से परे,आप बहुत से महिलाओं को कॉर्पोरेट सीढ़ी चढ़ते हुए नहीं देखेंगे।ऐसी विचारधारा से निकलना महिलाओं के लिए हर क्षेत्र में मुश्किल है,ख़ास तौर पर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में।एक महिला के लिए अन्य सांस्कृतिक पहलू भी होते हैं-चाहे वह परिवार का समर्थन हो या बच्चे होने के बाद व्यस्तता के कारण काम नहीं कर पाना।


 क्यूँ महिला उद्यमी पुरुष प्रधान इको सिस्टम में हो रहे पक्षपात को दूर नहीं कर पा रही है?
 महिलाएँ नेटवर्किंग और व्यावसायिक संबंध बनाने में बहुत अच्छी नहीं होती है।सामाजिक मुद्दे व वर्जनाएं और पति/ पिता से समर्थन की कमी भी महिलाओं का इस पुरुष-प्रधान इकोसिस्टम में हिस्सा बनना कठिन बनाती है। भारत में एक सामाजिक परिवर्तन,समय की ज़रूरत है।
 भारत के एक आई.टी लीडर की भूमिका से यूरोप में विश्व स्तर पर लीडर की भूमिका पर पहुँच गई हैं । आपका काम अब कितना अलग है?अब काम पूरी तरह अलग है। मुझपर अब सिर्फ़ आई.टी की ज़िम्मेदारी नहीं है,मैं टेक्नोलॉजी से संबंधित हर चीज़ देखती हूँ। इसका मतलब 4G,5G की शुरुआत करना या व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया हो इत्यादि। मेरी भूमिका इस व्यवसाय में बहुत अलग है। अब आई.टी मुझे रिपोर्ट सौंपते हैं और यह मेरी भूमिका का सिर्फ़ एक हिस्सा है।मैं नेटवर्क,एंटरप्राइस डिलीवरी इत्यादि जैसे कामों को संभालती हूँ।
 
 आपके अनुसार, क्यों भारत में इतनी कम महिला सी.आई.ओ हैं?

 यह कथन सिर्फ़ भारत ही नहीं,अपितु पूरी दुनिया के लिए सत्य है।असल में,यह विश्वभर में,भारत से ज़्यादा देखा जा सकता है। महिलाओं का झुकाव एच.आर जैसे कार्यों पर टेक्नोलॉजी से ज़्यादा होता है।यह बेहद आश्चर्यचकित करने वाली बात है क्योंकि इंजीनियरिंग महाविद्यालयों में 50 प्रतिशत महिलाएँ हैं और दोनों वर्गों के पास समान अवसर होते हैं। महिलाओं को विज्ञान से संबंधित विषयों की प्रेरणा उनके माता पिता से मिलती है। मुझे लगता है हमारा यह कहना ठीक नहीं है कि भारत में महिलाएँ विज्ञान का चयन नहीं करती है। यह मुझे यूरोप में ज़्यादा देखने को मिलता है।
 
 भारत में आपके अधीन कार्यरत लोगों को कैसा लगता है कि उन की लीडर एक महिला है?
 मैंने इस विषय में कभी सोचा नहीं है। मुझे लगता है उनको यह बात पसंद है कि मैं महिला हूँ,और ज़्यादा दयालु और परवाह करने वाली हूँ। ये वे पहलू है जो एक महिला से जुड़े होते हैं,जैसे की पारिवारिक जीवन के बारे में अधिक समग्र सोच रखना और कुल मिलाकर अच्छा व्यवहार रखना।
 
 क्या बहुराष्ट्रीय और स्थानीय  कंपनियों में पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं को भी कॉर्पोरेट सीढ़ी चढ़ने के समान अवसर मिलते हैं ?
 विविधता बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए और बड़ी स्थानीय कॉरपोरेट्स के लिए एक बड़ा एजेंडा है । सरकार भी इसके लिए पहल कर रही है। उन्होंने हर सूचीबद्ध कम्पनियों में 25% महिलाओं का बोर्ड में होना अनिवार्य कर दिया है।अगर आप बैंकिंग क्षेत्र में भी देखे, तो सारे बड़े बैंकों में किसी समय पर महिला ही रही है। मेरे पास छोटी कंपनियों की बात करने का अनुभव नहीं है,परंतु “हाँ, विविधता की बड़े संगठनों में प्राथमिकता होती है।” 
 
 इतने सालों में आपने बहुत सी भूमिकाएं निभाई हैं। आपको नया करने के लिए क्या प्रेरित करता है?

 मैं अब सिर्फ़ में आई.टी नेतृत्त्व नहीं करती अपितु टेलीकॉम के हर टेक्नोलॉजी का भी निरीक्षण करती हूँ । मुझमें उत्सुकता होती है किसी नई टेक्नोलॉजी को जानक, उससे अपने व्यवसाय को बढ़ाऊँ - फिर चाहे वह नया व्यवसाय हो या पुराने व्यवसाय में ही विकास की बात हो। हर पहलू, भले ही वह डिजिटल हो,आईटी हो या टेलीकॉम टेक्नोलॉजी हो,कुछ नया करने के लिए सबको एक साथ आना होगा और व्यवसाय को बढ़ाने में मदद करनी होगी।
 
 शुरुआती दौर पर आप के सामने क्या चुनौतियां आईं?और उनका सामना अपने कैसे किया? 
 टेक्नोलॉजी से ज़्यादा आप जिस संगठन में काम करते हैं,वहाँ चुनौतियां होती हैं, की कैसे आप प्रोजेक्ट संभालते हैं,नई चीज़ें सीखते हैं,आपके आसपास के लोग आपका कैसा समर्थन करते हैं इत्यादी। सहायक बॉस का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।काम और घर पर एक समर्थन प्रणाली का निर्माण,आपको चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकता है।
 मैं ऐसे उद्योग से जुड़ी हूँ जो तेज़ी से अग्रसर हो रहा है, तो समय के साथ टेक्नोलॉजी में परिवर्तन का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। मैं एक टेक्नोलॉजी लीडर होने के नाते,हमेशा कहती हूँ कि आप जितने अनुभवी हैं,ज्ञान के मायने में उतने आउटडेटेड रहते हैं।इसलिए लगातार अध्ययन और स्वयं को अद्यतन बनाए रखना ही आपको आगे लेकर जाएगा।
 
 क्या महिलाएँ बोर्डरूम मीटिंग्स में असहज महसूस करती है?क्या आपकी कोई निजी अनुभवों पर आप रोशनी डालना चाहेंगे?
 मुझे लगता है उन्हें असहजता महसूस होती है। यह स्वयं को सँवारने का विषय है।यहाँ सहज होने में कुछ समय लगता है।अपने विचार को एकत्रित कर के,अच्छी तरह से पेश करना चुनौतीपूर्ण है।ऐसी अव्यवस्थाओं का कैसे सामना करें, आप अनुभव से ही सीखते हैं। तो मुझे भी पहले असहज लगता था परंतु समय के साथ मैंने यह सीखा। प्रत्येक बोर्ड की बारीकियां होती है, जिसे समझना बहुत महत्वपूर्ण है।
 
 आप कामकाजी जीवन में संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?

 मैं अपने काम को लेकर काफ़ी उत्साहित रहती हूँ और इसका आनंद लेती हूँ।इससे मुझे थकावट नहीं लगती।अलग-अलग लोगों की कामकाजी जीवन के संतुलन की अलग परिभाषाएँ होती है।मेरे नज़रिए से देखें तो अगर आपको अपने काम से प्यार है तो आपका और निजी जीवन में संतुलन बना लेंगी।काम मेरे जीवन का एक हिस्सा है।
 ‘कामकाजी जीवन में संतुलन’ यह वाक्य थोड़ा सा पेचीदा है क्योंकि यह काम और निजी चीज़ें ही आपके जीवन को संपूर्ण करती है।जब मैं काम करती हूँ,तो कड़ी मेहनत करती हूँ। परंतु स्वयम् को आनंदित करने के लिए परिवारके  साथ समय बिताना और छुट्टियां मनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारी ,आपस में जुड़ी दुनियाँ यह संतुलन बनाने में मेरी मदद करती है।
 
 किन तरीक़ों से महिलाओं को उनके संगठनों में बेहतर भूमिका पाने में मदद मिल सकती है?
 मैं अपने जवाब को एक महिला के निजी और पेशेवर जीवन में बाँट कर देना चाहूंगी।निजी जीवन में महिलाएँ बहुत शक्तिशाली होती हैं।वह सब काम बिना किसी सहायता से करना चाहती हैं।हमारी ज़िम्मेदारी कि समाज बहुत अच्छी है और इसलिए हम काम बीच में नहीं छोड़ते हैं।  यह एक महत्वपूर्ण करता है पर आपको सब कुछ स्वयं ही करने की ज़रूरत नहीं है।परिवार के सदस्यों और घरेलू सहायको से मदद ले सकते हैं। अपने लिए समय निकाल लिए।भले ही वह स्वयं सीखने के लिए हो,व्यक्तिगत विकास या सँवारने के लिए हो। आपको स्वयं को दोषी माने बिना,यह सब करना आना चाहिए।
 अब बारी है दूसरे की- एक संगठन में प्रोन्नति के लिए आपको क्या करना चाहिए। आजकल,एक ही काम और स्थिति पर रह कर भी लिंग के कारण जो वेतन में अंतर आ रहा है उसकी बहुत चर्चा हो रही है। महिलाओं को बढ़त की माँग करने और अपने उपलब्धियों को हाइलाइट करने में मुश्किल होती है। इसलिए कुछ साल बाद किस करियर के मार्ग का आप चयन करना चाहेंगी यह जान लेना ज़रूरी है। फिर आप अपने लक्ष्य की तरफ़ काम करना शुरू कर सकती हैं,सही प्रोजेक्ट ले सकती हैं,सही लोगों से जुड़ सकती हैं और सबको बता सकती हैं कि एक लक्ष्य को साध रही हैं।
 
 आपकी सूची में अगला क्या आप हासिल करना चाहती हैं?

 मैं एक ऐसी अवस्था में पहुँच रही हूँ जहाँ मैंने जो कुछ भी सीखा है,उसे मज़बूत करना चाहती हूँ, युवा प्रतिभा को सिखाना चाहती हूँ और इन क्षेत्रों में सफलता देखना चाहती हूँ।जब मैं भारत लौटूं तो कुछ सतत् देखना चाहती हूँ।
 
 कृपया महिला उद्यमियों के लिए तीन सलाह साझा करें:
 सबसे पहला,हिम्मत करिए। आत्मसंदेह और परिवार से सलाह आपका हौसला कम कर सकती है।दूसरा, अपने वित्तीय कुशाग्रता को व्यवसाय बढ़ाने में लगाएं। और आख़िरी,साहसी बनो। ’बड़ेलक्ष्य’ होना, व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण है।

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