रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए क्या सही उम्र है?

रिटायरमेंट के लिए योजना बनाने में देरी करना आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकता है, अगर आपने इसे काफी लंबे वक्त के लिए टाल दिया हो। तो रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी के लिए कब और कितनी बचत करनी शुरू चाहिए?

What is the right age to start planning your retirement

चाहे ये आपको बहुत जल्दी लगे, लेकिन रिटायरमेंट के लिए योजना बनाना नौकरी लगने के साथ ही, यानी 20 से 30 साल की उम्र में ही शुरू कर देना चाहिए। ये समझना मुश्किल नहीं है कि क्यों युवा रिटायरमेंट की योजना बनाने को प्राथमिकता नहीं देते हैं। आखिरकार अपने सपनों को हकीकत में बदलने का यही वक्त होता है और सपनों को साकार करने के लिए आप किसी भी मौके को गंवाते नहीं हैं। हालांकि, इसी उम्र में आप के ऊपर जिम्मेदारियां कम होती हैं, जिसकी वजह से आप आसानी से भविष्य के लिए बचत कर सकते हैं। वहीं, आपकी आयु 30 साल से ज्यादा होते ही आपके कंधों पर घर कर्ज, कार का कर्ज और घर की जिम्मेदारी का बोझ आ जाता है। दोनों स्थितियों को देखते हुए साफ पता चलता है कि जल्दी रिटायरमेंट के लिए बचत करना समझदारी का काम है और इससे आपकी पूंजी में बढ़ोतरी होने के लिए ज्यादा वक्त मिलेगा।

जल्दी शुरू करना महत्वपूर्ण है

वित्तीय विशेषज्ञ बार बार सलाह देते रहते हैं कि रिटायरमेंट के लिए बचत करना जल्दी शुरू करें। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर श्री कार्तिक जवेरी के मुताबिक बचत जल्दी शुरू करने से आपको रिटायरमेंट के लिए पूंजी इकट्टी करने के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। इसके अलावा लंबी अवधि के लिए निवेश करने से आपको पैसों पर ज्यादा रिटर्न भी मिलता है। श्री कार्तिक जवेरी का मानना है कि वेतन मिलने के साथ ही रिटायरमेंट के लिए योजना बनाना ‘वित्तीय समझदारी’ है।

वक्त के साथ संपत्ति बनती है इसलिए जल्दी बचत शुरू करने से आप कंपाउंडिंग का फायदा उठा सकते हैं, जिसे अल्बर्ट आइंस्टाइन दुनिया का आठवां अजूबा कहते थे और जिसकी तारीफ वॉरेन बफे और बेंजामिन ग्राहम जैसे दिग्गज करते हैं। लेकिन, रिटायरमेंट के लिए पैसा बचाना शुरू करने से पहले अपनी वित्तीय हालत का ठीक से विश्लेषण कर लें। चाहे कुछ लोग नौकरी लगते ही पैसे बचाना शुरू कर सकते हैं, लेकिन बाकी लोग तब रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू करना पसंद करते हैं जब उनको ज्यादा वेतन मिलता है।

अब इन सब बातों को मौजूदा हालात के दृष्टिकोण से देखते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति और जीवनकाल बढ़ने के साथ आज के युवा 90 साल की उम्र तक जी सकते हैं। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को अपने करीब 35 साल लंबे कामकाजी जीवन के दौरान इतना कमाना होगा ताकि वो रिटायरमेंट के बाद के करीब 30 साल आराम से काट पाए। इसके अलावा महंगाई को भी ध्यान में रखना होगा। अगर महंगाई दर के 3 फीसदी के निचले स्तर पर रहने का अनुमान करते हैं, तब भी 25 सालों में कीमतें करीब दोगुनी होंगी। वक्त के साथ आपके खर्चे भी बढ़ सकते हैं। इसलिए, आपकी रिटायरमेंट की योजना पर महंगाई पानी फेर सकती है। लिहाजा, जल्दी बचत शुरू करने के साथ ही आपको अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा इक्विटी में लगाना चाहिए ताकि आपको रिटायरमेंट के बाद पर्याप्त पूंजी मिल सके।

रिटायरमेंट प्लानिंग एक और पहलू – इक्विटी निवेश

ब्याज दरों में कमी चाहे अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है, लेकिन इससे रिटायर हो चुके नागरिकों को कोई फायदा नहीं होता। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद वेतन और बचत दोनों ही बंद हो जाते हैं, इसलिए ऊंची आर्थिक विकास दर और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का ज्यादा असर रिटायर हो चुके लोगों पर नहीं पड़ता है। चाहे, वरिष्ठ नागरिकों को नौकरियों की तलाश न हो लेकिन उन्हें ऊंचे ब्याज दरों की अपेक्षा होती है। यहां इक्विटी निवेश काम आता है।

वरिष्ठ और रिटायर हो चुके नागरिकों को इस तरह इक्विटी में निवेश करना चाहिए जिससे उनका टैक्स बचे और जोखिम भी कम रहे। ये इसलिए भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि फिक्स्ड डिपॉजिट पर महंगाई दर से सिर्फ 1.5 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलता है, जबकि इक्विटी में 3-5 फीसदी का रिटर्न मिलता है।

इसके अलावा चाहे बजट 2018 में सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स लागू किया हो, लेकिन टैक्स बचाने के तरीके मौजूद हैं। नए नियम के मुताबिक अब इक्विटी ओरिएंटड म्युचुअल फंड स्कीम और इक्विटी शेयर बेचने से हुए एलटीसीजी यानि लंबी अवधि के पूंजी लाभ पर इंडेक्सेशन का फायदा मिले बिना 10 फीसदी टैक्स लगेगा, अगर साल में हुआ पूंजी लाभ 1 लाख रुपये से ज्यादा है। फिनविन फाइनेंशियल प्लानर्स के फाउंडर, श्री मेल्विन जोसेफ के मुताबिक इक्विटी पर सिर्फ 1 लाख रुपये तक के एलटीसीजी पर टैक्स छूट मिलती है तो निवेशकों को रिटर्न की अपेक्षा कम कर देनी चाहिए।

श्री जोसेफ के मुताबिक अब निवेशकों को ऐसी रणनीति अपनानी चाहिए जिससे टैक्स छूट का फायदा मिले और निवेशकों को हर वित्तीय साल में 1 लाख रुपये का मुनाफा दर्ज करके एलटीसीजी टैक्स बोझ को कम करना चाहिए। इसके पीछे वजह है कि आप 1 लाख रुपये अगले साल आगे नहीं ले जा सकते हैं। इसलिए, पूंजी लाभ को कई साल तक इकट्ठा करने के बजाय हर साल मुनाफा दर्ज करें और इसे नियमित तौर पर दूसरे निवेश विकल्पों में लगाएं ताकि आपका टैक्स बोझ कम हो सके। हालांकि, ध्यान रखें कि मुनाफे को खर्च करने की जगह अगर फिर से निवेश किया जाता है तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिलेगा।

इस रणनीति को अपनाने और जल्दी बचत शुरू करने से आप निश्चित हो सकते हैं कि आपको रिटायरमेंट के बाद वित्तीय मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट के विपरीत इक्विटी निवेश से होने वाली आय पर टैक्स नहीं लगेगा, जो इक्विटी निवेश को और आकर्षक बना देता है।

डिस्क्लमेर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार मनन व्यास के हैं और ये टूमॉरोमेकर्स.कॉम या फिर इसके मालिकों के विचारों को नहीं दर्शाते हैं।

 

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